किसानों ने ठुकराया सरकार का 10 सूत्रीय प्रस्ताव: टोल फ्री, जिला मुख्यालयों पर धरना और Jio बायकॉट समेत 4 बड़े ऐलान
Farmers Protest के दौरान 9 दिसंबर 2020 को किसानों ने कृषि कानूनों पर सरकार का प्रस्ताव सिरे से खारिज कर दिया। किसान नेताओं ने कहा कि कानून रद्द होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

सरकार और किसानों के बीच छह दौर की बातचीत हो चुकी थी। मंगलवार को किसान नेताओं की गृह मंत्री अमित शाह से बैठक हुई। इसके बाद बुधवार को सरकार ने लिखित प्रस्ताव भेजा।
किसान नेताओं ने प्रस्ताव को गोलमोल बताया। उनका कहना था कि सरकार अच्छाई की बात करती है, लेकिन अमल का तरीका साफ नहीं है।
किसानों के फैसले के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर गृह मंत्री के घर पहुंचे। दोनों के बीच बैठक हुई।
किसानों के 4 बड़े ऐलान
प्रस्ताव पर विचार के बाद किसानों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें आंदोलन की आगे की रणनीति बताई गई।
- टोल फ्री: शनिवार को देशभर में टोल प्लाजा फ्री कराए जाएंगे। दिल्ली-जयपुर हाईवे बंद रहेगा।
- जिला मुख्यालयों पर धरना: 15 दिसंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर धरना होगा। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसान शामिल होंगे। जो धरने में नहीं जा सकेंगे, वे दिल्ली कूच करेंगे।
- कॉर्पोरेट बायकॉट: अंबानी-अडानी के मॉल, उत्पाद और टोल का बायकॉट होगा। Jio उत्पादों का बायकॉट होगा और Jio सिम पोर्ट कराई जाएगी।
- भाजपा नेताओं का विरोध: राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा नेताओं का बहिष्कार होगा। उनके बंगलों और दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन होंगे।
कानून रद्द करने की मांग पर सरकार का इनकार
सरकार ने 10 अहम मुद्दों में से सबसे बड़ी मांग, यानी कृषि कानून रद्द करना, नहीं मानी। 5 मुद्दों पर सफाई देने और 4 मुद्दों पर मौजूदा व्यवस्था बदलने का आश्वासन दिया गया।
किसानों के मुद्दे और सरकार के जवाब
| किसानों का मुद्दा | सरकार का जवाब |
| कृषि सुधार कानून रद्द करें। | ऐतराज है तो खुले मन से विचार को तैयार। |
| MSP पर चिंता, फसलों का कारोबार निजी हाथों में जाएगा। | MSP पर लिखित आश्वासन देंगे। |
| किसानों की जमीन पर बड़े उद्योगपति कब्जा कर लेंगे। | किसान की जमीन पर ढांचा नहीं बनेगा। ढांचा बना तो मालिकाना हक किसान का। |
| APMC मंडियां कमजोर होंगी। | राज्य सरकारें प्राइवेट मंडियों का रजिस्ट्रेशन कर सेस वसूल सकेंगी। |
| किसानों की जमीन की कुर्की हो सकती है। | वसूली के लिए कुर्की नहीं होगी, फिर भी सफाई देंगे। |
| किसान सिविल कोर्ट नहीं जा सकते। | यह विकल्प दिया जा सकता है। |
| पैन कार्ड से फसल खरीद में धोखा होगा। | राज्य सरकारें खरीदारों के रजिस्ट्रेशन का नियम बना सकेंगी। |
| पराली जलाने पर जुर्माना और सजा। | किसानों की आपत्तियां दूर की जाएंगी। |
| एग्रीकल्चर एग्रीमेंट के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था नहीं। | एग्रीमेंट के 30 दिन में कॉपी एसडीएम ऑफिस में जमा होगी। |
| नया बिजली विधेयक वापस लें। | विधेयक चर्चा के लिए है। बिजली बिल भुगतान की मौजूदा व्यवस्था नहीं बदलेगी। |
विपक्ष के 5 नेता राष्ट्रपति से मिले
20 राजनीतिक दल किसानों की मांगों के समर्थन में थे। बुधवार को विपक्ष के पांच नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। इनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार शामिल थे। सीपीआई (एम) के सीताराम येचुरी, सीपीआई के डी. राजा और डीएमके के इलांगोवन भी साथ थे।
राहुल गांधी बोले- भारत का किसान नहीं डरेगा
राहुल गांधी ने कहा कि किसान ने देश की नींव रखी है। उन्होंने पास हुए बिलों को किसान विरोधी बताया। उन्होंने सवाल किया कि अगर बिल किसानों के हित में हैं, तो किसान इतना नाराज क्यों है। उन्होंने कहा कि बिल रद्द होने तक किसान नहीं हटेगा।
सरकार ने कहा- बातचीत जारी है
कैबिनेट फैसलों की जानकारी देने के लिए तीन मंत्रियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अंतिम दौर की बातचीत को काम प्रगति पर माना जाता है। इस पर रनिंग कमेंट्री नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के मुद्दों पर संवेदनशील है। अब तक 6 बार चर्चा हो चुकी है। उम्मीद है कि यह आखिरी चरण होगा।
राकेश टिकैत बोले- सरकार अड़ी तो किसान भी अडिग
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान पीछे नहीं हटेंगे। यह सम्मान की बात है। अगर सरकार अपने रुख पर अडिग है, तो किसान भी अडिग हैं। कानून वापस लेना होगा।
अकाली दल कार्यकर्ताओं ने बांटा मुफ्त डीजल
दिल्ली-अमृतसर हाईवे के एक पेट्रोल पंप पर आंदोलन में जा रहे लोगों को मुफ्त डीजल दिया गया। शिरोमणि अकाली दल के कार्यकर्ताओं ने यह व्यवस्था की। उनका कहना था कि ज्यादा से ज्यादा लोग आंदोलन में पहुंच सकें। स्थानीय युवा और उनके एनआरआई दोस्त इसमें मदद कर रहे थे।
इस आंदोलन पर फिल्मी हस्तियों की चुप्पी भी चर्चा में रही। पढ़ें किसान आंदोलन पर नसीरुद्दीन शाह का बयान।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Farmers Protest में किसानों ने सरकार का प्रस्ताव कब ठुकराया?
किसानों ने 9 दिसंबर 2020 को सरकार का लिखित प्रस्ताव खारिज किया था।
किसानों की सबसे बड़ी मांग क्या थी?
किसानों की सबसे बड़ी मांग तीनों कृषि कानूनों को रद्द करना थी।
किसानों ने कौन-से 4 बड़े ऐलान किए?
टोल प्लाजा फ्री कराना, 15 दिसंबर को जिला मुख्यालयों पर धरना, अंबानी-अडानी और Jio उत्पादों का बायकॉट और भाजपा नेताओं का बहिष्कार।

