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कोटा के जेके लोन अस्पताल में फिर टूटा कहर: 8 घंटे में 9 नवजातों ने तोड़ा दम, 11 वार्मर मिले खराब

डॉ. दुलारा के अनुसार अस्पताल में हर महीने करीब 60 से 100 बच्चों की मौत होती है। रोजाना यह आंकड़ा 2 से 5 के बीच रहता है। उन्होंने माना कि एक दिन में 9 बच्चों की मौत सामान्य नहीं है।

JK Lone Hospital में दिसंबर 2020 में करीब 8 घंटे के भीतर 9 नवजात शिशुओं की मौत हो गई। कोटा के इस मातृ एवं शिशु अस्पताल में एक साल पहले भी 35 दिनों में 107 बच्चों की जान गई थी।

कोटा का JK Lone Hospital

गुरुवार सुबह 3 बजे पहले बच्चे की मौत हुई। 9वें बच्चे की मौत सुबह करीब 10:30 बजे हुई। सभी बच्चों की उम्र 1 से 7 दिन के बीच थी।

यह पहली बार नहीं था। पिछले साल नवंबर-दिसंबर में इसी अस्पताल में 35 दिनों के भीतर 107 बच्चों की मौत हुई थी।

कलेक्टर पहुंचे, 5 डॉक्टर और 10 नर्सिंगकर्मी तैनात

बच्चों की मौत के बाद कलेक्टर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने तुरंत 5 अतिरिक्त डॉक्टर और 10 नर्सिंगकर्मी तैनात करने के आदेश दिए।

तत्कालीन चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की। विशेषज्ञ समिति को 24 घंटे में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया।

अस्पताल की सफाई- 3 बच्चों को जन्मजात बीमारी थी

8 घंटे में 9 बच्चों की मौत पर अस्पताल का बयान अस्पष्ट रहा। अस्पताल अधीक्षक डॉ. एससी दुलारा ने कहा कि 9 में से 3 नवजात अस्पताल पहुंचते ही दम तोड़ चुके थे।

उन्होंने बताया कि 3 बच्चों को जन्मजात बीमारियां थीं। इनमें एक बच्चे का सिर विकसित नहीं था। दूसरे को सिर से जुड़ी गंभीर समस्या थी। तीसरे में शुगर की कमी थी।

बूंदी से रेफर होकर आए 2 बच्चों में संक्रमण था।

हर महीने 60 से 100 बच्चों की मौत

डॉ. दुलारा के अनुसार अस्पताल में हर महीने करीब 60 से 100 बच्चों की मौत होती है। रोजाना यह आंकड़ा 2 से 5 के बीच रहता है। उन्होंने माना कि एक दिन में 9 बच्चों की मौत सामान्य नहीं है।

संसाधनों की कमी, 11 वार्मर खराब

पिछले साल भी ठंड के मौसम में बच्चों की मौत का सिलसिला शुरू हुआ था। तब कई नीतियां और प्रस्ताव बने, लेकिन जमीन पर असर नहीं दिखा।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार ठंड में बच्चों के लिए जरूरी चिकित्सा उपकरणों की कमी है। जो उपकरण हैं, उनमें से कई खराब हैं।

  • उस समय अस्पताल में 98 बच्चे भर्ती थे।
  • मौसम के कारण वार्मर की मांग बढ़ी हुई थी।
  • इसके बावजूद 11 वार्मर खराब पड़े थे।

पिछले साल दिल्ली से आई थी जांच टीम

पिछले साल 35 दिनों में 107 बच्चों की मौत के बाद कारण जानने के लिए दिल्ली से टीम आई थी। राज्य के मंत्री और अधिकारी भी पहुंचे थे।

बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अमृत लाल बैरवा को हटा दिया गया था। उनकी जगह जयपुर के डॉ. जगदीश को जिम्मेदारी दी गई थी।

विधायक का आरोप- 230 बच्चों पर सिर्फ दो प्रोफेसर

कोटा दक्षिण से विधायक संदीप शर्मा ने राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछली घटना के बाद यहां नए डॉक्टर लगाए गए थे, लेकिन बाद में सभी का तबादला कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि अस्पताल एक प्रोफेसर और एक एसोसिएट प्रोफेसर के भरोसे चल रहा है। दो डॉक्टर 230 बच्चों की देखभाल नहीं कर सकते।

राजस्थान में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े ताजा बदलाव भी पढ़ें: RGHS Rules में OPD टेस्ट के नए नियम लागू।

ये भी पढ़ें: मां योजना में अस्पतालों का भुगतान अटका, 25 लाख के दावे में उलझा 50 हजार का सच

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

JK Lone Hospital कहां है?

जेके लोन अस्पताल राजस्थान के कोटा शहर में स्थित मातृ एवं शिशु अस्पताल है।

दिसंबर 2020 में कितने नवजातों की मौत हुई थी?

करीब 8 घंटे के भीतर 9 नवजात शिशुओं की मौत हुई थी। सभी की उम्र 1 से 7 दिन के बीच थी।

इससे पहले इस अस्पताल में क्या हुआ था?

2019 में नवंबर-दिसंबर के दौरान 35 दिनों में 107 बच्चों की मौत हुई थी।

Thumbsup Bharat News Desk

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