162 निकायों में वोटिंग पूरी, अब अध्यक्ष पद से पहले प्रत्याशियों को संभालने की दौड़
पहले चरण में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका सहित 162 नगरीय निकायों में मतदान हुआ। शाम 6 बजे वोटिंग खत्म होते ही प्रत्याशियों के पास पार्टी ऑफिस से फोन आने लगे।

राजस्थान के 162 नगरीय निकायों में पहले चरण की वोटिंग खत्म होते ही राजनीतिक हलचल नई दिशा में बढ़ गई। बुधवार शाम 6 बजे मतदान समाप्त होते ही भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने प्रत्याशियों को संभालने की रणनीति शुरू कर दी। कई जगह उम्मीदवारों को पार्टी ऑफिस, होटल या तय स्थानों पर बुलाया गया। चित्तौड़गढ़ में भाजपा प्रत्याशी बैग लेकर पार्टी ऑफिस पहुंचे और फिर गाड़ियों से रवाना हो गए।
Rajasthan Nikay Chunav में मतदान के बाद बाड़ेबंदी इसलिए अहम हो गई है, क्योंकि निकायों में पार्षद ही आगे अध्यक्ष और चेयरमैन के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसी बीच बाड़मेर में वार्ड 48 के कांग्रेस प्रत्याशी पारसमल माली को कथित तौर पर कार में डालकर किडनैप करने की कोशिश का मामला सामने आया। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन वहां प्रत्याशी समर्थकों और पुलिस टीम के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
वोटिंग के बाद बाड़ेबंदी शुरू
पहले चरण में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका सहित 162 नगरीय निकायों में मतदान हुआ। शाम 6 बजे वोटिंग खत्म होते ही प्रत्याशियों के पास पार्टी ऑफिस से फोन आने लगे।
चित्तौड़गढ़ में भाजपा प्रत्याशी फोन आने के बाद जरूरी सामान और बैग लेकर पार्टी ऑफिस पहुंचे। वहां पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा हुई और फिर प्रत्याशी अलग-अलग गाड़ियों से रवाना हो गए। राजनीतिक हलकों में इसे मतगणना और अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले प्रत्याशियों को एकजुट रखने की रणनीति माना जा रहा है।
कांग्रेस प्रत्याशी भी अपने स्तर पर आगे की रणनीति बनाने में जुटे हैं। निकाय चुनाव में कई जगह निर्दलीय उम्मीदवार भी मजबूत स्थिति में बताए जा रहे हैं, इसलिए पार्टियां किसी तरह की ढील नहीं देना चाहतीं।
बाड़मेर में किडनैपिंग की कोशिश
बाड़मेर में मतदान के बाद तनावपूर्ण स्थिति बनी। वार्ड 48 के कांग्रेस प्रत्याशी पारसमल माली को रात करीब 8:30 बजे शहर के बेरियों का बास इलाके में कार में डालकर किडनैप करने की कोशिश की गई।
सूचना मिलने पर पुलिस और एएसपी नितेश आर्य मौके पर पहुंचे। पुलिस प्रत्याशी को थाने लाने की कोशिश कर रही थी, तभी प्रत्याशी के भाई और पीसीसी सदस्य ठाकराराम माली अपने समर्थकों के साथ पुलिस टीम से उलझ गए।
इस दौरान एएसपी के साथ धक्का-मुक्की हुई। घटना ने निकाय चुनाव के बाद प्रत्याशियों की सुरक्षा और राजनीतिक तनाव दोनों को सामने ला दिया है। अब पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
रामगंजमंडी में बस से रवाना प्रत्याशी
कोटा जिले की रामगंजमंडी नगर पालिका में मतदान खत्म होते ही भाजपा और कांग्रेस दोनों ने बाड़ेबंदी शुरू कर दी। भाजपा के एक प्रत्याशी के अनुसार, रामगंजमंडी विधायक और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने भाजपा के सभी 38 वार्डों के प्रत्याशियों को रात करीब 9:30 बजे भाजपा कार्यालय पर बुलाया।
इसके बाद सभी प्रत्याशियों को पार्टी पदाधिकारियों के साथ बस में बैठाकर बारां के लिए रवाना किया गया। बारां पहुंचने के बाद प्रत्याशियों को अयोध्या स्थित राम मंदिर दर्शन के लिए ले जाने की बात सामने आई।
कांग्रेस ने भी अपने सभी उम्मीदवारों को होटल में एकत्रित करना शुरू किया। दोनों दलों की यह सक्रियता दिखाती है कि परिणाम से पहले ही अध्यक्ष पद की रणनीति पर काम तेज हो चुका है।
भीलवाड़ा में 70 भाजपा प्रत्याशी बुलाए
भीलवाड़ा नगर निगम के 70 वार्डों में वोटिंग खत्म होने के बाद भाजपा ने अपने सभी 70 प्रत्याशियों को फोन कर पार्टी ऑफिस बुलाया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रत्याशियों को यहां से अज्ञात स्थान पर ले जाने की तैयारी की गई।
हाईकमान के निर्देशों के बाद भावी पार्षद बैग में कपड़े लेकर भाजपा ऑफिस पहुंचने लगे। इससे साफ है कि पार्टी अपने प्रत्याशियों को मतगणना और आगे की राजनीतिक प्रक्रिया तक साथ रखना चाहती है।
भीलवाड़ा में कांग्रेस ने 53 वार्डों में अधिकृत प्रत्याशी उतारे थे। उनके पास अभी तक पार्टी पदाधिकारियों की ओर से कोई फोन नहीं आया था। शहर में 154 निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में हैं। इनमें से कुछ भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवारों को सीधी टक्कर दे रहे हैं।
महवा में निर्दलीय भी सक्रिय
दौसा जिले की महवा नगर पालिका में वोटिंग खत्म होते ही कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी शुरू हो गई। मतदान के बाद भाजपा के 35 प्रत्याशियों को महवा विधायक राजेंद्र मीणा बस में बैठाकर जयपुर ले गए।
कांग्रेस उम्मीदवारों को हिंडौन रोड स्थित एक निजी होटल में बुलाया गया। पार्टी प्रत्याशियों को एकजुट रखने के साथ अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर आगे की रणनीति पर नजर रख रही है।
महवा में निर्दलीय प्रत्याशी भी पीछे नहीं रहे। पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष विजय बोहरा 22 निर्दलीय उम्मीदवारों को लेकर दिल्ली की ओर रवाना हो गए। इससे साफ है कि निकाय चुनाव में निर्दलीय भी अध्यक्ष पद की गणित में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अध्यक्ष पद की गणित सबसे अहम
निकाय चुनाव में मतदान खत्म होना अंतिम पड़ाव नहीं होता। असली राजनीतिक जोड़-तोड़ कई बार परिणाम आने के बाद तेज होती है। पार्षदों के बहुमत से नगर पालिका, नगर परिषद या नगर निगम में अध्यक्ष, सभापति या महापौर की कुर्सी तय होती है।
यही कारण है कि वोटिंग खत्म होते ही पार्टियों ने प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने और संपर्क में बनाए रखने की रणनीति शुरू कर दी। जहां मुकाबला नजदीकी है, वहां एक-एक पार्षद की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
आम मतदाता के लिए अब अगला बड़ा सवाल यही है कि उसके वार्ड से कौन जीतेगा और फिर शहर की कमान किसके हाथ जाएगी। बाड़ेबंदी की यह हलचल बताती है कि राजस्थान निकाय चुनाव में असली राजनीतिक खेल मतदान के बाद भी जारी है।
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