वीक्षक ही लिखवा रहे थे जवाब, CCTV से खुला जैसलमेर कॉलेज का नकल मामला
घटना जैसलमेर के श्री करणी कॉलेज कजोई की है। शनिवार सुबह 7 से 10 बजे की पारी में परीक्षा चल रही थी। इसी दौरान यूनिवर्सिटी की फ्लाइंग टीम सुबह करीब 9 बजे कॉलेज में निरीक्षण करने पहुंची।

Exam Cheating का बड़ा मामला जैसलमेर के निजी कॉलेज में सामने आया है। बीए सेकेंड ईयर के हिंदी साहित्य पेपर में वीक्षक ही छात्रों को बोल-बोलकर जवाब लिखवा रहे थे। जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी की फ्लाइंग स्क्वॉड टीम ने मौके पर 93 कॉपियां सील कीं और सामूहिक नकल का मामला दर्ज करवाया।
Exam Cheating का बड़ा मामला
जैसलमेर के एक निजी कॉलेज में परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। बीए सेकेंड ईयर के हिंदी साहित्य के पेपर में सामूहिक नकल पकड़ी गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एग्जाम रूम में मौजूद लेक्चरर यानी वीक्षक ही स्टूडेंट्स को सवालों के जवाब बोल-बोलकर लिखवा रहे थे।
जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी की फ्लाइंग स्क्वॉड टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। टीम ने 93 कॉपियां सील कीं और सामूहिक नकल का मामला दर्ज करवाया।
यह मामला सिर्फ एक परीक्षा केंद्र की गड़बड़ी नहीं है। यह परीक्षा की निष्पक्षता और कॉलेजों में निगरानी व्यवस्था पर सीधा सवाल है।
जैसलमेर कॉलेज में जरूरी कार्रवाई
घटना जैसलमेर के श्री करणी कॉलेज कजोई की है। शनिवार सुबह 7 से 10 बजे की पारी में परीक्षा चल रही थी। इसी दौरान यूनिवर्सिटी की फ्लाइंग टीम सुबह करीब 9 बजे कॉलेज में निरीक्षण करने पहुंची।
टीम में प्रोफेसर अमन सिंह, डॉ. सुरेश चौधरी, डॉ. ललित झाला और डॉ. गौरव जैन शामिल थे। निरीक्षण के दौरान एग्जाम रूम में गंभीर अनियमितता पकड़ी गई।
लेक्चरर जय करण और ओम प्रकाश छात्रों को सामूहिक रूप से सवालों के जवाब लिखवाते मिले। टीम ने तुरंत कॉपियों की जांच शुरू की। जांच में कई उत्तर लगभग समान पाए गए।
इससे नकल की आशंका और मजबूत हुई।
93 कॉपियां सील हुईं
फ्लाइंग स्क्वॉड ने परीक्षा कक्ष से 93 कॉपियां सील कर दीं। यह कार्रवाई सामूहिक नकल के आधार पर की गई।
कॉपियों की जांच में सामने आया कि छात्रों के उत्तरों में काफी समानता थी। यह सामान्य परीक्षा लेखन जैसा नहीं लगा। इसके बाद टीम ने मामले को गंभीर माना और पूरी प्रक्रिया दर्ज की।
Exam Cheating के इस मामले में कॉपियां सील होना अहम कदम है। इससे आगे की जांच में यह देखा जा सकेगा कि कितने परीक्षार्थियों के जवाब एक जैसे हैं और नकल किस स्तर पर कराई गई।
परीक्षा कक्ष में मौजूद वीक्षक की भूमिका भी जांच के केंद्र में आ गई है।
CCTV से असली पुष्टि
मामले की पुष्टि केवल कॉपियों की समानता से नहीं हुई। टीम ने CCTV फुटेज भी जांचे। फुटेज में लेक्चरर की ओर से परीक्षार्थियों को उत्तर डिक्टेट कर नकल करवाने की पुष्टि हुई।
यानी वीडियो में यह सामने आया कि छात्रों को बोल-बोलकर जवाब लिखवाए जा रहे थे। यही फुटेज कार्रवाई का महत्वपूर्ण आधार बना।
परीक्षा व्यवस्था में CCTV का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है। लेकिन इस मामले में उसी CCTV ने परीक्षा कक्ष के भीतर हो रही गड़बड़ी को सामने ला दिया।
यह दृश्य परीक्षा प्रणाली के लिए गंभीर चेतावनी है। जब निगरानी करने वाला ही नकल में शामिल दिखे, तो भरोसा सबसे पहले टूटता है।
वीक्षकों की भूमिका पर सवाल
किसी भी परीक्षा केंद्र में वीक्षक की जिम्मेदारी परीक्षा को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराना होती है। वह यह सुनिश्चित करता है कि कोई छात्र अनुचित साधन का उपयोग न करे।
जैसलमेर के इस मामले में आरोप उल्टा है। यहां वीक्षक ही स्टूडेंट्स को उत्तर लिखवाते मिले।
लेक्चरर जय करण और ओम प्रकाश की भूमिका इसलिए गंभीर मानी जा रही है। वे परीक्षा कक्ष में अनुशासन और निष्पक्षता के लिए मौजूद थे। लेकिन फ्लाइंग टीम ने उन्हें छात्रों को जवाब बताने की स्थिति में पाया।
Exam Cheating में जब जिम्मेदार व्यक्ति ही शामिल हो, तो कार्रवाई केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह सकती।
फ्लाइंग टीम का ग्राउंड इम्पैक्ट
जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी की फ्लाइंग टीम ने केवल एक केंद्र तक जांच सीमित नहीं रखी। टीम ने जैसलमेर शहर के साथ अनडू, फतेहगढ़, रामगढ़ और बाड़मेर जिले के शिव क्षेत्र में स्थित कॉलेजों के परीक्षा केंद्रों की भी जांच की।
फ्लाइंग टीम की सक्रियता से कई केंद्रों की परीक्षा व्यवस्था पर नजर रखी गई। कुछ निजी कॉलेजों में परीक्षा के दौरान गड़बड़ी पाई गई। इन केंद्रों की भी जांच जारी है।
बाड़मेर के शिव केंद्र पर भी नकल का एक मामला दर्ज किया गया।
यह कार्रवाई बताती है कि यूनिवर्सिटी अब परीक्षा केंद्रों की निगरानी को व्यापक स्तर पर देख रही है।
निजी कॉलेजों पर बढ़ी निगरानी
इस मामले के बाद निजी कॉलेजों की परीक्षा व्यवस्था पर खास नजर रहेगी। जहां गड़बड़ी मिली है, वहां आगे की जांच की जा रही है।
परीक्षा केंद्रों में नकल का मामला छात्रों के भविष्य से सीधे जुड़ा होता है। मेहनत करने वाले छात्र इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। अगर सामूहिक नकल होती है, तो परीक्षा की विश्वसनीयता कमजोर होती है।
निजी कॉलेजों में परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी और सख्त हो जाती है, क्योंकि वहां यूनिवर्सिटी की निगरानी टीम के पहुंचने तक केंद्र स्तर की व्यवस्था ही मुख्य नियंत्रण होती है।
जैसलमेर का मामला इसी नियंत्रण की परीक्षा बन गया है।
कुलगुरु का कड़ा संदेश
जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रो. पवन कुमार शर्मा ने परीक्षा पारदर्शिता पर स्पष्ट रुख जताया है। उन्होंने कहा कि परीक्षा की पारदर्शिता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जीरो टॉलरेंस नीति के तहत काम कर रहा है। नकल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
कुलगुरु ने कई परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण भी किया। उनका संदेश साफ है कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
Exam Cheating पर जीरो टॉलरेंस का यह रुख आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेगा।
छात्रों के भरोसे पर असर
किसी भी परीक्षा का आधार भरोसा होता है। छात्र महीनों तैयारी करते हैं। परिवार उम्मीद लगाते हैं। यूनिवर्सिटी डिग्री देती है। अगर परीक्षा कक्ष में नकल कराई जाती है, तो यह पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाती है।
जैसलमेर के मामले में 93 कॉपियां सील होना बड़ा कदम है। इससे उन छात्रों पर भी असर पड़ेगा, जो परीक्षा में मौजूद थे। जांच में यह तय होगा कि किसकी भूमिका क्या रही।
ऐसे मामले मेहनती छात्रों के मन में असमानता की भावना पैदा करते हैं। उन्हें लगता है कि ईमानदारी से परीक्षा देने का महत्व कम हो रहा है। यही शिक्षा व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा नुकसान है।
आगे जांच की दिशा
अब सील की गई 93 कॉपियों और CCTV फुटेज के आधार पर आगे की जांच होगी। यूनिवर्सिटी सामूहिक नकल के मामले में नियमों के अनुसार कार्रवाई आगे बढ़ाएगी।
जिन केंद्रों पर गड़बड़ी पाई गई है, वहां भी जांच जारी रहेगी। बाड़मेर के शिव केंद्र पर दर्ज नकल मामले को भी अलग से देखा जाएगा।
कुलगुरु के जीरो टॉलरेंस बयान के बाद परीक्षा केंद्रों पर निगरानी और सख्त हो सकती है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि छात्रों, वीक्षकों और संबंधित कॉलेज प्रशासन के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।
परीक्षा हॉल में भरोसा टूटे, तो केवल एक पेपर प्रभावित नहीं होता। पूरी व्यवस्था को खुद को फिर साबित करना पड़ता है।
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