राजस्थान में Building Bylaws में फिर बदलाव की तैयारी: भू-खंड सीमा घटेगी, फायर ब्रिगेड का रास्ता होगा संकरा
गौर करने वाली बात यह है कि इनमें से ज्यादातर नियमों में बदलाव मौजूदा सरकार के कार्यकाल में ही किए गए थे, और अब उन्हीं नियमों में दोबारा संशोधन की मांग उठ रही है। यानी जो नियम कुछ समय पहले ही सुरक्षा और नियोजन को ध्यान में रखकर तय किए गए थे, उन्हें डवलपर्स अब व्यावहारिक दिक्कतों का हवाला देते हुए फिर बदलवाना चाहते हैं।

राजस्थान में एक बार फिर Building Bylaws यानी भवन निर्माण नियमों में बदलाव की तैयारी चल रही है। इसके तहत बहुमंजिला इमारतों के लिए न्यूनतम भू-खंड का आकार 1000 वर्गमीटर से घटाकर 750 वर्गमीटर करने, एक से ज्यादा भू-खंड जोड़ने पर सेटबैक के नियम बदलने, स्टिल्ट पार्किंग की ऊंचाई बढ़ाने और फायर ब्रिगेड के रास्ते की चौड़ाई घटाने सहित कई प्रस्ताव दिए गए हैं। इन प्रस्तावों पर नगर नियोजन विभाग ने मंथन शुरू कर दिया है।
टोडार और क्रेडाई ने भेजे बिल्डिंग बायलॉज में बदलाव के प्रस्ताव
टाउनशिप डवलपर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान यानी टोडार और कन्फडेरेशन ऑफ रियल एस्टेट डवलपर्स एसोसिएशन यानी क्रेडाई की ओर से भवन निर्माण नियमों में बदलाव के प्रस्ताव नगर नियोजन विभाग को भेजे गए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इनमें से ज्यादातर नियमों में बदलाव मौजूदा सरकार के कार्यकाल में ही किए गए थे, और अब उन्हीं नियमों में दोबारा संशोधन की मांग उठ रही है।
यानी जो नियम कुछ समय पहले ही सुरक्षा और नियोजन को ध्यान में रखकर तय किए गए थे, उन्हें डवलपर्स अब व्यावहारिक दिक्कतों का हवाला देते हुए फिर बदलवाना चाहते हैं, जिससे यह चर्चा एक बार फिर गरमा गई है।
नगर नियोजन विभाग ने शुरू किया प्रस्तावों पर मंथन
संस्थाओं के ये प्रस्ताव फिलहाल नगर नियोजन विभाग के पास हैं, और अब इन पर यूडीएच यानी नगरीय विकास एवं आवासन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा होनी है। विभाग का कहना है कि प्रस्तावों के व्यावहारिक पहलुओं के साथ-साथ इनसे जनहित और सुरक्षा पर पड़ने वाले असर पर भी गहराई से मंथन किया जाएगा, ताकि कोई भी बदलाव करने से पहले उसके सभी पहलुओं की ठीक से जांच हो सके।
भू-खंड जोड़ने पर बदलेंगे सेटबैक के नियम
प्रस्तावों में एक से ज्यादा भू-खंडों को जोड़कर बड़ा भू-खंड बनाने यानी पुनर्गठित करने पर सेटबैक के नियम बदलने की मांग की गई है। अभी नियम यह है कि भू-खंडों को जोड़ने के बाद बने नए, बड़े भू-खंड के आकार के हिसाब से ही सेटबैक छोड़ना पड़ता है। डवलपर्स चाहते हैं कि इस नियम में ढील दी जाए, जिससे उनके लिए निर्माण की योजना बनाना आसान हो सके।
सेटबैक बदलाव से खुली जगह और सुरक्षा को लेकर खड़ी होगी चुनौती
विशेषज्ञों के मुताबिक सेटबैक के नियमों में बदलाव के बाद इमारत में पर्याप्त खुली जगह, हवा-रोशनी और फायर ब्रिगेड की आवाजाही के लिए जरूरी जगह बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। साथ ही निर्माण की बढ़ती सघनता के बीच सुरक्षा मानकों और भवन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा, वरना घनी आबादी वाले इलाकों में दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
बहुमंजिला इमारतों के लिए भू-खंड की न्यूनतम सीमा होगी कम
प्रस्तावों में बहुमंजिला इमारत बनाने के लिए न्यूनतम भू-खंड का आकार 1000 वर्गमीटर से घटाकर 750 वर्गमीटर करने की मांग भी शामिल है। अभी नियम के मुताबिक एक हजार वर्गमीटर से छोटे भू-खंडों पर बहुमंजिला इमारत बनाने की अनुमति नहीं है, ताकि सामान्य कॉलोनियों में ऊंची-ऊंची इमारतें न बन सकें और इलाके का घनत्व नियंत्रित रहे।
अगर यह सीमा घटाकर 750 वर्गमीटर कर दी जाती है, तो उन कई छोटे भू-खंडों पर भी बहुमंजिला इमारतें बन सकेंगी, जो अभी तक इस दायरे से बाहर थे, जिससे शहरों में निर्माण का दायरा काफी बढ़ सकता है।
छोटे भू-खंड पर पार्किंग और फायर ब्रिगेड पहुंच बनेगी चुनौती
अगर न्यूनतम भू-खंड सीमा घटाई जाती है, तो छोटे भू-खंड पर भी बहुमंजिला इमारतें बन सकेंगी। ऐसे में इन छोटे भू-खंडों पर वाहन पार्किंग और फायर ब्रिगेड की पहुंच के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना विशेषज्ञों के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि जगह जितनी कम होगी, सुरक्षा इंतजामों में उतनी ही मुश्किल आएगी।
फायर ब्रिगेड वाहनों के लिए गलियारा डेढ़ मीटर होगा कम
मौजूदा नियमों के तहत इमारतों में फायर ब्रिगेड के वाहनों की आवाजाही के लिए चारों ओर छह मीटर चौड़ा रास्ता यानी गलियारा छोड़ने का प्रावधान है। अब इसे घटाकर 4.50 मीटर करने का प्रस्ताव दिया गया है, यानी मौजूदा चौड़ाई से करीब डेढ़ मीटर कम।
संकरे रास्ते से बचाव कार्य में आ सकती है दिक्कत
विशेषज्ञों का कहना है कि रास्ता संकरा होने से फायर ब्रिगेड के वाहनों को इमारत के भीतर मुड़ने में दिक्कत आ सकती है, जिससे आग लगने की स्थिति में बचाव कार्य भी प्रभावित हो सकता है। लखनऊ में हुए आग के हादसे के बाद देशभर में इमारतों की फायर सेफ्टी को लेकर सख्ती बढ़ाई गई थी, ऐसे में राजस्थान में फायर ब्रिगेड के रास्ते की चौड़ाई घटाने का यह प्रस्ताव सुरक्षा के लिहाज से सवालों के घेरे में आ सकता है।
स्टिल्ट पार्किंग की ऊंचाई साढ़े चार मीटर करने का प्रस्ताव
प्रस्तावों में इमारतों की स्टिल्ट पार्किंग की ऊंचाई तीन मीटर से बढ़ाकर 4.50 मीटर करने की मांग भी शामिल है। डवलपर्स का तर्क है कि मौजूदा तीन मीटर की ऊंचाई कई बार बड़े वाहनों की पार्किंग के लिए पर्याप्त नहीं होती, इसलिए इसे बढ़ाने की जरूरत है।
पहले छह मीटर से घटाकर तीन मीटर की गई थी ऊंचाई, जानें वजह
गौरतलब है कि स्टिल्ट पार्किंग की ऊंचाई पहले छह मीटर तक रखी जाती थी, जिसे बाद में घटाकर तीन मीटर कर दिया गया था। यह बदलाव इसलिए किया गया था क्योंकि आशंका थी कि डवलपर्स पार्किंग के लिए तय जगह की ज्यादा ऊंचाई का इस्तेमाल पार्किंग के अलावा दूसरे कामों में भी कर सकते हैं।
अब ऊंचाई फिर बढ़ाने के प्रस्ताव के बाद यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि पार्किंग के लिए तय जगह सिर्फ वाहन खड़े करने के लिए ही इस्तेमाल हो, ताकि बढ़ते वाहनों के दबाव के बीच सड़क पर पार्किंग की समस्या न बढ़े और यातायात सुचारू बना रहे।
मौजूदा नियम और प्रस्तावित बदलाव, एक नजर में
| प्रावधान | मौजूदा नियम | प्रस्तावित बदलाव |
|---|---|---|
| बहुमंजिला इमारत के लिए न्यूनतम भू-खंड | 1000 वर्गमीटर | 750 वर्गमीटर |
| भू-खंड जोड़ने पर सेटबैक | नए बड़े भू-खंड के आकार अनुसार | नियम में ढील का प्रस्ताव |
| फायर ब्रिगेड गलियारा (चारों ओर) | 6 मीटर | 4.50 मीटर |
| स्टिल्ट पार्किंग ऊंचाई | 3 मीटर (पहले 6 मीटर थी) | 4.50 मीटर |
मुख्य नगर नियोजक शशिकांत ने बताई आगे की प्रक्रिया
राजस्थान के मुख्य नगर नियोजक शशिकांत ने बताया कि टोडार और क्रेडाई की ओर से बिल्डिंग बायलॉज में बदलाव के प्रस्ताव मिले हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों पर चर्चा कर यह देखा जाएगा कि ये कितने व्यावहारिक हैं। उनके मुताबिक नियमों में बदलाव पर विचार करते समय जनहित और सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है, जितना डवलपर्स की सहूलियत का। उन्होंने साफ किया कि विभाग किसी भी प्रस्ताव को जल्दबाजी में मंजूरी नहीं देगा, बल्कि यूडीएच अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद ही आगे का रास्ता तय किया जाएगा।
जनहित और सुरक्षा पर भी होगा मंथन, जानें आगे क्या होगा
फिलहाल सभी प्रस्ताव नगर नियोजन विभाग के पास विचाराधीन हैं, और इन पर यूडीएच अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा होनी बाकी है। प्रॉपर्टी से जुड़े नियमों और दरों में बदलाव का सीधा असर आम खरीदारों की जेब पर भी पड़ता रहा है, ऐसे में बिल्डिंग बायलॉज में यह संभावित बदलाव डवलपर्स के साथ-साथ आम निवासियों के लिए भी अहम माना जा रहा है।
अंतिम फैसला आने में अभी समय लग सकता है, लेकिन इतना तय है कि किसी भी बदलाव से पहले सुरक्षा मानकों पर गहराई से विचार किया जाएगा। जिन लोगों ने फ्लैट या मकान खरीदने की योजना बना रखी है, उनके लिए भी आने वाले समय में यह जानना जरूरी होगा कि नए नियम लागू होने पर उनकी इमारत में पार्किंग, खुली जगह और फायर सेफ्टी से जुड़े इंतजाम किस तरह बदलते हैं।
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