आधार में तकनीकी क्रांति: अब चेहरे से होगी पहचान, फ्रॉड पर लगेगी लगाम Read it later

Aadhaar Face Authentication को लेकर सरकार ने बड़ा तकनीकी रोडमैप तैयार कर लिया है। ‘आधार विजन 2032’ के तहत फिंगरप्रिंट आधारित पहचान को धीरे-धीरे हटाकर फेस रिकग्निशन को प्राथमिक बनाया जाएगा। इसके साथ ही AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और ब्लॉकचेन से आधार को तेज, सुरक्षित और फ्रॉड-फ्री बनाने की तैयारी है।

आधार के तकनीकी ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी

सरकार ने आधार की मौजूदा पहचान प्रणाली को भविष्य के अनुरूप ढालने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है। ‘आधार विजन 2032’ नाम से तैयार किए गए दस्तावेज में साफ तौर पर कहा गया है कि आने वाले वर्षों में आधार की पहचान प्रक्रिया को पूरी तरह आधुनिक तकनीकों पर आधारित किया जाएगा। इसका मकसद न सिर्फ सिस्टम को तेज बनाना है, बल्कि फ्रॉड और डुप्लिकेशन की संभावनाओं को लगभग खत्म करना भी है।

फिंगरप्रिंट की जगह अब चेहरे से होगी पहचान

नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि आधार ऑथेंटिकेशन के लिए फिंगरप्रिंट की अनिवार्यता धीरे-धीरे खत्म की जाएगी। उसकी जगह Facial Recognition यानी चेहरे से पहचान को प्राथमिक माध्यम बनाया जाएगा। यह बदलाव खासतौर पर बुजुर्गों, श्रमिकों और बच्चों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, जिनके फिंगरप्रिंट समय के साथ घिस जाते हैं या सही तरीके से मैच नहीं कर पाते।

हर महीने 100 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन का लक्ष्य

वर्तमान में देश में रोजाना करीब 9 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन होते हैं। इनमें से लगभग 1 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए किए जाते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर महीने 100 करोड़ ऑथेंटिकेशन केवल Face Authentication के जरिए किए जाएं। यह लक्ष्य आधार को दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणाली के रूप में और मजबूत करेगा।

AI से खुद को अपडेट करेगा फेस रिकग्निशन सिस्टम

आधार के नए तकनीकी ढांचे में Artificial Intelligence (AI) की अहम भूमिका होगी। AI आधारित सिस्टम समय-समय पर उपयोगकर्ता के चेहरे में आने वाले बदलावों को खुद सीखता और अपडेट करता रहेगा। इससे बार-बार बायोमैट्रिक अपडेट कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पहचान प्रक्रिया ज्यादा सहज हो जाएगी।

बच्चों और किशोरों का बायोमैट्रिक अपडेट जारी

सरकार अब तक करीब 5 करोड़ बच्चों और किशोरों का बायोमैट्रिक अपडेट कर चुकी है। यह प्रक्रिया सितंबर 2026 तक पूरी तरह मुफ्त जारी रहेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बढ़ती उम्र के साथ आधार डेटा में कोई तकनीकी बाधा न आए और भविष्य में फेस-आधारित पहचान सुचारु रूप से काम करे।

आधार CEO ने क्या कहा?

आधार के CEO भुवनेश कुमार ने स्पष्ट किया कि ‘विजन 2032’ सिर्फ एक लक्ष्य नहीं, बल्कि उससे आगे की तकनीकी तैयारी का संकेत है। उनके मुताबिक AI और Quantum Computing जैसे क्षेत्रों में तेजी से हो रहे बदलावों को ध्यान में रखते हुए आधार का ढांचा तैयार किया जा रहा है, ताकि यह आने वाले दशकों तक सुरक्षित और प्रासंगिक बना रहे।

Quantum Computing से सुरक्षा होगी और मजबूत

नई योजना में Quantum Computing को भी शामिल करने की सिफारिश की गई है। इसका इस्तेमाल आधार डेटा की सुरक्षा को अगले स्तर तक ले जाएगा। क्वांटम तकनीक से एन्क्रिप्शन इतना मजबूत हो जाएगा कि साइबर अटैक या डेटा ब्रीच की आशंका लगभग खत्म हो सकती है।

ब्लॉकचेन और क्लाउड कंप्यूटिंग की भूमिका

आधार के भविष्य के सिस्टम में Blockchain Technology और Cloud Computing को भी अहम माना गया है। ब्लॉकचेन से डेटा ट्रांजैक्शन ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित होंगे, जबकि क्लाउड कंप्यूटिंग से स्केलेबिलिटी बढ़ेगी और ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा तेज होगी।

नया तकनीकी ढांचा कब होगा लागू?

इस पूरे तकनीकी रोडमैप को अंतिम रूप देने के लिए बनाई गई समिति अगले महीने अपनी रिपोर्ट को फाइनल करेगी। मार्च में यह रिपोर्ट UIDAI को सौंपी जाएगी। इसके आधार पर अगले पांच साल के लिए आधार का नया तकनीकी ढांचा तैयार किया जाएगा। मौजूदा तकनीकी अनुबंध 2027 में समाप्त हो रहा है, जबकि नया अनुबंध 2032 तक के लिए किया जाएगा।

समिति में कौन-कौन से विशेषज्ञ शामिल?

‘आधार विजन 2032’ दस्तावेज तैयार करने के लिए पिछले साल अक्टूबर में UIDAI के चेयरमैन नीलकांत मिश्रा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई थी।
इसमें शामिल प्रमुख नाम हैं—

  • सर्वम् AI के सह-संस्थापक विवेक राघवन

  • न्यूटनिक्स के संस्थापक धीरज पांडेय

  • अमृता यूनिवर्सिटी के डॉ. पी. पूर्णचंद्रन

  • मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रो. अनिल जैन

  • IIT जोधपुर के मयंक वत्स

आम लोगों के लिए क्या बदलेगा?

इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा आम नागरिकों को मिलेगा। अब राशन, बैंकिंग, सरकारी योजनाओं और अन्य सेवाओं के लिए बार-बार फिंगरप्रिंट फेल होने की समस्या से राहत मिलेगी। सिर्फ चेहरे की पहचान से ऑथेंटिकेशन संभव होगा, जिससे समय भी बचेगा और प्रक्रिया भी आसान होगी।

फ्रॉड और फर्जीवाड़े पर कैसे लगेगी लगाम?

AI-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम फर्जी पहचान, डुप्लिकेट आधार और बायोमैट्रिक मिसयूज जैसे मामलों को काफी हद तक रोक सकेगा। हर ऑथेंटिकेशन रियल-टाइम एनालिसिस से गुजरेगा, जिससे संदिग्ध गतिविधियों को तुरंत पकड़ा जा सकेगा।

डिजिटल इंडिया के अगले चरण की नींव

विशेषज्ञ मानते हैं कि आधार में यह तकनीकी बदलाव Digital India Mission के अगले चरण की नींव रखेगा। आधार जब ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगा, तो डिजिटल पेमेंट, सरकारी सब्सिडी और ई-गवर्नेंस सेवाओं में भी भरोसा बढ़ेगा।

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