TRAI का नया DCR प्लेटफॉर्म लॉन्च: घर-ऑफिस की नेटवर्क स्पीड और कनेक्टिविटी रेटिंग अब ऐसे करें चेक
ट्राई ने डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग यानी DCR प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप लॉन्च किया है, जिससे घर या ऑफिस खरीदने-किराए पर लेने से पहले वहां के मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट स्पीड और डिजिटल सुविधाओं की रेटिंग चेक की जा सकेगी।

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने शुक्रवार को अपना Digital Connectivity Rating Platform यानी DCR लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म और साथ आए मोबाइल एप के जरिए अब किसी भी इमारत में मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट स्पीड और डिजिटल सुविधाओं की रेटिंग चेक की जा सकेगी। ट्राई के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि रेटिंग को सार्वजनिक रूप से खोजने और सर्टिफिकेट वेरिफाई करने लायक बनाकर यह प्लेटफॉर्म उपभोक्ताओं को भरोसेमंद और तुलनीय जानकारी देगा।
क्या है पूरा मामला
इस रेटिंग के जरिए लोग किसी भी प्रॉपर्टी को खरीदने या किराए पर लेने से पहले वहां के मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट स्पीड और डिजिटल सुविधाओं का स्तर जांच सकेंगे। ट्राई के इस कदम से अब लोगों को घर या ऑफिस के अंदर कमजोर नेटवर्क और कॉल ड्रॉप जैसी परेशानियों से राहत मिल सकती है, जो शहरों की बहुमंजिला इमारतों में एक आम समस्या रही है।
यह पहल टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 के तहत बन रहे नियामकीय ढांचे का ही अगला हिस्सा मानी जा रही है, जिसके जरिए सरकार टेलीकॉम सेक्टर में पारदर्शिता और उपभोक्ता सुरक्षा बढ़ाने पर लगातार काम कर रही है।
अभी क्यों जरूरी है ऐसी रेटिंग
घर से काम करने और ऑनलाइन क्लासेज लेने का चलन बढ़ने के साथ ही तेज इंटरनेट और स्थिर मोबाइल नेटवर्क अब किसी भी घर या ऑफिस की बुनियादी जरूरत बन चुके हैं। वीडियो कॉल के बीच नेटवर्क कट जाना या इंटरनेट स्पीड अचानक धीमी हो जाना, इस तरह की शिकायतें अक्सर बड़े शहरों की बहुमंजिला इमारतों, बेसमेंट ऑफिस और नई कॉलोनियों में सुनने को मिलती हैं।
अभी तक प्रॉपर्टी खरीदते या किराए पर लेते समय लोकेशन, सुरक्षा और पार्किंग जैसी बातों की जानकारी तो आसानी से मिल जाती थी, लेकिन डिजिटल कनेक्टिविटी को लेकर कोई मानकीकृत और भरोसेमंद जानकारी उपलब्ध नहीं थी। ज्यादातर मामलों में लोगों को यह तभी पता चलता था जब वे शिफ्ट हो चुके होते थे। DCR प्लेटफॉर्म इसी कमी को पूरा करने की कोशिश है।
डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग की 5 बड़ी बातें
ट्राई का यह नया प्लेटफॉर्म इमारतों में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की स्थिति जांचने के लिए एक आसान, साफ-सुथरा और सबके लिए एक समान नियम देता है, जिससे उपभोक्ताओं को सही और भरोसेमंद जानकारी मिल सकेगी। इस पर मौजूद पब्लिक सर्च पेज पर कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रॉपर्टी या लोकेशन का नाम डालकर उसकी कनेक्टिविटी रेटिंग देख सकता है, और साथ मिले QR कोड व डिजिटल सर्टिफिकेट से उसकी सच्चाई भी परख सकता है।
नेटवर्क की ऑन-साइट जांच के लिए एक खास DCRA मोबाइल एप भी बनाया गया है, जिसके जरिए अधिकृत रेटिंग एजेंसियां इमारतों के अंदर जाकर नेटवर्क की मजबूती और इंटरनेट स्पीड की सटीक टेस्टिंग कर सकेंगी। इस टेस्टिंग के आधार पर ही इमारतों को फाइबर ऑप्टिक रेडीनेस, मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता, इन-बिल्डिंग सॉल्यूशंस और वाई-फाई इंफ्रास्ट्रक्चर, इन चार पैमानों पर परखकर 1 से 5 स्टार तक रेटिंग दी जाएगी।
यह पहल सिर्फ खरीदारों और किराएदारों की ही मदद नहीं करेगी, बल्कि प्रॉपर्टी डेवलपर्स और बिल्डर्स को भी शुरुआत से ही मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए प्रेरित करेगी, क्योंकि अच्छी रेटिंग अब किसी प्रॉपर्टी की बिकने या किराए पर उठने की संभावना को सीधे प्रभावित कर सकती है।
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प्रॉपर्टी मैनेजर्स के लिए सिंगल इंटरफेस
ट्राई के बयान के मुताबिक, यह प्लेटफॉर्म प्रॉपर्टी मैनेजर्स, रजिस्टर्ड डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग एजेंसी और ग्राहकों को एक ही सिंगल इंटरफेस पर लाता है। सरकारी, कमर्शियल, पब्लिक और प्राइवेट कैटेगरी की बनी हुई और अंडर-कंस्ट्रक्शन, दोनों तरह की इमारतों के लिए प्रॉपर्टी मैनेजर्स अपनी संपत्तियों को रजिस्टर कर रेटिंग एप्लीकेशन का स्टेटस भी ट्रैक कर सकते हैं।
रजिस्ट्रेशन के बाद संबंधित DCRA टीम इमारत का ऑन-साइट सर्वे करती है और उसी आधार पर स्टार रेटिंग तय होती है। यह पूरी प्रक्रिया प्लेटफॉर्म पर ट्रैक की जा सकती है, ताकि प्रॉपर्टी मैनेजर को हर चरण की जानकारी मिलती रहे।
क्या है इन-बिल्डिंग सॉल्यूशन (IBS)
बड़ी या बहुमंजिला इमारतों, बेसमेंट और लिफ्ट जैसी जगहों पर मोबाइल टावर के सिग्नल अक्सर अंदर तक नहीं पहुंच पाते। इससे निपटने के लिए इमारत के अंदर ही छोटे एंटेना और केबल्स का नेटवर्क बिछाया जाता है, जिसे इन-बिल्डिंग सॉल्यूशन यानी IBS कहा जाता है। DCR रेटिंग यही तय करेगी कि बिल्डर ने ऐसी तकनीक इमारत में इंस्टॉल की है या नहीं, जिससे घर या ऑफिस खरीदने वाले को पहले ही इस बारे में साफ जानकारी मिल जाएगी।
अभी तक ज्यादातर लोगों को यह पता तभी चलता था जब वे इमारत में शिफ्ट हो चुके होते थे और कमजोर नेटवर्क या इंटरनेट की दिक्कत सामने आती थी। इस रेटिंग सिस्टम से यह जानकारी पहले से ही मिल जाएगी, जिससे प्रॉपर्टी खरीदने का फैसला लेने में मदद मिलेगी। जो लोग प्रॉपर्टी खरीदने के लिए होम लोन लेने की सोच रहे हैं, उनके लिए भी यह जानकारी काम की है, क्योंकि EMI और बजट तय करने से पहले प्रॉपर्टी की कनेक्टिविटी रेटिंग देखना अब फैसले का एक और अहम पहलू बन सकता है।
रेटिंग सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। सरकारी दफ्तरों, कमर्शियल टावरों, को-वर्किंग स्पेस और पब्लिक बिल्डिंग जैसी संपत्तियां भी इस दायरे में आती हैं, यानी बड़ी कंपनियां भी नया ऑफिस लेने से पहले वहां की डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग परख सकेंगी।
बिजली उपकरणों की स्टार रेटिंग जैसा सिस्टम
इसे आसान भाषा में समझें तो यह कुछ-कुछ उसी तरह का सिस्टम है, जैसे फ्रिज या AC जैसे बिजली उपकरणों पर ऊर्जा बचत बताने वाली स्टार रेटिंग होती है, या होटलों को मिलने वाली स्टार कैटेगरी होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां बिजली की बचत या सुविधाओं की जगह इमारत की डिजिटल कनेक्टिविटी को परखा जाएगा, ताकि खरीदार या किराएदार एक नजर में समझ सकें कि वहां नेटवर्क और इंटरनेट की स्थिति कैसी रहेगी।
रेटिंग कैसे चेक करें
डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने के लिए ट्राई की आधिकारिक वेबसाइट dcrp.trai.gov.in पर जाया जा सकता है। यहां पब्लिक सर्च सेक्शन में प्रॉपर्टी का नाम, सर्टिफिकेट ID या लोकेशन डालकर कोई भी व्यक्ति उसकी मौजूदा रेटिंग देख सकता है।
जिन प्रॉपर्टी मैनेजर्स को अपनी इमारत रजिस्टर करानी है, वे भी इसी वेबसाइट के जरिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद रजिस्टर्ड DCRA एजेंसी इमारत का सर्वे करेगी और रेटिंग जारी होने के बाद वह प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक रूप से दिखने लगेगी। रेटिंग सर्टिफिकेट पर मिलने वाला QR कोड स्कैन करके कोई भी व्यक्ति मौके पर ही यह पुष्टि कर सकता है कि रेटिंग असली है और किसी फर्जी दावे का नतीजा नहीं।
होम बायर्स और किराएदारों के लिए क्या बदलेगा
अभी यह प्लेटफॉर्म नया-नया लॉन्च हुआ है, इसलिए शुरुआत में सीमित इमारतों की ही रेटिंग उपलब्ध होगी। लेकिन जैसे-जैसे ज्यादा प्रॉपर्टी मैनेजर्स अपनी इमारतें रजिस्टर कराएंगे, खरीदार और किराएदार बिना साइट पर जाए भी नेटवर्क और इंटरनेट की स्थिति का एक भरोसेमंद अंदाजा लगा सकेंगे। इससे खासतौर पर उन लोगों को फायदा होगा, जो दूसरे शहर से प्रॉपर्टी देख रहे हैं और मौके पर जाकर नेटवर्क टेस्ट करना उनके लिए मुमकिन नहीं है।
आगे क्या बदलेगा
फिलहाल यह रेटिंग सिस्टम स्वैच्छिक है, यानी हर प्रॉपर्टी मैनेजर पर तुरंत रजिस्ट्रेशन कराने की बाध्यता नहीं है। लेकिन जैसे-जैसे ज्यादा इमारतें रजिस्टर होंगी और खरीदार-किराएदार रेटिंग को अहमियत देने लगेंगे, बिल्डरों पर भी बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर देने का दबाव बढ़ेगा। आने वाले समय में यह रेटिंग किसी प्रॉपर्टी के लोकेशन, सुरक्षा या सुविधाओं जितनी ही अहम जानकारी बन सकती है, खासकर उन शहरों में जहां वर्क-फ्रॉम-होम और ऑनलाइन क्लासेज के चलते घर के अंदर तेज इंटरनेट की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने वाले बिल्डरों के लिए भी यह रेटिंग आगे चलकर एक मार्केटिंग पॉइंट बन सकती है, ठीक वैसे ही जैसे आजकल प्रोजेक्ट्स में पार्किंग, क्लबहाउस या ग्रीन सर्टिफिकेशन को बतौर खासियत गिनाया जाता है। जिन इमारतों की रेटिंग अच्छी होगी, वहां खरीदारों और किराएदारों का भरोसा भी स्वाभाविक रूप से ज्यादा रहेगा।
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