जयपुर नगर निगम में BJP बोर्ड, पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल की हार से बदली मेयर पद की गणित
सबसे बड़ा उलटफेर पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल की हार के रूप में सामने आया है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आईं ज्योति खंडेलवाल को मेयर पद की मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन वे अपने हर बूथ पर पिछड़ गईं। वहीं 7 वार्डों के परिणाम EVM में तकनीकी खराबी के कारण होल्ड किए गए हैं।

जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों की काउंटिंग में भाजपा बोर्ड बन गया है। अब तक BJP ने 78 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस 50 सीटों पर जीत चुकी है। निर्दलीयों के खाते में 14 सीटें गई हैं। 150 वार्डों वाले नगर निगम में बोर्ड बनाने के लिए 76 सीटों की जरूरत थी।
Jaipur Nagar Nigam Result में सबसे बड़ा उलटफेर पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल की हार के रूप में सामने आया है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आईं ज्योति खंडेलवाल को मेयर पद की मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन वे अपने हर बूथ पर पिछड़ गईं। वहीं 7 वार्डों के परिणाम EVM में तकनीकी खराबी के कारण होल्ड किए गए हैं।
BJP बहुमत के करीब
जयपुर नगर निगम में भाजपा 68 सीटों पर जीत के साथ बोर्ड बनाने की दौड़ में आगे दिख रही है। बहुमत के लिए 76 सीटों की जरूरत है। ऐसे में पार्टी को अब बाकी नतीजों और संभावित समर्थन पर नजर रखनी होगी।
कांग्रेस ने अब तक 50 सीटों पर जीत दर्ज की है। निर्दलीय प्रत्याशी 14 सीटों पर सफल रहे हैं। यह आंकड़ा बताता है कि कई वार्डों में स्थानीय चेहरों ने भी मजबूत असर दिखाया है।
काउंटिंग जारी रहने के कारण अंतिम तस्वीर सभी वार्डों के परिणाम साफ होने के बाद ही बनेगी। फिलहाल भाजपा को बढ़त मिली है, लेकिन बोर्ड गठन की असली गणित अंतिम सीटों और निर्दलीयों की भूमिका से तय हो सकती है।
ज्योति खंडेलवाल की हार बड़ा झटका
जयपुर नगर निगम चुनाव में पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल की हार भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका मानी जा रही है। वे कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुई थीं और इस चुनाव में उन्हें मेयर पद की संभावित दावेदारों में गिना जा रहा था।
उनकी हार इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि वे अपने हर बूथ पर पीछे रहीं। यह नतीजा भाजपा के स्थानीय समीकरणों और टिकट चयन पर सवाल खड़े कर सकता है।
ज्योति खंडेलवाल की उम्मीदवारी को लेकर पहले से अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं थीं। उनकी हार के बाद भाजपा के मेयर चेहरे की गणित बदल गई है। अब पार्टी को नए समीकरणों के आधार पर आगे की रणनीति तय करनी होगी।
7 वार्डों के नतीजे होल्ड
जयपुर नगर निगम के 7 वार्डों के परिणाम होल्ड किए गए हैं। इन वार्डों की EVM में तकनीकी खराबी सामने आई है। जिन वार्डों के नतीजे रोके गए हैं, उनमें वार्ड 148, 72, 47, 34, 25, 9 और 18 शामिल हैं।
अगर EVM सही नहीं होती और वोट रिकवर नहीं हो पाते, तो इन वार्डों में री-पोलिंग की स्थिति बन सकती है। हालांकि री-पोलिंग तभी होगी, जब जीत के निकट प्रत्याशी का वोट अंतर EVM में बंद वोटों से ज्यादा नहीं होगा।
अगर निकटतम मुकाबले में वोटों का अंतर खराब EVM में मौजूद वोटों से ज्यादा निकला, तो री-पोलिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐसे में इन 7 वार्डों पर निर्वाचन प्रक्रिया की आगे की कार्रवाई अहम होगी।
काउंटिंग सेंटर पर 150 टेबल
जयपुर नगर निगम की मतगणना सीकर रोड स्थित भवानी निकेतन परिसर के फार्मेसी कॉलेज में हो रही है। सबसे पहले बैलेट पेपर की गणना हुई। काउंटिंग के लिए निर्वाचन शाखा ने 15 कक्ष रिजर्व किए हैं।
इन कक्षों में 150 टेबल लगाई गई हैं, ताकि वार्डवार मतगणना तेजी से पूरी की जा सके। काउंटिंग सेंटर पर प्रत्याशियों, एजेंटों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में परिणामों की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
EVM खराबी वाले वार्डों को छोड़कर बाकी वार्डों में परिणाम लगातार सामने आ रहे हैं। जैसे-जैसे सीटों की संख्या स्पष्ट हो रही है, वैसे-वैसे बोर्ड गठन की तस्वीर भी साफ होती जा रही है।
निर्दलीयों की भूमिका अहम
जयपुर नगर निगम में 14 निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत बोर्ड गठन के बाद की राजनीति में महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर किसी दल को स्पष्ट बहुमत से कम सीट मिलती है, तो निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बढ़ जाएगी।
भाजपा फिलहाल बहुमत के करीब है। फिर भी 76 सीटों का आंकड़ा पार करना जरूरी है। होल्ड वार्डों और बाकी परिणामों के बाद ही तय होगा कि पार्टी अपने दम पर बोर्ड बनाती है या समर्थन की जरूरत पड़ती है।
कांग्रेस के लिए चुनौती सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ निर्दलीयों से राजनीतिक संवाद बनाने की भी रहेगी। जयपुर जैसे बड़े नगर निगम में मेयर पद का चुनाव केवल पार्टी सीटों से नहीं, बल्कि अंदरूनी एकजुटता से भी तय होता है।
मेयर पद की नई गणित
ज्योति खंडेलवाल की हार ने भाजपा के भीतर मेयर पद की दौड़ को नया मोड़ दे दिया है। उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन हार के बाद पार्टी को नया चेहरा आगे लाना होगा।
यह नतीजा भाजपा के लिए जीत के बीच चेतावनी जैसा है। पार्टी बोर्ड बनाने के करीब है, लेकिन बड़े चेहरे की हार स्थानीय असंतोष और वार्ड स्तर की राजनीति का संकेत देती है।
अब जयपुर नगर निगम के अंतिम परिणामों पर नजर रहेगी। 7 होल्ड वार्डों की स्थिति, निर्दलीयों का रुख और भाजपा-कांग्रेस की आगे की रणनीति तय करेगी कि शहर की सरकार किसके हाथ में जाएगी।
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