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Impact of AI and Automation: ट्रेडिशनल इंजीनियरिंग रोल्स में 64% कमी, नए युग के AI और ML स्किल्स की मांग ऐसे बढ़ी

Impact of AI and Automation: AI के बढ़ते इस्‍तेमाल और सक्‍सेस के साथ, IT कंपनियां सिस्टम और DevOps (डवलपमेंट और ऑपरेशंस) इंजीनियर जैसी ट्रेडिशनल रोल्‍स हटकर AI, मशीन लर्निंग (ML), डेटा एनालिटिक्स और रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन (RPA) जैसी स्किल वाले न्‍यू ऐरा वाले रोल्‍स पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

AI और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्‍तेमाल की वजह से IT इंडस्‍ट्री में ट्रेडिशनल इंजीनियरिंग की डिमांड में कमी आई है। (Impact of AI and Automation) हाल ये है कि कंपनियां अब AI, ML (Artificial intelligence , machine learning) डेटा एनालिटिक्स और RPA जैसे स्किल्‍ड वाले नए युग की भूमिकाओं पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही हैं। हालांकि, ट्रेडिशनल इंजीनियरिंग स्किल्‍ड अभी भी महत्वपूर्ण हैं लेकिन तब जब नई एआई स्किल भी उनमें हो।

मुख्य बिंदु:
  • AI और ऑटोमेशन के कारण ट्रेडिशनल इंजीनियरिंग रोल्‍स में आई कमी।
  • AI, ML, डेटा एनालिटिक्स और RPA जैसे कौशल वाले नए युग की भूमिकाओं पर ध्यान केंद्रित।
  • भारत में एआई स्किल्‍ड सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की मांग मजबूत बन रही।
सिस्‍टम इंजीनियर्स की मांग में भारी गिरवट (Impact of AI and Automation)

TeamLease Digital के बिजनेस हेड कृष्णा विज की मानें तो “AI और ऑटोमेशन के आने से ट्रेडिशनल सिस्टम और DevOps इंजीनियरों की मांग कमी आ रही है, लेकिन AI से जुड़े फील्‍ड में नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।”

सिस्टम इंजीनियरों की डिमांड में महत्‍वपूर्ण तरीके से गिरावट आई है, जिसमें फाइनेंशियल ईयर 2022 से लेकर 2023 में 29% की गिरावट और फाइनेंशियल ईयर 2023 से लेकर 2024 में 64% की ज्‍यादा गिरावट आई है।

टेम्‍प्रेरी रिसेशन और एडजेस्‍टमेंट पीरियड वजह

Quess IT स्टाफिंग के डिप्टी सीईओ कपिल जोशी के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से पिछले सालों में भारी भर्ती के बाद एक एडजेस्‍टमेंट पीरियड को बताती है (Impact of AI and Automation) और कुछ क्षेत्रों में टेम्‍प्रेरी रिसेशन को दर्शाती है। हालांकि, इंडस्ट्री की ओर से डिजिटल चेंंज स्‍ट्रेटेजी को तेजी से अपनाने के साथ, अन्य क्षेत्रों में सिस्टम इंजीनियरों की मांग बढ़ रही है।

ये असर भी (Impact of AI and Automation)

Infosys ने 2022 में एक एक्‍स्‍ट्राऑर्डिनरी रिक्रूटमेंट ड्राइव दर्ज की थी, लेकिन अब हाल ये है कि इसे 500 से अधिक नए कर्मचारियों को शामिल करने में देरी का सामना करना पड़ रहा है। इस पर कंपनी की सफाई है कि वे रिक्रूटमेंट ड्राइव को विभिन्न बैचों की जॉइनिंग डेट्स को बदलकर प्रोजेक्ट शेड्यूल में बदलावों के अनुरूप बनाते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि कर्मचारियों के पास सही ट्रेनिंग हो।

AI और ML एक्‍स्‍पर्टीज को प्राथमिकता

AI, ML, डेटा एनालिटिक्स और RPA में एक्‍सपर्टीज के साथ ट्रेडिशनल इंजीनियरिंग स्किल्‍स को मिलाने वाली भूमिकाओं की वर्तमान में मजबूत डिमांड है। Randstad Digital इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर मिलिंद शाह कहते हैं, “कंपनियां AI, ML, डेटा एनालिटिक्स और RPA में एक्‍सपर्टीज वाले कैंडडेट्स को प्रयोरिटी दे रही हैं।”

हालांकि, डेटा एंट्री, कस्‍टमर सर्विस, टेक्‍न‍ि‍कल असिस्‍टेंस, ट्रेडिशनल सॉफ्टवेयर डेवलपर के साथ नेटवर्क और सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर जैसी भूमिकाएं AI की बढ़ती प्रोग्रेस से अधिक खतरे में हैं।

GitHub Copilot जैसे टूल अब इंजीनियरों के लिए 40% कोड लिख रहे

Fireflies.ai के को-फाउंडर मिलिंद शाह कहते हैं, साल “2022 से 2024 तक, AI और मशीन लर्निंग से जुड़ी जॉब अपॉर्च्‍यूनिटीज में 50% से ज्‍यादा की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी ओर, फ्रंटएंड, मोबाइल और बैकएंड डेवलपमेंट जैसी ट्रेडिशनल इंजीनियरिंग भूमिकाओं में लगभग 20% तक की गिरावट आई है। GitHub Copilot जैसे टूल, जो अब इंजीनियरों के लिए 40% कोड लिख रहे हैं, इस बदलाव का जीता जागता प्रमाण हैं।”

एक्‍सपर्ट्स की मानें तो वैसे तो ट्रेडिशनल जॉब रोल्‍स में गिरावट आई है, लेकिन इन AI तकनीकों का प्रभावी ढंग से यूज करने वाले स्किल्‍ड प्रोफेशनल्‍स की जरूरत बढ़ती जा रही है।

2025 तक होगी 1.1 मिलियन इंजीनियरों की जरूरत

भारत में स्‍कि‍ल्‍ड सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की मांग मजबूत बनी हुई है, जिसमें पहले से ही 5.2 मिलियन प्रोफेशनल्‍स एक्टिव हैं और यह डिमांड 2023 में 17% से बढ़कर 2025 में 22% होने की उम्मीद है, इस हिसाब से तब तक लगभग 1.1 मिलियन इंजीनियरों की जरूरत होगी।

image credit: freepik

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सांवरिया सेठ सिंह

थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।

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