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फोन बंद रहे तब भी बुक होगी टिकट-होटल, OpenAI के नए AI एजेंट ‘डॉट्स’ का कमाल

सस्ती फ्लाइट टिकट ढूंढना हो या मनपसंद होटल में रूम बुक कराना, अब इसके लिए घंटों स्क्रीन पर वक्त नहीं गंवाना पड़ेगा। OpenAI Dots AI Agent नाम से नया टूल लॉन्च किया गया है, जो यूजर के बताए बिना भी खुद-ब-खुद कई डिजिटल काम पूरा कर सकता है।

सस्ती फ्लाइट टिकट ढूंढना हो या मनपसंद होटल में रूम बुक कराना, अब इसके लिए घंटों स्क्रीन पर वक्त नहीं गंवाना पड़ेगा। OpenAI Dots AI Agent नाम से नया टूल लॉन्च किया गया है, जो यूजर के बताए बिना भी खुद-ब-खुद कई डिजिटल काम पूरा कर सकता है।

चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी OpenAI ने अपना नया OpenAI Dots AI Agent लॉन्च कर दिया है। यह आम चैटबॉट की तरह सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यूजर का काम समझकर उसे बैकग्राउंड में खुद पूरा भी कर देता है। यह टूल हाल ही में लॉन्च हुए मेटा के ‘म्यूज’ को टक्कर देने के लिए उतारा गया है, और फिलहाल इसे सिर्फ पेड यूजर्स के लिए रोलआउट किया गया है।

डॉट्स के पास खुद का क्लाउड कंप्यूटर और ब्राउजर

डॉट्स के पास इंटरनेट पर चलने वाला अपना क्लाउड कंप्यूटर और ब्राउजर है। इसका मतलब है कि अगर यूजर का फोन या लैपटॉप बंद भी हो, तब भी यह बैकग्राउंड में दिया गया काम करता रहता है। OpenAI के मुताबिक डॉट्स GPT-6 Astra मॉडल पर आधारित है और प्रोजेक्ट्स पर प्रोएक्टिव रिसर्च करने के साथ-साथ समय के साथ यूजर की पसंद भी सीखता रहता है।

फिलहाल यह सुविधा सिर्फ प्रो, बिजनेस प्रीमियम और एंटरप्राइज जैसे पेड प्लान वाले यूजर्स के लिए चुनिंदा बाजारों में रोलआउट की गई है। कंपनी का कहना है कि बाकी यूजर्स को भी जल्द यह सुविधा मिलेगी, और पात्र यूजर्स को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के एक डॉट मिलेगा। डॉट्स से जुड़ी पूरी जानकारी OpenAI की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है।

4 हजार से ज्यादा एप्स से जुड़ सकेगा डॉट्स

OpenAI के मुताबिक यूजर्स डॉट्स को 4 हजार से ज्यादा एप्स के साथ जोड़ सकते हैं। इसे चैटजीपीटी के डेस्कटॉप और मोबाइल ऐप के अलावा स्लैक और माइक्रोसॉफ्ट टीम्स जैसे प्लेटफॉर्म से भी चलाया जा सकता है, और आने वाले समय में टेक्स्ट के जरिए भी इसे एक्सेस करने का विकल्प मिलेगा।

उदाहरण के लिए अगर किसी को ग्राहकों के फीडबैक पर नजर रखनी है, तो इस काम के लिए डॉट्स को लगाया जा सकता है। इसके अलावा सॉफ्टवेयर की गलतियां यानी बग्स ढूंढने, उन्हें ठीक करने और नए कोड की टेस्टिंग जैसे तकनीकी काम में भी डॉट्स इस्तेमाल हो सकता है।

बिजनेस और कंपनियों के लिए स्पेशलिस्ट डॉट्स बना रही OpenAI

OpenAI कंपनियों के लिए स्पेशलिस्ट डॉट्स भी बना रही है, जो इनवॉइस प्रोसेसिंग, कस्टमर सपोर्ट और प्रोक्योरमेंट जैसे काम संभालेंगे। कंपनी का कहना है कि डॉट्स ऐसे कामों को भी संभाल सकता है जो समय के साथ बदलते रहते हैं, जैसे ग्राहकों की बदलती जरूरतों को ट्रैक करना और प्रपोजल अपडेट करना। अगर कहीं इंसानी दखल की जरूरत पड़े, तो यह यूजर को फ्लैग भी कर देता है। आने वाले समय में एक साथ कई डॉट्स की टीम बनाकर काम कराने का विकल्प भी मिलेगा।

पहले भी AI एजेंट ला चुकी है OpenAI

OpenAI के लिए डॉट्स कोई बिल्कुल नया कॉन्सेप्ट नहीं है। इससे पहले कंपनी ‘ऑपरेटर’ नाम से एक ऐसा टूल ला चुकी है, जो ब्राउजर के जरिए यूजर की तरफ से टिकट बुकिंग और फॉर्म भरने जैसे काम करता था। इसके अलावा ‘डीप रिसर्च’ फीचर भी लंबी और जटिल रिसर्च रिपोर्ट खुद तैयार करने के लिए पहले से मौजूद है। डॉट्स इन दोनों टूल्स से आगे बढ़कर लगातार बैकग्राउंड में काम करने और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौजूद रहने की सुविधा देता है, जो इसे पहले के एजेंट्स से अलग बनाता है।

मेटा का ‘म्यूज’ 8 सितंबर को हुआ था लॉन्च

मेटा ने 8 सितंबर 2026 को अपना पर्सनल AI एजेंट ‘म्यूज’ लॉन्च किया था, जो लॉन्च के एक हफ्ते के भीतर ही एपल के ऐप स्टोर में चैटजीपीटी को पीछे छोड़कर नंबर-1 फ्री ऐप बन गया था। यह iOS, Android, muse.ai और वॉट्सएप पर उपलब्ध है और ईमेल, कैलेंडर, पेमेंट, खाना ऑर्डर करने और शॉपिंग जैसी कई सर्विसेज से जुड़ सकता है। मेटा का दावा है कि म्यूज एक सुरक्षित वर्चुअल मशीन पर चलता है और पेमेंट या ईमेल जैसे संवेदनशील काम से पहले यूजर की मंजूरी लेता है।

चैटबॉट और AI एजेंट में क्या है फर्क

डॉट्स और म्यूज जैसे नए AI एजेंट सामान्य चैटबॉट्स से पूरी तरह अलग हैं। आम चैटबॉट में यूजर को हर सवाल टाइप करना पड़ता है और फिर जवाब का इंतजार करना होता है। इसके उलट AI एजेंट को बस काम बता दिया जाता है, और वह पूरा काम खुद ही निपटा लेता है, भले ही यूजर का फोन-लैपटॉप बंद क्यों न हो। काम पूरा होने पर या यूजर की मंजूरी की जरूरत पड़ने पर यह नोटिफिकेशन भेज देता है।

म्यूज ने बिना पूछे भेज दिया यूजर का घर का पता

खुद काम करने वाले AI एजेंट जितने मददगार हैं, उनसे जुड़ा खतरा भी उतना ही बड़ा है। टेक यूट्यूबर मैट रॉब ने हाल ही में बताया कि उन्होंने फेसबुक मार्केटप्लेस पर एक कीबोर्ड बेचने का जिम्मा म्यूज को सौंपा था। उन्होंने ‘ऑलवेज अलाउ’ यानी हमेशा इजाजत वाला विकल्प चुना था, जिसे लेकर उन्हें लगा कि ऑफर स्वीकार करने से पहले भी उनकी मंजूरी ली जाएगी। लेकिन म्यूज ने बिना पूछे ही एक खरीदार का सस्ता ऑफर मंजूर कर लिया और उसे रॉब का घर का पता भेज दिया।

जब खरीदार तय सौदे के सबूत के साथ रॉब की बिल्डिंग पर पहुंचा, तो रॉब वहां मौजूद ही नहीं थे। इससे नाराज खरीदार ने निगेटिव रेटिंग दे दी, जिसके बाद म्यूज ने रॉब की तरफ से माफी मांगते हुए कहा कि वे किसी काम में उलझे हुए थे। मेटा के अधिकारी डेविड सिंगलटन का कहना है कि ऐसे मामलों में म्यूज सीधे निर्देशों का पालन करते हुए सही तरीके से मंजूरी मांग रहा था।

सुरक्षा चिंताओं के चलते अमेजन ने म्यूज को किया ब्लॉक

ऐसी ही सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के चलते अमेजन ने म्यूज को अपने प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक कर दिया है। अमेजन का कहना है कि म्यूज बिना अनुमति के ग्राहकों के अकाउंट एक्सेस कर रहा था, खुद को पहचान नहीं बता रहा था, और क्रेडेंशियल स्टोर करने से सुरक्षा जोखिम पैदा हो सकता था। कंपनी के 68 अरब डॉलर से ज्यादा के विज्ञापन कारोबार पर भी इसके असर की आशंका जताई गई थी।

गलती होने पर कानूनी जवाबदेही अब भी तय नहीं

AI एजेंट्स के खुद फैसले लेने से यह विवाद खड़ा हो गया है कि किसी गड़बड़ी या नुकसान की जिम्मेदारी किसे माना जाएगा। एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने भी अपनी आईपीओ फाइलिंग में इस पर गंभीर चिंता जताई है। कंपनी के मुताबिक, ऐसे एजेंट जो कम निगरानी में लंबे समय तक यूजर के सिस्टम के भीतर काम करते हैं, उनसे जुड़े कानूनी जोखिम अभी साफ नहीं हैं। खासतौर पर डेटा डिलीट करने या पेमेंट जैसे अपरिवर्तनीय फैसलों को लेकर चिंता जताई गई है।

एंथ्रोपिक के मुताबिक अभी यह साफ नहीं है कि एजेंट का लिया फैसला यूजर पर कानूनी तौर पर बाध्य माना जाएगा या नहीं, और इन AI सिस्टम्स को प्रोडक्ट की कैटेगरी में रखा जाएगा या सर्विस में। कंपनी ने यह भी कहा कि मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट में तय जवाबदेही की सीमाएं ऐसे मामलों में पर्याप्त या लागू होने लायक भी नहीं हो सकतीं।

यूजर्स को किन बातों का रखना होगा ध्यान

मैट रॉब वाले मामले से एक बात साफ हो जाती है कि AI एजेंट को दी गई परमिशन सेटिंग्स को समझे बिना इस्तेमाल करना भारी पड़ सकता है। ‘ऑलवेज अलाउ’ जैसे विकल्प चुनने से पहले यह जरूर देखना चाहिए कि इसमें एजेंट को कितनी आजादी दी जा रही है, खासतौर पर पेमेंट, पर्सनल एड्रेस या कॉन्टैक्ट डिटेल जैसी संवेदनशील जानकारी शेयर करने के मामलों में। बेहतर यही होगा कि शुरुआत में हर बड़े फैसले पर मैनुअल मंजूरी वाला विकल्प ही चुना जाए, और भरोसा बनने के बाद ही एजेंट को ज्यादा आजादी दी जाए।

आगे क्या

OpenAI और मेटा जैसी कंपनियां फिलहाल AI एजेंट को लेकर आगे की रेस में हैं, लेकिन म्यूज जैसे मामलों ने साफ कर दिया है कि यूजर की मंजूरी और डेटा सुरक्षा को लेकर अभी कई सवाल अनसुलझे हैं। जब तक इन सिस्टम्स की कानूनी जवाबदेही साफ नहीं होती, तब तक यूजर्स को पेमेंट या पर्सनल जानकारी से जुड़े परमिशन सेटिंग्स को सावधानी से ही चुनना होगा।

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सांवरिया सेठ सिंह

थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।

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