फेस्टिव सेल में फोन-टीवी खरीदने से पहले ये 5 बातें जान लें, वरना फर्जी डिस्काउंट का हो जाएंगे शिकार
नवरात्रि से ठीक पहले आज गुरुवार से ई-कॉमर्स कंपनियों की फेस्टिव सेल शुरू हो चुकी है, जिसमें 80% तक डिस्काउंट के दावे किए जा रहे हैं। इन Festive Sale Shopping Tips की मदद से आप भारी छूट के विज्ञापनों और फर्जी ऑफर्स के झांसे से बचकर समझदारी से खरीदारी कर सकते हैं।

नवरात्रि, धनतेरस और दिवाली का यह समय भारत में साल की सबसे बड़ी खरीदारी का मौसम होता है। लेकिन ‘लिमिटेड टाइम डील’ और भारी छूट के चक्कर में अक्सर लोग जल्दबाजी में ऐसी चीजें खरीद लेते हैं जिनकी उन्हें जरूरत ही नहीं थी, या फर्जी डिस्काउंट का शिकार हो जाते हैं। अगर आप भी इस सीजन में नया फोन, टीवी, लैपटॉप या घर का सामान खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो यह Festive Sale Shopping Tips गाइड पढ़ने के बाद ही पेमेंट करें।
सेल शुरू होने से पहले ही अपनी जरूरत की चीजों की एक पक्की लिस्ट बना लेना सबसे पहला और सबसे जरूरी कदम माना जाता है। ‘काउंटडाउन टाइमर’ और ‘सिर्फ 2 बचे हैं’ जैसे मैसेज अक्सर दिमाग पर दबाव डालकर जल्दबाजी में फैसला करवाने के लिए ही दिखाए जाते हैं, इसलिए पहले से तय बजट और लिस्ट के बाहर जाकर कुछ भी खरीदने से पहले एक बार रुककर सोचना फायदेमंद रहता है।
कहां से क्या खरीदें, ऑनलाइन और ऑफलाइन में समझें फर्क
हर चीज ऑनलाइन खरीदना समझदारी नहीं है, और हर चीज के लिए बाजार जाना भी जरूरी नहीं। ब्रांडेड इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स, जैसे स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्टवॉच, हेडफोन और टैबलेट, के साथ ही स्मार्ट टीवी, वॉशिंग मशीन, फ्रिज और एसी जैसे बड़े होम अप्लायंस ऑनलाइन खरीदना फायदेमंद रहता है।
इसकी वजह यह है कि त्योहारी सेल में बैंक के डिस्काउंट ऑफर्स का खर्च ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और ब्रांड मिलकर उठाते हैं, जबकि रिटेल दुकानदार अपने मार्जिन से इतना बड़ा डिस्काउंट अकेले नहीं दे पाते। इसके अलावा ई-कॉमर्स कंपनियों के पास स्क्रैप और रिफर्निश्ड सामान का बड़ा नेटवर्क होने से पुराने फोन या टीवी की एक्सचेंज वैल्यू भी बेहतर मिलती है, और प्रोसेसर वेरिएंट, डिस्प्ले टाइप या रैम स्पीड जैसे बारीक स्पेसिफिकेशन की सीधी तुलना भी की जा सकती है।
वहीं कपड़े, दीये, दिवाली का सजावटी सामान, बर्तन और भारी फर्नीचर जैसी चीजें लोकल मार्केट या दुकान से खरीदना बेहतर रहता है, क्योंकि कपड़ों का फैब्रिक और फर्नीचर की मजबूती खुद छूकर परखी जा सकती है। इसके साथ ही दुकानदार से मोलभाव करने और सामान उसी वक्त घर लाने की सुविधा भी ऑफलाइन खरीदारी में ही मिलती है।
ऑनलाइन मार्केटप्लेस से खरीदारी करते समय एक और बात का ध्यान रखना जरूरी है। कई बार एक ही प्रोडक्ट कई अलग-अलग थर्ड-पार्टी सेलर्स की तरफ से लिस्ट किया होता है, और इनकी कीमत व डिलीवरी शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं। ऐसे में सिर्फ सबसे कम कीमत देखकर ऑर्डर करने के बजाय सेलर की रेटिंग, रिव्यू और रिटर्न पॉलिसी भी जरूर जांच लेनी चाहिए, क्योंकि कम रेटिंग वाले सेलर से सस्ता मिलने वाला सामान आगे चलकर महंगा भी पड़ सकता है।
कार्ड और एक्सचेंज ऑफर एक साथ जोड़ें, मिलेगी डबल बचत
सेल में सिर्फ 50% या 70% के बोर्ड देखकर खुश होने के बजाय दो तरीकों से ज्यादा बचत की जा सकती है। मान लीजिए कोई 20 हजार रुपए का फोन ले रहा है, और पुराने फोन पर 4 हजार रुपए का एक्सचेंज बोनस मिल गया। अब बाकी बचे 16 हजार रुपए का पेमेंट SBI, ICICI या Axis बैंक के कार्ड से किया जाए, तो उस पर अलग से 10% तक इंस्टेंट डिस्काउंट भी मिल सकता है। यानी एक ही सामान पर एक्सचेंज और कार्ड डिस्काउंट, दोनों का फायदा लिया जा सकता है।
यहां एक बात और ध्यान रखनी जरूरी है। बैंक कार्ड का इंस्टेंट डिस्काउंट आमतौर पर एक तय अधिकतम सीमा तक ही मिलता है, और यह सीमा हर बैंक व कार्ड के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। इसलिए बड़ी कीमत का सामान खरीदने से पहले यह जरूर चेक कर लेना चाहिए कि डिस्काउंट की अधिकतम सीमा कितनी तय है, ताकि उम्मीद से कम छूट मिलने पर आखिरी वक्त में निराशा न हो।
नो-कॉस्ट EMI चुनने से पहले छिपे चार्ज का गणित समझें
नो-कॉस्ट EMI में बैंक ब्याज तो माफ कर देता है, लेकिन इसके बदले प्रोसेसिंग फीस और उस फीस पर 18% GST जरूर वसूला जाता है। इसलिए पेमेंट करने से पहले यह जरूर जोड़ लेना चाहिए कि कुल कितना अतिरिक्त पैसा जा रहा है, ताकि ‘जीरो कॉस्ट’ के नाम पर असल में चुकाई जा रही रकम का सही अंदाजा लग सके। फेस्टिव सीजन में पेमेंट और बचत से जुड़े ऐसे ही जरूरी वित्तीय कामों को समय पर निपटाना भी उतना ही जरूरी है, ताकि साल के आखिर में अचानक कोई नुकसान न उठाना पड़े।
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फर्जी डिस्काउंट और हिडन चार्ज से ऐसे बचें
सेल के दौरान कई कंपनियां सामान की कीमत 4-5 दिन पहले बढ़ा देती हैं, और सेल वाले दिन उसी पर भारी डिस्काउंट का टैग लगा देती हैं। इससे बचने के लिए गूगल पर प्राइस हिस्ट्री या कीपा जैसे फ्री टूल से यह जरूर चेक किया जा सकता है कि वह सामान पिछले दो-तीन महीनों में असल में कितने में बिक रहा था। इस तरह की भारी छूट से जुड़ी सावधानियां पहले भी बताई जा चुकी हैं, और त्योहारी सीजन में इन्हें दोहराना और भी जरूरी हो जाता है।
सस्ते के चक्कर में यह भी जरूर देख लेना चाहिए कि सामान पर ‘नो रिटर्न’ तो नहीं लिखा है। ऐसा होने पर सामान पसंद न आने की सूरत में पैसे वापस नहीं मिलेंगे, सिर्फ खराबी निकलने पर ही रिप्लेसमेंट मिल पाएगा। यह जानकारी आमतौर पर ‘Buy Now’ बटन के ठीक नीचे लिखी होती है, इसलिए पेमेंट से पहले बिल में पैकिंग चार्ज या डिलीवरी फीस जैसे छोटे-छोटे हिडन चार्जेस भी ध्यान से चेक कर लेने चाहिए।
ओपन बॉक्स डिलीवरी और अनबॉक्सिंग वीडियो से मिलेगी सुरक्षा
सेल के दौरान गलत या डैमेज सामान मिलने की शिकायतें भी बढ़ जाती हैं, इनसे बचने के लिए दो बातें याद रखनी जरूरी हैं। टीवी, फोन और लैपटॉप जैसे महंगे प्रोडक्ट मंगाते समय जहां भी ओपन बॉक्स डिलीवरी का विकल्प मिले, उसे जरूर चुनना चाहिए, और डिलीवरी बॉय के सामने ही बॉक्स खुलवाकर प्रोडक्ट सही-सलामत और असली दिखने पर ही OTP देना चाहिए।
अगर ओपन बॉक्स डिलीवरी की सुविधा नहीं है, तो पैकेट खोलते समय बिना कट या पॉज किए मोबाइल से पूरा वीडियो रिकॉर्ड करना चाहिए। अगर अंदर से साबुन, पत्थर या कोई डैमेज सामान निकलता है, तो यही वीडियो रिफंड पाने का सबसे पक्का आधार बनता है। ऑनलाइन ठगी और फ्रॉड के मामलों में भी सबूत जुटाना हमेशा सबसे कारगर बचाव माना जाता है, इसलिए पेमेंट करने से पहले ही सावधानी बरतना सबसे आसान तरीका है।
पेमेंट करने से ठीक पहले इस चेकलिस्ट से खुद को जांच लें
खरीदारी का फैसला पक्का करने से पहले कुछ आसान सवालों के जवाब खुद से जरूर लेने चाहिए। क्या बैंक कार्ड का 10% डिस्काउंट और कूपन का चेकबॉक्स एप्लाई कर लिया गया है? क्या प्रोडक्ट की पुरानी प्राइस हिस्ट्री चेक की जा चुकी है? क्या यह साफ है कि प्रोडक्ट पर पूरा रिटर्न मिलेगा या सिर्फ रिप्लेसमेंट की सुविधा है?
इसके अलावा चेकआउट पेज पर यह भी देख लेना चाहिए कि कहीं फालतू की इंश्योरेंस या पैकेजिंग फीस तो नहीं जुड़ी हुई है, जिसे हटाया जा सकता हो। बड़े अप्लायंस जैसे टीवी, फ्रिज या एसी खरीदते समय यह भी जरूर देख लेना चाहिए कि उसकी वारंटी और नजदीकी सर्विस सेंटर की जानकारी साफ-साफ दी गई है या नहीं,
क्योंकि सेल के बाद अगर कोई दिक्कत आती है तो यही जानकारी काम आती है। इन चंद सवालों पर दो मिनट खर्च करने से ही सेल के असली फायदे का सही अंदाजा लग जाता है, और जल्दबाजी में होने वाली गलत खरीदारी से भी बचा जा सकता है।
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