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खुद की सिम दूसरे को दी तो ₹50 लाख जुर्माना समेत 3 साल की जेल, जानें अपने नाम पर एक्टिव सिम यूं चेक करें

दूरसंचार विभाग की नई एडवाइजरी के मुताबिक अपने नाम की सिम किसी और को देना, बेचना या किराए पर देना अब 3 साल की जेल और ₹50 लाख के जुर्माने तक की मुसीबत बन सकता है, जानें अपने नाम पर एक्टिव सिम चेक करने का पूरा तरीका।

अपने नाम की सिम किसी और को देना, किराए पर देना या फर्जी दस्तावेज से सिम लेना अब भारी पड़ सकता है। दूरसंचार विभाग की नई एडवाइजरी के मुताबिक ऐसा करने पर 3 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

दूरसंचार विभाग यानी DoT ने 21 सितंबर 2026 को SIM Card Fraud Fine से जुड़ी नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें साफ कहा गया है कि फर्जी ID से सिम खरीदने या बेचने पर, या मोबाइल के IMEI नंबर से छेड़छाड़ करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। सरकार ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे तुरंत चेक करें कि उनकी ID पर कोई अनजान सिम तो एक्टिव नहीं है।

DoT ने क्यों जारी की नई एडवाइजरी

दूरसंचार विभाग ने यह कदम छत्तीसगढ़ में हुए एक बड़े साइबर फ्रॉड के बाद उठाया है। वहां एक सिम बेचने वाले पॉइंट ऑफ सेल यानी PoS एजेंट ने लोगों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करके उनकी जानकारी के बिना 25 फर्जी सिम चालू कर रखे थे।

मामला खुलते ही DoT ने उस एजेंट को ब्लैकलिस्ट कर दिया। डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध गतिविधि पकड़ में आने के बाद सभी 25 नंबरों की दोबारा वेरिफिकेशन कराई गई, और जो फेल हुए उन्हें तुरंत बंद कर दिया गया।

इस तरह के मामले अकेले छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं हैं। देशभर में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जहां आम लोगों के आधार कार्ड या दूसरे दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उनकी जानकारी के बिना सिम एक्टिवेट कर ली जाती है। बाद में इन्हीं नंबरों से ठगी, धमकी या अन्य साइबर अपराध किए जाते हैं, जिसकी आंच असली दस्तावेज धारक तक भी पहुंच सकती है।

सिम किसी और को देना क्यों पड़ेगा भारी

दूरसंचार विभाग ने साफ कर दिया है कि अगर आप अपने नाम से सिम खरीदकर किसी और को बेचते हैं, किराए पर देते हैं या साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने देते हैं, तो पुलिस केस और कानूनी कार्रवाई आपके खिलाफ भी होगी।

जब कोई ठग किसी के ID प्रूफ से सिम निकलवाता है या पैसे का लालच देकर उसकी सिम ले लेता है और उससे साइबर अपराध को अंजाम देता है, तो उस सिम को म्यूल सिम कहा जाता है। ऐसे मामलों में असली दस्तावेज देने वाला व्यक्ति भी कानूनी पचड़े में फंस सकता है, भले ही उसने जानबूझकर अपराध न किया हो।

SIM Card Fraud Fine-2

फर्जी दस्तावेज से सिम लेना भी अपराध

फर्जी डॉक्यूमेंट्स लगाकर सिम लेना, पहचान छिपाकर धोखाधड़ी करना या किसी और के नाम की सिम का गलत इस्तेमाल करना भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इससे पहले भी सिम डीलरों के लिए सख्त वेरिफिकेशन नियम लागू किए जा चुके हैं, ताकि फर्जी तरीके से सिम जारी होने पर रोक लगाई जा सके।

IMEI छेड़छाड़ और कॉलिंग ID बदलना भी गैर-कानूनी

एडवाइजरी के मुताबिक, जिस फोन के IMEI नंबर से छेड़छाड़ या बदलाव किया गया हो, उसका इस्तेमाल करना गैर-कानूनी है। IMEI नंबर हर फोन की एक तरह की यूनिक पहचान होती है, जिससे चोरी या गुम हुए फोन को ट्रैक किया जाता है। इसी वजह से पहले भी सरकार स्मार्टफोन में संचार साथी ऐप अनिवार्य कर चुकी है, ताकि IMEI फ्रॉड और मोबाइल चोरी पर लगाम लगाई जा सके।

इसके अलावा एप्स या वेबसाइट्स के जरिए किसी और का नंबर दिखाकर कॉल करने, यानी कॉलिंग ID बदलने वाले टूल्स का इस्तेमाल करना भी अपराध है। सरकार ने इसे देश की सुरक्षा और टेलीकॉम नेटवर्क के लिए बड़ा खतरा माना है।

कितना जुर्माना और कितनी सजा हो सकती है

दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत सिम कार्ड के गलत इस्तेमाल, फर्जी दस्तावेजों से सिम लेने या IMEI से छेड़छाड़ करने पर 3 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। दोनों सजाएं साथ में भी दी जा सकती हैं।

यह कानून पहले के मुकाबले काफी सख्त माना जा रहा है, क्योंकि इसमें केवल ठगी करने वाले को ही नहीं, बल्कि लापरवाही से अपनी सिम किसी और को सौंपने वाले असली ग्राहक को भी जवाबदेह बनाया गया है।

यही वजह है कि सिम को किसी परिचित, रिश्तेदार या घर में काम करने वाले किसी व्यक्ति को भी बिना सोचे-समझे इस्तेमाल के लिए देना अब सुरक्षित नहीं माना जा सकता। भले ही इरादा गलत न हो, लेकिन अगर उस सिम का दुरुपयोग हो जाए तो मूल दस्तावेज धारक को भी जवाब देना पड़ सकता है।

SIM Card Fraud Fine-3

एक व्यक्ति के नाम पर कितने सिम कार्ड हो सकते हैं

भारत में एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 सिम कार्ड रखने का नियम पहले से लागू है। हालांकि जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा कारणों से यह सीमा घटाकर 6 सिम कार्ड कर दी गई है।

इस सीमा से ज्यादा सिम रखने वालों पर टेलीकॉम कंपनियां अब सख्ती से नजर रख रही हैं। नई एडवाइजरी के बाद इस नियम का पालन कराने पर और जोर दिया जा रहा है।

यह सीमा इसलिए तय की गई है क्योंकि ठग अक्सर एक ही व्यक्ति के नाम पर दर्जनों सिम एक्टिवेट कराकर उन्हें फर्जी कॉल सेंटर या ठगी के नेटवर्क में इस्तेमाल करते हैं। तय सीमा से इस तरह की बड़े पैमाने पर होने वाली गड़बड़ी को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ना आसान हो जाता है।

Digital Intelligence Platform पर दिखेगी फोटो

नियमों को और सख्त बनाने के लिए सरकार ने डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पर एक नया फीचर जोड़ा है। इसके निर्देश 17 अगस्त 2026 को जारी किए गए थे और 23 अगस्त से इससे जुड़ा डेटा पोर्टल पर दिखना शुरू हो गया।

इसके तहत जिन लोगों के नाम पर तय सीमा से ज्यादा सिम कार्ड चल रहे हैं, उनकी फोटो इस पोर्टल पर दिखने लगती है। इससे नया सिम देते समय डीलर तुरंत पहचान जाते हैं कि किस ग्राहक को सिम देने से मना करना है।

दूरसंचार विभाग ने सभी टेलीकॉम कंपनियों को अपने सिस्टम को इस प्लेटफॉर्म के साथ पूरी तरह रियल-टाइम में जोड़ने के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया है। तब तक कंपनियों को अपनी प्रक्रिया दुरुस्त करनी होगी, ताकि तय सीमा से ज्यादा किसी को भी नया सिम जारी न हो सके।

अपने नाम पर एक्टिव सिम कैसे चेक करें

सरकार ने सलाह दी है कि सभी नागरिक संचार साथी पोर्टल या इसके ऐप पर जाकर तुरंत चेक करें कि उनकी ID पर बिना जानकारी के कोई अनजान मोबाइल नंबर तो एक्टिव नहीं है। पोर्टल के TAFCOP सेक्शन में मोबाइल नंबर डालकर OTP वेरिफिकेशन के बाद अपने नाम पर चल रहे सभी सिम की लिस्ट देखी जा सकती है।

यही पोर्टल फोन खरीदने से पहले उसके IMEI नंबर को वेरीफाई करने के काम भी आता है, ताकि पता चल सके कि फोन चोरी या ब्लैकलिस्टेड तो नहीं है।

अनजान सिम मिलने पर क्या करें

अगर चेक करने पर आपके नाम पर कोई ऐसा नंबर दिखे जो आपने नहीं लिया है, तो पोर्टल पर ही उसे तुरंत रिपोर्ट किया जा सकता है। इसके बाद संबंधित टेलीकॉम कंपनी उस नंबर की दोबारा जांच करती है और जरूरत पड़ने पर उसे बंद कर देती है।

समय रहते ऐसी शिकायत दर्ज कराना जरूरी है, क्योंकि अगर उस नंबर से कोई साइबर अपराध हो जाए, तो शुरुआती जांच में असली दस्तावेज धारक से भी पूछताछ हो सकती है। हाल ही में सामने आए Digital Arrest जैसे साइबर ठगी के मामलों में भी अक्सर ऐसी ही म्यूल सिम का इस्तेमाल होता पाया गया है।

सिम खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान

नई सिम लेते समय हमेशा अधिकृत रिटेलर या कंपनी के आधिकारिक स्टोर से ही खरीदारी करनी चाहिए। किसी अनजान एजेंट को आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र की फोटोकॉपी देने से पहले यह जरूर देखें कि उसका इस्तेमाल सिर्फ बताए गए काम के लिए हो रहा है।

SIM Card Fraud Fine-4

पुराना नंबर बंद करवाने या सिम सरेंडर करने के बाद भी संचार साथी पोर्टल पर एक बार जरूर चेक कर लें कि वह नंबर आपके नाम से हट गया है या नहीं। जरूरत न होने पर इस्तेमाल न हो रहे नंबरों को समय रहते बंद करवा देना ही बेहतर रहता है, ताकि भविष्य में किसी गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

नए नियम का असर मैसेजिंग ऐप्स पर भी

सिम को लेकर सख्ती सिर्फ कॉलिंग तक सीमित नहीं है। पहले भी सरकार ने WhatsApp और Telegram जैसे मैसेजिंग ऐप्स के लिए भी सिम बाइंडिंग से जुड़े नियम लागू किए थे, ताकि बिना एक्टिव सिम के इन ऐप्स का गलत इस्तेमाल न हो सके। इन सभी कदमों को नए टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 के दायरे में ही सख्त किया जा रहा है, जिसके तहत अब सिम से जुड़े हर गलत इस्तेमाल पर पहले से कहीं ज्यादा सख्त सजा का प्रावधान है।

ये भी पढ़ें: SIM Card Verification: अब सिम कार्ड के लिए ये जरूरी, जानें पूरा मामला

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सांवरिया सेठ सिंह

थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।

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