Pitru Paksha 2026: तर्पण, श्राद्ध और दान से जुड़े ये 7 काम जरूर करें, जानें धूप-ध्यान की सही विधि
Pitru Paksha 2026 10 अक्टूबर तक चलेगा। तर्पण, श्राद्ध, दान-पुण्य से लेकर धूप-ध्यान तक जुड़े ये 7 जरूरी काम ज्योतिषाचार्य की सलाह से जानें, ताकि पितरों की कृपा से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहे।

Pitru Paksha 2026 अभी चल रहा है और यह 10 अक्टूबर तक चलेगा। हिंदू मान्यताओं में इन 15 दिनों में पूर्वजों के स्मरण के लिए तर्पण, श्राद्ध, दान-पुण्य और धूप-ध्यान जैसे कर्म किए जाते हैं। वाराणसी के ज्योतिषाचार्य पं. पुरुषोत्तम शर्मा के मुताबिक इन्हें सही विधि से करने पर ही पितरों की पूरी कृपा मिलती है।
पहला काम: दक्षिण दिशा मुख करके करें पितरों का तर्पण
ज्योतिषाचार्य पं. पुरुषोत्तम शर्मा के अनुसार, पितृ पक्ष में तर्पण को सबसे प्रमुख कर्म माना गया है। मान्यता है कि जल में काले तिल मिलाकर, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के नाम से तर्पण करना चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है।
तर्पण के समय अपने दिवंगत परिजनों और पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है और उनके नाम का उच्चारण करते हुए जल अर्पित किया जाता है। यह विधि सरल है और इसे घर पर भी आसानी से किया जा सकता है, इसके लिए किसी बड़े आयोजन की जरूरत नहीं होती।
परंपरागत रूप से यह जिम्मेदारी परिवार के सबसे बड़े पुत्र या घर के मुख्य सदस्य को दी जाती है, हालांकि आज कई घरों में यह सुविधा के अनुसार परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा पूरी कर ली जाती है। तर्पण के लिए दिन का दोपहर वाला समय यानी कुतुप काल सबसे उपयुक्त माना गया है, क्योंकि इसी समय को पितरों के कर्मों के लिए शास्त्रों में तय किया गया है।
दूसरा काम: मृत्यु-तिथि पर श्राद्ध, न बन पाए तो सर्वपितृ अमावस्या पर करें भरपाई
परिवार के जिन सदस्यों का निधन हो चुका है, मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष में उनकी मृत्यु-तिथि पर श्राद्ध करने की परंपरा है। घर के बड़े सदस्य या पंडित की मदद से विधि-विधान के साथ यह कर्म पूरा किया जाता है।
अगर किसी वजह से कोई तिथि निकल जाए या श्राद्ध करना भूल जाएं, तो सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या यानी 10 अक्टूबर को वह श्राद्ध-कर्म किया जा सकता है, ताकि किसी भी पितर की उपेक्षा न हो। इसी दिन के साथ Pitru Paksha 2026 भी संपन्न होगा।
श्राद्ध और तर्पण को अक्सर एक ही मान लिया जाता है, जबकि दोनों अलग-अलग कर्म हैं। श्राद्ध में विधि-विधान से पूजा, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन कराया जाता है, जबकि तर्पण में सिर्फ जल, तिल और कुश की मदद से पितरों को जल अर्पित किया जाता है। जो परिवार पूरे विधि-विधान से श्राद्ध नहीं कर पाते, वे रोज तर्पण करके भी पितरों का स्मरण कर सकते हैं।
तीसरा काम: जरूरतमंदों को भोजन कराना और दान-पुण्य करना
शास्त्रों में देवकार्य और पितृकार्य के साथ जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने को बहुत शुभ बताया गया है। भोजन कराने के बाद अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा देने की भी परंपरा है, जिससे भोजन कराने वाले को भी पूरा पुण्य मिलता है।
इसके अलावा अन्न, वस्त्र, तिल, जलपात्र और धन का दान भी पितृ पक्ष में शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्य का कहना है कि दान दिखावे के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धा और अपनी सामर्थ्य के मुताबिक ही करना चाहिए, तभी इसका पूरा फल मिलता है।
हिंदू मान्यताओं में अन्नदान को सबसे बड़ा पुण्य कार्य माना गया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर किसी भूखे को भोजन कराने से जुड़ा है। दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति, मंदिर, गौशाला या सामाजिक संस्था को भी दिया जा सकता है, और यह सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्ग की मदद का भी एक जरिया माना जाता है।
चौथा काम: गाय, कुत्ते और कौवे को भोजन का हिस्सा देना
पितृ पक्ष में गाय, कुत्ते, कौवे और अन्य जीवों को भोजन का अंश देने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इन जीवों को भोजन कराने से अक्षय पुण्य मिलता है, क्योंकि इन्हें पितरों का प्रतीक माना जाता है।
कई घरों में श्राद्ध का भोजन बनाने के बाद सबसे पहले इन्हीं जीवों को निकालकर रखा जाता है, इसके बाद ही परिवार के लोग भोजन करते हैं। यह परंपरा आज भी गांव-कस्बों में बड़े पैमाने पर निभाई जाती है।
मान्यताओं में कौवे को यमराज का दूत और पितरों का प्रतीक माना जाता है, इसलिए श्राद्ध का भोजन सबसे पहले कौवे को ही दिखाया जाता है। इसी तरह कुत्ते को यमराज के वाहन से जोड़कर देखा जाता है, जबकि गाय को सनातन परंपरा में पूजनीय और पवित्र पशु माना गया है।
पांचवां काम: घर का माहौल शांत और संयमित रखना
पितृ पक्ष के दौरान घर का वातावरण शांत बनाए रखने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक इन 15 दिनों में गुस्सा, झगड़े और कड़वे शब्दों से बचना चाहिए और अपना व्यवहार संयमित रखना चाहिए।
मान्यता है कि अगर घर में कलह-क्लेश होता है, तो पितर दुखी होते हैं, इसलिए इस दौरान आपसी विवाद टालकर आपस में प्रेम और सहयोग से रहने की सलाह दी जाती है।
इसी वजह से पितृ पक्ष में नए वस्त्र खरीदना, गृह प्रवेश, विवाह जैसे मांगलिक कार्य और मांस-मदिरा का सेवन टाल दिया जाता है, क्योंकि यह पक्ष शोक और पितरों के स्मरण का समय माना जाता है, उत्सव का नहीं।
छठा काम: मंत्र-जाप और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना
भगवान के नामों का स्मरण, मंत्र-जाप और गीता, रामायण या गरुड़ पुराण जैसे ग्रंथों का पाठ भी इस दौरान मन शांत रखने और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा जताने का तरीका माना गया है। कई परिवार पितृ पक्ष में रोज कुछ समय इन ग्रंथों के पाठ के लिए तय रखते हैं।
मान्यता है कि गरुड़ पुराण का पाठ खासतौर पर पितरों की आत्मा की शांति से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए कई घरों में पितृ पक्ष के दौरान इसका पाठ कराया जाता है। कुछ परिवार श्रीमद्भगवद्गीता के अध्यायों का पाठ भी पितरों को समर्पित करते हैं, जिसे आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए फलदायी माना जाता है।
इसी तरह महाभारत में भीष्म-युधिष्ठिर प्रसंग से भी यह समझा जा सकता है कि पितरों के लिए किए गए हर कर्म के पीछे कोई न कोई पौराणिक वजह जरूर होती है। इस प्रसंग में बताया गया है कि पितरों को भोजन सीधे नहीं, बल्कि अग्नि के माध्यम से ही अर्पित किया जाता है।
सातवां काम: सही सामग्री और विधि से करें धूप-ध्यान
धूप-ध्यान के लिए गाय के गोबर से बने कंडे, हवन कुंड या कोई बर्तन, घी, काले तिल, चावल, गुड़, कर्पूर, जल से भरा तांबे का लोटा, फूल और बैठने के लिए आसन की जरूरत होती है। अगर ये सभी चीजें जुटाना संभव न हो, तो ज्योतिषाचार्य के मुताबिक सिर्फ जल, तिल, कंडे के अंगारे और गुड़-घी से भी श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करके धूप-ध्यान किया जा सकता है।
चाहें तो खीर-पूड़ी बनाकर भी धूप दी जा सकती है, क्योंकि इसे पितरों का प्रिय भोजन माना जाता है। धूप देते समय पितरों का नाम लेकर स्मरण करना और श्रद्धा के साथ उनके प्रति आभार व्यक्त करना भी परंपरा में जरूरी बताया गया है।
![]()
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक धूप-ध्यान के लिए भी दोपहर का कुतुप काल सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, हालांकि शहर के हिसाब से सूर्योदय-सूर्यास्त और तिथि की गणना अलग होने से यह समय थोड़ा आगे-पीछे भी हो सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग से सही समय जरूर देख लेना चाहिए।
Pitru Paksha 2026 के बाकी दिनों में इन सभी 7 कामों को अपनाकर पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जा सकती है, और सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या तक जो लोग किसी तिथि पर श्राद्ध नहीं कर पाए हैं, वे इसे पूरा कर सकते हैं। इसके अगले दिन से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो जाएगी, इसलिए पितृ पक्ष का समापन नवरात्रि की तैयारियों से भी जुड़ा माना जाता है।
ये भी पढ़ें :
Pitru Paksha 2025 Amavasya: पितरों को तृप्त करने के आसान उपाय, घर में ऐसे करें धूप-ध्यान और तर्पण
Like and follow us on :
Telegram | Facebook | Instagram | Twitter | Pinterest | Linkedin