इनकम टैक्स नियमों में बड़ी सर्जरी, 2026 से बदलेगा पूरा सिस्टम, लागू होंगे नए नियम Read it later

Income Tax Rules 2026 को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शनिवार को इनकम टैक्स विभाग ने नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया, जिसे 1 अप्रैल 2026 से लागू करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और आम करदाताओं के लिए ज्यादा आसान बनाना है।

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इनकम टैक्स रूल्स 2026 का ड्राफ्ट क्या है

इनकम टैक्स विभाग ने ‘इनकम टैक्स रूल्स, 2026’ का ड्राफ्ट सार्वजनिक कर दिया है। यह ड्राफ्ट मौजूदा ‘इनकम टैक्स रूल्स, 1962’ की जगह लेगा और अगले वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। सरकार का कहना है कि बीते छह दशकों में टैक्स नियमों में कई संशोधन और जोड़ हुए, जिससे सिस्टम जटिल हो गया। अब नए सिरे से नियमों को सरल, तार्किक और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया जा रहा है, ताकि आम टैक्सपेयर्स को अनुपालन में आसानी हो।

नियमों और फॉर्म की संख्या में बड़ी कटौती

नए ड्राफ्ट की सबसे बड़ी खासियत नियमों और फॉर्म की संख्या में भारी कमी है। अभी लागू नियमों के तहत कुल 511 नियम और 399 फॉर्म मौजूद हैं। प्रस्तावित ‘इनकम टैक्स रूल्स, 2026’ में इन्हें घटाकर सिर्फ 333 नियम और 190 फॉर्म कर दिया गया है। विभाग ने ऐसे कई प्रावधान हटा दिए हैं, जिनकी अब जरूरत नहीं थी, जबकि मिलते-जुलते नियमों को एक-दूसरे में मर्ज कर दिया गया है। इससे टैक्स कानून की जटिलता कम होगी और समझना आसान बनेगा।

क्यों जरूरी था इनकम टैक्स नियमों का सरलीकरण

सरकार और टैक्स विशेषज्ञ लंबे समय से यह मानते रहे हैं कि इनकम टैक्स कानून आम लोगों के लिए बेहद कठिन भाषा और जटिल प्रक्रियाओं में उलझा हुआ है। नियमों की अधिकता, बार-बार बदलते फॉर्म और कानूनी शब्दावली के कारण आम करदाता को चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स कंसल्टेंट पर निर्भर रहना पड़ता है। नए ड्राफ्ट का मकसद यही निर्भरता कम करना और टैक्सपेयर्स को स्वयं नियम समझकर पालन करने में सक्षम बनाना है।

आसान भाषा में तैयार होंगे टैक्स फॉर्म

वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने बजट भाषण के दौरान यह स्पष्ट किया था कि इनकम टैक्स के नियमों और फॉर्म को आम आदमी की भाषा में लाया जाएगा। इसी दिशा में नए ड्राफ्ट में फॉर्म को दोबारा डिजाइन किया गया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फॉर्म की भाषा अब ज्यादा यूजर-फ्रेंडली है और तकनीकी या कानूनी शब्दों को सरल तरीके से समझाया गया है। साथ ही, फॉर्म भरने से जुड़ी गाइडलाइंस को भी आसान बनाया गया है, ताकि गलतियां कम हों।

CBDT ने पब्लिक डोमेन में डाला ड्राफ्ट

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज यानी Central Board of Direct Taxes ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 के ड्राफ्ट को पब्लिक डोमेन में उपलब्ध करा दिया है। इसका मतलब है कि अब आम नागरिक, टैक्स प्रोफेशनल्स, उद्योग जगत और अन्य स्टेकहोल्डर्स इन नियमों को पढ़ सकते हैं और अपने सुझाव दे सकते हैं। सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से कानून ज्यादा व्यावहारिक और समावेशी बनेगा।

22 फरवरी तक दिए जा सकते हैं सुझाव

CBDT ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट पर सुझाव देने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है। यानी 22 फरवरी 2026 तक कोई भी व्यक्ति या संस्था अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकती है। इन सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नियमों को नोटिफाई किया जाएगा। यह कदम टैक्स कानून बनाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

नए इनकम टैक्स बिल की पहली बड़ी बात: टैक्स ईयर की अवधारणा

नए इनकम टैक्स बिल में ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह ‘टैक्स ईयर’ की अवधारणा लाई गई है। अब टैक्सपेयर्स को अलग-अलग वर्षों की गणना में उलझने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह बदलाव कर प्रणाली को ज्यादा सहज और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की कोशिश है।

कानून की संरचना में बदलाव: पन्ने कम, सेक्शन ज्यादा

नए बिल में कानून के पन्नों की संख्या 823 से घटाकर 622 कर दी गई है। हालांकि, चैप्टर्स की संख्या 23 ही रखी गई है। वहीं, सेक्शनों की संख्या 298 से बढ़ाकर 536 कर दी गई है। इसके अलावा, शेड्यूल्स की संख्या भी 14 से बढ़कर 16 हो गई है। इसका उद्देश्य कानून को ज्यादा व्यवस्थित और विषय-आधारित बनाना है, ताकि टैक्सपेयर्स को सही प्रावधान ढूंढने में आसानी हो।

क्रिप्टो एसेट्स पर सख्त प्रावधान

नए इनकम टैक्स बिल में क्रिप्टो एसेट्स को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब क्रिप्टो एसेट्स को किसी भी अनडिस्क्लोज्ड इनकम के तहत गिना जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे नकदी, बुलियन या ज्वेलरी को गिना जाता है। इसका उद्देश्य डिजिटल ट्रांजैक्शन को पारदर्शी बनाना और काले धन पर नियंत्रण मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि इससे क्रिप्टो से जुड़े लेन-देन कानूनी दायरे में आएंगे।

टैक्सपेयर्स चार्टर को कानूनी मान्यता

नए बिल में टैक्सपेयर्स चार्टर को शामिल किया गया है। यह चार्टर टैक्सपेयर्स के अधिकारों की रक्षा करेगा और टैक्स प्रशासन को ज्यादा जवाबदेह बनाएगा। इसमें टैक्स अधिकारियों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया है, ताकि मनमानी और अनावश्यक उत्पीड़न की शिकायतें कम हों।

सैलरी से जुड़ी कटौतियों का एकीकृत प्रावधान

सैलरी से संबंधित कटौतियों—जैसे स्टैंडर्ड डिडक्शन, ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट—को अब एक ही जगह पर सूचीबद्ध किया गया है। पुराने कानून में ये प्रावधान अलग-अलग सेक्शनों में फैले हुए थे, जिससे भ्रम पैदा होता था। नए ढांचे में इन्हें एक स्थान पर रखने से टैक्सपेयर्स के लिए नियम समझना और लागू करना आसान हो जाएगा।

आम टैक्सपेयर्स को क्या होगा फायदा

इनकम टैक्स रूल्स 2026 का सीधा लाभ आम करदाताओं को मिलने की उम्मीद है। कम नियम, कम फॉर्म और सरल भाषा से टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया आसान होगी। गलतियों की संभावना कम होगी और विवादों में भी कमी आ सकती है। सरकार का दावा है कि इससे ‘ईज ऑफ डूइंग टैक्सेशन’ बेहतर होगा।

टैक्स प्रोफेशनल्स और उद्योग जगत ने क्‍या  कहा

टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ड्राफ्ट सही दिशा में उठाया गया कदम है। हालांकि, वे यह भी कह रहे हैं कि अंतिम नियमों में व्यावहारिक पहलुओं का ध्यान रखना जरूरी होगा। उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरल नियमों से अनुपालन लागत घटेगी और बिजनेस फ्रेंडली माहौल बनेगा।

अंतिम नियमों से पहले क्या बदला जा सकता है

चूंकि यह अभी ड्राफ्ट स्टेज में है, इसलिए जनता और स्टेकहोल्डर्स के सुझावों के आधार पर इसमें बदलाव संभव हैं। सरकार ने संकेत दिया है कि जहां जरूरी होगा, वहां नियमों को और सरल या स्पष्ट किया जाएगा, ताकि 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला सिस्टम ज्यादा प्रभावी साबित हो।

टैक्स सिस्टम के नए दौर की तैयारी

इनकम टैक्स रूल्स 2026 का ड्राफ्ट भारत के टैक्स सिस्टम में बड़े सुधार की ओर इशारा करता है। यदि प्रस्तावित बदलाव सही तरीके से लागू होते हैं, तो यह न केवल टैक्सपेयर्स का भरोसा बढ़ाएगा, बल्कि टैक्स प्रशासन को भी ज्यादा पारदर्शी और आधुनिक बनाएगा। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि जनता के सुझावों के बाद अंतिम नियम किस रूप में सामने आते हैं।

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