DA Hike 2026: दिवाली से पहले बढ़ा महंगाई भत्ता, 63% हुआ DA, जानें किसे कितना फायदा
पिछले महीनों यानी जुलाई, अगस्त और सितंबर का बकाया एरियर भी दिवाली से पहले कर्मचारियों और पेंशनर्स के खाते में भेजा जाएगा। इससे त्योहारी सीजन में उनकी जेब में एकमुश्त ज्यादा रकम आने की उम्मीद है।

DA Hike 2026 के ऐलान से केंद्र सरकार के 48 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनर्स की दिवाली थोड़ी और रोशन हो गई है। सरकार ने त्योहार से ठीक 10 दिन पहले उनके महंगाई भत्ते में 3 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। ताजा बढ़ोतरी के बाद कर्मचारियों और पेंशनर्स का महंगाई भत्ता यानी DA 63 फीसदी हो जाएगा, और सरकार इस पर करीब 10 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी।
बुधवार को कैबिनेट ने दी नई दरों को मंजूरी
बुधवार 28 अक्टूबर को केंद्रीय कैबिनेट ने महंगाई भत्ते की नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू करने को मंजूरी दे दी। चूंकि यह फैसला जुलाई से प्रभावी माना जाएगा, इसलिए पिछले महीनों यानी जुलाई, अगस्त और सितंबर का बकाया एरियर भी दिवाली से पहले कर्मचारियों और पेंशनर्स के खाते में भेजा जाएगा। इससे त्योहारी सीजन में उनकी जेब में एकमुश्त ज्यादा रकम आने की उम्मीद है।
अप्रैल में DA 2 फीसदी बढ़ाया गया था, अब पहुंचेगा 63 फीसदी पर
इससे पहले अप्रैल में सरकार ने महंगाई भत्ते में 2 फीसदी की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद DA 60 फीसदी पर पहुंच गया था। अब ताजा 3 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद यह आंकड़ा 63 फीसदी हो जाएगा। केंद्र सरकार हर साल कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए DA और DR में दो बार संशोधन करती है, पहला संशोधन आमतौर पर जनवरी से और दूसरा जुलाई से प्रभावी होता है।
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इन कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा सीधा फायदा
महंगाई भत्ते की यह बढ़ोतरी केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में काम करने वाले सभी कर्मचारियों पर लागू होगी, जिसमें रेलवे, रक्षा मंत्रालय और डाक विभाग जैसे बड़े विभागों के कर्मचारी भी शामिल हैं। इसके साथ ही रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी, रक्षा पेंशनर्स और परिवार पेंशन पाने वाले लोग भी DR बढ़ोतरी के दायरे में आएंगे। आमतौर पर राज्य सरकारें भी केंद्र के फैसले के बाद अपने यहां कार्यरत कर्मचारियों के लिए अलग से महंगाई भत्ता संशोधन का ऐलान करती हैं, हालांकि राज्यों में यह बढ़ोतरी अलग-अलग समय पर और अलग-अलग दर से लागू होती है।
मिनिमम बेसिक सैलरी वालों को हर महीने मिलेंगे 540 रुपए ज्यादा
DA बढ़ने से सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी कर्मचारी की बेसिक पे के आधार पर तय होती है। अगर किसी कर्मचारी की बेसिक पे 18 हजार रुपए है, तो 3 फीसदी की बढ़ोतरी के हिसाब से उसकी सैलरी में हर महीने 540 रुपए का इजाफा होगा। यह न्यूनतम बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है, क्योंकि छोटे वेतन वालों के लिए हर महीने मिलने वाली यह अतिरिक्त रकम घर के बजट में फर्क डालती है।
हायर पे-स्केल वालों की सैलरी में होगी 1683 रुपए तक की बढ़ोतरी
वहीं वरिष्ठ अधिकारियों और हायर पे-स्केल वाले कर्मचारियों को इस बढ़ोतरी का ज्यादा बड़ा फायदा मिलेगा। अगर किसी वरिष्ठ अधिकारी की बेसिक सैलरी 56,100 रुपए है, तो उनकी मासिक सैलरी में करीब 1,683 रुपए की सीधी बढ़ोतरी होगी। यानी जितनी ज्यादा बेसिक पे, DA बढ़ने का फायदा भी उतना ही ज्यादा मिलेगा, क्योंकि यह बढ़ोतरी प्रतिशत के आधार पर तय होती है।
जुलाई से सितंबर तक का एरियर भी मिलेगा आगामी सैलरी के साथ
चूंकि यह फैसला जुलाई 2026 से प्रभावी माना जा रहा है, इसलिए कर्मचारियों और पेंशनर्स को जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने का बकाया यानी एरियर भी आगामी सैलरी के साथ दिया जाएगा। इसका मतलब है कि दिवाली के आसपास कर्मचारियों के खाते में सिर्फ बढ़ी हुई सैलरी ही नहीं, बल्कि पिछले तीन महीनों का जमा हुआ अतिरिक्त पैसा भी एक साथ आएगा, जिससे त्योहारी खर्च के लिए अतिरिक्त राहत मिलेगी।
DA 50% पार करने के बाद जुड़ चुके हैं कई भत्ते
महंगाई भत्ता जब 50 फीसदी के आंकड़े को पार कर जाता है, तो नियमों के मुताबिक कई दूसरे भत्तों में भी अपने आप बढ़ोतरी हो जाती है, जैसे मकान किराया भत्ता यानी HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और चाइल्ड एजुकेशन अलाउंस।
चूंकि DA पहले ही 50 फीसदी का आंकड़ा पार कर चुका है, इसलिए मौजूदा बढ़ोतरी के बाद कर्मचारियों को DA के साथ-साथ इन जुड़े हुए भत्तों का भी अप्रत्यक्ष फायदा मिलता रहेगा। यही वजह है कि DA में हर बार होने वाली बढ़ोतरी का असर सिर्फ एक अलाउंस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कुल सैलरी ढांचे पर पड़ता है।
AICPI-IW के आंकड़ों के आधार पर तय होती है भत्ते की बढ़ोतरी
सरकार ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी AICPI-IW के आंकड़ों के आधार पर महंगाई का आकलन करती है, और उसी अनुपात में DA व DR बढ़ाने का फैसला लेती है।
यह इंडेक्स बाजार में रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में होने वाले बदलाव को दर्शाता है, और इसी के आधार पर तय होता है कि अगली बार भत्ते में कितने फीसदी की बढ़ोतरी की जाए। यही वजह है कि हर बार DA बढ़ोतरी का प्रतिशत अलग-अलग रहता है, जो पिछले कुछ महीनों की महंगाई दर पर निर्भर करता है।
DA और DR में क्या है फर्क, जानें पूरा गणित
DA यानी महंगाई भत्ता कार्यरत सरकारी कर्मचारियों के रहन-सहन के खर्च को संतुलित करने के लिए दिया जाने वाला अलाउंस है, जो कर्मचारी की बेसिक सैलरी के प्रतिशत के रूप में तय होता है। वहीं DR यानी महंगाई राहत रिटायर्ड कर्मचारियों यानी पेंशनर्स को उनकी बेसिक पेंशन पर दी जाती है।
दोनों का मुख्य उद्देश्य एक जैसा ही है, यानी रोजमर्रा की चीजों के बढ़ते दामों के असर को कम करना, फर्क सिर्फ इतना है कि DA कार्यरत कर्मचारियों को मिलता है और DR रिटायर्ड पेंशनर्स को। EPFO से जुड़ी पेंशन राहत वाली खबरों के साथ देखें तो साफ है कि सरकार लगातार पेंशनर्स के हित में कदम उठा रही है।
8वें वेतन आयोग को लेकर भी बनी हुई है उम्मीद
मौजूदा DA बढ़ोतरी के साथ ही कर्मचारी संगठनों में 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि 7वें वेतन आयोग को लागू हुए काफी समय बीत चुका है। कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि अगला वेतन आयोग लागू होने पर बेसिक पे और भत्तों के पूरे ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर DA की गणना पर भी पड़ेगा।
हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक अगले वेतन आयोग को लेकर कोई आधिकारिक समयसीमा तय नहीं की गई है, इसलिए फिलहाल कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए DA बढ़ोतरी ही सबसे बड़ी राहत मानी जा रही है।
DA बढ़ोतरी के साथ बोनस को लेकर भी रहती है उम्मीद
हर साल दिवाली के आसपास DA बढ़ोतरी के साथ-साथ कई सरकारी कर्मचारी संगठन नॉन-गजेटेड कर्मचारियों के लिए एडहॉक बोनस की भी मांग करते हैं, जो आमतौर पर एक तय सीमा तक की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों को त्योहार से पहले दिया जाता है।
हालांकि मौजूदा घोषणा में सिर्फ DA और DR बढ़ोतरी को ही मंजूरी दी गई है, बोनस को लेकर फिलहाल कोई अलग ऐलान नहीं हुआ है। बीते वर्षों के ट्रेंड को देखते हुए कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस पर भी कोई फैसला लिया जा सकता है, जिससे त्योहारी सीजन में कर्मचारियों को एक और राहत मिल सकती है।
त्योहारी सीजन में सरकारी कर्मचारियों को मिलेगी दोहरी राहत
दिवाली से ठीक पहले आई इस DA बढ़ोतरी को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए दोहरी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि एक तरफ उनकी नियमित सैलरी और पेंशन में इजाफा होगा, तो दूसरी तरफ पिछले तीन महीनों का एरियर भी एकमुश्त मिलेगा।
करीब 1.16 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा फायदा पहुंचाने वाले इस फैसले पर सरकार के कुल खर्च का आंकड़ा 10 हजार करोड़ रुपए के आसपास बताया जा रहा है, जो इस बात का संकेत है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर असर डालने वाली है।
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