जोधपुर के उम्मेद उद्यान पर खर्च होंगे 15 करोड़, राजस्थान हाईकोर्ट में पेश हुई प्रदेश के 3319 पार्कों की रखरखाव योजना
रिपोर्ट के मुताबिक, पार्कों के रखरखाव के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और नई व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत 5 हजार वर्ग मीटर से बड़े आकार के पार्कों का रखरखाव संबंधित नगरीय निकाय खुद करेंगे।

राजस्थान में सार्वजनिक पार्कों के रखरखाव और विकास को लेकर राज्य सरकार ने Rajasthan High Court में अपनी विस्तृत योजना पेश की है। सरकार की ओर से बताया गया कि शहरी निकायों के 3,319 पार्कों का सर्वे कर राज्यस्तरीय डेटाबेस तैयार कर लिया गया है। इसी कड़ी में जोधपुर के ऐतिहासिक उम्मेद उद्यान के कायाकल्प के लिए 15 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान भी तैयार किया गया है, जिसके तहत पार्कों के रखरखाव और सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम किया जाएगा।
शहरों में बढ़ती आबादी और कंक्रीट के जंगल के बीच पार्क न सिर्फ हरियाली का स्रोत हैं, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों के लिए सुबह-शाम की सैर, व्यायाम और सामाजिक मिलन का भी प्रमुख स्थान हैं। ऐसे में इनकी बिगड़ती हालत को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, जिस पर अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने ठोस कदम उठाना शुरू किया है।
राज्य के 3319 पार्कों का तैयार हुआ डेटाबेस, जोधपुर में मिले 504 पार्क
राजस्थान हाईकोर्ट में पेश की गई अनुपालना रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के सभी शहरी निकायों में मौजूद पार्कों का विस्तृत सर्वे कराया गया है। इस सर्वे में प्रदेशभर के 3,319 पार्क चिन्हित किए गए और इनका राज्यस्तरीय डेटाबेस तैयार कर लिया गया है। यह डेटाबेस आगे पार्कों के रखरखाव, सुविधाओं और जरूरतों की योजना बनाने में काम आएगा।
जोधपुर नगर निगम के अपने सर्वे में शहर में 504 पार्क मिले हैं, जिनमें से 32 बड़े पार्क और 472 छोटे पार्क हैं। इस आंकड़े से साफ है कि शहर में छोटे पार्कों की संख्या कहीं ज्यादा है, जिनकी रोजाना की देखरेख एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
हाईकोर्ट में पेश हुई रखरखाव की योजना, जस्टिस माथुर-शर्मा की बेंच ने सुनी रिपोर्ट
जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चन्द्रशेखर शर्मा की डिवीजन बेंच के सामने अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने सरकार की ओर से अनुपालना और प्रगति रिपोर्ट पेश की। यह रिपोर्ट हाईकोर्ट के पहले दिए गए आदेश के जवाब में दाखिल की गई, जिसमें राज्य में पार्कों की बिगड़ती हालत और रखरखाव में लापरवाही को लेकर सवाल उठाए गए थे। सरकार ने बेंच को बताया कि पार्कों की स्थिति सुधारने के लिए ठोस कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया गया है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
5 हजार वर्ग मीटर से बड़े पार्कों का रखरखाव करेगी नगरीय निकाय, छोटे पार्कों को मिलेंगे RWA और मोहल्ला समितियां
रिपोर्ट के मुताबिक, पार्कों के रखरखाव के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और नई व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत 5 हजार वर्ग मीटर से बड़े आकार के पार्कों का रखरखाव संबंधित नगरीय निकाय खुद करेंगे, क्योंकि इतने बड़े पार्कों की देखरेख के लिए संसाधन और तकनीकी क्षमता निकायों के पास ही मौजूद है। इससे छोटे आकार के पार्कों की सफाई, बागवानी और रोज की देखरेख के लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), मोहल्ला विकास समितियों और पंजीकृत संस्थाओं को जोड़ा जाएगा।
सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर समितियों को जिम्मेदारी देने से पार्कों की निगरानी बेहतर होगी और शिकायतों का निपटारा भी तेजी से हो सकेगा। दरअसल अभी तक बड़ी संख्या में छोटे पार्कों की नियमित सफाई और बागवानी सिर्फ निकायों के भरोसे होने की वजह से अक्सर अनदेखी हो जाती थी, जिससे कई मोहल्लों में पार्क खराब हालत में पहुंच गए थे। स्थानीय समितियों को जोड़ने से निकायों पर बोझ भी कम होगा और रहवासियों की सीधी भागीदारी से पार्कों की देखरेख में निरंतरता बनी रहेगी।
तीन साल के एमओयू से जुड़ेंगी संस्थाएं, तय होगी मेंटेनेंस की नई व्यवस्था
छोटे पार्कों के रखरखाव में शामिल होने वाली आरडब्ल्यूए, मोहल्ला विकास समितियों और अन्य पंजीकृत संस्थाओं के साथ तीन साल की अवधि का एमओयू किया जाएगा। इस एमओयू में संस्थाओं की जिम्मेदारियां, रखरखाव के मानक और निगरानी की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से तय की जाएगी।
सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और पार्कों के रखरखाव पर होने वाले सरकारी खर्च पर भी नियंत्रण रहेगा। जयपुर के वर्ल्ड हेरिटेज दर्जे को लेकर हाईकोर्ट की सख्ती की तरह ही अब पार्कों के मामले में भी अदालत लगातार सरकार से जवाबदेही मांग रही है।
जोधपुर में 32 बड़े और 472 छोटे पार्क, सर्वे में सामने आई पूरी तस्वीर
जोधपुर नगर निगम की ओर से कराए गए सर्वे में शहर के कुल 504 पार्कों की स्थिति का आकलन किया गया। इनमें से 32 पार्क बड़े आकार के हैं, जबकि 472 पार्क छोटे आकार के हैं। इस सर्वे के आधार पर ही आगे की रखरखाव योजना और संसाधनों का बंटवारा तय किया जाएगा। बड़े पार्कों की जिम्मेदारी सीधे निगम के पास रहेगी, जबकि छोटे पार्कों के लिए स्थानीय समितियों की मदद ली जाएगी।
स्वच्छता ही सेवा अभियान में सफाई हुए 300 से ज्यादा पार्क, निकला 465 टन कचरा
स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान के तहत जोधपुर में 19 से 21 सितंबर तक विशेष सफाई अभियान चलाया गया। इस अभियान में 2 हजार से ज्यादा सफाई कर्मचारियों और 50 प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। तीन दिन के इस अभियान के दौरान शहर के 300 से ज्यादा पार्कों की सफाई की गई, जिसमें 465 टन से अधिक कचरा, प्लास्टिक और मलबे का निस्तारण किया गया। यह अभियान जोधपुर में पार्कों की सफाई को लेकर प्रशासन की गंभीरता को दिखाता है और आगे इसी तरह के नियमित अभियानों की जरूरत को भी रेखांकित करता है।
ऐतिहासिक उम्मेद उद्यान के लिए तैयार हुआ 15 करोड़ का मास्टर प्लान
जोधपुर के ऐतिहासिक उम्मेद उद्यान के कायाकल्प के लिए 15 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। करीब डेढ़ लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला यह उद्यान शहर की पुरानी धरोहरों में से एक माना जाता है और लंबे समय से इसके जीर्णोद्धार की मांग उठती रही है। मास्टर प्लान के तहत उद्यान के हेरिटेज स्वरूप को बनाए रखते हुए इसे आम लोगों के लिए और बेहतर बनाने पर फोकस रहेगा।
उम्मेद उद्यान जोधपुर के सबसे पुराने और बड़े उद्यानों में शुमार है और शहर के इतिहास व वास्तुकला से जुड़ा होने के कारण इसे संरक्षित धरोहर स्थल की तरह भी देखा जाता है। लंबे समय से रखरखाव की कमी के चलते इसकी कई हेरिटेज संरचनाएं जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुंच गई थीं, जिसके बाद प्रशासन ने इसके व्यवस्थित जीर्णोद्धार का फैसला लिया।
हेरिटेज संरचनाओं, पार्किंग और लैंडस्केपिंग पर खर्च होंगे करोड़ों रुपए
मास्टर प्लान के मुताबिक, उम्मेद उद्यान में मौजूद हेरिटेज संरचनाओं के संरक्षण पर 5.45 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। पार्किंग और सड़कों के विकास पर 3.15 करोड़ रुपए, लैंडस्केपिंग एवं पौधारोपण पर 2.06 करोड़ रुपए, जबकि वॉटर फीचर्स पर 1.58 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान रखा गया है। इस तरह मास्टर प्लान में उद्यान के हर पहलू को शामिल किया गया है, ताकि कायाकल्प के बाद यह उद्यान जोधपुर के लिए एक आकर्षक और संरक्षित पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित हो सके।
पांच साल के संचालन-रखरखाव पर भी तय हुआ बजट, माली-विशेषज्ञों की होगी नियुक्ति
मास्टर प्लान में सिर्फ पुनर्निर्माण ही नहीं, बल्कि आगे की देखरेख को भी शामिल किया गया है। उद्यान के पांच साल के संचालन एवं रखरखाव के लिए 2.50 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। इसके साथ ही रिपोर्ट में उद्यान के नियमित रखरखाव के लिए माली और विशेषज्ञ कर्मचारियों की व्यवस्था करने की जानकारी भी दर्ज की गई है। इससे उम्मेद उद्यान के रखरखाव में निरंतरता बनी रहेगी और भविष्य में इसकी स्थिति फिर से बिगड़ने की आशंका कम होगी।
हाईकोर्ट ने मांगी अगली सुनवाई में कार्ययोजना, जारी रहेगी निगरानी
राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार की रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए जोधपुर के उद्यानों के रखरखाव की विस्तृत कार्ययोजना अगली सुनवाई पर पेश करने के निर्देश दिए हैं। इससे साफ है कि अदालत इस मामले में सिर्फ जानकारी लेने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लागू की जा रही योजनाओं की प्रगति पर भी लगातार नजर बनाए रखेगी।
प्रदेशभर में बन रहे 3,319 पार्कों के डेटाबेस और जोधपुर के उम्मेद उद्यान के मास्टर प्लान को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि आने वाले महीनों में शहरों के पार्कों की सूरत में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हाईकोर्ट की यह सख्ती सिर्फ जोधपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर प्रदेश के अन्य शहरों के पार्कों और सार्वजनिक स्थलों के रखरखाव पर भी पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि राज्यस्तरीय डेटाबेस के आधार पर आगे हर शहर की स्थिति की समीक्षा की जा सकेगी।
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