‘हनुमान अंश’ के 10 मिनट के सीन के लिए 24 घंटे पानी में खड़े रहे बाल कलाकार विहान
विहान का किरदार तपस्या से लेकर चमत्कार तक की यात्रा दिखाता है। उन्होंने बताया कि पूरी शूटिंग के दौरान उन्हें तपस्या, मंत्रजप और ध्यान जैसी भावनाओं में खुद को ढालना पड़ा। बाल कलाकार होने के बावजूद इस तरह का अनुशासन और धैर्य उनके लिए बड़ी सीख बन गया।

इंदौर के बाल कलाकार विहान शेडगे ने फिल्म ‘हनुमान अंश’ में बाल महाराज का किरदार निभाया है। इस भूमिका की शूटिंग उनके लिए आसान नहीं रही। फिल्म में एक 10-15 मिनट के सीन के लिए उन्हें करीब 24 घंटे पानी में खड़ा रहना पड़ा। पानी और पत्थरों के बीच शूटिंग पूरी करना मुश्किल था, लेकिन विहान ने इसे अध्यात्म और फिल्म से जुड़ा यादगार अनुभव बताया।
Hanuman Ansh में विहान का किरदार तपस्या से लेकर चमत्कार तक की यात्रा दिखाता है। उन्होंने बताया कि पूरी शूटिंग के दौरान उन्हें तपस्या, मंत्रजप और ध्यान जैसी भावनाओं में खुद को ढालना पड़ा। बाल कलाकार होने के बावजूद इस तरह का अनुशासन और धैर्य उनके लिए बड़ी सीख बन गया।
चर्चा के दौरान विहान शेडगे ने फिल्म में अपने किरदार, शूटिंग के अनुभव और बाबा नीम करोली महाराज से जुड़ी आस्था पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि फिल्म से पहले वे बाबा नीम करोली महाराज के जीवन और उनके आध्यात्मिक प्रभाव के बारे में ज्यादा नहीं जानते थे।
विहान के अनुसार, जब उन्हें बाबा का किरदार निभाने का मौका मिला तो उन्होंने उनके जीवन को समझने के लिए रिसर्च शुरू की। इसी प्रक्रिया में बाबा नीम करोली महाराज और हनुमान जी के प्रति उनकी आस्था गहरी होती चली गई।
पानी में 24 घंटे की शूटिंग
विहान शेडगे ने बताया कि फिल्म में उनके सीन बहुत मुश्किल थे। एक सीन में उन्हें पहले तालाब में पानी के अंदर खड़े रहना पड़ा। इसके बाद शूटिंग आगे बढ़ी और वही सीन नदी के पास पत्थरों के बीच भी फिल्माया गया।
उनके अनुसार, इस सीन की शूटिंग में लगभग 24 घंटे लग गए। फिल्म में यह हिस्सा करीब 10-15 मिनट का है, लेकिन पर्दे पर छोटे दिखने वाले सीन के पीछे लंबी मेहनत लगी।
पानी में लंबे समय तक खड़े रहना किसी भी कलाकार के लिए चुनौती भरा होता है। बाल कलाकार के लिए यह और कठिन हो सकता है, लेकिन विहान ने इसे अपनी भूमिका का जरूरी हिस्सा मानकर पूरा किया।
बाल महाराज का सबसे चुनौतीपूर्ण सीन
विहान ने कहा कि बाल महाराज की पूरी शूटिंग में सबसे ज्यादा मेहनत उनकी तपस्या वाले सीन में लगी। इस दौरान उन्हें मंत्रजप और ध्यान की अवस्था में दिखाया गया।
उन्होंने बताया कि ध्यान करना उन्हें अच्छा लगता है, क्योंकि वे स्कूल और घर पर भी पहले से इसकी प्रैक्टिस करते हैं। इसी कारण ध्यान वाले दृश्यों में ज्यादा कठिनाई नहीं हुई।
हालांकि पानी और पत्थरों के बीच लगातार शूटिंग करना उनके लिए शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद उन्होंने अपने किरदार की गंभीरता बनाए रखी।
अध्यात्म से मिला आत्मविश्वास
फिल्म की शूटिंग के दौरान विहान को अध्यात्म से जुड़े अनुभव भी मिले। उन्होंने बताया कि तपस्या, मंत्रजप और ध्यान वाले सीन करते समय उन्हें किरदार को भीतर से समझना पड़ा।
उनके लिए यह सिर्फ अभिनय नहीं था। यह एक ऐसा अनुभव रहा, जिसमें उन्हें अपने मन को शांत रखना पड़ा और कैमरे के सामने एकाग्रता बनाए रखनी पड़ी।
विहान का कहना है कि ध्यान के दौरान उनका स्वयं से गहरा जुड़ाव होता है। शूटिंग के समय भी उन्हें इस अभ्यास से मदद मिली।
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गरीब बच्चों की मदद की इच्छा
विहान ने फिल्म से जुड़ी अपनी एक याद साझा करते हुए कहा कि उन्हें बचपन से गरीब बच्चों को चॉकलेट और टॉफी देना अच्छा लगता है। वे गरीब बच्चों की मदद करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि इंसान को हमेशा बड़ा दिल रखना चाहिए और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। उनके अनुसार, हर व्यक्ति में सम्मान होना चाहिए।
एक बाल कलाकार के रूप में विहान का यह भाव उनके व्यक्तित्व की संवेदनशीलता दिखाता है। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने इंसानियत और मदद की भावना को भी महत्वपूर्ण बताया।
रोल मिलने से पहले किया हनुमान चालीसा का पाठ
विहान शेडगे ने बताया कि ऑडिशन से पहले उन्होंने लगातार दो-तीन दिन हनुमान चालीसा का पाठ किया था। इसके बाद उन्हें फिल्म में बाबा नीम करोली महाराज के बचपन का किरदार निभाने का मौका मिला।
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उनके लिए यह सिर्फ अभिनय का अवसर नहीं था, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी खास अनुभव रहा। फिल्म से जुड़ने के बाद हनुमान जी और बाबा नीम करोली महाराज के प्रति उनकी आस्था पहले से ज्यादा मजबूत हुई।
शूटिंग में लंगूर का आना खास अनुभव रहा
विहान ने शूटिंग से जुड़ा एक यादगार अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जिस गांव में फिल्म की शूटिंग हो रही थी, वहां करीब 15-20 साल से कोई लंगूर नहीं आया था। लेकिन उनकी शूटिंग वाले दिन अचानक एक लंगूर वहां पहुंच गया।
लंगूर ने शूटिंग के दौरान दो-तीन सीन में उनके साथ हिस्सा लिया। विहान के अनुसार, शूटिंग पूरी होते ही वह वहां से चला गया। यह पल उन्हें चमत्कार जैसा महसूस हुआ।
‘हनुमान अंश’ के बाद दिनचर्या बदली
विहान के मुताबिक, बाबा नीम करोली महाराज का किरदार निभाने के बाद उनकी दिनचर्या में भी बदलाव आया है। अब वे नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं।
उन्होंने कहा कि फिल्म ने उनकी भक्ति और आस्था को और गहरा किया है। बाबा नीम करोली महाराज और हनुमान जी से उनका जुड़ाव फिल्म के दौरान लगातार बढ़ता गया।
चार साल से एक्टिंग कर रहे हैं विहान
विहान ने बताया कि वे करीब चार साल से एक्टिंग कर रहे हैं। ‘हनुमान अंश’ उनकी पहली इंडी फिल्म है। इससे पहले वे मराठी टीवी सीरियल्स, फिल्मों और विज्ञापनों में काम कर चुके हैं।
मूल रूप से पुणे के रहने वाले विहान को यह मौका निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के जरिए मिला। वे पहले उनके साथ एक विज्ञापन में काम कर चुके थे। उस दौरान विशाल चतुर्वेदी को उनकी एक्टिंग पसंद आई थी और उन्होंने अपने अगले प्रोजेक्ट में विहान को मौका देने का मन बना लिया था। बाद में विहान को ‘हनुमान अंश’ में बाबा नीम करोली महाराज के बचपन का किरदार मिला।
फिल्म से मिली बड़ी सीख
विहान शेडगे के लिए ‘हनुमान अंश’ की शूटिंग केवल फिल्मी अनुभव नहीं रही। इस दौरान उन्होंने धैर्य, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में काम करने की सीख ली।
एक छोटे सीन के पीछे घंटों की मेहनत, लगातार तैयारी और भावनात्मक जुड़ाव की जरूरत होती है। विहान के अनुभव से साफ है कि बाल कलाकारों के लिए भी अभिनय केवल कैमरे के सामने खड़े होना नहीं, बल्कि किरदार को जीना होता है।
‘हनुमान अंश’ में बाल महाराज का किरदार निभाकर विहान ने अपनी अभिनय यात्रा में एक खास पड़ाव जोड़ा है। कठिन शूटिंग, आध्यात्मिक भाव और मदद की सोच ने इस अनुभव को उनके लिए यादगार बना दिया।
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