Canva Layoffs: AI की वजह से 1271 कर्मचारियों की जाएगी नौकरी
कंपनी के इस फैसले के पीछे मुख्य रूप से तीन वजहें बताई जा रही हैं। पहली, नई AI टेक्नोलॉजी का असर, एंथ्रोपिक के 'क्लॉड' जैसे नए AI टूल्स के आने से लोग बिना किसी स्पेशल डिजाइन प्रोग्राम के ही खुद अपना काम पूरा कर पा रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट भी हाल ही में बढ़ते AI खर्च और शेयरों में गिरावट के बीच 4,800 कर्मचारियों को निकाल चुकी है।

ऑनलाइन डिजाइन और पब्लिशिंग प्लेटफॉर्म कैनवा ने Canva Layoffs के तहत अपने वर्कफोर्स में 22% से ज्यादा की कटौती का ऐलान किया है। कंपनी के इस फैसले से कम से कम 1,271 कर्मचारियों की नौकरी जाएगी, उनका रोल बदलेगा या फिर उन्हें सेंट्रल हब्स में रिलोकेट किया जाएगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से ऑस्ट्रेलिया की इस जानी-मानी टेक कंपनी में यह बड़ा बदलाव हो रहा है। कंपनी का यह फैसला सिर्फ एक आंतरिक रीऑर्गनाइजेशन नहीं है, बल्कि यह पूरी सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के सामने खड़े उस बड़े सवाल की झलक भी है कि नई AI टेक्नोलॉजी आने वाले वर्षों में टेक कंपनियों के कामकाज के तरीके को किस हद तक बदल देगी।
सिडनी में हेडक्वार्टर रखने वाली कैनवा दुनिया की उन सबसे बड़ी डिजाइन कंपनियों में शामिल है, जिसे करोड़ों यूजर्स रोजमर्रा के प्रेजेंटेशन, सोशल मीडिया पोस्ट और मार्केटिंग मैटेरियल बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, इसलिए इसका यह फैसला टेक इंडस्ट्री में खासतौर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
13 साल के इतिहास का सबसे कठिन समय, मेलानी पर्किंस का कर्मचारियों को नोट
कैनवा की चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) मेलानी पर्किंस ने कर्मचारियों को भेजे एक नोट में बताया कि सिडनी स्थित इस कंपनी की ग्रोथ एक दशक में पहली बार सुस्त हुई है। उन्होंने इस रीऑर्गनाइजेशन को कंपनी के 13 साल के इतिहास का सबसे कठिन समय बताया है। पर्किंस ने लिखा कि नई टेक्नोलॉजी लोगों के क्रिएट करने के तरीके और उनकी उम्मीदों को बदल रही है, और वे इस कठिन फैसले पर पहुंची हैं कि छोटे बदलाव अब काफी नहीं होंगे।
उन्होंने यह भी साफ किया कि यह कदम किसी एक टीम की नाकामी का नतीजा नहीं है, बल्कि पूरी इंडस्ट्री में हो रहे बदलाव के साथ तालमेल बनाने के लिए लिया गया एक रणनीतिक फैसला है। पर्किंस के मुताबिक कंपनी के लीडरशिप को यह फैसला लेने से पहले लंबे समय तक यह आकलन करना पड़ा कि आने वाले वर्षों में कंपनी को किस तरह की टीम स्ट्रक्चर की जरूरत होगी, ताकि वह तेजी से बदलते AI इकोसिस्टम में प्रतिस्पर्धी बनी रह सके।
कैनवा में छंटनी और रीस्ट्रक्चरिंग की ये हैं तीन बड़ी वजहें
कंपनी के इस फैसले के पीछे मुख्य रूप से तीन वजहें बताई जा रही हैं। पहली, नई AI टेक्नोलॉजी का असर, एंथ्रोपिक के ‘क्लॉड’ जैसे नए AI टूल्स के आने से लोग बिना किसी स्पेशल डिजाइन प्रोग्राम के ही खुद अपना काम पूरा कर पा रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट भी हाल ही में बढ़ते AI खर्च और शेयरों में गिरावट के बीच 4,800 कर्मचारियों को निकाल चुकी है, जो बताता है कि यह चुनौती सिर्फ कैनवा तक सीमित नहीं है।
दूसरी वजह है कम कर्मचारियों की जरूरत, कंपनियां अब कम स्टाफ के साथ ही काम चलाने के लिए AI टूल्स का सहारा ले रही हैं, जिससे कई पुरानी भूमिकाओं की जरूरत घटती जा रही है। तीसरी वजह वैल्यूएशन में गिरावट की चिंता है, निवेशकों को डर है कि नई टेक्नोलॉजी इन कंपनियों के मौजूदा बिजनेस मॉडल को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की कुल वैल्यू में अरबों डॉलर की कमी आई है।
इन तीनों वजहों को मिलाकर देखा जाए, तो साफ है कि यह सिर्फ एक कंपनी की अंदरूनी समस्या नहीं, बल्कि पूरे सॉफ्टवेयर सेक्टर के बिजनेस मॉडल में आ रहे बड़े बदलाव का हिस्सा है।
छोटी टीमों में काम करेगी कंपनी, हाइब्रिड कल्चर में भी होगा बदलाव
पर्किंस ने बताया कि कैनवा को अब एक सिंपल बिजनेस बनाना होगा और छोटी टीमों के साथ काम पर लौटना होगा। कंपनी में नीश स्पेशलाइजेशन यानी बहुत खास तरह की एक्स्पर्टीज वाले रोल कम किए जाएंगे, ताकि फैसले तेजी से लिए जा सकें और टीमें ज्यादा लचीले ढंग से काम कर सकें।
इसके साथ ही कंपनी की प्रोडक्ट टीमों के लिए सिडनी को मुख्य बेस बनाया जाएगा, जिससे प्रोडक्ट डेवलपमेंट से जुड़े ज्यादातर फैसले एक ही जगह से लिए जा सकेंगे। जनवरी 2027 से ज्यादातर हाइब्रिड कर्मचारियों को हफ्ते में दो से तीन दिन ऑफिस आकर काम करना होगा, जो महामारी के बाद अपनाई गई पूरी तरह लचीली वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्था से एक स्पष्ट बदलाव है।
कंपनी का मानना है कि छोटी, एक-दूसरे के करीब बैठने वाली टीमें फैसले तेजी से ले सकती हैं और नए प्रोडक्ट आइडिया पर तेजी से काम कर सकती हैं, जो तेजी से बदलते AI बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए जरूरी माना जा रहा है।
IPO की तैयारी के बीच कंपनी की नाजुक फाइनेंशियल कंडीशन
कैनवा शेयर बाजार में लिस्टिंग यानी IPO लाने की तैयारी कर रही है। ऐसे समय में इस बड़े रीऑर्गनाइजेशन ने कंपनी को एक नाजुक फाइनेंशियल बैलेंस में ला खड़ा किया है। साल 2021 में कैनवा की वैल्यूएशन 40 बिलियन डॉलर के हाई पर पहुंच गई थी, जिसने इसे दुनिया की सबसे मूल्यवान स्टार्टअप्स में से एक बना दिया था।
हालांकि, 2022 में टेक शेयरों में बिकवाली के दौरान यह गिरकर लगभग 26 बिलियन डॉलर रह गई थी। बाद में इसकी वैल्यू में सुधार तो हुआ, लेकिन हालिया छंटनी और रीस्ट्रक्चरिंग का इस पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी साफ नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि IPO से पहले कंपनी का यह कदम निवेशकों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश भी हो सकता है कि वह बदलते बाजार के मुताबिक खुद को समय रहते ढाल रही है।
किसी भी कंपनी के लिए लिस्टिंग से पहले अपने खर्चों और टीम के आकार को व्यवस्थित करना एक आम रणनीति मानी जाती है, ताकि बाजार में उतरते समय उसकी बैलेंस शीट और भविष्य की ग्रोथ को लेकर निवेशकों का भरोसा बना रहे।
19 साल की उम्र में मेलानी पर्किंस ने शुरू किया था कैनवा
साल 2008 में जब फेसबुक तेजी से पॉपुलर हो रहा था, तब 19 साल की मेलानी पर्किंस को लगा कि ट्रेडिशनल डिजाइन टूल्स को सीखने में सालों लग जाते हैं। उन्होंने तभी डिजाइन सॉफ्टवेयर को सिंपल, ऑनलाइन और कोलैबोरेटिव यानी सहयोगी बनाने के बारे में सोचा।
इसी सोच के साथ मेलानी ने अपने पार्टनर क्लिफ ओब्रेक्ट के साथ मिलकर फ्यूजन बुक्स नाम से पहला प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जो स्कूल इयरबुक डिजाइन करने में मदद करता था। साल 2013 में कैमरन एडम्स टीम में शामिल हुए और तीनों ने मिलकर ‘Canva’ की शुरुआत की।
इसका मकसद लोगों के लिए लोगो, पोस्टर और बिजनेस कार्ड डिजाइन करना आसान बनाना था, जहां यूजर्स फोटो अपलोड कर प्रीसेट फिल्टर और फॉन्ट से अपनी डिजाइन कस्टमाइज कर सकें। कुछ ही सालों में कैनवा दुनियाभर में छोटे बिजनेस, स्टूडेंट्स और सोशल मीडिया क्रिएटर्स के लिए डिजाइन का सबसे लोकप्रिय ऑनलाइन टूल बन गया।
बिना किसी महंगी ट्रेनिंग या प्रोफेशनल सॉफ्टवेयर की जरूरत के, कोई भी आम यूजर कुछ ही मिनटों में अपनी पसंद का पोस्टर, प्रेजेंटेशन या सोशल मीडिया ग्राफिक बना सके, यही सोच कैनवा की शुरुआती सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी।
निवेशकों की चिंता, AI में भारी निवेश से रिटर्न कब और कैसे मिलेगा
AI के इस दौर ने जहां बड़े पैमाने पर नौकरियां छीनी हैं, वहीं निवेशक अब यह सवाल भी उठा रहे हैं कि AI में हो रहे भारी-भरकम निवेश से कंपनियों को वित्तीय मुनाफा कब और कैसे मिलेगा। कंपनियां अरबों डॉलर AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट पर खर्च कर रही हैं, लेकिन इसका सीधा रिटर्न अभी तक सीमित नजर आ रहा है, जिससे निवेशकों में बेचैनी बढ़ी है।
कैनवा जैसी कंपनियों के लिए यह सवाल और भी अहम हो जाता है, क्योंकि वह खुद उन्हीं AI टूल्स की वजह से पैदा हुई चुनौती का सामना कर रही है, जिन्हें विकसित करने में उसके प्रतिस्पर्धी भी भारी निवेश कर रहे हैं। कई बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ महीनों में यह साफ हो जाएगा कि कौन सी कंपनियां AI को अपने बिजनेस मॉडल में सही तरीके से ढाल पाती हैं और कौन सी इस बदलाव की रफ्तार से पीछे छूट जाती हैं।
क्या होता है ‘सॉफ्टवेयर कैनिबलाइजेशन’, जिससे डर रही हैं टेक कंपनियां
जब कोई नई तकनीक जैसे AI टूल्स-Claude किसी पुरानी कंपनी या सॉफ्टवेयर के बने-बनाए बिजनेस और डिमांड को खुद ही खत्म करने लगती है, तो इसे टेक इंडस्ट्री की भाषा में ‘कैनिबलाइजेशन’ कहते हैं। कैनवा जैसी कंपनियों को खतरा है कि लोग अलग से डिजाइन टूल्स का इस्तेमाल करने के बजाय सीधे AI टूल्स से ही अपने डिजाइन और कंटेंट से जुड़े काम पूरे कर लेंगे।
यही वजह है कि कैनवा खुद भी अपने प्लेटफॉर्म में AI फीचर्स जोड़ने की कोशिश कर रही है, ताकि वह अपने यूजर्स को उन्हीं नई सुविधाओं के साथ प्लेटफॉर्म पर बनाए रख सके, जिनकी वजह से उसके सामने यह चुनौती खड़ी हुई है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कैनवा जैसी कंपनियां इस कैनिबलाइजेशन के खतरे से कैसे निपटती हैं और छोटी, ज्यादा फोकस्ड टीमों के साथ अपनी ग्रोथ को फिर से कैसे पटरी पर लाती हैं।
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