Supreme Court का अल्टीमेटम: कुत्तों की नसबंदी करें, 6 हफ्तों में 5000 पकड़ने का टारगेट Read it later

Stray Dogs Sterilization: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को Delhi-NCR के सभी नगर निकायों, MCD और NMDC को आदेश दिया कि आवारा कुत्तों को तुरंत पकड़कर sterilization करें और उन्हें स्थायी रूप से dog shelter homes में रखें। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने साफ कहा कि इस काम में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।

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बाधा डालने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर कोई व्यक्ति या संगठन इस प्रक्रिया में बाधा डालेगा तो उसके खिलाफ strict legal action लिया जाएगा। इसके लिए जरूरत पड़ने पर special dog catching force भी बनाई जा सकती है।

रेबीज और (Stray Dogs) डॉग बाइट के बढ़ते मामले चिंता का कारण

यह मामला तब उठा जब 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने संसद में पेश रिपोर्ट पर suo motu cognizance लिया। रिपोर्ट में बताया गया था कि Delhi-NCR में rabies cases और dog bite incidents तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की मौत तक हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट के 5 अहम आदेश

1. 8 हफ्तों में डॉग शेल्टर तैयार

पर्याप्त स्टाफ, CCTV surveillance और सभी सुविधाओं से लैस शेल्टर होम बनाकर कुत्तों (Stray Dogs) को नसबंदी के बाद वहीं रखें।

2. 6 हफ्तों में 5,000 कुत्ते पकड़ने का अभियान

संवेदनशील इलाकों से शुरुआत करते हुए बड़े पैमाने पर dog catching drive शुरू करें। बाधा डालने वालों पर तुरंत कार्रवाई हो।

3. रोजाना रिकॉर्ड मेंटेन करना

दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम में रोजाना पकड़े गए कुत्तों का रिकॉर्ड रखा जाए, नियम तोड़ने वालों पर penalty लगे।

4. डॉग बाइट हेल्पलाइन

एक हफ्ते में dog bite helpline शुरू हो, जिससे 4 घंटे के भीतर टीम मौके पर पहुंचे और कुत्ते को नसबंदी के बाद शेल्टर में रखा जाए।

5. रेबीज वैक्सीन का स्टॉक

सभी नगर निकाय रेबीज वैक्सीन का पर्याप्त stock उपलब्ध रखें और इसकी रिपोर्ट पेश करें।

रेबीज से मौतें ‘डराने वाली स्थिति’

28 जुलाई को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि रेबीज से मौतों के आंकड़े alarming हैं। Animal bite से जुड़े मामलों पर तुरंत एक्शन जरूरी है।

चौंकाने वाले आंकड़े
  • 2024 में 37 लाख से ज्यादा dog bites दर्ज हुए, जिनमें 54 मौतें रेबीज से हुईं।

  • 5.19 लाख पीड़ित 15 साल से कम उम्र के बच्चे थे।

  • दिल्ली में  (Stray Dogs) dog bite cases में 143% की बढ़ोतरी।

  • 2023 में 30.5 लाख और 2022 में 21.9 लाख मामले सामने आए।

  • सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में दर्ज हुए।

सालभर में 21 लाख से ज्यादा डॉग बाइट केस दर्ज

देशभर में वर्ष 2024 में कुल 26.99 लाख एनिमल बाइट के मामले सामने आए।

81% से ज्यादा मामले सिर्फ डॉग बाइट के

इनमें से 21.95 लाख यानी लगभग 81.33% मामले सिर्फ dog bite से जुड़े थे।

5 लाख से ज्यादा केस बंदरों और अन्य जानवरों के हमलों के

लगभग 5.04 लाख मामले बंदरों और अन्य जानवरों द्वारा काटने के थे।

20% पीड़ित बच्चे थे

कुल मामलों में करीब 20% शिकार बच्चे थे, यानी हर 5 पीड़ितों में से 1 बच्चा था।

यह आंकड़ा पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा जारी किया गया है और वर्ष 2024 के मामलों पर आधारित है।

महाराष्ट्र डॉग बाइटिंग मामलों में पहले स्थान पर

ताजा आंकड़ों के अनुसार, dog biting cases में महाराष्ट्र सबसे आगे है। यहां कुल 4,85,345 मामले दर्ज हुए हैं, जो देश में सबसे ज्यादा हैं।

तमिलनाडु करीब-करीब बराबरी पर

दूसरे नंबर पर तमिलनाडु है, जहां 4,80,427 डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं।

गुजरात तीसरे नंबर पर

गुजरात में 3,92,837 डॉग बाइट के केस दर्ज हुए, जो इसे तीसरे स्थान पर रखते हैं।

कर्नाटक भी टॉप लिस्ट में शामिल

कर्नाटक में 3,61,494 मामले रिपोर्ट हुए हैं, जो डॉग अटैक के मामलों में गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं।

बिहार में दो लाख से ज्यादा मामले

बिहार में 2,63,930 डॉग बाइट के मामले दर्ज हुए, जो इस समस्या के व्यापक फैलाव को दिखाते हैं।

केरल में एक लाख से अधिक केस

केरल में 1,15,046 डॉग बाइट केस सामने आए हैं।

दिल्ली में 25,210 मामले

राजधानी दिल्ली में 25,210 मामले रिपोर्ट हुए हैं, हालांकि संख्या कम है लेकिन यहां डॉग बाइट के मामलों में 143% की बढ़ोतरी देखी गई है।

दिल्ली की बच्ची की दर्दनाक मौत

रिपोर्ट में दिल्ली की 6 साल की बच्ची छवि शर्मा का जिक्र था, जिसे 30 जून को कुत्ते (Stray Dogs) ने काटा था और 26 जुलाई को इलाज के बावजूद उसकी मौत हो गई।

CJI के सामने जाएगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने इस रिपोर्ट को जनहित याचिका के रूप में दर्ज कर Chief Justice of India के सामने रखने का आदेश दिया।

पहले भी जताई थी चिंता

15 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में आवारा कुत्तों को खिलाने के लिए तय जगह की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि लोग अगर कुत्तों को खाना देना चाहते हैं तो अपने घर में दें, ताकि public safety बनी रहे।

आवारा कुत्तों से सुरक्षा और सावधानियां: जरूरी सवाल-जवाब

सवाल- आवारा कुत्तों के हमलों के पीछे क्या कारण होते हैं?

जवाब: अधिकतर मामलों में stray dogs डर, भूख या अपने इलाके की सुरक्षा के लिए आक्रामक हो जाते हैं। कई बार झुंड में रहने से उनकी आक्रामकता बढ़ जाती है। Rabies जैसी बीमारियां भी उनके व्यवहार को खतरनाक बना सकती हैं। साथ ही इंसानों द्वारा डराना, मारना या चिढ़ाना भी हमले को उकसाता है। इन कारणों को समझना जरूरी है ताकि सही dog attack prevention उपाय अपनाए जा सकें।

सवाल- मौसम में बदलाव कुत्तों के व्यवहार को कैसे प्रभावित करता है?

जवाब: मौसम बदलने का सीधा असर आवारा कुत्तों के मूड और व्यवहार पर पड़ता है। गर्मी में उन्हें ठंडी और सुरक्षित जगह या पानी नहीं मिलता, जिससे वे थकान और चिड़चिड़ेपन का शिकार होते हैं और हमला कर सकते हैं। बरसात के मौसम में skin infection, घाव या खुजली जैसी समस्याएं उन्हें और इरिटेट कर देती हैं, जिससे आक्रामकता बढ़ जाती है।

सवाल- बच्चों को आवारा कुत्तों से बचाने के लिए पेरेंट्स को क्या करना चाहिए?

जवाब: पेरेंट्स को बच्चों को कुत्तों से डरना और उनकी आदतों को समझना सिखाना चाहिए। उन्हें बताएं कि कुत्तों को न चिढ़ाएं, न पत्थर फेंकें और न परेशान करें। बच्चों को अकेले गली-मोहल्ले में न भेजें, खासकर जहां dog packs हों। अगर आसपास कुत्ते आक्रामक हों तो तुरंत स्थानीय प्रशासन को सूचित करें।

सवाल- कैसे पहचानें कि कोई कुत्ता हमला कर सकता है?

जवाब: कुत्तों की बॉडी लैंग्वेज और हरकतें देखकर पता लगाया जा सकता है कि वे शांत हैं या आक्रामक होने वाले हैं। कान पीछे करना, दांत दिखाना, गुर्राना या पूंछ सख्त करना dog aggression signals हो सकते हैं। समय रहते पहचानकर बचाव किया जा सकता है।

सवाल- अगर कुत्ता हमला करने की स्थिति में हो तो क्या करें?

जवाब: घबराएं नहीं और शांत रहें। उसकी आंखों में न देखें, धीरे-धीरे पीछे हटें। अपने और कुत्ते के बीच बैग, छड़ी या कपड़ा जैसे अवरोध रखें। अगर हमला हो जाए तो गिरकर सिर और गर्दन को हाथों से ढक लें और जोर से मदद के लिए आवाज लगाएं।

सवाल- कुत्ते के काटने पर तुरंत प्राथमिक उपचार कैसे करें?

जवाब: घाव को तुरंत साफ पानी और साबुन से धोएं ताकि infection का खतरा कम हो। साफ कपड़े या पट्टी से ढक दें। खून बह रहा हो तो रोकने की कोशिश करें और तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। डॉक्टर जरूरी टीके और दवाएं देंगे। घाव पर घरेलू नुस्खे न अपनाएं और केवल चिकित्सकीय सलाह लें।

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