राजस्थान निकाय चुनाव में 76.04% वोटिंग, अरनोद में सबसे ज्यादा और चित्तौड़गढ़ में सबसे कम मतदान
162 निकायों में वोटिंग पूरी, 20,623 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद, पिछले चुनाव से ज्यादा मतदान, छोटे शहरों में उत्साह और बड़े शहरों में कम वोटिंग

राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण की वोटिंग बुधवार को पूरी हो गई। प्रदेश के 162 नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में शाम 6 बजे तक कुल 76.04 फीसदी मतदान हुआ। यह पिछले चुनाव के मुकाबले 1.28 फीसदी ज्यादा रहा। इस चरण में 20,623 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो गई है।
Rajasthan Nikay Voting में सबसे ज्यादा मतदान प्रतापगढ़ जिले की नवगठित अरनोद नगर पालिका में 91.98 फीसदी दर्ज हुआ। भीलवाड़ा की बीगोद नगर पालिका में भी 91.85 फीसदी वोट पड़े। सबसे कम मतदान चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में 61.49 फीसदी रहा। अब दूसरे चरण में 147 निकायों के लिए 11 सितंबर को मतदान होगा और सभी 309 निकायों की मतगणना 14 सितंबर को होगी।
पहले चरण में 76.04% मतदान
पहले चरण में प्रदेश के 162 नगरीय निकायों में सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हुआ था। सुबह मतदान केंद्रों पर तेजी दिखी, लेकिन शाम 6 बजे तक कुल मतदान 76.04 फीसदी रहा।
इन निकायों में 20,623 उम्मीदवार मैदान में थे। 32 वार्डों में पहले ही निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है। इस बार जिन 162 निकायों में चुनाव हुए, उनमें से 89 निकायों में पिछली बार 74.76 फीसदी मतदान हुआ था। इस बार वोटिंग 1.28 फीसदी ज्यादा रही।
73 निकाय ऐसे हैं, जिनका गठन पिछले चुनाव के बाद हुआ। इन निकायों में बुधवार को पहली बार मतदान हुआ। इसलिए कई जगह स्थानीय स्तर पर वोटिंग को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया।
अरनोद टॉप, चित्तौड़गढ़ सबसे पीछे
प्रतापगढ़ जिले की अरनोद नगर पालिका पहले चरण में सबसे ज्यादा मतदान वाला निकाय रहा। यहां 91.98 फीसदी वोट पड़े। भीलवाड़ा की बीगोद नगर पालिका में 91.85 फीसदी मतदान हुआ।
90 फीसदी से ज्यादा मतदान वाले निकायों में धौलपुर की सैपऊ नगर पालिका भी शामिल रही, जहां 90.77 फीसदी वोट पड़े। भरतपुर जिले की पहाड़ी नगर पालिका में 90.32 फीसदी मतदान दर्ज हुआ।
सबसे कम मतदान चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में हुआ, जहां 61.49 फीसदी वोटिंग रही। भीलवाड़ा नगर निगम में 63.84 फीसदी और अलवर नगर निगम में 64.60 फीसदी मतदान हुआ। डूंगरपुर नगर परिषद में 65 फीसदी वोट पड़े।
छोटे निकायों में ज्यादा उत्साह
मतदान के आंकड़ों से साफ संकेत मिला कि छोटे शहरों और कस्बों में वोटिंग का उत्साह बड़े निकायों से ज्यादा रहा। 10 हजार से कम मतदाता वाले 19 निकायों में औसत मतदान करीब 85 फीसदी रहा।
10 से 20 हजार मतदाताओं वाले 65 निकायों में करीब 82.70 फीसदी मतदान हुआ। 20 से 50 हजार मतदाता वाले 51 निकायों में वोटिंग करीब 80.70 फीसदी रही।
बड़े निकायों में मतदान प्रतिशत कम रहा। 50 हजार से 1 लाख मतदाता वाले 22 निकायों में करीब 74.10 फीसदी मतदान हुआ। 1 से 2 लाख मतदाताओं वाले निकायों में यह आंकड़ा 72.20 फीसदी रहा।
यह ट्रेंड बताता है कि छोटे निकायों में स्थानीय मुद्दों और प्रत्याशियों से सीधा जुड़ाव वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।
निगमों में मतदान का हाल
पहले चरण में शामिल नगर निगमों में भरतपुर में 73.13 फीसदी मतदान हुआ। पिछली बार यहां 71.86 फीसदी मतदान रहा था। बीकानेर नगर निगम में इस बार 68.20 फीसदी वोटिंग हुई, जबकि पिछली बार यह आंकड़ा 66.94 फीसदी था।
अलवर नगर निगम में 64.60 फीसदी मतदान हुआ। भीलवाड़ा नगर निगम में 63.84 फीसदी वोट पड़े। अलवर और भीलवाड़ा के पिछली बार के आंकड़े नगर परिषद के आधार पर हैं, क्योंकि इस बार ये नगर निगम के रूप में चुनावी प्रक्रिया में शामिल रहे।
बड़े शहरों में अपेक्षाकृत कम मतदान राजनीतिक दलों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। नगर निगम क्षेत्रों में वोटिंग कम रहने से कई वार्डों में करीबी मुकाबले बन सकते हैं।
33 शिकायतें, 100 से ज्यादा ईवीएम बदलीं
मतदान के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग के पास 33 शिकायतें पहुंचीं। अलवर में मारपीट की घटना सामने आई। डूंगरपुर में मतदान में देरी को लेकर विरोध हुआ और दूदू में भी हंगामा हुआ।
रायसिंहनगर में पुलिस वृत्ताधिकारी और प्रत्याशी के बीच नोकझोंक हुई। भरतपुर, धौलपुर, नागौर, बीकानेर, पाली और अजमेर सहित कुछ जिलों में मतदान से रोकने, फर्जी मतदान और मतदाता सूची से नाम कटने के आरोप लगाए गए।
33 जिलों में 100 से अधिक ईवीएम खराब होने की शिकायतें मिलीं। इन्हें बदलने के लिए कुछ जगह मतदान रोकना पड़ा। राजसमंद जिले के नाथद्वारा में चेक बाउंस के पुराने मामले में एक प्रत्याशी को पुलिस ने डिटेन किया।
डीडवाना में मतदान के लिए परिवार सहित पहुंचे निर्दलीय विधायक युनूस खान के साथ धक्का-मुक्की हुई। इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया।
कम मतदान वाले निकाय
सबसे कम मतदान वाले निकायों में चित्तौड़गढ़ नगर परिषद सबसे नीचे रही, जहां 61.49 फीसदी मतदान हुआ। इसके बाद भीलवाड़ा नगर निगम में 63.84 फीसदी और अलवर नगर निगम में 64.60 फीसदी वोट पड़े।
डूंगरपुर नगर परिषद में 65 फीसदी, सवाई माधोपुर नगर परिषद में 65.24 फीसदी, फतेहपुर नगर परिषद में 66.72 फीसदी, सायला नगर पालिका में 66.78 फीसदी, रावतभाटा नगर पालिका में 66.82 फीसदी, बसनी नगर पालिका में 66.91 फीसदी और बांसवाड़ा नगर परिषद में 67.01 फीसदी मतदान दर्ज हुआ।
इन आंकड़ों से साफ है कि बड़े और मध्यम शहरों में मतदाता turnout अपेक्षाकृत कमजोर रहा। वहीं छोटे निकायों ने मतदान प्रतिशत में बढ़त बनाए रखी।
दूसरा चरण 11 सितंबर को
नगरीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण में 147 निकायों के लिए 11 सितंबर को मतदान होगा। इन निकायों में प्रचार बुधवार को थम गया। दूसरे चरण में 4,774 वार्डों के लिए 18,266 उम्मीदवार मैदान में हैं।
45 वार्डों में निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है। टोंक नगर परिषद के एक वार्ड में कोई नामांकन नहीं आने के कारण मतदान नहीं होगा। दूसरे चरण में 6 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 121 नगर पालिकाएं शामिल हैं।
जयपुर, पाली, अजमेर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर नगर निगमों में दूसरे चरण में मतदान होगा। मतदान दल गुरुवार को प्रशिक्षण के बाद रवाना होंगे। दोनों चरणों में शामिल कुल 309 नगरीय निकायों की मतगणना 14 सितंबर को होगी।
अब नजर दूसरे चरण की वोटिंग और 14 सितंबर के नतीजों पर रहेगी। पहले चरण में छोटे निकायों ने मतदान में उत्साह दिखाया है, जबकि बड़े शहरों की कम वोटिंग ने चुनावी गणित को और दिलचस्प बना दिया है।
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