Clitoris: जानें महिलाओं के Pleasure Zone के बारे में खास बातें Read it later

Clitoris महिलाओं के यौन अंगों में सबसे सेंसेटिव और क्रूशल हिस्सा है, जो महिलाओं के यौन सुख का प्राइमरी सॉर्स माना जाता है। इसकी सही समझ और stimulation एक महिला के सेक्‍सुअल एक्‍सपीरियंस को पूरी तरह से बदल सकता है। ऐसे में पुरुषों का महिलाओं के Clitoris की लोकेशन, स्‍ट्रक्‍चर और फंक्‍शन को समझना बहुत जरूरी है, ताकि इसे सही तरीके से stimulate किया जा सके।

यहां आपको यह भी बताना जरूरी है कि जब सेक्सुअल और रिप्रोडक्टिव हेल्थ की बात आती है, तो इसके बारे में खुलकर चर्चा होती है। लेकिन जब विषय प्लेजर और ऑर्गेज्म का होता है, तो यह अब भी वर्जित सा माना जाता है। खासतौर पर महिलाओं के ऑर्गेज्म के बारे में खुलकर बात करना आसान नहीं होता। महिलाएं खुद इस बारे में संकोच करती हैं। हालांकि, इसमें संकुचित महसूस करने की जरूरत नहीं है। यौन सुख और ऑर्गेज्म भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने कि शरीर की अन्य ज़रूरतें। इन विषयों पर खुलकर बात करना हमारी मानसिक और शारीरिक भलाई के लिए ज़रूरी है।

क्लिटोरिस को हिंदी में भगशेफ़ कहा जाता है, जो महिलाओं के यौन अंगों में सबसे संवेदनशील और उत्तेजक अंग है। यह योनि के ऊपर स्थित होता है और इसमें 8,000 से अधिक तंत्रिकाएं होती हैं, जिससे इसे उत्तेजित करने से यौन सुख और आनंद प्राप्त होता है। क्लिटोरिस को कभी-कभी “फीमेल पेनिस” भी कहा जाता है। इसका नाम ग्रीक भाषा के एक शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है चाबी। क्लिटोरिस की संरचना और कार्य महिलाओं के यौन अनुभव को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस आर्टिकल में हम Clitoris की इंटर्नल एनाटॉमी, स्टिमुलेशन टेक्‍नीक्‍स (stimulation techniques) और इसके बारे में myths को explore करेंगे। Clitoris से जुड़ी यह जानकारी से आप इसे गहराई से समझ पाएंगे।

Clitoris

Table of Contents

Clitoris का स्‍ट्रक्‍चर और फंक्‍शन

Clitoris का एक छोटा हिस्सा externally visible होता है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा अंदर की ओर होता है। इसके अंदर हजारों तंत्रिका सिरे होते हैं, जो इसे कहीं ज्यादा सेंसेटिव बनाते हैं। Clitoris का फंक्‍शन प्राथमिक तौर पर यौन उत्तेजना को बढ़ाना होता है और इसे sexual arousal के लिए सबसे जरूरी spot माना जाता है।

Sexual Arousal के दौरान Clitoris का कार्य क्‍या होता है?

जब कोई woman sexually aroused होती है, तब Clitoris में ब्‍लड का फ्लो इन्क्रीज हो जाता है, जिससे यह सूज जाता है। खास बात यह है कि ये arousal के दौरान touch और friction के प्रति बहुत ज्यादा सेंसेटिव हो जाता है और orgasm तक पहुंचने में बड़ा रोल प्‍ले करता है।

क्लिटोरिस की आंतरिक संरचना कैसी होती है? (Internal Anatomy of Clitoris)

Clitoris की internal anatomy में क्रुरा (crura) और vestibular bulbs शामिल होते हैं, जो यौन उत्तेजना के दौरान फैलते हैं और extra sensitivity प्रदान करते हैं। इसके बारे में और जानना sexual health understanding के लिए काफी helpful होता है।

क्‍ल‍िटोरिस को उत्‍तेजित कैसे करें? (How to Stimulate the Clitoris)

Clitoral stimulation के लिए सबसे जरूरी चीज है gentle touch, rubbing, या माइल्‍ड प्रेशर का यूज करना। हर महिला की sexual desires और sensations अलग होती हैं, इसलिए यह ज़रूरी है कि स्टिमुलेशन के तरीके को उनके कम्‍फर्ट के हिसाब से एडजस्ट किया जाए।

Clitoris
image credit: natural cycles
अपने शरीर को समझना क्यों जरूरी है (Know Your Vulva)

किसी भी तरह की clitoral stimulation से पहले अपने शरीर की बनावट को समझना बहुत जरूरी है। इसके लिए अपने वल्वा (vulva) और आसपास के हिस्सों को ध्यान से जानें।
आप चाहें तो घर पर ही एक self-exam कर सकती हैं, जिससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि क्लिटोरिस कहां है और उसका आकार व संवेदनशीलता कैसी है। इससे शरीर के प्रति आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

धीरे और सहज शुरुआत करें (Start Gently)

इस प्रक्रिया की शुरुआत हमेशा शांत और रिलैक्स महसूस करते हुए करें। इसमें किसी तरह की जल्दी नहीं होती।
सबसे पहले क्लिटोरिस के आसपास के हिस्से को हल्के हाथ से छूने या सहलाने की कोशिश करें। कई लोगों के लिए इतना ही स्पर्श उत्तेजना (arousal) के लिए काफी होता है।
अगर सहज लगे तो क्लिटोरिस के ऊपरी हिस्से (head) को बहुत हल्के दबाव के साथ छूकर देखें।

ल्यूब्रिकेशन का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है (Use Lubrication)

कई लोगों को lubricant का उपयोग करने से अनुभव ज्यादा आरामदायक लगता है।
ल्यूब्रिकेशन से ड्राइनेस कम होती है, घर्षण (friction) घटता है और त्वचा पर असहजता नहीं होती। इससे संवेदनशील हिस्सों में स्पर्श ज्यादा सहज महसूस हो सकता है।

अलग-अलग तरीकों को आजमाएं (Try Different Techniques)

हर व्यक्ति की पसंद और संवेदनशीलता अलग होती है। इसलिए एक ही तरीके तक सीमित न रहें।
आप अलग-अलग तरह के स्पर्श, उंगलियों के मूवमेंट, sex toys, या किसी पार्टनर के साथ सहज बातचीत के जरिए अपनी पसंद को समझ सकती हैं।
कुछ लोग यह भी महसूस करते हैं कि योनि (vagina) के अंदर से होने वाला स्पर्श भी क्लिटोरिस पर असर डालता है, क्योंकि यह हिस्सा अंदर तक फैला होता है।

अपने अनुभव को समझना सबसे अहम है

सबसे जरूरी बात यह है कि आप अपने शरीर के संकेतों को समझें और वही करें जिसमें आपको आराम और सहजता महसूस हो।
कोई एक “सही तरीका” नहीं होता—जो तरीका आपके लिए सही है, वही सबसे बेहतर है।

महिलाओं में Clitoris का साइज और वैरिएशंस

हर महिला का clitoris size में अलग होता है, और इसका size किसी भी तरह से sexual pleasure को अफेक्‍ट नहीं करता है। ये आम है कि क्लिटोरिस का external part छोटा या बड़ा हो सकता है, लेकिन यह कहा जा सकता है कि इसका असर यौन अनुभव पर नहीं होता है।

Clitoris और G-Spot का Relation

कई researchers का मानना है कि G-Spot, जो vaginal canal में पाया जाता है, यह असल में clitoris से जुड़ा होता है। इसका मतलब है कि vaginal stimulation भी clitoral stimulation के जरिए होता है, जिससे महिलाओं में orgasm achieve करना possible होता है।

Clitoris

क्लिटोरिस से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां

क्लिटोरिस का जटिल तंत्रिका नेटवर्क

विशेषज्ञों के अनुसार क्लिटोरिस का नर्वस सिस्‍टम काफी जटिल होता है और इसमें 8,000 से ज्यादा नर्व्‍स होती हैं। यह नर्व्स महिलाओं में यौन उत्तेजना को बढ़ाती हैं और वहीं यह आनंद की तीव्रता को नियंत्रित भी करती हैं।

क्लिटोरिस को उत्तेजित करने से महिलाओं के यौन अनुभव में इजाफा होता है

क्लिटोरिस को उत्तेजित करने से यौन उत्तेजना तेजी से बढ़ती है। असल में यह महिलाओं को चरमोत्कर्ष तक पहुंचाने में मदद करता है, और इसे छूने से महिलाओं के यौन सुख की तीव्रता को बढ़ाया जा सकता है।

 

क्लिटोरिस स्टिमुलेशन से बढ़ा महिलाओं का ऑर्गेज्म रेट

एक स्टडी के अनुसार, केवल 6% महिलाओं ने वेजाइनल इंटरकोर्स के दौरान ऑर्गेज्म अनुभव किया। एक अन्य स्टडी में यह संख्या 18% तक बढ़ी, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि जब सेक्स के दौरान क्लिटोरिस स्टिमुलेशन को शामिल किया गया, तो ऑर्गेज्म प्राप्त करने वाली महिलाओं की संख्या 70% तक बढ़ गई। इसका मतलब है कि क्लिटोरिस की उत्तेजना महिलाओं के यौन सुख और ऑर्गेज्म की संभावनाओं को काफी हद तक बढ़ा देती है, जिससे यौन अनुभव और बेहतर हो सकता है।

क्लिटोरिस का शारीरिक विकास

क्लिटोरिस को कभी-कभी फीमेल पेनिस भी कहा जाता है, क्योंकि इसका विकास शारीरिक रूप से पेनिस से मिलता-जुलता होता है। यह महिलाओं के यौन अंगों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

क्लिटोरिस और प्लास्टिक सर्जरी

क्लिटोरल हुड रिडक्शन सर्जरी एक कॉस्मेटिक प्रक्रिया है, जिसमें क्लिटोरिस को ढकने वाली अतिरिक्त त्वचा को हटाया जाता है, विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा यौन संवेदनशीलता में सुधार किए जाने के उद्देश्‍य से किया जाता है।

क्लिटोरिस से जुड़े रोचक तथ्य (Facts about the Clitoris)

अब जब आप क्लिटोरिस की बनावट के बारे में जान चुकी हैं, तो इससे जुड़े कुछ ऐसे तथ्य जानते हैं, जो इस अंग की अहमियत और खासियत को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं।

क्लिटोरिस की लंबाई 5 इंच तक हो सकती है

बाहरी रूप से क्लिटोरिस बहुत छोटा दिखाई देता है, लेकिन जो हिस्सा नजर आता है, वह इसका केवल ऊपरी भाग होता है।
क्लिटोरिस का बड़ा हिस्सा शरीर के अंदर होता है और दिखाई नहीं देता। बाहर दिखने वाला भाग लगभग 1 सेंटीमीटर का होता है, लेकिन पूरा क्लिटोरिस लगभग 5 इंच (करीब 12 सेंटीमीटर) तक लंबा हो सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि भ्रूण विकास के शुरुआती चरण में penis और clitoris की संरचना एक जैसी होती है और गर्भावस्था के लगभग 11वें सप्ताह के बाद इनमें अंतर विकसित होता है।

उत्तेजना के समय क्लिटोरिस में बदलाव होता है

जब शरीर उत्तेजित (aroused) होता है, तो क्लिटोरिस में भी रक्त प्रवाह बढ़ जाता है।
इससे यह थोड़ा सूज जाता है और अधिक संवेदनशील हो जाता है, ठीक उसी तरह जैसे पुरुषों में होता है।
इस दौरान वल्वा का रंग गहरा हो सकता है और योनि (vagina) का आकार भी फैलता व गहराता है। यानी उत्तेजना के समय पूरा जनन क्षेत्र प्रतिक्रिया देता है।

क्लिटोरिस का मुख्य उद्देश्य सुख से जुड़ा है

वैज्ञानिक दृष्टि से क्लिटोरिस का direct reproduction में कोई सीधा रोल नहीं होता।
यह मुख्य रूप से आनंद और संवेदनशीलता से जुड़ा अंग है।
शोध बताते हैं कि केवल इंसान ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य स्तनधारी जीवों में भी यह अंग आनंद से जुड़ा होता है। एक अध्ययन में human और dolphin clitoris की संरचना में भी समानताएं पाई गई हैं, जहां इसका मुख्य कार्य pleasure से जुड़ा माना गया है।

ज्यादातर महिलाओं में ऑर्गैज्म क्लिटोरल स्टिमुलेशन से होता है

शोध के अनुसार, केवल लगभग 18% महिलाएं सिर्फ penetrative vaginal sex से ऑर्गैज्म तक पहुंच पाती हैं।
अधिकतर महिलाओं के लिए clitoral stimulation सबसे प्रभावी तरीका होता है।
यह पूरी तरह सामान्य और प्राकृतिक है। कुछ अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि जिन महिलाओं को penetrative sex से भी ऑर्गैज्म होता है, उसमें क्लिटोरिस की पोजिशन की अहम भूमिका होती है। इससे साफ होता है कि क्लिटोरिस वास्तव में pleasure center है।

क्लिटोरिस दर्द कम करने में भी मदद कर सकता है

मासिक धर्म के दौरान हार्मोनल बदलाव के कारण कई बार सेक्स ड्राइव बढ़ सकती है।
इस समय ऑर्गैज्म होने से endorphins रिलीज होते हैं, जो शरीर के प्राकृतिक painkillers की तरह काम करते हैं और पीरियड क्रैम्प्स को कम करने में मदद कर सकते हैं।
इसी वजह से पीरियड्स के दौरान self-pleasure या intimacy को स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित और सामान्य माना जाता है।

 1990 के दशक तक क्लिटोरिस की पूरी जानकारी सामने नहीं आई थी

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मेडिकल साइंस में क्लिटोरिस की पूरी संरचना को आधिकारिक तौर पर समझने में बहुत देर लगी। महिलाओं की सेहत और यौन स्वास्थ्य पर लंबे समय तक पर्याप्त रिसर्च नहीं हुई। 1990 के दशक में ऑस्ट्रेलियाई यूरोलॉजिस्ट Helen O’Connell ने MRI स्कैन और 3D मॉडलिंग के जरिए क्लिटोरिस की संपूर्ण संरचना को वैज्ञानिक रूप से समझाया। इस रिसर्च ने महिला यौन स्वास्थ्य को समझने की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाया।

 

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