राजस्थान

बुलिंग की 8 शिकायतें, फिर भी नहीं मिली मदद; अमायरा केस ने उठाए स्कूल सेफ्टी पर सवाल

पुलिस ने 8 महीने की जांच के बाद कोर्ट में चालान पेश किया है। चार्जशीट में क्लास टीचर पुनिता शर्मा, स्कूल संस्थापक सौरभ मोदी और प्रिंसिपल इंदू दूबे को आरोपी बनाया गया है। जांच में सबसे बड़ा आधार ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ में कथित चूक को माना गया है।

Amyra Death Case सिर्फ एक बच्ची की मौत की जांच नहीं, बल्कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, निगरानी और संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल है। जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में 1 नवंबर 2025 को चौथी क्लास की स्टूडेंट अमायरा की मौत के 8 महीने बाद पुलिस ने चार्जशीट पेश की है। इसमें क्लास टीचर की ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ में लापरवाही, बिना आवाज वाले CCTV फुटेज, 10 दिन तक स्कूल में रखे गए बैग और घटना स्थल साफ करने जैसे गंभीर पहलू सामने आए हैं। परिवार अब जांच और धाराओं पर सवाल उठा रहा है।

सिस्टम की कमी से टूटा भरोसा

जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में हुई अमायरा की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि स्कूल परिसर में बच्चा आखिर किसकी जिम्मेदारी होता है। चार्जशीट के मुताबिक, चौथी क्लास की स्टूडेंट अमायरा ने घटना से पहले कई बार अपनी क्लास टीचर तक परेशानी पहुंचाने की कोशिश की। वह 31 अक्टूबर को तीन बार शिकायत लेकर गई। अगले दिन 1 नवंबर को वह फिर पांच बार गई।

इतनी बार जाने के बाद भी उसे वह मदद नहीं मिली, जिसकी वह हकदार थी।

पुलिस ने 8 महीने की जांच के बाद कोर्ट में चालान पेश किया है। चार्जशीट में क्लास टीचर पुनिता शर्मा, स्कूल संस्थापक सौरभ मोदी और प्रिंसिपल इंदू दूबे को आरोपी बनाया गया है। जांच में सबसे बड़ा आधार ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ में कथित चूक को माना गया है। यानी स्कूल समय के दौरान बच्ची की सुरक्षा, मानसिक स्थिति और तत्काल जरूरतों पर ध्यान देने की जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही।

यह मामला केवल एक स्कूल या एक क्लासरूम की घटना नहीं रह गया है। यह हर उस परिवार की चिंता बन गया है, जो सुबह अपने बच्चे को स्कूल भेजते समय भरोसा करता है कि वह सुरक्षित लौटेगा।

जरूरी आंकड़े, आठ शिकायतें

चार्जशीट में सबसे चौंकाने वाला हिस्सा अमायरा के बार-बार क्लास टीचर के पास जाने से जुड़ा है। जांच टीम ने क्लासरूम के CCTV फुटेज जब्त किए। फुटेज की बारीकी से जांच में यह सामने आया कि अमायरा को आसपास के बच्चे परेशान कर रहे थे।

31 अक्टूबर को वह तीन बार क्लास टीचर पुनिता शर्मा के पास शिकायत लेकर गई। 1 नवंबर को घटना वाले दिन वह पांच बार शिकायत लेकर जाती दिखाई दी। यानी दो दिनों में आठ बार उसने मदद पाने की कोशिश की।

एक बच्ची बार-बार उठकर टीचर के पास जा रही थी। उसके व्यवहार में बेचैनी दिख रही थी। क्लास में उसके आसपास की गतिविधियां भी फुटेज में नजर आईं। पुलिस ने इन संकेतों को महत्वपूर्ण माना।

यहीं से Amyra Death Case में ‘बुलिंग’ और ‘मेंटल डिस्टेस’ जांच के केंद्र में आए। सवाल अब केवल घटना का नहीं रहा। सवाल यह बना कि परेशानी के स्पष्ट संकेतों के बाद भी स्कूल सिस्टम ने क्या किया।

CCTV की असली खामोशी

पुलिस को अमायरा के क्लासरूम के CCTV फुटेज मिले, लेकिन उनसे आवाज गायब थी। यही बात जांच में बेहद अहम मानी गई। CBSE गाइडलाइन के अनुसार CCTV कैमरे वॉयस रिकॉर्डिंग के साथ होने चाहिए। स्कूल में पुलिस को जो फुटेज मिले, वे बिना वॉयस के थे।

इसका मतलब यह हुआ कि कैमरे ने दृश्य तो दर्ज किए, लेकिन वह नहीं बताया कि क्लास में बातचीत क्या हुई। बच्ची ने क्या कहा। टीचर ने क्या जवाब दिया। आसपास के बच्चों ने क्या बोला। यह सब जांच से बाहर रह गया।

कई बार सच दृश्य में नहीं, आवाज में छिपा होता है।

यह खामोशी इस केस की सबसे बड़ी कमियों में गिनी जा रही है। फुटेज में अमायरा का बार-बार उठना दिखा, लेकिन उसके शब्द रिकॉर्ड नहीं हुए। इससे घटना की पूरी भावनात्मक और व्यवहारिक तस्वीर सामने नहीं आ सकी।

Duty Of Care की बड़ी चूक

पुलिस चार्जशीट में ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ को अमायरा की मौत के पीछे सबसे अहम पहलू बताया गया है। इसका मतलब है कि जिस व्यक्ति के पास बच्चे की जिम्मेदारी है, वह बच्चे की सुरक्षा, मानसिक स्थिति और तत्काल जरूरतों का ध्यान रखे।

स्कूल समय में यह जिम्मेदारी संबंधित टीचर पर भी होती है। पुलिस ने माना कि क्लास टीचर के पास बच्ची की स्थिति देखने और हस्तक्षेप करने के पर्याप्त अवसर थे। वह कई बार शिकायत लेकर गई। उसके व्यवहार में तनाव के संकेत दिखे।

इसके बावजूद उसे अनसुना किया गया।

जांच में लिखा गया है कि अमायरा की बात को नजरअंदाज करना शिक्षक की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी निभाने में चूक का मामला है। इसी आधार पर क्लास टीचर पुनिता शर्मा को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 में आरोपी बनाया गया है।

Amyra Death Case ने साफ कर दिया कि स्कूल में ‘देखरेख’ सिर्फ उपस्थिति दर्ज करने का नाम नहीं है। बच्चे की आवाज सुनना भी उसी जिम्मेदारी का हिस्सा है।

टीचर की गंभीर संवेदनहीनता

चार्जशीट में एक और तथ्य बेहद गंभीर है। जांच अधिकारी ने लिखा कि अमायरा के छत से गिरने की सूचना एक अन्य छात्रा ने क्लास टीचर को दे दी थी। इसके बावजूद क्लास टीचर पुनिता शर्मा ने तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी।

वह क्लास में ही बैठी रही।

पुलिस ने इस व्यवहार को गंभीर संवेदनहीनता माना है। चार्जशीट में यह निष्कर्ष भी दर्ज है कि जानकारी मिलने के बाद भी टीचर का क्लास में रुकना बच्ची के प्रति दुख या तत्काल चिंता न दिखाने जैसा था।

यह तथ्य इस केस को और पीड़ादायक बनाता है। एक छात्रा ने घटना की जानकारी दी। फिर भी वह प्राथमिक प्रतिक्रिया नहीं दिखी, जो किसी भी स्कूल स्टाफ से अपेक्षित होती है। बच्चों के बीच ऐसी घटना हो और जिम्मेदार व्यक्ति सक्रिय न हो, तो यह केवल प्रशासनिक कमी नहीं, संवेदनशीलता की विफलता भी बन जाती है।

सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप

पुलिस ने इस मामले में तीनों नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 238 लगाई है। यह धारा तब लगती है जब क्राइम सीन से छेड़छाड़ हो या सबूत मिटाने की कोशिश सामने आए।

चार्जशीट में माना गया है कि घटना के बाद सबूत मिटाने की कोशिश हुई। अमायरा चौथी मंजिल से गिरने के बाद जिस स्थान पर मिली, वहां खून के धब्बों को साफ कर दिया गया था। स्पॉट को पानी से धो दिया गया था।

एडिशनल डीसीपी जिज्ञासा पूनिया ने जांच में पाया कि पुलिस के पहुंचने से पहले स्कूल प्रशासन ने मौके से ब्लड और अन्य चीजों को साफ कर दिया था। यह तथ्य जांच की दिशा में बेहद अहम बन गया।

जहां हर निशान कहानी बता सकता था, वहां सफाई हो चुकी थी।

10 दिन तक बैग स्कूल में

अमायरा का बैग भी जांच में महत्वपूर्ण तथ्य बन गया है। पुलिस के मुताबिक, बच्ची का बैग करीब 10 दिन तक स्कूल मैनेजमेंट की कस्टडी में रहा। जांच टीम को वह बैग तत्काल नहीं दिया गया।

किसी भी बच्चे के बैग में उसकी दिनचर्या, नोटबुक, संभावित लिखावट, भावनात्मक संकेत या घटना से जुड़े छोटे-छोटे संदर्भ मिल सकते हैं। ऐसे में बैग का 10 दिन तक स्कूल के पास रहना परिवार और जांच दोनों के लिए गंभीर प्रश्न बन गया।

Amyra Death Case में यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि घटना के बाद शुरुआती घंटे और शुरुआती साक्ष्य सबसे ज्यादा अहम होते हैं। देर से मिले या नियंत्रित रहे सबूत हमेशा सवाल पैदा करते हैं।

पिता विजय मीणा ने भी स्कूल प्रशासन पर सबूत मिटाने की कोशिश का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि घटना की सूचना उन्हें करीब एक घंटे बाद दी गई।

पिता के आरोप और दर्द

अमायरा के पिता विजय मीणा ने चार्जशीट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि घटना के बाद जब वे अस्पताल पहुंचे, तो स्कूल के टीचर वहां से भाग गए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर पहुंची पुलिस और शिक्षा विभाग की टीमों को स्कूल प्रशासन ने कई घंटों तक अंदर प्रवेश नहीं दिया।

परिवार का दर्द केवल बेटी की मौत तक सीमित नहीं है। उनकी लड़ाई अब जवाबदेही की है।

विजय मीणा ने कहा कि 8 महीने जांच के बाद भी पुलिस ने कमजोर धाराएं लगाई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल संस्थापक और प्रिंसिपल को बचाने की कोशिश हुई। उनका कहना है कि क्लासरूम CCTV में अमायरा की मानसिक पीड़ा साफ दिख रही थी, फिर भी उसे प्रोटेक्शन या काउंसलिंग नहीं दी गई।

उन्होंने सवाल उठाया कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में आरोपी होने के बावजूद क्लास टीचर की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई।

सुने अमायर की मां ने क्‍या कहा –

तीन जांच अधिकारी बदले

इस केस की जांच के दौरान तीन जांच अधिकारी बदले गए। पहले जांच अधिकारी लखन खटाना थे, जो मानसरोवर थाने के सीआई थे। इसके बाद प्रशिक्षु आईपीएस आदित्य कांकड़े को जांच दी गई। फिर जांच आरपीएस जिज्ञासा पूनिया को सौंपी गई।

1 नवंबर 2025 को हुई घटना के बाद लंबी जांच चली। पुलिस ने 1 जुलाई 2026 को कोर्ट में चालान पेश किया। यानी घटना और चालान के बीच करीब 8 महीने का समय लगा।

इस दौरान परिवार ने लगातार सवाल उठाए। पिता का आरोप है कि इतना समय बीतने के बाद भी चार्जशीट में वह कठोरता नहीं दिखी, जिसकी उन्हें उम्मीद थी।

जांच का समय जितना लंबा हुआ, परिवार का इंतजार उतना ही भारी होता गया।

आरोपियों पर लगी धाराएं

पुलिस ने क्लास टीचर पुनिता शर्मा पर BNS की धारा 106 और 238 के साथ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 लगाई है। धारा 75 बच्चों की देखभाल और संरक्षण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण मानी गई है।

स्कूल संस्थापक सौरभ मोदी और प्रिंसिपल इंदू दूबे को BNS की धारा 106 और 238 में नामजद किया गया है। पिता विजय मीणा ने सवाल उठाया है कि स्कूल संस्थापक और प्रिंसिपल पर भी जेजे एक्ट-75 क्यों नहीं लगाया गया।

उनका तर्क है कि स्कूल परिसर में चाइल्ड सेफ्टी, सुपरविजन, प्रोटेक्शन और वेलबीइंग की जिम्मेदारी स्कूल मैनेजमेंट और प्रिंसिपल की भी होती है। परिवार अब इस मुद्दे को आगे हाईकोर्ट तक ले जाने की बात कर रहा है।

Amyra Death Case

Amyra Death Case में कानूनी लड़ाई अब धाराओं की गंभीरता और जवाबदेही के दायरे पर केंद्रित हो सकती है।

स्कूल सेफ्टी की बड़ी परत

जांच अधिकारी ने चार्जशीट में स्कूल की कई कमियां गिनाईं। एडिशनल डीसीपी जिज्ञासा पूनिया ने कहा कि अमायरा प्रकरण में कई जगह जिम्मेदारों ने लापरवाही की। इसे ओवरऑल सुपरवाइजरी नेग्लीजेंसी माना गया।

CBSE की कई एडवाइजरी के उल्लंघन की बात सामने आई। क्लास में CCTV फुटेज ऑडियो के साथ होना चाहिए था, लेकिन फुटेज बिना आवाज मिले। जी प्लस 5 बिल्डिंग नहीं होनी चाहिए। हर फ्लोर पर सुरक्षाकर्मी होना चाहिए।

टीचर को पाबंद किया जाना चाहिए था कि कोई भी घटना हो, तो कोऑर्डिनेशन कमेटी को बताया जाए। जांच में यह भी सामने आया कि एंटी बुलिंग कमेटी जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी।

यह सिर्फ अमायरा की कहानी नहीं रही। यह स्कूल सेफ्टी सिस्टम की परतें खोलती है।

बुलिंग पर सिस्टम की चुप्पी

बच्चों के बीच बुलिंग हमेशा शोर से नहीं दिखती। कई बार यह बार-बार की चिढ़ाने, धक्का देने, अलग करने, मजाक उड़ाने या मानसिक दबाव के रूप में सामने आती है। अमायरा के मामले में फुटेज में आसपास के बच्चों द्वारा परेशान किए जाने के संकेत दिखे।

वह बार-बार टीचर के पास गई। यही उसका मदद मांगने का तरीका था।

अगर क्लासरूम में एंटी बुलिंग सिस्टम सक्रिय होता, तो शायद शिकायत दर्ज होती। कोऑर्डिनेशन कमेटी को सूचना जाती। काउंसलिंग की पहल होती। बच्चों को अलग बैठाया जा सकता था। अभिभावकों को बुलाया जा सकता था।

चार्जशीट का बड़ा सवाल यही है कि ऐसा कुछ क्यों नहीं हुआ। Amyra Death Case में स्कूल की चुप्पी अब कानूनी जांच का हिस्सा बन चुकी है।

पूरी टाइमलाइन में देरी

घटना 1 नवंबर 2025 को हुई। अमायरा नीरजा मोदी स्कूल में चौथी क्लास की छात्रा थी। वह स्कूल परिसर में गंभीर रूप से घायल मिली। उसे स्कूल के पास एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

लंबी जांच के बाद पुलिस ने 1 जुलाई 2026 को कोर्ट में चालान पेश किया। चार्जशीट में घटना से पहले की परिस्थितियां, स्कूल प्रशासन की भूमिका, घटना के दौरान की स्थिति और बाद की कार्रवाई को शामिल किया गया।

  1. 10 जुलाई को कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन वह टल गई। 15 जुलाई को आरोपी पक्ष के वकील के नहीं पहुंचने पर सुनवाई फिर टल गई। अभी तक इस केस में एक भी सुनवाई नहीं हुई है।

परिवार के लिए यह देरी सिर्फ तारीख नहीं, इंतजार है।

Amyra Death Case

अगला कदम अदालत में

अब अदालत चार्जशीट का संज्ञान लेगी। आरोपियों को चार्जशीट की प्रति दी जाएगी। इसके बाद आरोप तय करने यानी चार्ज फ्रेमिंग पर सुनवाई होगी।

फिर अभियोजन पक्ष अपने गवाह और सबूत पेश करेगा। बचाव पक्ष को जिरह और अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत फैसला सुनाएगी।

इस प्रक्रिया में समय लग सकता है। लेकिन यह केस अब स्कूल से निकलकर अदालत की प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है। आगे हर तथ्य, हर फुटेज, हर देरी और हर निर्णय अदालत के सामने परखा जाएगा।

याद रहने वाला अंतिम सवाल

अमायरा दो दिनों में आठ बार अपनी बात लेकर टीचर के पास गई। फुटेज में उसकी बेचैनी दिखी। आवाज रिकॉर्ड नहीं हुई। बैग 10 दिन तक स्कूल में रहा। घटनास्थल पानी से धुला मिला। और सुनवाई अब भी शुरू नहीं हुई।

यह कहानी केवल एक बच्ची की नहीं है। यह उस भरोसे की कहानी है, जो हर सुबह स्कूल गेट पर माता-पिता अपने बच्चों के साथ छोड़ते हैं।

क्लासरूम में बच्चा सिर्फ पढ़ने नहीं आता। वह सुरक्षा, सुनवाई और संवेदना की उम्मीद लेकर आता है। अमायरा केस का सबसे भारी सवाल यही है—जब बच्चा मदद मांग रहा हो, तो स्कूल कितनी बार सुनता है?

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सांवरिया सेठ सिंह

थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।

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