जनगणना 2027: पहली बार जाति गिनती, हर घर बनेगा ‘डिजी डॉट’, 30 लाख कर्मचारी जुटाएंगे डेटा Read it later

Census 2027 भारत की अब तक की सबसे आधुनिक और व्यापक जनगणना होने जा रही है। पहली बार यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें हर घर का जियो-टैग बनेगा, जाति आधारित डेटा जुटेगा और 30 लाख कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए जानकारी इकट्ठा करेंगे।

Table of Contents

जनगणना 2027 (Census 2027) का पहला फेज कब और कैसे होगा

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के अनुसार, जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2027 के बीच आयोजित किया जाएगा। इस फेज की शुरुआत देशभर में घरों की लिस्टिंग और हाउसिंग डेटा कलेक्शन से होगी।
हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को अपने क्षेत्र में यह काम 30 दिनों के भीतर पूरा करना होगा।

क्या होगा पहले फेज में: घर-घर लिस्टिंग का काम

पहले चरण में हर मकान और परिवार की पहचान की जाएगी। इसमें यह दर्ज होगा कि—

  • मकान पक्का है या कच्चा

  • घर में कितने लोग रहते हैं

  • बिजली, पानी, शौचालय जैसी सुविधाएं हैं या नहीं

  • घर का भौगोलिक स्थान (Geo-tagging)

Census 2027 की पूरी प्रक्रिया अगले चरण में होने वाली वास्तविक जनसंख्या गणना की मजबूत नींव बनेगी।

सेल्फ एन्यूमरेशन का विकल्प भी मिलेगा

सरकार ने साफ किया है कि घर-घर लिस्टिंग शुरू होने से 15 दिन पहले नागरिकों को Self Enumeration का विकल्प दिया जाएगा।
इसके तहत लोग खुद पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए अपनी जानकारी भर सकेंगे, जिससे—

  • समय की बचत होगी

  • डेटा की सटीकता बढ़ेगी

  • कर्मचारियों पर दबाव कम होगा

जनगणना 2027 पूरी तरह डिजिटल क्यों है खास

इस बार जनगणना पूरी तरह Digital Census होगी। लगभग 30 लाख कर्मचारी मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा कलेक्ट करेंगे।

  • Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर ऐप

  • रियल-टाइम डेटा ट्रांसफर

  • पेपरलेस प्रोसेस

  • केंद्रीकृत सर्वर पर सुरक्षित स्टोरेज

यह भारत की प्रशासनिक क्षमता में एक ऐतिहासिक तकनीकी छलांग मानी जा रही है।

आजादी के बाद पहली बार होगी जाति जनगणना

जनगणना 2027 (Census 2027) की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आजादी के बाद पहली बार जाति आधारित डेटा एकत्र किया जाएगा।

  • आखिरी जाति जनगणना: 1931 (ब्रिटिश काल)

  • 2011 में केवल सामाजिक-आर्थिक सर्वे हुआ

  • अब सभी जातियों का आधिकारिक डिजिटल रिकॉर्ड

यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने लिया था।

2011 की जनगणना क्या बताती है

2011 की पिछली जनगणना के अनुसार—

  • भारत की आबादी: 121 करोड़

  • पुरुष: 51.5%

  • महिलाएं: 48.5%

Census 2027 इन आंकड़ों को पूरी तरह अपडेट करेगी, जो नीति निर्माण के लिए बेहद अहम होंगे।

हर घर बनेगा ‘डिजी डॉट’: क्या है यह व्यवस्था

जनगणना 2027 में हर मकान को Digital Dot के रूप में मैप पर दर्ज किया जाएगा। इस जियो-टैग्ड डिजिटल लेआउट से देश का सबसे सटीक जनसंख्या नक्शा तैयार होगा।

डिजी डॉट सिस्टम के 5 बड़े फायदे
1. आपदा में सटीक राहत व्यवस्था

भूकंप, बाढ़, बादल फटना या किसी अन्य आपदा के समय डिजिटल मैप से तुरंत पता चलेगा—

  • किस घर में कितने लोग हैं

  • होटल या धर्मशाला में कितने लोग ठहरे हैं

  • कितनी नाव, हेलिकॉप्टर, भोजन पैकेट चाहिए

यह राहत कार्य को तेज और प्रभावी बनाएगा।

2. परिसीमन (Delimitation) में मदद

लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के युक्तिसंगत परिसीमन में डिजिटल मैप बेहद उपयोगी होगा।

  • शहरी-ग्रामीण संतुलन स्पष्ट

  • मोहल्लों का विभाजन नहीं

  • समुदायों की निरंतरता बनी रहेगी

3. शहरी प्लानिंग होगी आसान

डिजिटल डेटा से यह तय करना आसान होगा कि—

  • कहां स्कूल चाहिए

  • कहां अस्पताल जरूरी

  • कहां पार्क या सड़क की जरूरत

यदि किसी इलाके में बच्चों की संख्या ज्यादा है, तो वहां स्कूल-पार्क प्राथमिकता से बनाए जा सकेंगे।

4. शहरीकरण और पलायन दर का सटीक डेटा

अगली जनगणना में डिजिटल मैप की तुलना से पता चलेगा—

  • कौन से गांव शहर बने

  • कहां से पलायन बढ़ा

  • किस इलाके में आबादी घटी या बढ़ी

यह नीति निर्माण में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।

5. मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हटेंगे

आधार और जियो-टैगिंग से वोटर लिस्ट ज्यादा मजबूत बनेगी।

  • एक व्यक्ति, एक स्थान

  • फर्जी या दोहरी एंट्री खत्म

  • चुनावी पारदर्शिता बढ़ेगी

क्यों टली थी जनगणना और अब क्यों जरूरी

जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे टालना पड़ा।
अब 2027 में यह प्रक्रिया पूरी होने से—

  • सामाजिक योजनाओं की सही मैपिंग

  • आर्थिक नीति में सटीकता

  • कल्याणकारी योजनाओं का बेहतर वितरण संभव हो सकेगा।

जनगणना को आसान भाषा में समझिए

जनगणना क्या होती है

जनगणना वह आधिकारिक प्रक्रिया है, जिसके तहत देश की आबादी, परिवार, मकान, शिक्षा, भाषा, पेशा, काम, लिंग और आयु जैसी जानकारियों की गिनती और रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। भारत में यह प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत हर 10 साल में होती है।

भारत में जनगणना का इतिहास

भारत में पहली जनगणना वर्ष 1872 में हुई थी, जबकि अब तक की आखिरी जनगणना 2011 में संपन्न हुई। देश में कुल 15 बार जनगणना हो चुकी है। आज़ाद भारत की पहली जनगणना 1951 में कराई गई थी।

जनगणना के चरण कैसे होते हैं

जनगणना आमतौर पर दो चरणों में पूरी की जाती है।
पहले चरण में सभी मकानों, घरों और परिवारों की सूची तैयार की जाती है, जिसमें बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी जुटाई जाती है।
दूसरे चरण में तय तारीख के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति की गिनती की जाती है।

जनगणना डेटा की गोपनीयता

जनगणना के दौरान एकत्र किया गया पूरा डेटा पूरी तरह गोपनीय होता है। किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती और न ही इसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए साझा किया जाता है।

1951 से अब तक जाति गणना की स्थिति

1951 से अब तक की जनगणनाओं में SC/ST वर्ग की गिनती होती रही है, लेकिन OBC और अन्य जातियों की गणना शामिल नहीं की गई। यही वजह है कि संपूर्ण जातिगत आंकड़े अब तक उपलब्ध नहीं हो सके।

जातिगत जनगणना क्यों अहम मानी जाती है

जातिगत जनगणना से सरकारी योजनाओं का सही लाभ तय करने, आरक्षण नीति की समीक्षा करने और डेटा आधारित सामाजिक नीतियां बनाने में मदद मिलती है। इससे नीतिगत फैसलों को ज्यादा सटीक बनाया जा सकता है।

आजादी के बाद पहली जातिगत जनगणना कब

देश में आजादी के बाद पहली बार 2027 में जातिगत जनगणना होने जा रही है। इसकी प्रक्रिया अप्रैल 2026 से शुरू होगी और इस बार पूरा डेटा डिजिटल तरीके से एकत्र किया जाएगा।

ब्रिटिश काल में कितनी बार जाति जनगणना हुई

ब्रिटिश शासन के दौरान देश में 6 बार जातिगत जनगणना कराई गई थी।
1881 से 1931 तक हर जनगणना में जाति की गिनती होती रही।
1931 आखिरी पूर्ण जातिगत जनगणना थी। इसके बाद 1941 में तकनीकी कारणों से जाति से जुड़ा डेटा प्रकाशित नहीं किया गया।

 

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