Israel Iran attack: इजराइल और अमेरिका ने मिलकर शनिवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान समेत 10 से अधिक शहरों पर भयंकर हवाई हमला किया। इस हमले में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 700 से अधिक लोग घायल हैं।
ईरान में तबाही का मंजर: 201 मौतें, 747 घायल
शनिवार की सुबह जब दुनिया अभी ठीक से जागी भी नहीं थी, तब मध्य पूर्व एक बड़े युद्ध की आग में झुलस रहा था। इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर एक साथ कई मोर्चों से हमला बोल दिया। ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि इन हमलों में कम से कम 201 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 747 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है, क्योंकि कई इलाकों से अभी भी बचाव अभियान जारी है और मलबे के नीचे दबे लोगों की खोज की जा रही है।
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि नेतन्याहू ने अपने इस दावे के समर्थन में अभी तक कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है।
NETANYAHU CLAIMS THERE ARE ‘SIGNS’ KHAMENEI’S ‘NO MORE’
PROVIDES NO EVIDENCE
IRAN SAYS SUPREME LEADER ‘SAFE AND SOUND’ pic.twitter.com/g108AT6us8
— RT (@RT_com) February 28, 2026
#BREAKING Israeli Prime Minister Netanyahu says ‘there are signs’ Iran’s Khamenei is dead, vows US-Israeli attacks to last ‘as long as necessary’ pic.twitter.com/4sWmT8M4Cc
— AFP News Agency (@AFP) February 28, 2026
हमले की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इजराइल और अमेरिका की संयुक्त सेना ने ईरान के कम से कम 10 शहरों को एक साथ निशाना बनाया। तेहरान, जो देश की राजधानी और सबसे घनी आबादी वाला शहर है, वहां सबसे अधिक तबाही देखी गई। धमाकों की गूंज दूर-दूर तक सुनी गई और आसमान में धुएं के गुबार उठते रहे।
Launching a major attack alongside Israel against Iran, US President Donald Trump is openly pursuing the goal he once adamantly rejected — regime change.
Details: https://t.co/OUCAjdxfVi pic.twitter.com/uMx9XJiF7q— AFP News Agency (@AFP) February 28, 2026
स्कूल पर मिसाइल हमला: 85 मासूम बच्चियों की मौत, 45 घायल
इन हमलों में सबसे दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना तब सामने आई जब ईरान के एक स्कूल पर सीधे मिसाइल गिरी। इस हमले में 85 छात्राओं की मौके पर ही मौत हो गई और 45 अन्य बच्चियां गंभीर रूप से घायल हैं। यह खबर सामने आते ही पूरी दुनिया में आक्रोश की लहर दौड़ गई। मासूम बच्चों पर इस तरह का हमला अंतरराष्ट्रीय कानून और युद्ध नियमों का खुला उल्लंघन माना जा रहा है। मानवाधिकार संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग उठाई है।
इस हमले ने न केवल ईरानी समाज को हिलाकर रख दिया, बल्कि वैश्विक समुदाय में भी इजराइल और अमेरिका की इस कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने स्कूल पर हुए इस हमले की भर्त्सना की है।
UGC images posted on social media on 28 February 2026 show the moment of a strike on a US base in Bahrain. A centre at the headquarters of the US Fifth Fleet in Bahrain was hit by a ‘missile attack’, the country’s authorities announced in a statement. pic.twitter.com/fqgQkHnQiW
— AFP News Agency (@AFP) February 28, 2026
ईरानी रक्षामंत्री और IRGC कमांडर की मौत की खबर
इस हमले में सिर्फ आम नागरिक ही नहीं, बल्कि ईरान के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक अधिकारी भी मारे गए। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इजराइली हमले में ईरान के रक्षामंत्री अमीर नासिरजादेह की मौत हो गई है। इसके साथ ही ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी के कमांडर मोहम्मद पाकपोर भी इस हमले में मारे गए हैं।
रक्षामंत्री और शीर्ष सैन्य कमांडर की मौत ईरान के लिए एक बड़ा सदमा है। इससे ईरान की रक्षा व्यवस्था और कमान-नियंत्रण ढांचे पर गंभीर असर पड़ सकता है। ईरान ने अभी तक इन मौतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन कई स्वतंत्र मीडिया रिपोर्ट्स इन दावों की तस्दीक कर रही हैं। अगर ये खबरें सच निकलीं, तो यह ईरान के सैन्य नेतृत्व के लिए अभूतपूर्व क्षति होगी।
‘ऑपरेशन लियोंस रोर’: इजराइल और अमेरिका का जॉइंट मिलिट्री एक्शन
इजराइल ने ईरान के खिलाफ इस नए संयुक्त अभियान को एक खास नाम दिया है — ‘लियोंस रोर‘ यानी शेर की दहाड़। यह नाम ही बताता है कि इजराइल इस बार कितना आक्रामक रुख अपनाना चाहता था। यह पहली बार है जब अमेरिका और इजराइल ने खुलेआम मिलकर ईरान के खिलाफ एक साझा सैन्य अभियान छेड़ा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हमले के तुरंत बाद एक वीडियो संदेश जारी किया। ट्रम्प ने कहा कि ईरान पर यह हमला अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और देश के हितों की रक्षा के लिए किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना का मुख्य उद्देश्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करना और उसके मिसाइल कार्यक्रम को जड़ से खत्म करना है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि जब तक ईरान परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर समझौता नहीं करता, तब तक दबाव जारी रहेगा।
The United States and Israel launched a wave of strikes against targets in Iranian cities on Saturday. US President Donald Trump is pursuing the goal he once adamantly rejected — regime change. pic.twitter.com/MP4QRy3V0f
— AFP News Agency (@AFP) February 28, 2026
ट्रम्प ने हाल ही में ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर परमाणु समझौते पर बातचीत आगे नहीं बढ़ी, तो सैन्य कार्रवाई की जाएगी। इस हमले को उसी चेतावनी का अमल माना जा रहा है।
ईरान का पलटवार: 400 मिसाइलें और दुबई पर हमला
ईरान ने इस हमले का जवाब खाली हाथों नहीं दिया। तेहरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी और इजराइल की ओर करीब 400 मिसाइलें दाग दीं। इसके साथ ही ईरान ने क्षेत्र के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। इनमें कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में स्थित अमेरिकी बेस शामिल हैं।
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सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ईरान ने UAE के सबसे बड़े और सर्वाधिक आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया। दुबई, जो अपनी चमक-दमक और व्यापारिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है, पर मिसाइल हमले की खबर ने पूरी दुनिया को हिला दिया। दुबई में हजारों भारतीय नागरिक भी रहते और काम करते हैं, इसलिए भारत में भी इस हमले की खबर को लेकर भारी चिंता देखी गई।
ईरान का यह जवाबी हमला यह साफ संदेश देता है कि वह बिना लड़े पीछे हटने को तैयार नहीं है। क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर ईरान ने यह भी जता दिया है कि वह अपने दुश्मनों की पहुंच को महंगा साबित करने की क्षमता रखता है।
बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम बना सबसे बड़ा विवाद
इस पूरे संघर्ष की जड़ें दरअसल ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में हैं। इस बातचीत में सबसे बड़ा और सबसे जटिल मुद्दा ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम बन गया है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने मिसाइल प्रोग्राम पर अंकुश लगाए या इसे किसी अंतरराष्ट्रीय निगरानी के दायरे में लाए। लेकिन ईरान ने इस मुद्दे पर बिल्कुल भी झुकने से इनकार कर दिया है।
ईरानी अधिकारियों ने बार-बार साफ शब्दों में कहा है कि उनका बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ है। इसे ईरान अपनी ‘रेड लाइन’ मानता है, यानी यह एक ऐसी सीमा है जिसे पार करना ईरान के लिए बिल्कुल मंजूर नहीं। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बातचीत नहीं होगी और यह उनकी संप्रभुता का विषय है।
ईरान का तर्क: मिसाइलें ही बचाती हैं देश को
ईरान ने जून 2025 की घटना का हवाला देते हुए अपने मिसाइल कार्यक्रम को जायज ठहराया है। ईरान का कहना है कि जब जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, उस वक्त ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों ने ही उसे बचाया था। इन मिसाइलों ने जवाबी हमले की क्षमता दिखाकर दुश्मनों को रोकने में भूमिका निभाई थी।
ईरानी नेतृत्व का तर्क है कि अगर उनका मिसाइल कार्यक्रम नहीं होता, तो ईरान पहले से कहीं ज्यादा असुरक्षित होता। इसलिए मिसाइल कार्यक्रम को छोड़ना उनके लिए खुद अपनी रक्षा क्षमता को नष्ट करने जैसा होगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी जोड़ा है कि बातचीत केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहनी चाहिए। मिसाइल कार्यक्रम या क्षेत्र में ईरान समर्थित संगठनों के विषय पर किसी भी चर्चा को ईरान सिरे से नकारता है।
मध्य पूर्व में युद्ध की आग: क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर खतरा
इस हमले के बाद मध्य पूर्व में तनाव एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। खाड़ी के देश, जो पहले से ही इस क्षेत्र की अनिश्चितता से चिंतित थे, अब और ज्यादा सहमे हुए हैं। दुबई पर हुए हमले ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों को भी सीधे इस संघर्ष की जद में ला दिया है।
कतर, जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले से यह साफ है कि ईरान इस युद्ध को केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष के रूप में देख रहा है। यह स्थिति पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए अत्यंत गंभीर चुनौती खड़ी कर रही है।
तेल की कीमतों पर भी इस युद्ध का असर दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें उछाल पर हैं, क्योंकि मध्य पूर्व दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है और यहां किसी भी अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
इस हमले के बाद दुनिया भर की सरकारें और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं सक्रिय हो गई हैं। संयुक्त राष्ट्र ने आपात बैठक बुलाई है और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। रूस और चीन ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। यूरोपीय देशों में भी इस हमले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं।
भारत ने भी स्थिति पर गहरी चिंता जताई है, क्योंकि ईरान और खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं। भारत सरकार ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए एडवाइजरी जारी की है और दूतावास अलर्ट पर हैं।
ईरान को लेकर रोचक तथ्य
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क्या रुकेगा यह युद्ध? आगे की राह
यह सवाल अभी सबसे बड़ा है कि क्या इस भयावह टकराव को रोका जा सकता है। ईरान और इजराइल-अमेरिका दोनों पक्ष इस वक्त युद्ध की राह पर हैं। ईरान का जवाबी हमला यह बताता है कि वह किसी भी हालत में झुकने को तैयार नहीं है। वहीं अमेरिका और इजराइल का कहना है कि जब तक ईरान का मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम खत्म नहीं होता, तब तक कार्रवाई जारी रहेगी।
मध्यस्थता के लिए कई देश और संगठन कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दोनों पक्षों की कठोर स्थिति को देखते हुए निकट भविष्य में संघर्ष विराम की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। अगर यह युद्ध और लंबा खिंचा, तो न केवल मध्य पूर्व, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर इसके गहरे असर पड़ेंगे।
यह वह मोड़ है जहां एक गलत कदम पूरे क्षेत्र को महायुद्ध की आग में झोंक सकता है। दुनिया की नजरें अभी इस संघर्ष पर टिकी हैं और हर घंटे नई और भयावह खबरें सामने आ रही हैं।
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