50 दिन, 4 चरण और 1.69 लाख सीटें: राजस्थान पंचायत चुनाव का पूरा कैलेंडर आया सामने
राजस्थान में पंचायत चुनावों की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है। 4 चरणों में वोटिंग होगी, 23 अक्टूबर से मतदान शुरू होकर 28 नवंबर तक जिला प्रमुख-प्रधान के चुनाव के साथ पूरी प्रक्रिया खत्म होगी। जानिए पूरा शेड्यूल।

Rajasthan Panchayat Election Schedule राज्य निर्वाचन आयोग ने शनिवार को जारी कर दिया है। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए 23, 29 अक्टूबर और 4, 14 नवंबर को चार चरणों में वोटिंग होगी, जबकि इनका नतीजा 20 नवंबर को आएगा। सरपंच और वार्ड पंचों के लिए 25, 31 अक्टूबर और 6, 16 नवंबर को मतदान कराया जाएगा। घोषणा के साथ ही ग्रामीण इलाकों में आचार संहिता लागू हो गई है।
जिला परिषद-पंचायत समिति सदस्यों के लिए चार चरणों में वोटिंग
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए पहले चरण में 23 अक्टूबर, दूसरे चरण में 29 अक्टूबर, तीसरे चरण में 4 नवंबर और चौथे चरण में 14 नवंबर को मतदान होगा। इन दोनों पदों के लिए वोटिंग ईवीएम से कराई जाएगी।
इन दोनों पदों के लिए मतगणना वोटिंग के दिन नहीं, बल्कि सभी चरण पूरे होने के बाद 20 नवंबर को एक साथ कराई जाएगी। जिला परिषद सदस्य ही आगे जिला प्रमुख और पंचायत समिति सदस्य प्रधान का चुनाव करेंगे, इसलिए इनका परिणाम आगे की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है।
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सरपंच-वार्ड पंच के लिए अलग शेड्यूल, नतीजे उसी दिन
सरपंच और वार्ड पंचों के चुनाव भी चार चरणों में होंगे, लेकिन इनकी तारीखें जिला परिषद-पंचायत समिति सदस्यों से अलग रखी गई हैं। पहले चरण में 25 अक्टूबर, दूसरे चरण में 31 अक्टूबर, तीसरे चरण में 6 नवंबर और चौथे चरण में 16 नवंबर को मतदान होगा।
सरपंच और वार्ड पंच का चुनाव बैलेट पेपर से होगा और नतीजे भी मतदान वाले दिन ही देर रात तक घोषित कर दिए जाएंगे। तीसरे चरण में खास बात यह है कि 3605 ग्राम पंचायतों में धनतेरस के दिन ही वोटिंग होगी।
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दो दिन के अंतर में मतदाताओं को दो बार डालना होगा वोट
इस बार मतदाताओं को दो दिन के भीतर ही दूसरी बार वोट डालना पड़ेगा, क्योंकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का मतदान एक साथ होगा, जबकि इसके ठीक दो दिन बाद उसी इलाके में पंच-सरपंच का चुनाव कराया जाएगा। आयोग ने यह व्यवस्था मतदान केंद्रों पर भीड़ कम रखने और प्रशासनिक सुविधा के लिहाज से तय की है।
20 नवंबर को रिजल्ट, 25 से 28 नवंबर तक चुनेंगे प्रमुख-प्रधान
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का परिणाम 20 नवंबर को आने के बाद 37 जिलों में 25 नवंबर को जिला प्रमुख और 27 नवंबर को प्रधान का चुनाव होगा। इसी तरह 26 नवंबर को उपजिला प्रमुख और 28 नवंबर को उपप्रधान चुने जाएंगे।
कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली जिलों में प्रमुख और प्रधान का कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा हो रहा है, इसलिए इन चार जिलों में जिला प्रमुख और प्रधान का चुनाव बाद में कराया जाएगा। हालांकि इन जिलों में भी जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव बाकी प्रदेश के साथ ही होगा।
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जयपुर में सबसे ज्यादा चार चरण, कई जिलों में एक और तीन चरण में चुनाव
प्रदेश के 37 जिलों में 8 अक्टूबर से 28 नवंबर तक यानी करीब 50 दिन तक चुनावी प्रक्रिया चलेगी। जयपुर में सबसे ज्यादा चार चरणों में चुनाव होंगे, जबकि जैसलमेर, फलोदी और सलूंबर में सिर्फ एक ही चरण में मतदान पूरा हो जाएगा।
झुंझुनूं, करौली, सीकर, बांसवाड़ा, बीकानेर, जालोर और उदयपुर में तीन चरणों में वोटिंग होगी, जबकि बाकी 30 जिलों में दो चरणों में चुनाव कराए जाएंगे। हर जिले का यह अलग-अलग शेड्यूल प्रशासन और सुरक्षा बलों की उपलब्धता के हिसाब से तय किया गया है।
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आचार संहिता लागू, मंत्री नहीं लेंगे सरकारी गाड़ी-गेस्ट हाउस
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही ग्रामीण इलाकों में आचार संहिता लागू हो गई है और सरकारी तबादलों पर पाबंदी लग गई है। मंत्री अब अपने इलाकों के दौरे पर सरकारी गाड़ी से नहीं जा सकेंगे और सरकारी गेस्ट हाउस या डाक बंगलों में नहीं ठहर सकेंगे।
आचार संहिता के दौरान सरकार कोई नई योजना या कार्यक्रम घोषित नहीं कर सकेगी, हालांकि पहले से चल रहे काम और जिन टेंडरों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, उन पर कोई रोक नहीं रहेगी। आयोग के मुताबिक, ऐसी कोई भी सरकारी घोषणा नहीं हो सकेगी जिससे मतदाता किसी तरह प्रभावित हों। हाल में हुए नगर निकाय चुनावों के दौरान भी इसी तरह की पाबंदियां लागू रही थीं।
1.69 लाख जनप्रतिनिधि चुनेगी जनता, 80 हजार से ज्यादा महिलाएं होंगी निर्वाचित
इन चुनावों में कुल 1.69 लाख नए पंचायतीराज जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे, जिनमें 1403 जिला परिषद सदस्य और 8245 पंचायत समिति सदस्य शामिल हैं। 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच-उपसरपंच के साथ 1.30 लाख वार्ड पंचों का चुनाव भी बैलेट से होगा।
महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण मिलने की वजह से 1.69 लाख में से आधी सीटों पर महिलाएं ही चुनकर आएंगी। इसके तहत 14,403 ग्राम पंचायतों में 7200 महिला सरपंच, 7200 महिला उपसरपंच और 1.30 लाख वार्ड पंच पदों में से करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच निर्वाचित होंगी, यानी कुल मिलाकर 80 हजार से ज्यादा महिलाएं पंचायतीराज जनप्रतिनिधि बनेंगी।
सरपंच-वार्ड पंच पदों पर आरक्षण का पूरा गणित
सरपंच पद के लिए एसटी वर्ग को 3058, एससी वर्ग को 2493 और ओबीसी वर्ग को 1961 सीटें आरक्षित की गई हैं। वार्ड पंचों के 1.30 लाख पदों में से 21,962 सीटें एससी वर्ग, 19,117 सीटें एसटी वर्ग और करीब 15 हजार सीटें ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित रखी गई हैं।
मतदाताओं को वोटिंग से पहले इन बातों का रखना होगा ध्यान
इस बार मतदाताओं को यह ठीक से समझना होगा कि उनके इलाके में किस चरण में वोटिंग होनी है, क्योंकि जिला परिषद-पंचायत समिति सदस्य और सरपंच-वार्ड पंच के लिए अलग-अलग तारीखें तय की गई हैं। एक ही मतदाता को दो अलग दिन बूथ पर जाकर वोट डालना होगा, इसलिए दोनों तारीखें याद रखना जरूरी है।
सरपंच और वार्ड पंच के लिए बैलेट पेपर पर प्रत्याशी के नाम के आगे बना चुनाव चिन्ह ध्यान से देखकर मुहर लगानी होगी, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के लिए ईवीएम पर बटन दबाने से पहले उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिन्ह दोनों मिलाकर जांच लेना चाहिए, ताकि वोट में कोई गलती न हो।
4 करोड़ से ज्यादा वोटर डालेंगे वोट, जयपुर में सबसे ज्यादा मतदाता
पंचायतीराज चुनाव में कुल मतदाताओं में 51.82% पुरुष और 48.18% महिला वोटर शामिल हैं। प्रदेश के 41 जिलों में जयपुर में सबसे ज्यादा 18.99 लाख वोटर हैं, जबकि जैसलमेर में सबसे कम 4.36 लाख वोटर दर्ज हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक पूरे प्रदेश में इस बार करीब 4.03 करोड़ मतदाता अपने वोट का इस्तेमाल करेंगे, जिनमें 2,08,87,351 पुरुष, 1,94,19,789 महिला और 168 थर्ड जेंडर वोटर शामिल हैं। इतनी बड़ी तादाद में वोटिंग के लिए प्रदेशभर में 45,384 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक अब सभी जिलों में नामांकन प्रक्रिया 8 अक्टूबर से शुरू होगी और 28 नवंबर को प्रधान-उपप्रधान के चुनाव के साथ पूरी प्रक्रिया खत्म होगी। इस बीच प्रत्याशियों और मतदाताओं को हर चरण की तारीख ध्यान से याद रखनी होगी, क्योंकि इलाके के हिसाब से अलग-अलग दिन वोटिंग होनी है।
निकाय चुनाव के बाद अब पंचायतों में भी बीजेपी-कांग्रेस की सियासी परीक्षा
सितंबर में हुए नगर निकाय चुनावों में बीजेपी ने कई शहरों में बोर्ड बनाया था, और अब पंचायतीराज चुनावों में पार्टी के सामने गांवों में भी यह बढ़त बनाए रखने की चुनौती होगी। कांग्रेस के लिए यह चुनाव अपनी परंपरागत ग्रामीण पकड़ साबित करने का मौका माने जा रहे हैं।
यहां तीन इमेज में ब्रीफ में पंंचायत चुनाव का शेड्यूल देखें:
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निकाय चुनावों की तरह पंचायतीराज चुनावों में भी दलबदल विरोधी कानून लागू नहीं होता, इसलिए जिला प्रमुख और प्रधान की कुर्सी तय करने में जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों के बीच सियासी जोड़-तोड़ की पूरी गुंजाइश रहेगी।
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