National

Lucknow fire के बाद नियम नहीं माने तो कोचिंग, होटल और अवैध इमारतों पर सख्त कार्रवाई

मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। वहां से उन्हें 14 दिन के लिए जेल भेज दिया गया। जेल भेजे गए आरोपियों में बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, बिल्डिंग में अलीगंज पेट शॉप एंड क्लीनिक चलाने वाले रामकृष्ण उपाध्याय, हेक्सा थ्रीडी एनिमेशन और हेड हूपर्स इंस्टीट्यूट चलाने वाले तुषाक कृष्णा जायसवाल और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं।

Lucknow fire में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। अलीगंज की जिस इमारत में आग लगी, वह अवैध निकली। सरकार ने SIT जांच बैठाई है, बिल्डिंग गिराने की तैयारी शुरू कर दी है और पूरे प्रदेश में कोचिंग सेंटरों व होटलों पर फायर सेफ्टी जांच तेज कर दी गई है।

Lucknow fire का बड़ा असर

लखनऊ के अलीगंज इलाके में दो मंजिला इमारत में लगी आग ने 15 लोगों की जान ले ली। यह हादसा अब सिर्फ एक आग नहीं रहा। इसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिल्डिंग अवैध निकली। पुराने आदेश सामने आए। जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई शुरू हुई। पूरे प्रदेश में कोचिंग सेंटरों और होटलों पर छापेमारी तेज हो गई।

मंगलवार सुबह 11 बजे हादसे की जांच के लिए SIT और फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने पूरे परिसर की जांच की। मौके से कई सबूत जुटाए गए। टीम बैगों में भरकर सामान अपने साथ ले गई। SIT में IPS प्रवीण कुमार और IAS अमृत अभिजात शामिल हैं।

यह जांच अब सिर्फ आग लगने के कारण तक सीमित नहीं है। जांच इस बात पर भी है कि अवैध इमारत चल कैसे रही थी, उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई और फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी किस स्तर पर हुई।

अवैध बिल्डिंग पर बड़ा एक्शन

Lucknow fire की जांच में पता चला कि जिस इमारत में आग लगी, वह अवैध थी। इस इमारत को लेकर 2016 में गिराने का आदेश हुआ था। बाद में यह आदेश निरस्त कर दिया गया। अब इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बिल्डिंग मालिक को नोटिस जारी किया है। 15 दिन में जवाब मांगा गया है। उसके बाद इमारत गिराने की कार्रवाई होगी। प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि इस बिल्डिंग पर बुलडोजर चलेगा।

यह इमारत रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट कॉलेज के मालिक वीरेंद्र शुक्ला की बताई गई है। पुलिस ने इस मामले में गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। वीरेंद्र शुक्ला समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

बिल्डिंग में क्या-क्या चलता था

जिस इमारत में आग लगी, उसमें कई तरह की गतिविधियां चल रही थीं। यह अलीगंज इलाके की बिल्डिंग थी। बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और पहले फ्लोर पर पेट शॉप और क्लीनिक संचालित थे। दूसरे फ्लोर पर लर्निंग स्पेस नाम की लाइब्रेरी और कोचिंग चल रही थी। वहीं हेड हॉपर स्टूडियो नाम की यूनिट भी चल रही थी, जहां 3D आर्ट प्रोडक्शन और गेम एसेट आउटसोर्सिंग का काम होता था।

यानी यह इमारत बहु-उपयोग वाली बन चुकी थी। सवाल यह है कि क्या इमारत का उपयोग स्वीकृत मानकों के अनुसार हो रहा था। यही बिंदु अब जांच का अहम हिस्सा है।

सरकारी रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति के बीच कितना अंतर था, यह भी सामने आना बाकी है।

शवों का पोस्टमॉर्टम, परिवारों का दर्द

Lucknow fire में मारे गए लोगों के शवों का पोस्टमॉर्टम करीब 7 घंटे तक चला। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर दर्दनाक दृश्य दिखे। पश्चिम बंगाल की अनामिका का शव देखकर उनकी मां बेहोश हो गईं।

Lucknow fire

हादसे के बाद अस्पतालों और पोस्टमॉर्टम हाउस में परिजनों की भीड़ रही। कई परिवार अपने बच्चों, रिश्तेदारों और कमाने वाले सदस्यों को खो चुके हैं। कुछ लोग घायल हैं और उनका इलाज लंबा चल सकता है।

इसी कारण मुआवजे और दीर्घकालीन सहायता की मांग भी अब तेज हो गई है।

आरोपियों पर केस, जेल और जांच

पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। वहां से उन्हें 14 दिन के लिए जेल भेज दिया गया। जेल भेजे गए आरोपियों में बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, बिल्डिंग में अलीगंज पेट शॉप एंड क्लीनिक चलाने वाले रामकृष्ण उपाध्याय, हेक्सा थ्रीडी एनिमेशन और हेड हूपर्स इंस्टीट्यूट चलाने वाले तुषाक कृष्णा जायसवाल और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं।

यह कार्रवाई शुरुआती मानी जा रही है। जांच अभी जारी है। SIT और फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। LDA ने भी शासन को रिपोर्ट भेजी है।

इस रिपोर्ट में तत्कालीन विहित प्राधिकारी, 5 जोनल अफसरों और 18 इंजीनियरों की जवाबदेही तय की गई है। इनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है।

6 अफसर सस्पेंड, 14 पर और कार्रवाई संभव

Lucknow fire के बाद सरकारी अमला भी कार्रवाई की जद में आया है। LDA के 6 अफसरों को सस्पेंड कर दिया गया है। 14 और अफसरों पर कार्रवाई की संभावना बताई गई है। इससे साफ है कि सरकार प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने के दबाव में है।

इस तरह के मामलों में अक्सर बिल्डिंग मालिक और ऑपरेटर सामने आते हैं, लेकिन अब लापरवाही की श्रृंखला में अफसरों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। 2016 में गिराने का आदेश और बाद में उसका निरस्त होना इस मामले का अहम हिस्सा है।

यही कारण है कि Lucknow fire अब भ्रष्टाचार, निगरानी की कमी और मिलीभगत के आरोपों से भी जुड़ गया है।

सीएम योगी की हाईलेवल मीटिंग

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार शाम अफसरों के साथ हाईलेवल मीटिंग की। उन्होंने इस हादसे को बड़ा सबक बताया। कहा कि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं होगा। जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। फायर सेफ्टी केवल नियम का मामला नहीं, मानव जीवन की सुरक्षा का विषय है।

मीटिंग में कई फैसले लिए गए। पूरे प्रदेश में मिशन मोड में फायर सेफ्टी ऑडिट के निर्देश दिए गए। अस्पताल, नर्सिंग होम, मेडिकल कॉलेज, कोचिंग, मॉल और सरकारी भवनों की जांच होगी। हर जिले में विशेष टीम बनाई जाएगी।

यह भी तय हुआ कि पहले जनजागरूकता अभियान चलेगा। उसके बाद नियमानुसार कार्रवाई होगी। अभियान के नाम पर किसी नागरिक का उत्पीड़न न हो, यह निर्देश भी दिया गया।

पूरे प्रदेश में फायर ऑडिट

Lucknow fire के बाद प्रदेश स्तर पर जो सबसे बड़ा असर दिखा, वह फायर ऑडिट अभियान है। सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। व्यावसायिक भवनों में फायर एनओसी साफ तौर पर प्रदर्शित करनी होगी।

आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां नहीं चलेंगी। बेसमेंट में किसी भी हालत में कोचिंग या दूसरी व्यावसायिक गतिविधि नहीं होगी। पार्किंग के लिए स्वीकृत बेसमेंट का उपयोग सिर्फ पार्किंग के लिए ही होगा।

व्यावसायिक भवनों के बिजली लोड की भी जांच होगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर तत्काल सख्त कार्रवाई होगी।

यानी यह हादसा अब राज्यव्यापी प्रशासनिक कार्रवाई का कारण बन चुका है।

48 कोचिंग और 3 होटल सील

प्रदेश में शुरू हुई कार्रवाई का असर तुरंत दिखा। अब तक 48 कोचिंग सेंटर और 3 होटल सील किए जा चुके हैं। इन जगहों पर फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमों ने कई शहरों में जांच शुरू की।

यह कार्रवाई सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं है। Lucknow fire के बाद पूरे प्रदेश में कोचिंग संस्थानों, होटलों और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है।

आने वाले दिनों में सीलिंग और निरीक्षण की संख्या और बढ़ सकती है।

फायर स्टेशन और रिस्पॉन्स टाइम पर फोकस

मुख्यमंत्री ने राहत और बचाव कार्यों की भी समीक्षा की। आपातकालीन सेवाओं का रिस्पॉन्स टाइम और कम करने के निर्देश दिए गए। अग्निशमन विभाग को आधुनिक उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराने को कहा गया।

प्रदेश की 350 तहसीलों में से 296 में 326 स्थायी फायर स्टेशन संचालित हैं। 26 नए फायर स्टेशन लोकार्पण के लिए तैयार हैं। 25 का निर्माण चल रहा है। 47 नए फायर स्टेशनों के लिए DPR तैयार की जा रही है।

सरकार अब इस हादसे के बाद फायर इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बड़ा मुद्दा बना रही है।

अखिलेश यादव की मुआवजे की मांग

Lucknow fire के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव मंगलवार शाम केजीएमयू पहुंचे। उन्होंने घायलों और परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि अगर सरकार मदद नहीं करेगी तो कौन करेगा। सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि पूरी मदद दे।

अखिलेश ने मांग की कि जो व्यक्ति 50 हजार की नौकरी करता था और घायल है, जब तक वह स्वस्थ नहीं होता, तब तक सरकार उसका वेतन दे। इलाज का पूरा खर्च भी सरकार उठाए। उन्होंने मृतकों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की।

उन्होंने एक घायल युवक का भी जिक्र किया, जो खिड़की से कूद गया था और गंभीर रूप से जख्मी है। परिवार के मुताबिक उसकी मां नहीं है और वह घर का अकेला कमाने वाला सदस्य है।

अखिलेश का सरकार पर हमला

केजीएमयू में अखिलेश यादव ने कहा कि 10 साल से हर घटना में SIT बनती है। अगर सरकार है, तो नियमों का पालन क्यों नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि एनओसी देने वाले लोग अपनी जेब भर रहे थे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार मानकों पर हावी हो गया है।

उन्होंने होटल लेवाना हादसे का भी जिक्र किया। कहा कि उस समय भी बुलडोजर की बात हुई थी, लेकिन क्या कार्रवाई हुई। उन्होंने पूछा कि अब बुलडोजर किसका इंतजार कर रहा है।

अखिलेश ने यह भी कहा कि गरीबों पर बुलडोजर जल्दी चलता है, लेकिन बड़े लोगों पर कार्रवाई में देर होती है।

डिप्टी सीएम का पलटवार

अखिलेश के बयान पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुखद अग्निकांड है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल्डिंग पिछली सरकार के समय बनी थी और अवैध निर्माण उसी दौर की देन है।

पाठक ने कहा कि प्लॉट 2016 में आवंटित हुआ था। बिल्डिंग का निर्माण पिछली सरकार के समय हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि एक बार सीलिंग के बाद उसे खोलने का काम भी उसी समय हुआ था। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कड़ी कार्रवाई कर रही है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सभी कार्यक्रम रद्द कर मौके पर पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात की और रात में ही कार्रवाई शुरू हुई।

FSSO का सीएम को पत्र

Lucknow fire में निलंबित अग्निशमन अधिकारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले में मुख्य अग्निशमन अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया है। FSSO कमलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि पूरे मामले में CFO अंकुश मित्तल जिम्मेदार हैं।

उन्होंने लिखा कि आवासीय भवन का व्यावसायिक उपयोग हो रहा था, इसकी जानकारी CFO के पास होनी चाहिए थी। आग लगने के बाद दमकल प्रक्रिया में देरी और समन्वय की कमी भी CFO की लापरवाही दिखाती है। उन्होंने कहा कि छोटे स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई की गई, जबकि उनका कार्यक्षेत्र सीमित था।

यह पत्र अब प्रशासनिक जवाबदेही की बहस को और तेज कर सकता है।

मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला

Lucknow fire का मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मीकांत सिंह ने आयोग में शिकायत दर्ज कर पीड़ितों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और LDA वीसी समेत अन्य दोषियों पर एफआईआर की मांग भी की है।

इससे साफ है कि हादसे के बाद केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं आई। कानूनी और मानवाधिकार स्तर पर भी दबाव बनना शुरू हो गया है।

आने वाले दिनों में इस मामले में और याचिकाएं या शिकायतें सामने आ सकती हैं।

आगे क्या

अब इस मामले में तीन मोर्चों पर कार्रवाई होगी। पहली, SIT और फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट आएगी। दूसरी, अवैध बिल्डिंग पर प्रशासनिक कार्रवाई होगी। तीसरी, पूरे प्रदेश में फायर सेफ्टी ऑडिट और सीलिंग अभियान चलेगा।

मृतकों के परिवार मुआवजे और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। घायल इलाज और आर्थिक मदद की प्रतीक्षा में हैं। सरकार ने सख्ती के संकेत दिए हैं। अब नजर इस पर रहेगी कि जांच रिपोर्ट, अफसरों पर कार्रवाई और बिल्डिंग ध्वस्तीकरण कितनी जल्दी होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: Lucknow fire में अब तक कितनी मौतें हुई हैं?
उत्तर: इस हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है।

प्रश्न 2: आग किस इलाके की इमारत में लगी थी?
उत्तर: आग लखनऊ के अलीगंज इलाके की दो मंजिला इमारत में लगी थी।

प्रश्न 3: क्या यह बिल्डिंग वैध थी?
उत्तर: नहीं। जांच में पता चला कि बिल्डिंग अवैध थी। 2016 में इसे गिराने का आदेश भी हुआ था।

प्रश्न 4: बिल्डिंग में क्या-क्या चल रहा था?
उत्तर: बेसमेंट, ग्राउंड और पहले फ्लोर पर पेट शॉप और क्लीनिक था। दूसरे फ्लोर पर लाइब्रेरी, कोचिंग और 3D आर्ट-गेम एसेट स्टूडियो चल रहा था।

प्रश्न 5: इस मामले में कौन-कौन गिरफ्तार हुआ है?
उत्तर: बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

प्रश्न 6: SIT में कौन-कौन शामिल हैं?
उत्तर: SIT में IPS प्रवीण कुमार और IAS अमृत अभिजात शामिल हैं।

प्रश्न 7: सरकार ने हादसे के बाद क्या बड़ा फैसला लिया है?
उत्तर: पूरे प्रदेश में फायर सेफ्टी ऑडिट, कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य करने और बेसमेंट में व्यावसायिक गतिविधि रोकने का फैसला लिया गया है।

प्रश्न 8: कितने कोचिंग सेंटर और होटल सील हुए हैं?
उत्तर: अब तक 48 कोचिंग सेंटर और 3 होटल सील किए गए हैं।

प्रश्न 9: अखिलेश यादव ने क्या मांग की है?
उत्तर: उन्होंने मृतकों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा, घायलों का इलाज और आय रुकने पर वेतन जैसी मदद की मांग की है।

प्रश्न 10: इस मामले में आगे क्या होगा?
उत्तर: SIT और फोरेंसिक जांच जारी है। बिल्डिंग पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी और अफसरों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

ये भी पढ़ें :

RPSC Portal Hack की असली कहानी, डिलीवरी बॉय बनकर पहुंचे कॉन्स्टेबल ने ऐसे दबोचा आरोपी

 

Like and Follow us on :

|Telegram | Facebook | Instagram | Twitter | Pinterest | Linkedin

सांवरिया सेठ सिंह

थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button