नामांकन की आखिरी तारीख से पहले कांग्रेस में बहस, BJP में बगावत
कांग्रेस ने करीब 90 फीसदी विधानसभा क्षेत्रों में ‘जिताऊ और टिकाऊ’ फॉर्मूले पर टिकट तय कर लिए हैं, लेकिन भीलवाड़ा के टिकटों को लेकर हुई बैठक में पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए।

राजस्थान में निकाय चुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 31 अगस्त है। इससे ठीक पहले कांग्रेस और BJP दोनों में टिकट को लेकर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने करीब 90 फीसदी विधानसभा क्षेत्रों में ‘जिताऊ और टिकाऊ’ फॉर्मूले पर टिकट तय कर लिए हैं, लेकिन भीलवाड़ा के टिकटों को लेकर हुई बैठक में पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए।
दूसरी तरफ BJP भी प्रत्याशी चयन में जुटी है। पार्टी ने कई संभागों के निकायों के लिए उम्मीदवार तय कर लिए हैं, लेकिन अजमेर, दौसा और पाली से आई राजनीतिक हलचल ने चुनाव से पहले समीकरण बदल दिए हैं। अब सबकी नजर 31 अगस्त को होने वाले नामांकन पर है।
कांग्रेस बैठक में खुला विवाद
कांग्रेस वॉर रूम में भीलवाड़ा के शहरी निकायों के टिकटों को लेकर बैठक चल रही थी। इसी दौरान पूर्व मंत्री रामलाल जाट और पूर्व विधायक धीरज गुर्जर के बीच तीखी बहस हो गई।
दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर काफी देर तक चला। विवाद इतना बढ़ा कि प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को बीचबचाव करना पड़ा।
बैठक शुरू होते ही दोनों नेताओं के बीच तनातनी की स्थिति बन गई थी। दोनों ने एक-दूसरे के साथ बैठक तक से इनकार कर दिया। बहस बढ़ने पर रामलाल जाट ने धीरज गुर्जर पर गंभीर आरोप लगाए। इसके जवाब में धीरज गुर्जर ने भी पलटवार किया।
गहलोत-पायलट खेमों की पृष्ठभूमि
रामलाल जाट को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का समर्थक माना जाता है। धीरज गुर्जर सचिन पायलट के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। भीलवाड़ा कांग्रेस की स्थानीय राजनीति में दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से मतभेद की चर्चा रही है।
निकाय चुनाव में टिकट वितरण के समय यह पुराना तनाव फिर सामने आ गया। कांग्रेस के लिए चुनौती सिर्फ प्रत्याशी तय करने की नहीं है, बल्कि टिकट कटने के बाद संभावित बगावत रोकने की भी है।
पार्टी ने ‘जिताऊ और टिकाऊ’ फॉर्मूले पर टिकट तय करने की रणनीति बनाई है। इसका मकसद ऐसे प्रत्याशी उतारना है, जो स्थानीय स्तर पर चुनाव लड़ सकें और पार्टी लाइन पर बने रहें।
BJP में भी बगावत के संकेत
BJP में भी निकाय चुनाव से पहले सब कुछ शांत नहीं है। अजमेर में पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत के इस्तीफे के बीच दौसा के लालसोट से बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया।
लालसोट में BJP के पूर्व वाइस चेयरमैन पुरुषोत्तम जोशी और BJP नेता दिनेश जोशी ने पार्टी छोड़कर कांग्रेस जॉइन कर ली। दोनों भाइयों के कांग्रेस में जाने के बाद स्थानीय चुनावी समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है।
पाली में भी BJP को झटका लगा। पांच बार के पार्षद राकेश भाटी कांग्रेस में शामिल हो गए। निकाय चुनाव से ठीक पहले ऐसे बदलाव दोनों दलों के लिए स्थानीय स्तर पर असर डाल सकते हैं।
BJP प्रत्याशियों पर महामंथन
BJP ने पिछले तीन दिनों में अजमेर, उदयपुर और बीकानेर के बाद कोटा और जोधपुर संभाग के सभी निकायों पर प्रत्याशी तय कर लिए हैं। भरतपुर और जयपुर संभाग के प्रत्याशियों के नाम अभी तय होने बाकी हैं।
जयपुर नगर निगम के सिविल लाइन क्षेत्र के वार्डों को लेकर भी चर्चा तेज रही। कुछ कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि सिविल लाइन विधायक गोपाल शर्मा ने अपने स्तर पर 16 प्रत्याशी तय कर दिए और उन्हें माला पहना दी।
इस बीच यह चर्चा भी चली कि पार्टी लाइन से अलग जाने पर विधायक को कारण बताओ नोटिस दिया जा सकता है। हालांकि BJP के राष्ट्रीय महामंत्री और प्रदेश निकाय चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी ने ऐसे किसी घटनाक्रम से इनकार किया।
हरीश द्विवेदी ने विरोध से किया इनकार
हरीश द्विवेदी ने कहा कि पार्टी ने अभी किसी प्रकार की घोषणा नहीं की है। जब उनसे पूछा गया कि क्या किसी विधायक को नोटिस जारी हुआ है, तो उन्होंने कहा कि नोटिस अनुशासनहीनता पर होता है और अनुशासनहीनता 31 अगस्त के बाद होगी।
उन्होंने कहा कि अभी पार्टी ने कोई घोषणा ही नहीं की है, इसलिए अनुशासनहीनता का सवाल नहीं उठता। किसी को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है।
द्विवेदी ने यह भी कहा कि अब तक किसी प्रकार का विरोध सामने नहीं आया है। उनके अनुसार 31 अगस्त को नामांकन प्रक्रिया में BJP के 10 हजार से ज्यादा उम्मीदवार अपना नामांकन भरेंगे।
31 अगस्त की तारीख क्यों अहम
निकाय चुनाव में नामांकन की आखिरी तारीख 31 अगस्त है। इसलिए टिकट वितरण, प्रत्याशी चयन और बगावत रोकने के लिए दोनों पार्टियों के पास बहुत कम समय बचा है।
कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान दिखी है। BJP में प्रत्याशी चयन के बीच नेताओं के पार्टी बदलने की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में आखिरी दिन नामांकन के दौरान बागी उम्मीदवारों पर भी नजर रहेगी।
स्थानीय निकाय चुनाव में प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़, जातीय समीकरण, वार्ड स्तर का नेटवर्क और पार्टी संगठन की भूमिका बहुत अहम होती है। इसलिए टिकट बंटवारे के बाद दोनों दलों को नाराज नेताओं को साधना पड़ेगा।
मतदाताओं के लिए आने वाले 24 घंटे यह साफ करेंगे कि उनके वार्ड में कांग्रेस, BJP और संभावित बागी चेहरे कौन होंगे। यही नाम आगे स्थानीय चुनावी मुकाबले की दिशा तय करेंगे।
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