बिना इंश्योरेंस अब पेट्रोल-डीजल पर रोक, पंप पर कैमरे स्कैन करेंगे नंबर प्लेट
गाड़ी का इंश्योरेंस खत्म हो चुका है और आप उसे रिन्यू कराना टाल रहे हैं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल पंप पर परेशानी हो सकती है। सरकार बिना वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाली गाड़ियों पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है। इसके लिए नो इंश्योरेंस नो फ्यूल व्यवस्था का ट्रायल शुरू होगा।

No Insurance No Fuel नियम लागू होने के बाद बिना वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा। पेट्रोल पंप पर कैमरे वाहन की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे और सिस्टम बीमा स्टेटस जांचेगा। ट्रायल कुछ शहरों से शुरू होगा। इसका मकसद बिना बीमा चल रही गाड़ियों पर रोक लगाना और सड़क हादसे के पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की व्यवस्था मजबूत करना है।
गाड़ी का इंश्योरेंस खत्म हो चुका है और आप उसे रिन्यू कराना टाल रहे हैं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल पंप पर परेशानी हो सकती है। सरकार बिना वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाली गाड़ियों पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है। इसके लिए No Insurance No Fuel व्यवस्था का ट्रायल शुरू होगा।
इस व्यवस्था में पेट्रोल पंप पर लगे कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे। इसके बाद सिस्टम वाहन का इंश्योरेंस स्टेटस चेक करेगा। अगर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वैलिड नहीं मिला, तो पंप पर पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बीमा नियामक IRDAI कुछ शहरों में इस व्यवस्था का ट्रायल शुरू करेगा। शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी। इसका उद्देश्य यह जांचना है कि फ्यूल भरवाते समय वाहन का बीमा तुरंत और सही तरीके से चेक हो सकता है या नहीं।
पंप पर नंबर प्लेट स्कैनिंग
नई व्यवस्था में वाहन चालक को पेट्रोल पंप पर कोई अलग कागज दिखाने की जरूरत नहीं होगी। गाड़ी की नंबर प्लेट ही जांच का आधार बनेगी।
पंप पर लगे कैमरे वाहन की रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट स्कैन करेंगे। इसके बाद सिस्टम उस वाहन का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस स्टेटस जांचेगा। अगर बीमा वैलिड मिला, तो फ्यूल सामान्य तरीके से मिलेगा। अगर बीमा नहीं मिला या पॉलिसी खत्म हो चुकी है, तो फ्यूल देने से मना किया जा सकता है।
No Insurance No Fuel मॉडल में पेट्रोल पंपों को वाहन बीमा डेटा से जोड़ा जाएगा। यह सिस्टम वाहन डेटाबेस और इंश्योरेंस रिकॉर्ड के आधार पर काम करेगा। इससे बिना बीमा चल रही गाड़ियों की पहचान आसान हो सकती है।
वाहन मालिकों के लिए इसका सीधा मतलब है कि गाड़ी का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस समय पर रिन्यू रखना जरूरी होगा। अभी कई लोग बीमा खत्म होने के बाद भी वाहन चलाते रहते हैं। नई व्यवस्था में ऐसा करना रोजमर्रा की जरूरत, यानी फ्यूल भरवाने तक को प्रभावित कर सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने 4 अगस्त को केंद्र सरकार को दिल्ली से पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया था। इस प्रोजेक्ट के तहत पेट्रोल पंपों को गाड़ियों के वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस से जोड़ा जाएगा।
अगर किसी वाहन का बीमा वैलिड नहीं पाया जाता, तो पेट्रोल पंप पर उसे फ्यूल नहीं दिया जाएगा। वाहन मालिक को पहले बीमा कराना होगा। इसके बाद ही वह गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवा सकेगा।
यह कदम इसलिए अहम है, क्योंकि भारत में थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस कानूनन अनिवार्य है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में वाहन मालिक इंश्योरेंस रिन्यू नहीं कराते। इससे सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए मुआवजा पाना मुश्किल हो जाता है।
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस जरूरी कवर
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाहन मालिक के लिए कानूनी जरूरत है। मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 146 के तहत हर वाहन का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होना अनिवार्य है।
यह बीमा आपकी अपनी गाड़ी के नुकसान को कवर नहीं करता। इसका काम किसी दूसरे व्यक्ति, उसकी गाड़ी या संपत्ति को आपकी गाड़ी से हुए नुकसान की भरपाई करना है। इसलिए इसे सड़क हादसों में पीड़ित पक्ष की आर्थिक सुरक्षा से जोड़ा जाता है।
No Insurance No Fuel व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य इसी नियम का पालन सख्ती से करवाना है। अगर वाहन का बीमा नहीं है और हादसा हो जाता है, तो पीड़ित या उसके परिवार को मुआवजे के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ सकती है।
खासकर उन मामलों में स्थिति गंभीर हो जाती है, जहां हादसे में परिवार का कमाने वाला सदस्य घायल, दिव्यांग या मृत हो जाता है। वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होने से ऐसे मामलों में मुआवजा प्रक्रिया अपेक्षाकृत व्यवस्थित हो सकती है।
नई गाड़ियों के बीमा नियम
नई गाड़ियों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अनिवार्य अवधि भी बढ़ाई गई है। कारों के लिए पहले 3 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस जरूरी था। अब नई कार के रजिस्ट्रेशन के समय 4 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना होगा।
नई बाइक और स्कूटी के लिए पहले 5 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य था। अब यह अवधि 6 साल कर दी गई है।
2018 में कारों के लिए 3 साल और बाइक्स के लिए 5 साल का नियम लागू हुआ था। इसके बावजूद करोड़ों वाहन बिना बीमा के चलते रहे। इसी कारण अनिवार्य बीमा अवधि बढ़ाने और फ्यूल से जोड़ने जैसे कदम सामने आए हैं।
वाहन मालिकों को यह ध्यान रखना होगा कि थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस और ओन-डैमेज कवर अलग-अलग होते हैं। थर्ड-पार्टी कवर कानूनी रूप से जरूरी है। ओन-डैमेज कवर अपनी गाड़ी के नुकसान के लिए लिया जाता है।
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पुलिस चेकिंग का नया सिस्टम
सड़क पर चेकिंग के दौरान पुलिस भी बीमा स्टेटस तुरंत जांच सकेगी। अभी राज्यों की पुलिस के पास मौके पर इंश्योरेंस चेक करने का एक समान सिस्टम नहीं है।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि राज्य पुलिस को हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल ऐप दिए जाएं। ये डिवाइस VAHAN पोर्टल और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के डेटाबेस से जुड़े होंगे।
इससे पुलिस वाहन का रियल-टाइम बीमा स्टेटस चेक कर सकेगी। अगर गाड़ी बिना वैलिड इंश्योरेंस के मिलेगी, तो ई-चालान काटा जा सकेगा।
इस सिस्टम से No Insurance No Fuel व्यवस्था केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगी। सड़क पर जांच और डिजिटल रिकॉर्ड मिलकर बिना बीमा वाहनों पर नियंत्रण मजबूत कर सकते हैं।
वाहन मालिकों को पॉलिसी विकल्प
सुप्रीम कोर्ट ने IRDA को यह भी निर्देश दिया है कि प्राइवेट वाहन मालिकों को अलग-अलग पॉलिसी विकल्प उपलब्ध कराए जाएं। इसका उद्देश्य यह है कि लोग अपनी जरूरत के अनुसार बीमा चुन सकें।
बेस थर्ड-पार्टी कवर के साथ पर्सनल एक्सीडेंट कवर, एड-ऑन और ओन-डैमेज कवर जैसे विकल्प मिलने चाहिए। इससे वाहन मालिक केवल न्यूनतम कानूनी जरूरत तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी सुरक्षा के हिसाब से कवर चुन सकें।
बीमा कंपनियों के लिए भी यह व्यवस्था बड़ा बदलाव ला सकती है। अगर नियम सख्ती से लागू हुआ, तो मोटर इंश्योरेंस सेगमेंट में प्रीमियम कलेक्शन बढ़ सकता है।
वित्तवर्ष 2026 में देश की टॉप-5 मोटर इंश्योरेंस कंपनियों—ICICI लोम्बार्ड, न्यू इंडिया एश्योरेंस, टाटा AIG, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस और बजाज जनरल—ने मोटर प्रीमियम के रूप में करीब ₹48,400 करोड़ जुटाए। यह कुल सेगमेंट का लगभग 45% हिस्सा था।
इंश्योरेंस सेक्टर पर असर
इस नियम से बीमा बाजार में मांग बढ़ सकती है। खासकर वे वाहन मालिक, जो अभी तक थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस रिन्यू नहीं कराते थे, उन्हें पॉलिसी लेनी पड़ेगी।
हालांकि असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने वाहन मालिक केवल थर्ड-पार्टी बीमा लेते हैं और कितने लोग ओन-डैमेज या एड-ऑन कवर भी चुनते हैं। अगर लोग बेहतर कवर चुनते हैं, तो जनरल इंश्योरेंस कंपनियों का प्रीमियम कलेक्शन और बढ़ सकता है।
यह व्यवस्था बीमा कंपनियों के लिए अवसर है, लेकिन वाहन मालिकों के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी भी है। बीमा खत्म होने की तारीख पर नजर रखना अब ज्यादा जरूरी हो जाएगा।
फ्यूल भरवाने से पहले इंश्योरेंस स्टेटस जांचना आने वाले समय में सामान्य आदत बन सकती है।
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आम लोगों के लिए अगला कदम क्या?
वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस तुरंत जांच लेना चाहिए। अगर पॉलिसी खत्म हो चुकी है, तो उसे रिन्यू कराना जरूरी है।
फिलहाल व्यवस्था ट्रायल के रूप में शुरू होगी। कुछ शहरों में पायलट प्रोजेक्ट के बाद इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। ट्रायल से यह साफ होगा कि पेट्रोल पंप पर नंबर प्लेट स्कैनिंग, बीमा स्टेटस जांच और फ्यूल रोकने की प्रक्रिया व्यावहारिक रूप से कितनी सफल रहती है।
आने वाले दिनों में वाहन मालिकों के लिए इंश्योरेंस केवल चालान से बचने का दस्तावेज नहीं रहेगा। यह पेट्रोल-डीजल भरवाने, सड़क पर जांच और हादसे में जिम्मेदारी तय करने से सीधे जुड़ जाएगा।
FAQs
प्रश्न 1: No Insurance No Fuel नियम क्या है?
उत्तर: इस व्यवस्था में बिना वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल पंप पर फ्यूल नहीं दिया जाएगा।
प्रश्न 2: पेट्रोल पंप पर बीमा कैसे चेक होगा?
उत्तर: पंप पर कैमरे नंबर प्लेट स्कैन करेंगे और सिस्टम वाहन का इंश्योरेंस स्टेटस जांचेगा।
प्रश्न 3: इस नियम का ट्रायल कौन शुरू करेगा?
उत्तर: बीमा नियामक IRDAI कुछ शहरों में इस व्यवस्था का ट्रायल शुरू करेगा।
प्रश्न 4: थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस क्या होता है?
उत्तर: यह बीमा आपकी गाड़ी से किसी दूसरे व्यक्ति, वाहन या संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई करता है।
प्रश्न 5: क्या भारत में थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस जरूरी है?
उत्तर: हां, मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 146 के तहत हर वाहन का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कानूनी रूप से जरूरी है।
प्रश्न 6: नई कार के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कितने साल का होगा?
उत्तर: नई कार के लिए अब 4 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य होगा।
प्रश्न 7: नई बाइक या स्कूटी के लिए बीमा अवधि कितनी होगी?
उत्तर: नई बाइक या स्कूटी के लिए अब 6 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना जरूरी होगा।
प्रश्न 8: पुलिस सड़क पर इंश्योरेंस कैसे चेक करेगी?
उत्तर: पुलिस को VAHAN और इंश्योरेंस डेटाबेस से जुड़े हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल ऐप दिए जाएंगे।
प्रश्न 9: बिना बीमा वाहन चलाने से क्या नुकसान है?
उत्तर: हादसे में पीड़ितों को मुआवजा मिलने में देरी हो सकती है और वाहन मालिक पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
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