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नवरात्रि में रोज बदलता है देवी मां का भोग, जानें किस दिन क्या चढ़ाएं और किन बातों का रखें ध्यान

Navratri 2026 Bhog की परंपरा के मुताबिक आज रविवार, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू हो गई है, जो 19 अक्टूबर तक चलेगी। नौ दिनों के इस उत्सव में देवी मां के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा के साथ हर दिन अलग भोग लगाने की भी परंपरा है।

आज से आश्विन मास की शारदीय नवरात्रि शुरू हो गई है, और देवी दुर्गा की आराधना का यह पर्व 19 अक्टूबर तक चलेगा। नौ दिनों के इस उत्सव में रोज देवी मां के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है, और परंपरा के मुताबिक Navratri 2026 Bhog में हर दिन अलग चीज अर्पित करने का विशेष महत्व माना जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक नवरात्रि में देवी मां को किस दिन क्या भोग लगाना चाहिए और इन दिनों में कौन-कौन से काम नहीं करना चाहिए, इसकी सही जानकारी होना जरूरी है।

घर पर ही ऐसे कर सकते हैं देवी मां की सरल पूजा

पंडित मनीष शर्मा के मुताबिक नवरात्रि में रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद मां दुर्गा के सामने दीपक जलाना चाहिए और नारियल व फूल अर्पित करने चाहिए। इसके बाद धूप-दीप जलाकर ‘दुं दुर्गायै नम:’ मंत्र का जप कम से कम 108 बार करने की सलाह दी जाती है।

पूजा में देवी मां को उस दिन के हिसाब से तय भोग लगाना चाहिए, और इसके साथ दुर्गा चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। पूजा पूरी होने के बाद परिवार के साथ-साथ अन्य लोगों को भी प्रसाद बांटने की परंपरा निभाई जाती है, जिसे शुभ माना जाता है।

जिन घरों में कलश स्थापना के साथ अखंड ज्योति जलाने की परंपरा है, वहां नौ दिनों तक इस दीपक को लगातार जलते रहने देना चाहिए, और इसके पास सुबह-शाम बैठकर मंत्र जप या दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जा सकता है। घर में रोज सुबह-शाम आरती करने से भी पूरे परिवार में सकारात्मकता बने रहने की मान्यता है।

नौ दिन, नौ भोग, जानें किस देवी स्वरूप को क्या लगाएं

परंपरा के मुताबिक नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को गाय के घी का भोग लगाया जाता है, जिसे स्वास्थ्य और आरोग्य से जोड़ा जाता है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शहद और पंचामृत का भोग लगाने की परंपरा है, जबकि तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध से बनी खीर या मिठाई अर्पित की जाती है।

चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाया जाता है, तो पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग चढ़ाने की परंपरा है। छठे दिन मां कात्यायनी को लौकी के हलवे और शहद का भोग, तो सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है। आठवें दिन मां महागौरी को नारियल का भोग अर्पित किया जाता है, और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री को हलवा-पूड़ी, चने और खीर का भोग लगाने के साथ छोटी कन्याओं को भोजन कराने की भी परंपरा निभाई जाती है। घट स्थापना से दशहरे तक की पूरी तारीखों और शुभ मुहूर्त की जानकारी रखने से हर दिन का भोग और पूजा समय पर पूरा करना आसान हो जाता है।

इन नौ भोगों को सिर्फ परंपरा के तौर पर ही नहीं, बल्कि सेहत और जीवन से जुड़े अलग-अलग पहलुओं के प्रतीक के तौर पर भी देखा जाता है। घी और शहद को आरोग्य व दीर्घायु से जोड़ा जाता है, तो मालपुए और केले को बुद्धि व ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसी तरह गुड़ और नारियल को मिठास व मनोकामना पूर्ति से जोड़कर देखा जाता है, जिससे हर दिन का भोग सिर्फ प्रसाद न रहकर एक खास भावना का प्रतीक बन जाता है।

Navratri 2026 Bhog

नवरात्रि के दिनों में इन कामों से बचना बेहद जरूरी

पंडित मनीष शर्मा के मुताबिक नवरात्रि में देवी मां की पूजा और दर्शन का विशेष महत्व है, इसलिए इन नौ दिनों में झूठ बोलने, गुस्सा करने और घर में क्लेश करने से बचना चाहिए। महिलाओं का भूलकर भी अपमान नहीं करना चाहिए, बल्कि इन दिनों सभी स्त्रियों का विशेष सम्मान करने की सलाह दी जाती है।

इसके अलावा अपने गुरु और गुरु के उपदेशों का निरादर करने से बचना चाहिए, और अपने साथियों व परिजनों से अच्छा व्यवहार बनाए रखना चाहिए। देवी पूजा करने वाले भक्तों को इन दिनों में खासतौर पर ब्रह्मचर्य का पालन करने की सलाह दी जाती है। माता-पिता की सेवा करना भी इस दौरान बेहद शुभ माना जाता है, और देवी पूजा के साथ इन नौ दिनों में श्रीरामचरित मानस का पाठ करने की भी परंपरा है।

इन नियमों के पीछे मान्यता यह है कि नवरात्रि के नौ दिन तन और मन दोनों की शुद्धता बनाए रखने का समय होता है, इसलिए इस दौरान आचरण, वाणी और व्यवहार में संयम रखने की सीख दी जाती है। जो भक्त व्रत रखते हैं, उनके लिए यह संयम और भी ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि माना जाता है कि व्रत के साथ गुस्सा या क्लेश करने से पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता।

मंदिर दर्शन के दौरान देवी मां को चढ़ाएं ये चीजें

नवरात्रि के दिनों में देवी मां के शक्तिपीठों और पौराणिक महत्व वाले अन्य मंदिरों में दर्शन करने की परंपरा भी निभाई जाती है। देश के प्रमुख शक्तिपीठों में दर्शन करने जाएं, तो मंत्र जप करते हुए देवी मां को नारियल, लाल चुनरी, लाल चूड़ियां, लाल फूल, कुमकुम और सुहाग से जुड़ी अन्य चीजें चढ़ानी चाहिए।

अगर ये सभी चीजें जुटाना संभव न हो, तो देवी मां के मंत्रों का जप करते हुए सिर्फ दर्शन करना भी पूजा का पूरा फल दे सकता है। मंत्र याद न हो, तो देवी मां के विभिन्न नामों का जप करके भी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा पूरी की जा सकती है, क्योंकि मान्यता है कि देवी मां श्रद्धा और नियत को ही सबसे ज्यादा महत्व देती हैं।

लाल चुनरी और चूड़ियों को सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए शादीशुदा महिलाएं अक्सर नवरात्रि में देवी मां को यह चीजें चढ़ाकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं कुमकुम और लाल फूल को शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक बताया जाता है, जिससे मंदिर में जाकर दर्शन करने वाले भक्तों की आस्था और मजबूत होती है। कई शहरों में नवरात्रि के दौरान प्रमुख देवी मंदिरों में लंबी कतारें देखने को मिलती हैं, इसलिए भीड़भाड़ से बचने के लिए सुबह या देर शाम का समय दर्शन के लिए बेहतर माना जाता है।

भोग और सामग्री न हो तो भी नहीं रुकती पूजा

पंडित मनीष शर्मा का यह भी कहना है कि भोग या पूजा सामग्री का न होना देवी पूजा में बाधा नहीं बनना चाहिए। जिस दिन जो भोग उपलब्ध न हो, उस दिन श्रद्धा से किसी भी सात्विक चीज का भोग लगाकर देवी मां का स्मरण किया जा सकता है, क्योंकि शास्त्रों में भाव और नियत को द्रव्य से ज्यादा महत्व दिया गया है।

नौ दिनों तक रोज के भोग और पूजा विधि का ध्यान रखने के साथ ही आचार-व्यवहार में संयम बनाए रखना भी उतना ही जरूरी माना जाता है, ताकि देवी मां की पूरी कृपा प्राप्त हो सके। जो लोग रोज मंदिर नहीं जा पाते या पूरी पूजा विधि नहीं निभा पाते, उनके लिए भी सुबह-शाम सिर्फ दीपक जलाकर मन में देवी मां का स्मरण करना पूजा का एक आसान और प्रभावी तरीका माना जाता है।

नवरात्रि खत्म होने के साथ ही दशहरे का पर्व आएगा, इसलिए यह नौ दिन आस्था के साथ-साथ साल के सबसे बड़े उत्सव सीजन की शुरुआत भी माने जा रहे हैं। पंडित मनीष शर्मा के मुताबिक इन नौ दिनों में सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि आचरण और व्यवहार में भी सुधार लाने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि देवी उपासना का असली फल तभी मिलता है जब श्रद्धा के साथ अच्छे कर्म भी जुड़े हों।

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सांवरिया सेठ सिंह

थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।

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