₹22 लाख की XUV 700 में खराबी, कंज्यूमर कोर्ट ने 45 दिन में नई SUV देने का आदेश दिया
रिटायर्ड प्रोफेसर लक्ष्मी नारायण नागौरी ने 9 नवंबर 2021 को महिंद्रा कंपनी की XUV 700 खरीदी थी। गाड़ी की कीमत ₹22 लाख थी। ग्राहक ने नई कार ली थी, लेकिन शुरुआत से ही इसमें गंभीर तकनीकी खामियां सामने आने लगीं।

XUV 700 Case में जैसलमेर के ग्राहक को बड़ी राहत मिली है। ₹22 लाख की नई SUV में सनरूफ से पानी टपकने, म्यूजिक सिस्टम, डिस्प्ले और फ्यूल इंडिकेटर खराब होने के बाद कंज्यूमर कोर्ट ने कंपनी को 45 दिन में नई XUV 700 देने का आदेश दिया। XUV 700 Case में ₹2.60 लाख जुर्माना भी लगाया गया है।
XUV 700 Case का फैसला ग्राहक के लिए बना राहत
जैसलमेर में ₹22 लाख की नई SUV खरीदने वाले ग्राहक को उपभोक्ता आयोग से बड़ी राहत मिली है। ग्राहक ने महिंद्रा की XUV 700 खरीदी थी, लेकिन कुछ समय बाद ही गाड़ी में कई गंभीर खराबियां सामने आने लगीं।
गाड़ी का साउंड सिस्टम खराब हुआ। सनरूफ ठीक से काम नहीं कर रही थी। फ्यूल इंडिकेटर सही जानकारी नहीं दे रहा था। कार के अंदर पानी टपकने लगा। डिस्प्ले और सिल्वर बॉक्स बार-बार बंद हो रहे थे।
ग्राहक करीब 14 बार गाड़ी लेकर सर्विस सेंटर पहुंचा। हर बार तकनीकी खराबी की बात कहकर उसे टाला गया। समाधान नहीं मिला तो उसने कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अब कोर्ट ने कंपनी को 45 दिन के भीतर पुरानी गाड़ी लेकर नई XUV 700 देने का आदेश दिया है।
45 दिन में सीधी राहत
जैसलमेर उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने महिंद्रा कंपनी को 45 दिन के अंदर नई XUV 700 देने का आदेश दिया।
नई गाड़ी ऑन-रोड वाहन के रूप में देनी होगी। इसमें रोड टैक्स और बीमा शामिल रहेंगे। कंपनी को पुरानी गाड़ी वापस लेनी होगी।
आयोग ने आर्थिक और मानसिक कष्ट के लिए ₹2 लाख 60 हजार का जुर्माना भी लगाया है।
XUV 700 Case में यह आदेश उन ग्राहकों के लिए अहम संकेत है, जो नई गाड़ी खरीदने के बाद बार-बार खराबी से परेशान होते हैं और सर्विस सेंटर के चक्कर लगाते रहते हैं।
₹22 लाख की जरूरी खरीद
रिटायर्ड प्रोफेसर लक्ष्मी नारायण नागौरी ने 9 नवंबर 2021 को महिंद्रा कंपनी की XUV 700 खरीदी थी। गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर RJ 15 UA 2600 है।

गाड़ी की कीमत ₹22 लाख थी। ग्राहक ने नई कार ली थी, लेकिन शुरुआत से ही इसमें गंभीर तकनीकी खामियां सामने आने लगीं।
नई गाड़ी से ग्राहक को भरोसा, सुरक्षा और सुविधा की उम्मीद होती है। लेकिन इस मामले में शुरुआत से ही शिकायतों का सिलसिला शुरू हो गया।
सबसे पहले ग्राहक को शोरूम से गाड़ी लेते समय ही आगे की विंडशील्ड टूटी मिली। शुरुआत में कंपनी ने इसे बदलने से इनकार किया। बाद में शोरूम के CCTV कैमरे की फुटेज से गलती साबित हुई और नया कांच लगाया गया।
सनरूफ से पानी की असली समस्या
गाड़ी की सबसे गंभीर समस्याओं में सनरूफ से पानी टपकना शामिल था। बारिश या पानी के संपर्क में आने पर कार के अंदर रिसाव होना किसी भी वाहन के लिए बड़ी खराबी है।

कार मालिक ने दावा किया कि पानी के रिसाव से कार में शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा बना रहता था। यह केवल सुविधा की समस्या नहीं रही। यह सुरक्षा से जुड़ा मामला बन गया।
XUV 700 Case में सनरूफ, डिस्प्ले, साउंड सिस्टम और फ्यूल इंडिकेटर की खराबी ने वाहन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए।
नई कार से ऐसी उम्मीद नहीं होती कि ग्राहक उसे बार-बार सर्विस सेंटर लेकर जाए और फिर भी पक्का समाधान न मिले।
14 बार सर्विस सेंटर चक्कर
लक्ष्मी नारायण नागौरी ने गाड़ी की खराबियों को ठीक करवाने के लिए करीब 14 बार सर्विस सेंटर का रुख किया।
उन्होंने वॉट्सऐप, ईमेल, फोन और सर्विस के दौरान कई बार शिकायत की। फिर भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
हर बार तकनीकी खराबी की बात कही गई। ग्राहक को टालमटोल का सामना करना पड़ा।
एक ग्राहक जब लाखों रुपए खर्च कर गाड़ी खरीदता है, तो वह हर महीने सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने के लिए नहीं खरीदता। वह भरोसे के लिए खरीदता है। इस मामले में वही भरोसा टूट गया।
कंज्यूमर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
जैसलमेर उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पवन कुमार ओझा और सदस्य रमेश कुमार गौड़ की पीठ ने गुरुवार को फैसला सुनाया।
आयोग ने सबूतों और तर्कों के आधार पर कंपनी को सेवा में गंभीर लापरवाही और दोषयुक्त वाहन बेचने का दोषी माना।
रीडर मदन भाटी ने बताया कि गाड़ी में शुरुआत से ही मैन्युफैक्चरिंग कमियां थीं। इनमें म्यूजिक सिस्टम खराब होना, सनरूफ का ठीक से काम न करना, पानी टपकना, डिस्प्ले और सिल्वर बॉक्स का बार-बार बंद होना और फ्यूल इंडिकेटर का गलत जानकारी देना शामिल था।
XUV 700 Case में आयोग ने माना कि ग्राहक को उचित समाधान नहीं मिला और कंपनी की सेवा में कमी रही।
कानूनी नोटिस का अगला कदम
जब कंपनी ने शिकायतों का समाधान नहीं किया, तो ग्राहक ने वकील के जरिए 15 जुलाई 2025 को कानूनी नोटिस भेजा।
नोटिस में कार बदलकर नई कार देने या पूरे पैसे ब्याज सहित लौटाने की मांग की गई। ग्राहक ने ₹5 लाख हर्जाने की मांग भी रखी।
कंपनी ने 18 जुलाई 2025 को जवाब दिया, लेकिन ग्राहक के अनुसार वह केवल औपचारिक जवाब था। समस्या का समाधान नहीं निकला।
इसके बाद ग्राहक ने न्याय के लिए उपभोक्ता आयोग में शिकायत की। आयोग ने सुनवाई के बाद ग्राहक के पक्ष में आदेश दिया।
ग्राहक अधिकार का ग्राउंड इम्पैक्ट
यह फैसला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो महंगी गाड़ी खरीदने के बाद खराबी से परेशान होते हैं। कई ग्राहक वारंटी, सर्विस और शिकायतों के बीच महीनों फंस जाते हैं।
अगर नई गाड़ी में शुरुआत से ही लगातार तकनीकी खराबियां रहें और कंपनी समाधान न दे, तो ग्राहक उपभोक्ता आयोग में शिकायत कर सकता है।
XUV 700 Case यह बताता है कि लिखित शिकायतें, सर्विस रिकॉर्ड, ईमेल, वॉट्सऐप मैसेज, फोन शिकायतें और तकनीकी सबूत ग्राहक के पक्ष को मजबूत बना सकते हैं।
इस मामले में ग्राहक ने बार-बार शिकायत की। सर्विस सेंटर गया। कानूनी नोटिस भेजा। फिर आयोग तक पहुंचा।
आर्थिक और मानसिक कष्ट
कंज्यूमर कोर्ट ने केवल नई गाड़ी देने का आदेश नहीं दिया। आयोग ने आर्थिक और मानसिक कष्ट के लिए ₹2 लाख 60 हजार का जुर्माना भी लगाया।
इसका अर्थ है कि कोर्ट ने ग्राहक की परेशानी को केवल तकनीकी खराबी नहीं माना। उसने बार-बार के चक्कर, असुविधा और मानसिक तनाव को भी महत्व दिया।

नई कार में लगातार खराबी ग्राहक की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित करती है। वाहन पर भरोसा कम होता है। सुरक्षा का डर रहता है। पैसे फंसने का तनाव अलग होता है।
इस फैसले ने उस मानवीय पक्ष को भी जगह दी, जिसे अक्सर सर्विस शिकायतों में नजरअंदाज कर दिया जाता है।
ऑटो कंपनियों के लिए बड़ी सीख
यह मामला वाहन कंपनियों और डीलर नेटवर्क के लिए स्पष्ट संदेश है। नई गाड़ी बेचने के बाद जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।
अगर वाहन में मैन्युफैक्चरिंग कमी है, तो ग्राहक को पक्का समाधान मिलना चाहिए। टालमटोल, औपचारिक जवाब और बार-बार सर्विस विजिट पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
उपभोक्ता आयोग का आदेश बताता है कि दोषयुक्त वाहन बेचने और सेवा में कमी पर कंपनी को नई गाड़ी और मुआवजे तक का सामना करना पड़ सकता है।
XUV 700 Case ऐसे समय आया है, जब ग्राहक महंगी गाड़ियों में बेहतर गुणवत्ता और आफ्टर-सेल्स सर्विस की उम्मीद रखते हैं।
आगे क्या होगा
महिंद्रा कंपनी को आयोग के आदेश के अनुसार 45 दिन के भीतर ग्राहक से पुरानी गाड़ी लेकर नई XUV 700 देनी होगी। यह नई गाड़ी ऑन-रोड वाहन के रूप में देनी होगी, जिसमें रोड टैक्स और बीमा शामिल रहेंगे।
कंपनी को आर्थिक और मानसिक कष्ट के लिए ₹2.60 लाख भी चुकाने होंगे।
आने वाले दिनों में नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी आयोग के आदेश का पालन करती है या आगे कानूनी विकल्प अपनाती है। ग्राहक के लिए यह फैसला बड़ी राहत है। आम खरीदारों के लिए यह याद दिलाने वाला मामला है कि महंगी खरीद के बाद समस्या आए तो सबूत संभालना और अधिकारों के लिए खड़ा होना जरूरी है।
FAQs
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: XUV 700 Case किस शहर का है?
उत्तर: यह मामला राजस्थान के जैसलमेर का है, जहां ग्राहक ने महिंद्रा XUV 700 में लगातार खराबियों की शिकायत की थी।
प्रश्न 2: ग्राहक ने XUV 700 कब खरीदी थी?
उत्तर: रिटायर्ड प्रोफेसर लक्ष्मी नारायण नागौरी ने 9 नवंबर 2021 को XUV 700 खरीदी थी।
प्रश्न 3: गाड़ी में कौन-कौन सी खराबियां थीं?
उत्तर: म्यूजिक सिस्टम, सनरूफ, फ्यूल इंडिकेटर, डिस्प्ले और सिल्वर बॉक्स में खराबियां थीं। सनरूफ से पानी भी टपकता था।
प्रश्न 4: ग्राहक कितनी बार सर्विस सेंटर गया?
उत्तर: ग्राहक करीब 14 बार गाड़ी लेकर सर्विस सेंटर गया, लेकिन समस्या का पक्का समाधान नहीं हुआ।
प्रश्न 5: कंज्यूमर कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
उत्तर: कोर्ट ने कंपनी को 45 दिन में नई XUV 700 देने और ₹2.60 लाख जुर्माना चुकाने का आदेश दिया।
प्रश्न 6: नई गाड़ी किस रूप में देनी होगी?
उत्तर: कंपनी को ऑन-रोड वाहन देना होगा, जिसमें रोड टैक्स और बीमा शामिल रहेंगे।
प्रश्न 7: कानूनी नोटिस कब भेजा गया था?
उत्तर: ग्राहक ने वकील के जरिए 15 जुलाई 2025 को कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा था।
प्रश्न 8: कंपनी ने नोटिस का जवाब कब दिया?
उत्तर: कंपनी ने 18 जुलाई 2025 को जवाब दिया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकला।
प्रश्न 9: इस फैसले से ग्राहकों को क्या सीख मिलती है?
उत्तर: नई गाड़ी में लगातार खराबी हो तो शिकायतों, सर्विस रिकॉर्ड और सबूतों के आधार पर उपभोक्ता आयोग में न्याय मांगा जा सकता है।
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