राजस्थान

सीकर के प्रो. सुरेश कुमार वर्मा ने 51वीं बार NET पास किया, 18 बार देश में प्रथम रहने का रिकॉर्ड

प्रो. डॉ. सुरेश कुमार वर्मा ने 1999 में मात्र 24 वर्ष की उम्र में पहली बार NET परीक्षा दी थी। इसके बाद उनकी सफलता का सिलसिला लगातार जारी रहा। 1999 से 2026 तक वे कुल 51 बार NET परीक्षा पास कर चुके हैं। इनमें से 18 बार उन्होंने देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया। कई बार उन्होंने JRF भी क्लियर किया।

सीकर जिले के नीमकाथाना क्षेत्र के थोई के पास रूपपुरा गांव निवासी प्रो. डॉ. सुरेश कुमार वर्मा ने एक बार फिर शिक्षा जगत में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में हुई NET परीक्षा में उन्होंने 100 परसेंटाइल के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि इसलिए खास है, क्योंकि वे 1999 से 2026 तक कुल 51 बार NET परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं।

Suresh Kumar Verma अब तक 18 बार पूरे देश में प्रथम स्थान हासिल कर चुके हैं और JRF भी क्लियर कर चुके हैं। उनका नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है। प्रो. वर्मा फिलहाल जयपुर के चौमूं स्थित राजकीय कन्या महाविद्यालय में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

51 बार NET पास करने का रिकॉर्ड

प्रो. डॉ. सुरेश कुमार वर्मा ने 1999 में मात्र 24 वर्ष की उम्र में पहली बार NET परीक्षा दी थी। इसके बाद उनकी सफलता का सिलसिला लगातार जारी रहा। 1999 से 2026 तक वे कुल 51 बार NET परीक्षा पास कर चुके हैं।

इनमें से 18 बार उन्होंने देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया। कई बार उन्होंने JRF भी क्लियर किया। किसी एक परीक्षा में लगातार इतनी बार सफलता हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में बार-बार सफलता के लिए विषय पर मजबूत पकड़, लगातार तैयारी और परीक्षा पैटर्न की गहरी समझ जरूरी होती है। प्रो. वर्मा की उपलब्धि इसी अनुशासन को दिखाती है।

100 परसेंटाइल के साथ फिर टॉप

हाल ही में हुई NET परीक्षा में प्रो. वर्मा ने 100 परसेंटाइल के साथ प्रथम स्थान हासिल किया। यह परिणाम उनके लंबे शैक्षणिक सफर में एक और बड़ी उपलब्धि के रूप में जुड़ गया है।

वे रसायन विज्ञान विषय के प्रोफेसर हैं और लंबे समय से पढ़ाने के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि उनके कई शिष्यों ने भी देशभर में NET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की है।

कई विद्यार्थी सरकारी सेवा में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। इससे साफ है कि प्रो. वर्मा की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके अध्यापन का असर विद्यार्थियों की सफलता में भी दिखता है।

GATE में भी 25 बार सफलता

NET के अलावा प्रो. डॉ. सुरेश कुमार वर्मा ने GATE परीक्षा में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वे 2001 से अब तक 25 बार इंजीनियरिंग में स्नातक योग्यता परीक्षा यानी GATE उत्तीर्ण कर चुके हैं।

GATE में भी वे तीन बार ऑल इंडिया स्तर पर प्रथम स्थान हासिल कर चुके हैं। NET और GATE दोनों परीक्षाओं में लगातार सफलता उनकी विषय विशेषज्ञता और तैयारी के स्तर को दिखाती है।

रसायन विज्ञान जैसे विषय में गहरी पकड़ के साथ लगातार राष्ट्रीय परीक्षाओं में प्रदर्शन करना आसान नहीं होता। इसी कारण प्रो. वर्मा शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की दुनिया में अलग पहचान रखते हैं।

रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज नाम

प्रो. डॉ. सुरेश कुमार वर्मा की उपलब्धियों को देखते हुए उनका नाम लंदन स्थित वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है।

यह सम्मान उनकी लगातार शैक्षणिक सफलता और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में असाधारण प्रदर्शन के कारण मिला। रिकॉर्ड बुक्स में नाम दर्ज होना किसी भी शिक्षक और शोधकर्ता के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

प्रो. वर्मा की ऑर्गेनिक केमिस्ट्री पर चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके 19 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र भी प्रकाशित हुए हैं। इससे उनके अकादमिक योगदान की व्यापकता सामने आती है।

बेटी ने केमिस्ट्री में पाए 100% अंक

प्रो. वर्मा के परिवार में भी केमिस्ट्री के प्रति गहरी रुचि दिखती है। उनकी पुत्री प्रियांशी वर्मा ने 2026 में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं परीक्षा में केमिस्ट्री में 100 प्रतिशत अंक हासिल किए।

यह उपलब्धि परिवार के शैक्षणिक माहौल और विषय के प्रति लगन को दिखाती है। पिता की तरह बेटी की भी केमिस्ट्री में रुचि है और उन्होंने बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया।

प्रो. वर्मा की उपलब्धि विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, वहीं उनकी बेटी की सफलता यह दिखाती है कि निरंतर अभ्यास और विषय को समझकर पढ़ने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा

Suresh Kumar Verma की कहानी उन विद्यार्थियों के लिए खास है, जो NET, JRF, GATE या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने दिखाया है कि सफलता केवल एक बार परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि विषय को गहराई से समझना भी उतना ही जरूरी है।

उनकी लगातार सफलता बताती है कि पढ़ाई में निरंतरता, अनुशासन और विषय के प्रति रुचि लंबे समय तक परिणाम देती है। 51 बार NET और 25 बार GATE पास करना सामान्य उपलब्धि नहीं है।

राजस्थान के सीकर जिले के एक गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले प्रो. वर्मा आज कई छात्रों के लिए उदाहरण हैं। शिक्षा, शोध और अध्यापन में उनका योगदान विद्यार्थियों को मेहनत और निरंतर सीखने की राह दिखाता है।

 

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सांवरिया सेठ सिंह

थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।

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