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RPSC Portal Hack की असली कहानी, डिलीवरी बॉय बनकर पहुंचे कॉन्स्टेबल ने ऐसे दबोचा आरोपी

खुद राहुल 2019 से SAIL में माइनिंग इंजीनियर के पद पर कार्यरत है। वह राजस्थान वापस आना चाहता था। इसी वजह से उसने सहायक खनिज अभियंता भर्ती परीक्षा-2024 में अपना चयन सुनिश्चित करने के लिए यह रास्ता अपनाया और शॉर्टकट से नौकरी हासिल करने के प्रयास में था

RPSC Portal Hack मामले में राजस्थान पुलिस ने दौसा के माइनिंग इंजीनियर राहुल कुमार मीणा को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने ChatGPT और दूसरे AI टूल्स की मदद से भर्ती पोर्टल में सेंध लगाई, OTR सिस्टम को बायपास किया और इंटरव्यू से पहले 3 अभ्यर्थियों के आवेदन विड्रॉ कर दिए।

भर्ती सिस्टम पर बड़ा सवाल

राजस्थान लोक सेवा आयोग के भर्ती पोर्टल से छेड़छाड़ का मामला सिर्फ साइबर अपराध नहीं है। यह सीधे भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी ने सहायक खनिज अभियंता भर्ती-2024 की प्रोविजनल सूची से तीन अभ्यर्थियों के नाम इंटरव्यू से पहले हटाए। आरोप है कि उसने यह काम डिजिटल सिस्टम में घुसकर किया।

इस मामले में गिरफ्तार आरोपी राहुल कुमार मीणा माइनिंग इंजीनियर है। वह झारखंड में सेल (SAIL) में 2019 से नौकरी कर रहा है। पुलिस का कहना है कि उसने राजस्थान लौटने और चयन सुनिश्चित करने के लिए यह साजिश रची।

RPSC Portal Hack का तरीका

पुलिस के अनुसार आरोपी लगातार ChatGPT, DeepSeek और दूसरे AI प्लेटफॉर्म्स पर प्रॉम्प्ट तैयार कर रहा था। उसका मकसद यह जानना था कि किसी अभ्यर्थी का आवेदन भर्ती पोर्टल से कैसे विड्रॉ किया जा सकता है। जांच में यह भी सामने आया कि उसने AI से तैयार प्रॉम्प्ट के जरिए आरपीएससी के OTR सिस्टम को बायपास किया।

पुलिस का दावा है कि उसने पहली ही कोशिश में भर्ती साइट में सेंध लगा दी। इसके बाद उसने सहायक खनिज अभियंता भर्ती-2024 की प्रोविजनल लिस्ट से तीन अभ्यर्थियों के नाम हटा दिए। यही इस RPSC Portal Hack मामले का सबसे गंभीर हिस्सा है।

OTR यानी वन टाइम रजिस्ट्रेशन सिस्टम भर्ती प्रक्रिया की बुनियादी सुरक्षा परत माना जाता है। अगर इसे बायपास किया गया है, तो यह केवल एक भर्ती तक सीमित मामला नहीं माना जाएगा।

फर्जी SSO ID से खुली कड़ी

इस मामले की शुरुआती कड़ी एक फर्जी SSO ID और एक आईपी एड्रेस से जुड़ी थी। आरपीएससी ने जब छेड़छाड़ का मामला दर्ज कराया, तब पुलिस को यही शुरुआती तकनीकी जानकारी दी गई। जांच में पता चला कि फर्जी SSO ID रवि सिन्हा के नाम से बनाई गई थी।

साइबर टीम ने जब इस आईडी का आईपी एड्रेस ट्रैक किया, तो लोकेशन झारखंड की मिली। यहीं से जांच आगे बढ़ी। पुलिस ने भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों की सूची खंगाली। प्रोविजनल सूची में कुल 78 अभ्यर्थी थे, जबकि भर्ती में सिर्फ 24 पद थे।

इन 24 पदों में एसटी वर्ग के लिए एक पद आरक्षित था। एसटी वर्ग के 6 अभ्यर्थी सूची में शामिल थे। पुलिस ने इन छहों की पड़ताल शुरू की। इनमें से एक अभ्यर्थी खुद आरपीएससी को शिकायत करने वाला निकला। इसके बाद जांच का फोकस और संकरा हुआ।

एक नेटवर्क से जुड़ी दो आईडी

जांच का सबसे अहम मोड़ तब आया, जब पुलिस ने राहुल मीणा की SSO ID की तकनीकी जांच की। उसमें यह सामने आया कि उसकी आईडी भी उसी नेटवर्क से संचालित हो रही थी, जिससे फर्जी SSO ID चल रही थी। यहीं से पुलिस का शक राहुल पर गहरा गया।

यानी RPSC Portal Hack मामले में आरोपी ने एक तरफ फर्जी डिजिटल पहचान बनाई, दूसरी तरफ अपनी असली डिजिटल गतिविधि भी उसी नेटवर्क से चलाई। यही चूक उसके खिलाफ सबसे बड़ी तकनीकी कड़ी बन गई।

पुलिस के लिए यही वह बिंदु था, जहां मामला केवल शक से निकलकर ठोस दिशा में पहुंच गया।

डिलीवरी बॉय बनकर पहुंची पुलिस

जांच में पता चला कि राहुल झारखंड से छुट्टी लेकर अपने गांव दौसा पहुंच चुका है। इसके बाद पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए विशेष टीम बनाई। टीम में शामिल कॉन्स्टेबल सोनू चौधरी ने आरोपी तक पहुंचने के लिए सीधा तरीका नहीं अपनाया।

वह निजी कंपनी के डिलीवरी बॉय के रूप में राहुल के छोटे भाई लोकेश के संपर्क में आया। उसने कहा कि राहुल के नाम एक कोरियर आया है। अगर घर का पता नहीं बताया गया तो पार्सल वापस लौट जाएगा। कोरियर की बात सुनकर लोकेश ने घर का पता बता दिया।

इसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस को देखकर राहुल भागने लगा, लेकिन टीम ने पीछा कर उसे दबोच लिया। इस तरह RPSC Portal Hack का आरोपी तकनीकी जांच और जमीनी पुलिसिंग, दोनों के मेल से पकड़ा गया।

दिसंबर 2025 से चल रही थी तैयारी

पुलिस जांच में सामने आया कि राहुल मीणा ने दिसंबर 2025 से ही आरपीएससी रिक्रूटमेंट पोर्टल में सेंध लगाने की तैयारी शुरू कर दी थी। वह लंबे समय से आईटी में रुचि रखता था। पुलिस का कहना है कि वह पहले भी निजी वेबसाइटों से इसी तरह की छेड़छाड़ कर चुका है।

यानी यह काम अचानक नहीं हुआ। यह योजना पहले से बनाई गई थी। उसने AI टूल्स की मदद से ऐसे कमांड तैयार किए, जिनसे पोर्टल की कमजोरियों का फायदा उठाया जा सके।

यहां RPSC Portal Hack की गंभीरता और बढ़ जाती है, क्योंकि यह केवल मौके का अपराध नहीं, बल्कि तैयारी के साथ किया गया डिजिटल हस्तक्षेप दिखाई देता है।

पहले टॉपर को हटाया, फिर दो और नाम

पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि पोर्टल में घुसने के बाद राहुल ने सबसे पहले अपनी श्रेणी के पहले नंबर के अभ्यर्थी का आवेदन विड्रॉ किया। कुछ देर बाद उसे लगा कि अगर सिर्फ एक ही नाम हटाया गया तो शक सीधे उसी पर जाएगा।

इसके बाद उसने उसी श्रेणी के चौथे और छठे नंबर के अभ्यर्थियों के आवेदन भी विड्रॉ कर दिए। उसका मकसद शक को बिखेरना था। यानी उसने केवल तकनीकी सेंध नहीं लगाई, बल्कि जांच की दिशा को गुमराह करने की भी कोशिश की।

यह पॉइंट इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे साफ होता है कि आरोपी भर्ती सूची की रैंकिंग और उसके असर को समझता था। उसने सिर्फ सिस्टम नहीं देखा, चयन प्रक्रिया की संवेदनशीलता भी समझी।

खबर आते ही गांव पहुंचा

जांच में यह भी सामने आया कि जैसे ही पोर्टल से छेड़छाड़ की खबर सार्वजनिक हुई, राहुल ने तुरंत अपने ऑफिस से छुट्टी ली और दौसा स्थित घर पहुंच गया। वहां पहुंचकर उसने अपने लैपटॉप और मोबाइल का डेटा डिलीट कर दिया।

यह कदम पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सबूत है। इससे यह संकेत मिलता है कि आरोपी को अंदाजा था कि तकनीकी जांच उस तक पहुंच सकती है। अब साइबर थाना पुलिस ने उसका मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर एफएसएल जांच के लिए भेज दिया है।

डिलीट किए गए डेटा की रिकवरी होने पर मामले में और खुलासे हो सकते हैं। पुलिस को उम्मीद है कि RPSC Portal Hack से जुड़ी और भी डिजिटल परतें सामने आएंगी।

पढ़ा-लिखा परिवार, सरकारी नौकरी की चाह

पुलिस जांच के अनुसार राहुल मीणा शिक्षित परिवार से आता है। उसके पिता सरकारी बैंक में मैनेजर हैं। बहन सरकारी कर्मचारी है। छोटा भाई प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है। खुद राहुल 2019 से SAIL में माइनिंग इंजीनियर के पद पर कार्यरत है।

इसके बावजूद वह राजस्थान वापस आना चाहता था। पुलिस का कहना है कि इसी वजह से उसने सहायक खनिज अभियंता भर्ती परीक्षा-2024 में अपना चयन सुनिश्चित करने के लिए यह रास्ता अपनाया। यानी यह मामला बेरोजगारी या मजबूरी का नहीं, बल्कि शॉर्टकट से नौकरी हासिल करने की कोशिश का है।

यही कारण है कि RPSC Portal Hack मामला प्रशासनिक और नैतिक, दोनों स्तरों पर गंभीर माना जा रहा है।

जांच का अगला चरण

फिलहाल आरोपी 25 तारीख तक पुलिस रिमांड पर है। साइबर थाना उससे गहन पूछताछ कर रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या उसने यह काम अकेले किया या किसी और की मदद ली। यह भी जांच का हिस्सा है कि क्या भर्ती पोर्टल की और परतों तक पहुंच बनाई गई थी।

इस मामले का असर केवल एक भर्ती तक सीमित नहीं रहेगा। अगर OTR और भर्ती पोर्टल की सुरक्षा में कमजोरी साबित होती है, तो आरपीएससी समेत दूसरे भर्ती सिस्टम की तकनीकी समीक्षा का दबाव बढ़ेगा।

भर्ती परीक्षाओं में भरोसा प्रश्नपत्र लीक से ही नहीं टूटता। डिजिटल सिस्टम में इस तरह की घुसपैठ भी उतनी ही खतरनाक है। यही इस पूरे मामले की सबसे बड़ी चेतावनी है।

FAQs
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: RPSC Portal Hack मामले में कौन गिरफ्तार हुआ है?
उत्तर: इस मामले में दौसा निवासी राहुल कुमार मीणा को गिरफ्तार किया गया है। वह झारखंड में SAIL में माइनिंग इंजीनियर के पद पर कार्यरत है।

प्रश्न 2: आरोपी पर क्या आरोप है?
उत्तर: आरोप है कि उसने भर्ती पोर्टल में सेंध लगाकर सहायक खनिज अभियंता भर्ती-2024 की प्रोविजनल सूची से तीन अभ्यर्थियों के आवेदन विड्रॉ कर दिए।

प्रश्न 3: पुलिस के अनुसार उसने पोर्टल में कैसे घुसपैठ की?
उत्तर: पुलिस का कहना है कि आरोपी ने ChatGPT, DeepSeek और दूसरे AI टूल्स की मदद से प्रॉम्प्ट तैयार किए और OTR सिस्टम को बायपास किया।

प्रश्न 4: OTR सिस्टम क्या है?
उत्तर: OTR यानी वन टाइम रजिस्ट्रेशन सिस्टम। यही भर्ती प्रक्रिया की शुरुआती डिजिटल पहचान और सत्यापन की मुख्य व्यवस्था होती है।

प्रश्न 5: पुलिस राहुल मीणा तक कैसे पहुंची?
उत्तर: जांच में फर्जी SSO ID और राहुल की असली SSO ID एक ही नेटवर्क से चलती मिलीं। इसी तकनीकी कड़ी से पुलिस का शक राहुल पर गया।

प्रश्न 6: कॉन्स्टेबल ने आरोपी को कैसे पकड़ा?
उत्तर: एक कॉन्स्टेबल डिलीवरी बॉय बनकर आरोपी के छोटे भाई के पास पहुंचा। कोरियर के बहाने घर का पता लिया गया और फिर पुलिस ने राहुल को गिरफ्तार कर लिया।

प्रश्न 7: आरोपी ने किन अभ्यर्थियों को हटाया था?
उत्तर: पुलिस के अनुसार उसने पहले अपनी श्रेणी के पहले नंबर के अभ्यर्थी का आवेदन हटाया। बाद में शक से बचने के लिए चौथे और छठे नंबर के अभ्यर्थियों के आवेदन भी विड्रॉ कर दिए।

प्रश्न 8: क्या आरोपी पहले से इस हैकिंग की तैयारी कर रहा था?
उत्तर: हां। पुलिस जांच में सामने आया कि उसने दिसंबर 2025 से आरपीएससी पोर्टल में सेंध लगाने की तैयारी शुरू कर दी थी।

प्रश्न 9: पुलिस ने उसके कौन-कौन से डिवाइस जब्त किए हैं?
उत्तर: पुलिस ने उसका मोबाइल और लैपटॉप जब्त किया है। दोनों को एफएसएल जांच के लिए भेजा गया है।

प्रश्न 10: इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
उत्तर: डिलीट किए गए डेटा की रिकवरी के बाद और खुलासे हो सकते हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने यह काम अकेले किया या किसी और की मदद ली।

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सांवरिया सेठ सिंह

थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।

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