भारत में स्टारलिंक की एंट्री बस एक कदम दूर, 20 गेटवे स्टेशन तैयार, अब सिर्फ मंजूरी का इंतजार
एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक के Starlink India Launch का इंतजार अब खत्म होने वाला है। कंपनी ने देशभर में 20 गेटवे स्टेशन और सैकड़ों एंटीना तैनात कर जरूरी ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा कर लिया है, अब सिर्फ आखिरी सुरक्षा मंजूरी का इंतजार बाकी है।

Starlink India Launch से जुड़ी तैयारियां अब आखिरी चरण में पहुंच चुकी हैं। कंपनी के मुताबिक IN-SPACe की परमिशन और सैटेलाइट इंटरनेट के लिए जरूरी GMPCS लाइसेंस पहले ही मिल चुका है, और अब सिर्फ सुरक्षा मंजूरी तथा विदेशी निवेश यानी FDI से जुड़ी आखिरी औपचारिकता बाकी रह गई है। इसके पूरा होते ही भारत में आम लोग स्टारलिंक की सेवा ले सकेंगे।
गौर करने वाली बात यह है कि IN-SPACe भारत में निजी कंपनियों को अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियों की इजाजत देने वाली नोडल एजेंसी है, जबकि GMPCS लाइसेंस किसी भी कंपनी को सैटेलाइट के जरिए मोबाइल और इंटरनेट जैसी संचार सेवाएं देने के लिए जरूरी होता है। यह दोनों मंजूरी मिलना अपने आप में बड़ा कदम माना जा रहा था, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से डेटा और कम्युनिकेशन से जुड़ी शर्तों की अंतिम जांच अभी बाकी है, जिसके पूरा होते ही लाइसेंसिंग प्रक्रिया पूरी तरह खत्म मानी जाएगी।
देशभर में 20 गेटवे स्टेशन, सैकड़ों एंटीना से होगा सिग्नल ट्रांसफर
स्टारलिंक ने देशभर में 20 गेटवे साइट्स बनाई हैं। ये गेटवे जमीन पर बने ऐसे स्टेशन हैं, जो अंतरिक्ष में मौजूद स्टारलिंक के सैटेलाइट्स को जमीन के मुख्य इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ने का काम करते हैं। इन जगहों पर सैकड़ों एंटीना लगाए गए हैं, ताकि इंटरनेट सिग्नल बिना किसी रुकावट के ट्रांसफर हो सकें।
कंपनी ने यह भी साफ किया है कि भारतीय यूजर्स का डेटा देश के भीतर ही रखा जाएगा, और इसके लिए हर स्तर पर जरूरी कंप्लायंस व्यवस्था तैयार की गई है। स्पेसएक्स का कहना है कि उसने भारत की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही खासतौर पर यह पूरा सिस्टम तैयार किया है।
जियो-एयरटेल से डील, तीन राज्यों के साथ लेटर ऑफ इंटेंट साइन
भारत में बड़े पैमाने पर नेटवर्क पहुंचाने के लिए स्टारलिंक रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के साथ पहले ही शुरुआती सहमति पत्र यानी MoU साइन कर चुकी है। इससे पहले एयरटेल के साथ हुई इस पार्टनरशिप को सैटेलाइट इंटरनेट के भारतीय बाजार में उतरने की दिशा में पहला बड़ा कदम माना गया था।
इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर सेवाएं देने के लिए कंपनी ने महाराष्ट्र, गुजरात और मेघालय सरकार के साथ भी समझौते किए हैं। महाराष्ट्र के साथ हुए इस करार के तहत राज्य के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में सैटेलाइट इंटरनेट पहुंचाने की योजना है, जबकि गुजरात और मेघालय के साथ भी इसी तरह के लेटर ऑफ इंटेंट और समझौते किए गए हैं, ताकि कमजोर कनेक्टिविटी वाले इलाकों में सेवा जल्द शुरू हो सके।
लाइसेंस मिलने में हुई देरी, सुरक्षा शर्तें पूरी करने के बाद बनी बात
स्टारलिंक 2022 से ही भारत में सेवा शुरू करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं की वजह से इसमें लगातार देरी होती रही। भारत सरकार ने डेटा सिक्योरिटी और कॉल इंटरसेप्शन जैसी कुछ शर्तें रखी थीं, जिन्हें पूरा करने में कंपनी को काफी वक्त लगा।
अब स्टारलिंक ने इन सभी शर्तों को मानते हुए अपना सिस्टम तैयार कर लिया है, इसलिए सेवा शुरू होने का रास्ता लगभग साफ हो चुका है। कंपनी के एक अधिकारी ने हाल ही में कहा कि उम्मीद है कि अगली बार जब वे इस बारे में कोई बयान देंगे, तो सरकार की तरफ से बाकी बचा काम पूरा हो चुका होगा और स्टारलिंक को भारत में सेवा शुरू करने की औपचारिक इजाजत मिल चुकी होगी।
गांव-कस्बों तक पहुंचेगा इंटरनेट, सस्ते टेलीकॉम प्लान की भी उम्मीद
स्टारलिंक की सेवा शुरू होने से सबसे बड़ा फायदा उन गांवों और दूर-दराज के इलाकों को होगा, जहां अब तक सामान्य ब्रॉडबैंड या मोबाइल इंटरनेट नहीं पहुंच पाया है। पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में भी सैटेलाइट के जरिए सीधे इंटरनेट मिलने से ऑनलाइन एजुकेशन, टेलीमेडिसिन और छोटे कारोबारों को बढ़ावा मिल सकता है।
इसके अलावा टेलीकॉम मार्केट में एक नया खिलाड़ी आने से प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी, जिसका सीधा असर ग्राहकों को मिलने वाले प्लान पर पड़ सकता है। हाल ही में मोबाइल रिचार्ज महंगा होने को लेकर जो चर्चा हुई थी, उसे देखते हुए माना जा रहा है कि स्टारलिंक जैसे नए विकल्प से आगे चलकर ग्राहकों को बेहतर और किफायती प्लान भी मिल सकते हैं।
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट यूजर बेस है भारत, मस्क के लिए बड़ा मौका
भारत दुनिया में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या के लिहाज से दूसरे नंबर पर आता है, इसलिए स्टारलिंक को यहां मंजूरी मिलना एलन मस्क के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। अमेरिका में स्पेसएक्स के सरकारी अनुबंधों को लेकर अलग-अलग दौर में सियासी उतार-चढ़ाव देखने को मिलते रहे हैं, ऐसे में भारत जैसा विशाल बाजार मस्क के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम हो जाता है।
भारत में कामयाबी मिलने से स्टारलिंक को सिर्फ नए ग्राहक ही नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए एक भरोसेमंद और बड़ा बाजार भी मिल जाएगा, जो कंपनी के वैश्विक विस्तार की रणनीति के लिहाज से काफी मायने रखता है।
कीमत को लेकर अभी आधिकारिक ऐलान नहीं, लीक हुए आंकड़े गलत निकले
स्टारलिंक की भारत में कीमत को लेकर अभी कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। हाल ही में एक तकनीकी गड़बड़ी की वजह से कंपनी की भारतीय वेबसाइट पर कुछ देर के लिए टेस्ट डेटा दिख गया था, जिसमें करीब 8,600 रुपए महीने का प्लान और करीब 34,000 रुपए की हार्डवेयर कीमत बताई गई थी। स्टारलिंक ने बाद में साफ किया कि यह सिर्फ एक ‘डमी’ डेटा था, जो गलती से दिख गया, और इसका असली कीमतों से कोई लेना-देना नहीं है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में स्टारलिंक की असली मासिक कीमत इस लीक हुए आंकड़े से काफी कम, यानी करीब 2,500 से 3,000 रुपए के बीच रखी जा सकती है, क्योंकि भारत जैसे कीमत को लेकर संवेदनशील बाजार में ज्यादा महंगा प्लान टिक पाना मुश्किल होगा। कंपनी का कहना है कि सभी जरूरी मंजूरी और स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट मिलने के बाद ही वह अपने असली प्लान और कीमतें सार्वजनिक करेगी।
भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में स्टारलिंक अकेली खिलाड़ी नहीं रहने वाली। जियो-SES और एयरटेल से जुड़ी Eutelsat OneWeb भी इसी सेगमेंट में सेवाएं शुरू करने की तैयारी में हैं, और इन कंपनियों के प्लान भी सस्ती रेंज में आने की उम्मीद जताई जा रही है। यानी आने वाले वक्त में भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर ग्राहकों के पास एक से ज्यादा विकल्प मौजूद रहेंगे, जिससे कीमतों पर ग्राहकों के हक में दबाव बना रह सकता है।
सैटेलाइट से आप तक कैसे पहुंचेगा इंटरनेट, जानें पूरा सिस्टम
स्टारलिंक के सैटेलाइट्स पृथ्वी के बेहद करीब वाली कक्षा में घूमते हैं, जिससे इंटरनेट सिग्नल तेज और स्मूथ तरीके से मिलता है। यही वजह है कि इसमें लेटेंसी यानी डेटा को एक पॉइंट से दूसरे तक पहुंचने में लगने वाला समय भी काफी कम रहता है। यह सैटेलाइट नेटवर्क धरती के लगभग किसी भी हिस्से में बीम के जरिए इंटरनेट कवरेज पहुंचाने में सक्षम है।
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घर में इस्तेमाल के लिए स्टारलिंक किट में एक डिश, वाई-फाई राउटर, पावर सप्लाई केबल्स और माउंटिंग ट्राइपॉड शामिल होता है। हाई-स्पीड इंटरनेट पाने के लिए डिश को खुले आसमान के नीचे लगाना जरूरी होता है, ताकि सिग्नल में कोई रुकावट न आए। iOS और एंड्रॉइड दोनों पर स्टारलिंक का अपना ऐप मौजूद है, जो सेटअप से लेकर कनेक्शन की मॉनिटरिंग तक, पूरी प्रक्रिया को आसान बनाता है। आने वाले दिनों में जैसे ही आखिरी मंजूरी मिलती है, भारत में आम यूजर्स के लिए भी इस किट के जरिए सीधे सैटेलाइट इंटरनेट लेना मुमकिन हो जाएगा।
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