Kanpur Lamborghini case में नया मोड़ तब आया, जब 6 लोगों को टक्कर मारने वाले अरबपति कारोबारी के बेटे को पुलिस ने गिरफ्तार करने के सिर्फ 7 घंटे के भीतर ही जमानत पर छोड़ दिया। कोर्ट में पुलिस रिमांड के लिए ठोस वजह नहीं बता पाई, वहीं पूरे मामले में शुरू से लेकर अब तक कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
7 घंटे में जमानत, कोर्ट में पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज
कानपुर लेम्बोर्गिनी कांड में अरबपति तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार तो किया, लेकिन वह महज़ 7 घंटे के भीतर ही जमानत पर बाहर आ गया। आरोपी के वकील अनंत शर्मा के मुताबिक, पुलिस ने कोर्ट में 14 दिन की रिमांड मांगी थी।
अदालत ने जब पूछा कि रिमांड किस आधार पर चाहिए और किस तरह की पूछताछ बाकी है, जबकि केस में लगी सभी धाराएं जमानती हैं, तो जांच अधिकारी कोई ठोस तर्क नहीं दे पाए। इसी वजह से कोर्ट ने रिमांड की अर्जी खारिज कर दी। बाद में शिवम ने 20 हजार रुपए के बेल बॉन्ड पर हस्ताक्षर किए और पुलिस ने उसे छोड़ दिया।
पुलिस का दावा था कि शिवम जांच में सहयोग नहीं कर रहा था और खुद को छिपाने की कोशिश कर रहा था। इसी आधार पर गुरुवार सुबह 8 बजे उसे घर के बाहर से गिरफ्तार दिखाया गया। आरोप है कि वह एंबुलेंस के जरिए भागने की कोशिश में था, जिस पर कार्रवाई की गई।
हादसे के बाद मेडिकल, कोर्ट पेशी और मीडिया पर भड़कना
गिरफ्तारी के बाद पुलिस शिवम को मेडिकल के लिए अस्पताल ले गई, जहां से सीधे ACJM कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट परिसर के बाहर जैसे ही मीडिया ने वीडियो बनाना शुरू किया, शिवम मीडियाकर्मियों पर भड़क उठा। इशारों और हावभाव से उसने सवाल उठाया कि वीडियो क्यों बना रहे हो।
पेशी के दौरान शिवम बीमार नजर आया। उसके हाथ में वीगो लगी हुई थी और पुलिसकर्मियों एवं रिश्तेदारों का सहारा लेते हुए वह कोर्ट परिसर में अंदर-बाहर होता दिखा। इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुए, जिसके बाद पुलिस और सिस्टम पर सवाल और तेज हो गए।
8 फरवरी की सुबह का हादसा: 14 करोड़ की लेम्बोर्गिनी ने 6 लोगों को रौंदा
8 फरवरी को कानपुर के वीआईपी रोड इलाके में करोड़ों की लग्जरी लेम्बोर्गिनी कार ने अचानक नियंत्रण खो दिया और तेज रफ्तार में सड़क किनारे चल रहे लोगों को टक्कर मार दी। इस हादसे में 6 लोग घायल हो गए। कार की अनुमानित कीमत करीब 14 करोड़ रुपए बताई जाती है।
यह कार आर्यनगर निवासी तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा चला रहे थे। हादसे के तुरंत बाद हड़कंप मच गया, पुलिस मौके पर पहुंची और कार को थाने ले जाया गया। कार को कवर से ढक दिया गया, जिससे लोगों में यह सवाल भी उठा कि क्या सबूतों को छुपाने की कोशिश हो रही है।
पहले FIR नहीं, फिर 6 घंटे बाद ‘अज्ञात’ के नाम मुकदमा
हादसे के तुरंत बाद भी पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। मामला जब सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर सुर्खियों में आया, तब दबाव बढ़ा। शाम तक सवाल उठने लगे कि इतने बड़े हादसे के बाद भी मामला दर्ज क्यों नहीं हुआ।
करीब 6 घंटे बाद रात 8:30 बजे पुलिस ने कार नंबर के आधार पर ‘अज्ञात ड्राइवर’ के खिलाफ FIR दर्ज की। बाद में समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने भी इस घटना पर ट्वीट कर सवाल उठाए, जिसके बाद केस ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया। उसी के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अफसरों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
फिर भी, FIR में शिवम मिश्रा का नाम तत्काल नहीं जोड़ा गया। लगभग 24 घंटे बाद जाकर पुलिस ने FIR में संशोधन कर शिवम को नामजद आरोपी बनाया।
अरबपति पिता की कोशिशें: ‘बेटा नहीं, ड्राइवर चला रहा था कार’
तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा ने अपने इकलौते बेटे शिवम को बचाने के लिए हर संभव कोशिश की। हादसे के तुरंत बाद उन्होंने सबसे पहले यही सुनिश्चित किया कि शिवम को घटनास्थल से हटा लिया जाए।
10 फरवरी को केके मिश्रा ग्वालटोली थाने पहुंचे और बयान दिया कि हादसे के समय कार उनका बेटा नहीं, ड्राइवर मोहन चला रहा था। उनका दावा था कि शिवम उस समय कार की पिछली सीट पर सो रहा था। हादसे के झटके से कार लॉक हो गई, जिससे शिवम की तबीयत बिगड़ गई और बाद में शिशा तोड़कर उसे बाहर निकाला गया।
इधर, हादसे के बाद जब मामला बढ़ा तो पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने साफ कहा कि जांच में यह बात साबित हो चुकी है कि लेम्बोर्गिनी कार कारोबारी का बेटा शिवम ही चला रहा था। इस बयान पर केके मिश्रा भड़क गए और सार्वजनिक रूप से कमिश्नर पर झूठ बोलने का आरोप लगाया।
समझौते की कोशिश, पीड़ित का बयान और पुलिस का इंकार
11 फरवरी को इस केस में नया मोड़ आया, जब हादसे में घायल और FIR दर्ज कराने वाले मोहम्मद तौसीफ की ओर से समझौते की खबर सामने आई। कारोबारी के वकील धर्मेंद्र सिंह ने कोर्ट में एक समझौतानामा पेश किया, जिसमें तौसीफ की तरफ से कहा गया था कि इलाज का खर्च दे दिया गया है और वह पूरी तरह संतुष्ट है, अब कोई कार्रवाई नहीं चाहता।
तौसीफ ने यह भी दावा किया कि हादसे के वक्त कार ड्राइवर मोहन ही चला रहा था। हालांकि, पुलिस ने इस कथित समझौते से साफ इनकार कर दिया। DCP अतुल कुमार ने कहा कि पुलिस रिकॉर्ड में उन्हें किसी तरह का समझौता पत्र प्राप्त नहीं हुआ है और उनकी जांच में आरोपी के रूप में शिवम का नाम ही सामने आया है, ड्राइवर मोहन का नहीं।
ड्राइवर मोहन का सरेंडर, गियर वाले सवाल पर खुली पोल
इसी दिन दोपहर में तंबाकू कारोबारी की ओर से नया पैंतरा चला गया। ड्राइवर मोहन नाम का युवक अचानक कानपुर कोर्ट पहुंचा और सरेंडर कर दिया। कोर्ट में उसने कहा कि हादसे के समय कार वही चला रहा था, जबकि शिवम को दौरा पड़ा था और वह पैसेंजर सीट पर था। मोहन के मुताबिक, जब कार का कांच तोड़ा गया और दरवाजा खोला गया, तो वह घबराकर वहां से निकल गया था।
लेकिन कोर्ट ने पुलिस की रिपोर्ट और पूरे केस डायरी का अध्ययन करने के बाद मोहन की अर्जी खारिज कर दी। उसे लेम्बोर्गिनी केस में आरोपी नहीं माना गया। कोर्ट ने साफ कहा कि पुलिस दस्तावेजों में आरोपी के रूप में शिवम का ही नाम है, मोहन कहीं भी दर्ज नहीं है।
मीडिया ने जब मोहन से पूछा कि इस लेम्बोर्गिनी कार में कितने गियर होते हैं, तो उसने जवाब दिया—9 गियर। जबकि ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स के अनुसार, कार में 7 फॉरवर्ड गियर और 1 बैक गियर होता है, यानी कुल 8 गियर। इस जवाब ने उसके ‘ड्राइवर’ वाले दावे पर और भी सवाल खड़े कर दिए।
अरबपति कारोबारी की कंपनी, पुराना IT रेड और लग्जरी कारों की फौज
तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा की कंपनी बंशीधर एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कानपुर की टॉप गुटखा कंपनियों को तंबाकू सप्लाई करती है। करीब 2 साल पहले, 28 फरवरी को, आयकर विभाग ने कंपनी के हेड ऑफिस और कारोबारी के ठिकानों पर छापा मारा था।
उस कार्रवाई में दिल्ली स्थित उनकी कोठी से 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की कारें मिली थीं। इनमें करीब 60 करोड़ से ज्यादा कीमत की लग्जरी कारें शामिल थीं—16 करोड़ की रोल्स-रॉयस फैंटम, लेम्बोर्गिनी, फरारी, मैकलारेन जैसी हाई-एंड गाड़ियां भी वहीं खड़ी मिली थीं। आयकर जांच में उस समय 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की टैक्स चोरी का मामला भी सामने आया था।
कारोबारी का बेटा शिवम भी लग्जरी कारों का शौकीन बताया जाता है। उसके पास कई महंगी गाड़ियां हैं। उसने अपने बेटे के बर्थडे सेलिब्रेशन में बॉलीवुड के कई अभिनेताओं को बुलाया था और पार्टी पर करोड़ों रुपए खर्च किए थे। इसी तरह के हाई-प्रोफाइल खर्चों के बाद वह इनकम टैक्स विभाग के रडार पर भी आ गया था।
कोर्ट के सामने पुलिस की जांच पर अप्रत्यक्ष सवाल
शिवम मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अदालत में 14 दिन की रिमांड मांगते हुए कहा था कि जांच में अभी कई तथ्य सामने लाने हैं और आरोपी सहयोग नहीं कर रहा। लेकिन जब जज ने पूछा कि किन बिंदुओं पर रिमांड चाहिए, और क्या ऐसी कोई नॉन-बेलेबल धारा लगी है, तो जांच अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
रिमांड की अर्जी खारिज होते ही कोर्ट ने जमानत स्वीकार कर ली और 20 हजार रुपए के बेल बॉन्ड पर शिवम को रिहा कर दिया गया। कानूनी रूप से यह प्रक्रिया संभव है, क्योंकि केस की धाराएं जमानती हैं, लेकिन 6 लोगों को घायल करने वाले हाई-प्रोफाइल आरोपी का 7 घंटे में जमानत पर बाहर आ जाना, आम लोगों के बीच सिस्टम को लेकर अविश्वास भी बढ़ा रहा है।
कोर्ट ने बेल के साथ लगाई शर्तें: सहयोग नहीं किया तो मुश्किल बढ़ेगी
रिमांड की मांग खारिज करते समय अदालत ने शिवम पर कुछ शर्तें भी लगाई हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि—
आरोपी जांच में पूरा सहयोग करेगा।
तय तारीखों पर अदालत में पेश होगा।
जांच के दौरान किसी भी गवाह या पीड़ित को धमकाएगा नहीं।
किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं करेगा।
अदालत ने कहा कि अगर इन शर्तों का उल्लंघन होता है, तो भविष्य में बेल कैंसिल भी की जा सकती है और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा। उधर, पुलिस का दावा है कि वे कोर्ट की शर्तों के दायरे में रहते हुए आगे की जांच जारी रखेंगे।
कानपुर लेम्बोर्गिनी कांड: सिस्टम, साख और सवाल
इस पूरे Kanpur Lamborghini case ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या अमीरी और रसूख के आगे सिस्टम अब भी कमजोर पड़ जाता है?
FIR में देरी, ‘अज्ञात’ के नाम मुकदमा, फिर ड्राइवर मोहन की एंट्री—क्या यह सब महज़ संयोग था?
हादसे में घायल 6 लोगों को न्याय कब और कैसे मिलेगा?
एक तरफ अदालत ने कानूनी प्रक्रिया के दायरे में रहकर बेल दी, दूसरी तरफ ड्राइवर की थ्योरी, गियर वाले सवाल और पुराने IT रेड से जुड़ी जानकारियां आम लोगों के मन में शक पैदा करती हैं। आगे की जांच और कोर्ट में होने वाली कार्यवाही ही तय करेगी कि इस हाई-प्रोफाइल केस का अंत सच की जीत के साथ होगा या सवालों की लकीरें और लंबी होंगी।
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