Shankaracharya Protest के तहत प्रयागराज माघ मेले में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मौनी अमावस्या पर रथ यात्रा के दौरान बैरिकेडिंग तोड़े जाने के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को रोक दिया गया, जिसके बाद उन्होंने वहीं फुटपाथ पर धरना शुरू कर दिया।
माघ मेले में बैरिकेडिंग तोड़ने से भड़का विवाद
प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन उस समय हालात बिगड़ गए, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की रथ यात्रा को पुलिस बैरिकेडिंग के जरिए रोक दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ने पीपा पुल और निर्धारित मार्ग पर बैरिकेडिंग कर रखी थी। इसी दौरान शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस के बीच कहासुनी हुई, जो धीरे-धीरे तनाव में बदल गई।
स्थिति उस वक्त और बिगड़ी जब समर्थकों ने बैरिकेडिंग हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद प्रशासन ने यात्रा को वहीं रोक दिया और शंकराचार्य को उनके पंडाल तक नहीं जाने दिया।
पुलिस द्वारा छोड़े गए स्थान पर ही धरने पर बैठे शंकराचार्य
यात्रा रोके जाने के बाद पुलिस शंकराचार्य को जिस स्थान पर छोड़कर चली गई, वहीं उन्होंने धरना शुरू कर दिया। रविवार रात से लेकर सोमवार तक वे खुले फुटपाथ पर बैठे रहे। ठंड के बावजूद उन्होंने न तो पंडाल में प्रवेश किया और न ही किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर जाने को तैयार हुए।
मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज के मुताबिक, शंकराचार्य ने 24 घंटे से अधिक समय तक न भोजन किया और न पानी पिया। वहीं, उन्होंने सुबह की पूजा और दंड तर्पण भी उसी स्थान पर संपन्न किया।
“प्रशासन माफी मांगे, तभी आश्रम में कदम रखूंगा”
सोमवार दोपहर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता, वे अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि इतिहास में जब-जब शंकराचार्य गंगा स्नान के लिए आए हैं, वे पालकी में ही आए हैं। इसे परंपरा बताते हुए उन्होंने ऐलान किया कि अब हर मेले में प्रयागराज आएंगे, लेकिन कभी शिविर में नहीं रहेंगे, बल्कि फुटपाथ को ही अपना निवास बनाएंगे।
हवा के विपरीत चल रहे सिंहासन डोल रहे हैं।#avimukteshwarananda pic.twitter.com/jsewIDmerd
— Mukesh Mathur (@mukesh1275) January 18, 2026
गंगा स्नान को लेकर भावुक बयान
धरने के दौरान शंकराचार्य भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा सनातन धर्म में जन्म लेता है, तभी से उसे गंगा-यमुना में स्नान का अधिकार मिल जाता है। लेकिन आज उनसे वही अधिकार छीन लिया गया।
उन्होंने इसे केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि सनातन परंपरा का अपमान बताया।
मौनी अमावस्या बवाल का CCTV सामने आया
इस पूरे घटनाक्रम का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेडिंग के पास शंकराचार्य के समर्थक और पुलिस आमने-सामने आ गए थे। कुछ ही देर में बहस बढ़ी और समर्थकों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की।
इसके बाद पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए यात्रा को आगे बढ़ने से रोक दिया।
प्रशासन का पक्ष: अनुमति नहीं ली गई थी
प्रयागराज की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने कहा कि शंकराचार्य की ओर से पूर्व में किसी भी प्रकार की औपचारिक सूचना नहीं दी गई थी। मौनी अमावस्या से एक दिन पहले केवल दो वाहनों की अनुमति मांगी गई थी, जिसे सुरक्षा कारणों से अस्वीकार कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद इमरजेंसी के लिए आरक्षित पीपा पुल की बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की गई, जिससे हालात बिगड़े।
निरंजनी अखाड़े का तीखा बयान : सारा प्रोटोकॉल सिर्फ सतुआ बाबा के लिए
निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी रमण पुरी ने पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य सर्वोच्च पद होता है और उनकी पीठ आदि अनंत काल से चली आ रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मेले में सारा प्रोटोकॉल सिर्फ सतुआ बाबा के लिए लगाया गया है और ADM से लेकर SP तक उनके सामने नतमस्तक हैं, जबकि शंकराचार्य की गरिमा को गिराया गया।
शिष्य के वस्त्र पर लगे खून दिखाए
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेस के सामने अपने शिष्य के वस्त्र दिखाए, जिन पर खून के धब्बे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि साधु-संतों के साथ पुलिस द्वारा मारपीट की गई, जो किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।
साध्वी गौरी का बयान: शंकराचार्य के ऊपर कोई नहीं
विष्णु मोहिनी राज की पीठाधीश्वर साध्वी श्री गौरी ने कहा कि माघ मेला साधु-संतों और सनातन धर्मियों का होता है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य गुरु स्थान पर होते हैं और उनके ऊपर केवल भगवान ही होते हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब लाखों श्रद्धालु बिना अनुमति के मेले में आते हैं, तो फिर धर्माचार्यों पर ही सख्ती क्यों की जाती है।
अखिलेश यादव का फोन, समर्थन का ऐलान
धरने के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से फोन पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि वे उनके साथ हैं और जल्द ही उनसे मिलने प्रयागराज आएंगे।
इसके अलावा, हर्षा रिछारिया ने भी वीडियो जारी कर शंकराचार्य का समर्थन करते हुए कहा कि “ये बेटी आपके साथ है।”
अब माघ मेला सिर्फ आयोजन नहीं, सवाल बन चुका है
माघ मेले का यह विवाद अब केवल एक यात्रा या प्रोटोकॉल का मामला नहीं रह गया है। यह सनातन परंपरा, प्रशासनिक व्यवस्था और धार्मिक सम्मान के टकराव का प्रतीक बन गया है। धरना खत्म होगा या नहीं, यह अब प्रशासन के अगले कदम पर निर्भर करता है।
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