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UPI पर चार्ज लगा तो 83% दुकानदार नाराज, ग्राहकों के 86% भी कैश-कार्ड की तरफ लौटने को तैयार

15 अक्टूबर से ₹2,000 से ऊपर के UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% चार्ज लगने जा रहा है। लोकलसर्कल्स के UPI MDR Survey में सामने आया है कि 83% दुकानदार यह चार्ज खुद भरने को तैयार नहीं हैं, और अगर बोझ ग्राहकों पर डाला गया तो 86% लोग UPI छोड़ सकते हैं।

लोकलसर्कल्स के इस UPI MDR Survey ने देश के 242 जिलों में 32,000 से ज्यादा कारोबारियों से बात की। सर्वे में सामने आया कि नए नियम के तहत लगने वाले 0.4% के मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर दुकानदारों में भारी नाराजगी है। वहीं दूसरी ओर ग्राहकों से भी पूछा गया कि अगर यह चार्ज उन पर डाला गया तो वे क्या करेंगे, और इसके जवाब भी कारोबारियों के लिए राहत की खबर नहीं हैं।

83% दुकानदार 0.4% MDR खुद भरने को तैयार नहीं

सर्वे के मुताबिक सिर्फ 17% मर्चेंट्स ही 0.4% MDR का बोझ खुद उठाने के लिए तैयार हैं। बाकी 83% दुकानदार इस शुल्क को अपनी जेब से देने के मूड में नहीं हैं। इनमें से 41% मर्चेंट्स ने साफ कह दिया कि वे कोई भी चार्ज नहीं देंगे, जबकि 15% मर्चेंट्स सिर्फ 0.04% तक ही शुल्क देने की बात मान रहे हैं।

सर्वे में शामिल 9% व्यवसायियों ने तो यह भी कहा कि वे UPI पेमेंट स्वीकार ही नहीं करते, इसलिए उनके लिए यह सवाल बेमानी है। इस आंकड़े से साफ है कि नया MDR नियम लागू होने से पहले ही कारोबारियों के बीच इसे लेकर कितनी असहजता है।

छोटे और मझोले कारोबारियों, खासकर किराना और रोजमर्रा के सामान बेचने वाले दुकानदारों के लिए यह चिंता और बड़ी है, क्योंकि इस तरह के कारोबार में मुनाफे का मार्जिन वैसे ही बहुत पतला होता है। ऐसे दुकानदारों का कहना है कि अगर हर बड़े पेमेंट पर 0.4% अपनी जेब से देना पड़ा, तो महीने के आखिर में यह रकम छोटी नहीं रह जाती, और इसी वजह से बड़ी संख्या में व्यापारी इस चार्ज को सीधे नामंजूर कर रहे हैं।

ग्राहकों पर चार्ज डाला तो 86% छोड़ सकते हैं UPI पेमेंट

लोकलसर्कल्स के एक अन्य सर्वे में 291 जिलों के 67,000 से ज्यादा UPI यूजर्स से पूछा गया कि अगर दुकानदार MDR चार्ज उनसे वसूलते हैं, तो वे ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट कैसे करेंगे। 86% यूजर्स ने कहा कि वे ऐसी सूरत में UPI के बजाय कोई दूसरा जरिया अपनाएंगे।

जवाब देने वालों में 26% ने कहा कि वे नकद पेमेंट करेंगे, जबकि इतने ही यानी 26% लोगों ने क्रेडिट कार्ड को विकल्प बताया। 13% ने डेबिट कार्ड चुनने की बात कही। सिर्फ 11% यूजर्स ऐसे थे जो एक्स्ट्रा चार्ज देकर भी UPI से पेमेंट जारी रखने को तैयार दिखे। 9% ग्राहकों ने कहा कि वे ऐसा कोई विकल्प तलाशेंगे जिसमें चार्ज न लगे, 4% बैंक ट्रांसफर करेंगे, 2% ने खरीदारी ही टाल देने की बात कही, और 4% ने इस पर कोई राय नहीं दी।

यह ट्रेंड अचानक सामने नहीं आया है। इससे पहले अगस्त 2026 में हुए लोकलसर्कल्स के एक सर्वे में भी यही संकेत मिले थे, जिसमें करीब आधे से ज्यादा UPI यूजर्स ने कहा था कि अगर बड़े पेमेंट पर चार्ज वसूला गया तो वे उस ट्रांजैक्शन के लिए UPI से दूरी बना लेंगे। यानी ग्राहकों की यह सोच कई महीनों से लगातार बनी हुई है, और 15 अक्टूबर की डेडलाइन नजदीक आने के साथ यह रुझान और पुख्ता होता दिख रहा है।

No UPI Day Protest

संख्या में कम, लेकिन रकम में ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट की बड़ी हिस्सेदारी

सर्वे के मुताबिक दुकानदारों को होने वाले कुल UPI पेमेंट में ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन गिनती के लिहाज से 5% से भी कम हैं। लेकिन जब बात रकम की होती है, तो यह आंकड़ा काफी बड़ा हो जाता है, क्योंकि कुल पैसों का करीब 67% हिस्सा इन्हीं बड़े पेमेंट्स से आता है।

यह रकम हर महीने लगभग ₹6 लाख करोड़ के बराबर बैठती है, जो देश में होने वाले कुल UPI लेनदेन की वैल्यू का करीब 20% है। यानी बड़े ट्रांजैक्शन भले ही संख्या में कम हों, बाजार में घूमने वाले कुल पैसों का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं के जरिए चलता है, इसलिए नए नियम का असर सिर्फ कागजी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहने वाला।

No UPI Day Protest-2 | No UPI Day Fake News

दुकानदारों के सामने अब बचे हैं ये सीमित रास्ते

सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि 83% व्यापारी खुद MDR चुकाने को तैयार नहीं हैं, इसलिए उनके पास चंद ही विकल्प बचते हैं। वे चाहें तो यह शुल्क खुलेआम सरचार्ज के रूप में ग्राहक से वसूल सकते हैं, या प्रॉडक्ट और सर्विस की कीमतों में इसे छिपे तौर पर जोड़ सकते हैं। तीसरा रास्ता यह है कि वे ग्राहकों को नकद, कार्ड या किसी अन्य पेमेंट मोड की ओर मोड़ने की कोशिश करें।

हालांकि तीनों ही रास्तों में जोखिम है। सरचार्ज सीधे लगाने पर ग्राहक नाराज हो सकते हैं और दुकान छोड़ भी सकते हैं, जबकि कीमतों में छिपाकर जोड़ने पर प्रतिस्पर्धा में नुकसान हो सकता है। इसी महीने की शुरुआत में कुछ कारोबारी संगठनों ने UPI पेमेंट को लेकर प्रतीकात्मक विरोध भी दर्ज कराया था, जो इसी नाराजगी का एक नतीजा था।

ग्राहकों के लिहाज से भी एक अहम बात समझनी जरूरी है। अगर कोई दुकानदार सीधे बिल में अलग से MDR सरचार्ज जोड़ता है, तो उसे पेमेंट करने से पहले ही इसकी जानकारी ग्राहक को देनी होगी, ताकि बाद में कोई विवाद न हो।

जो ग्राहक ₹2,000 से ऊपर की खरीदारी कर रहे हैं, वे बिल बनने से पहले दुकानदार से यह जरूर पूछ सकते हैं कि क्या UPI पेमेंट पर कोई अतिरिक्त चार्ज लगेगा, जिससे सही पेमेंट मोड चुनने का फैसला पहले ही लिया जा सके।

15 अक्टूबर से क्या बदलेगा, पूरा नियम समझें

NPCI के मौजूदा फैसले के मुताबिक 15 अक्टूबर से मर्चेंट को होने वाले ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर 0.4% MDR लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। आम लोगों के बीच यानी पीयर-टू-पीयर UPI ट्रांसफर पर यह चार्ज नहीं लगेगा, और छोटे दुकानदारों की एक तय कैटेगरी को भी इससे बाहर रखा गया है।

करीब छह साल तक पूरी तरह मुफ्त रहने के बाद UPI पर यह पहला बड़ा चार्ज होगा, इसलिए कारोबारी संगठनों में इसे लेकर पहले से ही असंतोष था। गौर करने वाली बात यह भी है कि क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर बैंकों को मिलने वाला MDR अक्सर 1% से 2% के बीच रहता है, जबकि UPI पर लगने वाला 0.4% चार्ज उसके मुकाबले काफी कम है।

फिर भी, छह साल तक जिस सुविधा को पूरी तरह मुफ्त मानकर इस्तेमाल किया गया, उसमें अचानक कोई भी चार्ज जुड़ना दुकानदारों और ग्राहकों दोनों को असहज कर रहा है।

UPI को चलाने वाली एजेंसी NPCI और इससे जुड़े बैंकों का तर्क रहा है कि बिना किसी शुल्क के लगातार बढ़ते लेनदेन की तकनीकी लागत और सुरक्षा ढांचे को बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा था, इसलिए बड़े व्यावसायिक पेमेंट पर छोटा सा चार्ज लगाना जरूरी समझा गया।

हालांकि शुरुआत से ही आम और छोटे ट्रांजैक्शन, यानी पीयर-टू-पीयर ट्रांसफर और ₹2,000 से कम के पेमेंट, को इस चार्ज से बाहर रखा गया है, ताकि रोजमर्रा के छोटे पेमेंट करने वाले आम लोगों पर कोई सीधा असर न पड़े। इस नए नियम की पूरी डिटेल पहले ही सामने आ चुकी है, और अब लोकलसर्कल्स के इस सर्वे ने यह भी साफ कर दिया है कि जमीन पर इसे लागू करना दुकानदारों और ग्राहकों दोनों के लिए आसान नहीं होगा।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बड़े मर्चेंट्स और छोटे दुकानदार इस चार्ज को लेकर आखिर में किस रास्ते पर चलते हैं, और क्या ग्राहकों का रुझान वाकई नकद व कार्ड की तरफ मुड़ता है या सब कुछ धीरे-धीरे पहले जैसा ही सामान्य हो जाता है।

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सांवरिया सेठ सिंह

थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।

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