Explainer:नेहरू ने शुरू कराया, मोदी ने पूरा किया: क्या है सरदार सरोवर प्रोजेक्ट Read it later

Sardar Sarovar Project: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए कांग्रेस की “नीति बनाम क्रियान्वयन” की राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने नर्मदा डैम का उदाहरण देते हुए कहा कि जब गुजरात के लिए नर्मदा डैम की योजना बनी, तब वे पैदा भी नहीं हुए थे। सरदार वल्लभभाई पटेल के निधन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru ने इस परियोजना की शुरुआत कराई, लेकिन दशकों तक यह अधूरी रही।

मोदी ने कहा कि जब वे प्रधानमंत्री बने, तब उन्होंने इस परियोजना का उद्घाटन किया, जबकि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने किसानों के हक के लिए तीन दिन तक अनशन भी किया था।

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नर्मदा नदी और बहुउद्देश्यीय परियोजना की परिकल्पना

नर्मदा नदी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है, जो मध्य प्रदेश से निकलकर महाराष्ट्र और गुजरात से होते हुए अरब सागर में मिलती है। आज़ादी के बाद देश में सिंचाई, बिजली और पेयजल की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए नर्मदा नदी पर एक बहुउद्देश्यीय परियोजना की कल्पना की गई।

इसका उद्देश्य केवल बांध बनाना नहीं था, बल्कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों को पानी, किसानों को सिंचाई, गांवों को बिजली और शहरों को पीने का पानी उपलब्ध कराना था।

नेहरू काल में नर्मदा डैम योजना की शुरुआत

सरदार वल्लभभाई पटेल नर्मदा परियोजना के बड़े समर्थक माने जाते थे। उनके निधन के बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस परियोजना (Sardar Sarovar Project) को आगे बढ़ाया। 1940 और 1950 के दशक में नर्मदा घाटी विकास को लेकर प्रारंभिक सर्वेक्षण, रिपोर्ट और तकनीकी अध्ययन शुरू हुए।

नेहरू का मानना था कि बड़े बांध आधुनिक भारत के “नए मंदिर” हैं और नर्मदा घाटी परियोजना इसी सोच का हिस्सा थी।

नर्मदा जल विवाद और लंबा राजनीतिक संघर्ष

नर्मदा नदी तीन प्रमुख राज्यों—मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात—से होकर गुजरती है। इसी कारण जल बंटवारे, ऊंचाई, डूब क्षेत्र और लाभ वितरण को लेकर दशकों तक विवाद चला।

1969 में नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) का गठन हुआ। 1979 में ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला सुनाया, जिसमें बांध की ऊंचाई, राज्यों का जल हिस्सा और पुनर्वास से जुड़े दिशा-निर्देश तय किए गए।

इसके बावजूद, राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक ढिलाई के कारण परियोजना की गति बेहद धीमी रही।

Sardar Sarovar Project

सरदार सरोवर प्रोजेक्ट (SSP) क्या है?

Sardar Sarovar Project नर्मदा नदी पर बना एक विशाल बहुउद्देश्यीय बांध और नहर प्रणाली है, जो गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित है। इसे “सरदार सरोवर” नाम सरदार वल्लभभाई पटेल के सम्मान में दिया गया।

इस परियोजना के प्रमुख उद्देश्य हैं:

  • गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के सूखा प्रभावित क्षेत्रों को सिंचाई

  • लाखों लोगों को पीने का पानी

  • जलविद्युत उत्पादन

  • ग्रामीण और शहरी विकास को गति देना

परियोजना में देरी के कारण

Sardar Sarovar Project को पूरा होने में कई दशकों का समय लगा। इसके पीछे कई कारण रहे—

  • राज्यों के बीच जल विवाद

  • पुनर्वास और विस्थापन से जुड़े मुद्दे

  • पर्यावरणीय आपत्तियां

  • राजनीतिक मतभेद और नीति बनाम क्रियान्वयन की खाई

यही कारण है कि एक ऐतिहासिक परियोजना लंबे समय तक कागजों और फाइलों में अटकी रही।

मोदी का मुख्यमंत्री काल और नर्मदा आंदोलन
Sardar Sarovar Project
16 अप्रैल 2006 को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी अहमदाबाद में हिंदू पुजारियों और धार्मिक नेताओं के साथ अनशन में हिस्‍सा लेते हुए, उन्होंने सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई से जुड़े मुद्दे पर केंद्र सरकार के रुख के विरोध में 51 घंटे के अनशन में भाग लिया था। इस दौरान उन्होंने विभिन्न धार्मिक गुरुओं से आशीर्वाद लिया था और किसानों व गुजरात के हित में बांध की ऊंचाई बढ़ाने की मांग को लेकर उपवास शुरू किया था। image credit: Getty Images

नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में बताया कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने नर्मदा डैम के लिए तीन दिन तक अनशन किया था। यह अनशन गुजरात के किसानों और जल अधिकारों के लिए था। उनका कहना था कि नर्मदा का पानी गुजरात तक पहुंचना चाहिए और वर्षों से अटकी परियोजना को राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ पूरा किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री बनने के बाद SSP को मिली गति
Sardar Sarovar Project
17 सितंबर 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार सरोवर बांध स्थल का दौरा किया था। Getty Images

2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने सरदार सरोवर प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी।

  • बांध की ऊंचाई बढ़ाने का कार्य तेज हुआ

  • नहर नेटवर्क का विस्तार किया गया

  • पुनर्वास और मुआवजे के मामलों को तेजी से निपटाया गया

आखिरकार 2017 में सरदार सरोवर बांध का औपचारिक उद्घाटन किया गया।

SSP से किसानों और गांवों को क्या लाभ हुआ?

Sardar Sarovar Project से लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिली। गुजरात और राजस्थान के कई सूखा प्रभावित इलाके हरित पट्टी में बदलने लगे।

  • किसानों की फसल उत्पादकता बढ़ी

  • खेती पर निर्भरता मजबूत हुई

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली

मोदी ने राज्यसभा में कहा कि उन्होंने किसानों के लिए खुद को “दांव पर लगाया” था।

पीने के पानी और शहरी विकास में भूमिका

SSP केवल सिंचाई परियोजना नहीं है। इसके जरिए गुजरात के हजारों गांवों और कई शहरों को पीने का पानी उपलब्ध कराया गया। इससे महिलाओं और बच्चों को पानी के लिए मीलों दूर जाने की मजबूरी से राहत मिली और स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार देखा गया।

जलविद्युत और ऊर्जा सुरक्षा

Sardar Sarovar Project से जलविद्युत उत्पादन भी होता है, जिससे क्षेत्रीय ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली। यह परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इम्प्लीमेंटेशन पॉलिटिक्स का उदाहरण

राज्यसभा में अपने भाषण में नरेंद्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस सरकारों के समय नीतियां बनीं, योजनाएं बनीं, लेकिन ज़मीन पर काम नहीं हुआ। उनके अनुसार, सरदार सरोवर प्रोजेक्ट इस बात का उदाहरण है कि कैसे दशकों पुरानी योजना को राजनीतिक इच्छाशक्ति से पूरा किया जा सकता है।

नर्मदा डैम: राजनीति से परे एक राष्ट्रीय परियोजना

आज सरदार सरोवर प्रोजेक्ट केवल एक बांध नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा का प्रतीक बन चुका है। यह परियोजना बताती है कि कैसे दूरदृष्टि, धैर्य और क्रियान्वयन से राष्ट्रीय सपनों को साकार किया जा सकता है।

नर्मदा घाटी विकास परियोजना का तकनीकी और भौगोलिक महत्व

Sardar Sarovar Project केवल एक बांध नहीं, बल्कि नर्मदा घाटी विकास परियोजना (Narmada Valley Development Project) का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। नर्मदा नदी लगभग 1312 किलोमीटर लंबी है और इसका जलग्रहण क्षेत्र तीन राज्यों—मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात—में फैला है। इस परियोजना के अंतर्गत कुल 30 बड़े, 135 मध्यम और करीब 3000 छोटे बांध प्रस्तावित थे, जिनमें सरदार सरोवर सबसे बड़ा और रणनीतिक रूप से अहम है।

इसका स्थान गुजरात के नर्मदा जिले में चुना गया ताकि नदी का अधिकतम जल उपयोग पश्चिमी भारत के सूखा-प्रवण क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सके। यह परियोजना इंजीनियरिंग, हाइड्रोलॉजी और क्षेत्रीय योजना—तीनों का अनूठा संगम मानी जाती है।

नहर नेटवर्क: भारत की सबसे लंबी जल वितरण प्रणाली

सरदार सरोवर परियोजना की सबसे बड़ी ताकत इसका विशाल नहर नेटवर्क है। मुख्य नहर की लंबाई करीब 458 किलोमीटर है, जबकि शाखा और उप-नहरों को मिलाकर यह नेटवर्क 75,000 किलोमीटर से भी अधिक फैलता है। इस नहर प्रणाली के जरिए गुजरात के साथ-साथ राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों तक नर्मदा का पानी पहुंचाया गया।

यह भारत की सबसे जटिल और विस्तृत सिंचाई प्रणालियों में से एक मानी जाती है। इस नेटवर्क ने न केवल खेती योग्य क्षेत्र बढ़ाया, बल्कि पानी पर निर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायित्व भी दिया, जिससे सूखा-चक्र से जूझते क्षेत्रों में दीर्घकालिक समाधान मिला।

पुनर्वास, पर्यावरण और सामाजिक विमर्श

सरदार सरोवर प्रोजेक्ट अपने साथ बड़े सामाजिक और पर्यावरणीय प्रश्न भी लेकर आया। बांध के कारण कई गांवों के डूब क्षेत्र में आने से पुनर्वास एक बड़ा मुद्दा बना। वर्षों तक इस पर सामाजिक आंदोलनों, पर्यावरणीय बहसों और न्यायिक प्रक्रियाओं का दौर चला।

समय के साथ पुनर्वास नीति को संशोधित किया गया, मुआवजा बढ़ाया गया और प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक बसावट की व्यवस्था की गई। इस परियोजना ने भारत में “विकास बनाम पर्यावरण” की बहस को राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र में ला दिया और भविष्य की बड़ी परियोजनाओं के लिए नीतिगत सबक भी दिए।

Sardar Sarovar Project
11 मई 2006 को भारतीय संगठन नर्मदा बचाओ आंदोलन (NBA) के कार्यकर्ताओं ने महेश्वर पावर प्रोजेक्ट को मंजूरी दिए जाने के विरोध में नई दिल्ली में पर्यावरण और वन मंत्री के कार्यालय के प्रवेश द्वार को रोकते हुए सरकार विरोधी नारे लगाए थे। इससे पहले, NBA की नेता मेधा पाटकर ने सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाए जाने का विरोध करते हुए और विस्थापित ग्रामीणों के पुनर्वास की मांग को लेकर भूख हड़ताल की थी। उल्लेखनीय है कि 8 मई को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सरदार सरोवर बांध पर कार्य जारी रखने का फैसला सुनाया था। image:Getty Images
राष्ट्रीय जल नीति और दीर्घकालिक रणनीतिक भूमिका

Sardar Sarovar Project को भारत की दीर्घकालिक जल सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है। यह परियोजना बताती है कि नदी-आधारित योजनाएं केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संसाधन प्रबंधन का विषय होती हैं। नर्मदा का जल उपयोग सिंचाई, पेयजल और ऊर्जा—तीनों क्षेत्रों में संतुलन बनाता है।

आज जब जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और जल संकट जैसी चुनौतियां सामने हैं, तब Sardar Sarovar Project जैसी परियोजनाएं यह दिखाती हैं कि दूरदर्शी योजना और निरंतर क्रियान्वयन से दशकों पुरानी सोच को भी वर्तमान की जरूरतों के अनुरूप ढाला जा सकता है। यही कारण है कि यह परियोजना केवल गुजरात की नहीं, बल्कि पूरे भारत की रणनीतिक संपत्ति मानी जाती है।

परियोजना की मूल परिकल्पना
  • नर्मदा नदी पर आधारित बहुउद्देश्यीय राष्ट्रीय परियोजना

  • उद्देश्य: सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन

  • स्वतंत्र भारत की सबसे महत्वाकांक्षी जल परियोजनाओं में शामिल

 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
  • नर्मदा परियोजना की योजना आज़ादी के बाद बनी

  • सरदार वल्लभभाई पटेल ने अवधारणा का समर्थन किया

  • पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में परियोजना को आगे बढ़ाया गया

  • दशकों तक राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों से अधूरी रही

नर्मदा जल विवाद और समाधान
  • तीन राज्य: मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात

  • 1969 में नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन

  • 1979 में जल बंटवारा, बांध ऊंचाई और पुनर्वास तय

  • निर्णय के बाद भी क्रियान्वयन में वर्षों की देरी

सरदार सरोवर बांध की विशेषताएं
  • गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित

  • भारत के सबसे ऊंचे और मजबूत कंक्रीट बांधों में एक

  • सरदार वल्लभभाई पटेल के सम्मान में नामकरण

  • राष्ट्रीय महत्व की आधारभूत संरचना

 विशाल नहर नेटवर्क
  • मुख्य नहर की लंबाई: लगभग 458 किमी

  • कुल नहर नेटवर्क: 75,000 किमी से अधिक

  • गुजरात और राजस्थान के सूखा-प्रभावित क्षेत्रों तक जल आपूर्ति

  • भारत की सबसे बड़ी जल वितरण प्रणालियों में से एक

 किसानों और कृषि को लाभ
  • लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा

  • सूखा प्रभावित क्षेत्रों में खेती संभव

  • फसल उत्पादकता और किसान आय में वृद्धि

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायित्व

पेयजल आपूर्ति में योगदान
  • हजारों गांवों और कई शहरों को पीने का पानी

  • महिलाओं और बच्चों को पानी के लिए संघर्ष से राहत

  • स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता में सुधार

ऊर्जा उत्पादन और जलविद्युत
  • जलविद्युत उत्पादन से क्षेत्रीय ऊर्जा जरूरतों में योगदान

  • स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का स्रोत

  • औद्योगिक और ग्रामीण विकास को समर्थन

पुनर्वास और सामाजिक पक्ष
  • डूब क्षेत्र के कारण पुनर्वास की चुनौती

  • मुआवजा और वैकल्पिक बसावट की व्यवस्था

  • भारत में विकास बनाम पर्यावरण बहस का केंद्र

  • भविष्य की परियोजनाओं के लिए नीतिगत सबक

नरेंद्र मोदी का योगदान
  • मुख्यमंत्री रहते हुए नर्मदा जल के लिए 3 दिन का अनशन

  • प्रधानमंत्री बनने के बाद परियोजना को राष्ट्रीय प्राथमिकता

  • बांध ऊंचाई और नहर नेटवर्क का कार्य पूर्ण कराया

  • 2017 में परियोजना का उद्घाटन

राष्ट्रीय महत्व
  • केवल गुजरात नहीं, पूरे भारत की जल सुरक्षा से जुड़ी परियोजना

  • नीति से क्रियान्वयन तक की मिसाल

  • दीर्घकालिक जल प्रबंधन का मॉडल

नेहरू की नींव, मोदी का समापन

नर्मदा डैम की कहानी भारत की राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक यात्रा की कहानी है। पंडित नेहरू ने इसकी नींव रखी, लेकिन नरेंद्र मोदी ने इसे आकार देकर पूरा किया। Sardar Sarovar Project आज भारत के उन गिने-चुने प्रोजेक्ट्स में शामिल है, जिसने न केवल भूगोल बदला, बल्कि लाखों लोगों की ज़िंदगी भी।

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