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स्पेलिंग सुधार से सरनेम चेंज तक, आधार में नाम बदलने के लिए अब लगेंगे अलग-अलग दस्तावेज

आधार कार्ड में स्पेलिंग सुधारनी हो, शादी के बाद सरनेम बदलना हो या पूरा नाम ही बदलना हो, UIDAI ने Aadhaar Name Change Rules में बड़ा बदलाव कर दिया है। अब हर तरह के बदलाव के लिए अलग दस्तावेज और एफिडेविट देना होगा, एक डॉक्यूमेंट से सारे काम नहीं चलेंगे।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी UIDAI ने Aadhaar Name Change Rules को 18 सितंबर 2026 से सख्त कर दिया है। अब तक सिर्फ रेजिडेंशियल प्रूफ देकर भी नाम में बड़ा बदलाव करवाया जा सकता था, लेकिन नए नियम के बाद हर कैटेगरी के लिए तय दस्तावेज और एफिडेविट जरूरी होंगे। UIDAI का कहना है कि फ्रॉड और फर्जी पहचान रोकने के लिए यह सख्ती जरूरी थी, इसलिए अब हर आवेदन की बारीकी से जांच होगी।

मामूली स्पेलिंग सुधार में सिर्फ एक पहचान पत्र से बनेगा काम

नाम में छोटी-मोटी स्पेलिंग गलती सुधारना, मिडल या लास्ट नेम जोड़ना-हटाना, और नाम का क्रम बदलना – इन सभी को UIDAI ने ‘माइनर नेम चेंज’ की कैटेगरी में रखा है। जैसे Ram को Rama लिखना या सरनेम की स्पेलिंग में छोटा बदलाव करना इसी में आता है। ऐसे मामलों में आवेदक को सिर्फ एक मान्य पहचान पत्र जमा करना होगा, कोई एफिडेविट या अतिरिक्त कागज नहीं चाहिए।

18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अगर परिवार के मुखिया के आधार में यही छोटा बदलाव दिखाना है, तो ‘प्रूफ ऑफ रिलेशनशिप’ भी मान्य दस्तावेज माना जाएगा। UIDAI ने इसे सबसे आसान कैटेगरी रखा है, क्योंकि इसमें पहचान या नाम का मूल स्वरूप नहीं बदलता, सिर्फ लिखावट या क्रम में सुधार होता है।

ऑपरेटर की गलती सुधारने के लिए एफिडेविट देना अब जरूरी

कई बार आवेदक के दस्तावेज सही होते हैं, लेकिन एनरोलमेंट के वक्त ऑपरेटर की गलती से आधार में नाम गलत दर्ज हो जाता है। ऐसी डेटा-एंट्री एरर सुधारने के लिए अब एफिडेविट देना अनिवार्य होगा। वयस्कों के लिए Annexure B फॉर्म और बच्चों के लिए Annexure C फॉर्म भरना होगा, साथ में पहचान पत्र या प्रूफ ऑफ रिलेशनशिप भी लगाना होगा।

इस कैटेगरी में सबसे अहम शर्त यह है कि आवेदक जो नया नाम चाहता है, वह उसके पहले से जमा किए गए दस्तावेजों से पूरी तरह मेल खाना चाहिए। अगर नया नाम पुराने रिकॉर्ड से अलग निकला, तो UIDAI रिक्वेस्ट को सीधे रिजेक्ट कर सकता है, इसलिए एफिडेविट में सही जानकारी भरना बहुत जरूरी होगा।

इस कैटेगरी की एक राहत वाली बात भी है। क्योंकि गलती आवेदक की नहीं, ऑपरेटर की होती है, इसलिए इस तरह के सुधार को आधार में मिलने वाले सीमित मुफ्त नाम-बदलाव के मौकों में नहीं जोड़ा जाता। यानी ऑपरेटर एरर सुधारने के बाद भी आवेदक के पास नाम में वाकई बदलाव करने के लिए उसके अपने मौके पूरे बचे रहते हैं।

शादी या तलाक के बाद सरनेम बदलने के लिए Annexure D जरूरी

शादी या तलाक के बाद सरनेम बदलना चाहने वालों के लिए UIDAI ने अलग से Annexure D एफिडेविट तय किया है। इस एफिडेविट के साथ पहचान पत्र जमा करना होगा, और इसमें साफ तौर पर लिखना होगा कि यह बदलाव सिर्फ शादी या तलाक की वजह से हो रहा है, किसी और वजह से नहीं। जिनके पास रजिस्टर्ड मैरिज सर्टिफिकेट है, वे एफिडेविट के बदले उसे भी जमा कर सकते हैं।

इसी कैटेगरी में जेंडर बदलने के बाद नाम बदलने का विकल्प भी रखा गया है, जिसके लिए पहचान पत्र देना होगा। UIDAI ने इसे अलग से रखा है क्योंकि इसमें नाम के साथ पहचान से जुड़ी अन्य जानकारी भी बदलती है, इसलिए दस्तावेजी पुष्टि की शर्त यहां भी लागू होगी।

कैपिटल लेटर, डॉट्स की गलती बिना दस्तावेज सुधरेगी, उर्फ नाम के लिए एफिडेविट

नाम में रैंडम कैपिटल लेटर्स को सही करना, जैसे ‘RaMesh’ को ‘Ramesh’ लिखना, या नाम से बेवजह के डॉट्स हटाना, इन दोनों बदलावों के लिए किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। UIDAI के मुताबिक यह सिर्फ फॉर्मेटिंग की गलती है, इसलिए इसे सबसे हल्की कैटेगरी में रखा गया है।

वहीं जिन लोगों के आधार में ‘उर्फ’ या ‘अलिआस’ के साथ दो नाम दर्ज हैं और वे उनमें से एक ही नाम रखना चाहते हैं, उन्हें एफिडेविट देना होगा। वयस्कों के लिए Annexure E और बच्चों के लिए Annexure F फॉर्म तय किया गया है, साथ में सहायक दस्तावेज भी जमा करने होंगे। UIDAI ने यह भी साफ किया है कि आधार में अब किसी भी व्यक्ति के नाम के साथ मिलिट्री रैंक या सरकारी पद जोड़ने की इजाजत नहीं होगी।

पूरा नाम बदलने पर गजट नोटिफिकेशन के बिना अपडेट नहीं होगा

अगर कोई व्यक्ति अपना पूरा नाम ही बदल रहा है, या ऐसा बदलाव कर रहा है जिससे उसकी मूल पहचान बदल जाती है, तो UIDAI इसे ‘मेजर नेम चेंज’ मानेगा। इस कैटेगरी में केंद्र या राज्य सरकार का गजट नोटिफिकेशन देना अनिवार्य कर दिया गया है, साथ में पहचान पत्र भी जमा करना होगा। पहले इस तरह के बदलाव में भी सिर्फ रेजिडेंशियल प्रूफ से काम चल जाता था, जिससे फर्जी तरीके से नाम बदलवाने की शिकायतें मिलती रही थीं।

गजट नोटिफिकेशन जमा होने के बाद UIDAI उसकी तुलना आवेदक के पुराने आधार रिकॉर्ड से करेगा, और सभी दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही नया नाम अपडेट होगा। UIDAI का कहना है कि यह सबसे संवेदनशील कैटेगरी है, क्योंकि इसमें व्यक्ति की मूल पहचान बदल रही होती है, इसलिए यहां जांच भी सबसे सख्त रखी गई है।

मेजर नेम चेंज और एफिडेविट वाली बाकी कैटेगरी में एक और फर्क है। स्पेलिंग सुधार और फॉर्मेटिंग जैसी हल्की गलतियां माइ-आधार पोर्टल से घर बैठे ऑनलाइन सुधारी जा सकती हैं, लेकिन एफिडेविट या गजट नोटिफिकेशन जैसे दस्तावेज वाले मामलों में आवेदक को नजदीकी आधार सेवा केंद्र या एनरोलमेंट सेंटर जाकर ही आवेदन जमा करना होगा, क्योंकि इनकी पुष्टि अधिकारी के स्तर पर मैनुअल तरीके से होती है।

क्यों सख्त हुए नियम, आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर

UIDAI के मुताबिक पिछले कुछ समय में ऐसे मामले सामने आए, जहां लोगों ने कमजोर दस्तावेजों के सहारे आधार में नाम बदलकर पहचान छिपाने या फर्जीवाड़ा करने की कोशिश की। चूंकि आधार अब बैंकिंग, टैक्स, पासपोर्ट, वोटर ID और सरकारी योजनाओं जैसी जरूरी सेवाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए नाम में हुई कोई भी गलत एंट्री आगे कई दस्तावेजों में गड़बड़ी पैदा कर सकती थी।

नए नियमों का मकसद इसी तरह की गड़बड़ियों पर रोक लगाना है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के जरिए सब्सिडी और सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे आधार से जुड़े बैंक खातों में पहुंचता है, इसलिए किसी एक व्यक्ति के नाम पर बिना पुष्टि के कई तरह की एंट्री होना सिस्टम के लिए जोखिम बन सकता था, और यही बात नए नियमों को सख्त बनाने की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।

आम आवेदकों के लिए सबसे बड़ा फर्क यह है कि अब आवेदन से पहले यह तय करना जरूरी होगा कि उनका मामला किस कैटेगरी में आता है, क्योंकि गलत फॉर्म या अधूरे दस्तावेज के साथ भेजी गई रिक्वेस्ट सीधे रिजेक्ट हो सकती है। इसलिए आवेदन करने से पहले अपने पहचान पत्र, मैरिज सर्टिफिकेट या गजट नोटिफिकेशन जैसे दस्तावेजों की स्कैन कॉपी पहले से तैयार रखना फायदेमंद रहेगा, ताकि केंद्र पर या ऑनलाइन फॉर्म भरते समय समय बर्बाद न हो।

यह भी ध्यान रखना होगा कि दस्तावेज में दर्ज नाम और आवेदन में लिखा जा रहा नया नाम, दोनों पूरी तरह एक जैसे हों, स्पेलिंग का हल्का फर्क भी रिजेक्शन की वजह बन सकता है। UIDAI ने आधार से जुड़ी अपनी पिछली सर्विस अपडेट की तरह ही इस बार भी साफ कर दिया है कि दस्तावेज सही और पूरे होने पर ही अपडेट प्रोसेस आगे बढ़ेगा।

जिन लोगों के आधार में पहले से ही चेहरे की पहचान जैसी नई तकनीक से जुड़ी सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं, उनके लिए भी दस्तावेजों का मेल खाना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। ज्यादा जानकारी और सही फॉर्म डाउनलोड करने के लिए आवेदक UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरी प्रक्रिया देख सकते हैं।

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सांवरिया सेठ सिंह

थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।

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