Ursula von der Leyen भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहीं। उनकी इस ऐतिहासिक मौजूदगी ने भारत–यूरोपीय संघ रिश्तों को नई वैश्विक पहचान दी। इसी मौके पर जानिए, एक डॉक्टर, सात बच्चों की मां और यूरोप की सबसे ताकतवर महिला नेता बनने तक का उनका असाधारण सफर।

गणतंत्र दिवस परेड में मौजूदगी से खास बना दिन
भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen ) की मौजूदगी केवल औपचारिक कूटनीतिक यात्रा नहीं रही। यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक सहयोग का प्रतीक बनी। इसी कारण आज उनके जीवन और नेतृत्व को समझना और भी प्रासंगिक हो जाता है।
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
Ursula von der Leyen का जन्म 8 अक्टूबर 1958 को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में हुआ। उनका परिवार जर्मनी की राजनीति और प्रशासन से गहराई से जुड़ा रहा है।
उनके पिता एर्न्स्ट आल्ब्रेक्ट यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) में वरिष्ठ अधिकारी रहे और बाद में जर्मनी के लोअर सैक्सनी राज्य के मुख्यमंत्री बने।
यूरोपीय संस्थाओं और प्रशासनिक माहौल में पली-बढ़ी उर्सुला के भीतर अंतरराष्ट्रीय सोच बचपन से ही विकसित होने लगी थी।

Ursula von der Leyen का बचपन: एक देश नहीं, पूरा यूरोप
उर्सुला का बचपन किसी एक देश तक सीमित नहीं रहा।
उन्होंने बेल्जियम, जर्मनी और ब्रिटेन में रहकर पढ़ाई की। अलग-अलग संस्कृतियों, भाषाओं और राजनीतिक व्यवस्थाओं को करीब से देखने का यह अनुभव आगे चलकर उन्हें एक “पैन-यूरोपियन लीडर” बनाने में निर्णायक साबित हुआ।
यही कारण है कि उनके नेतृत्व में यूरोपीय संघ की नीतियों में बहुसांस्कृतिक दृष्टिकोण साफ नजर आता है।
राजनीति नहीं, पहले विज्ञान चुना
बहुत कम लोग जानते हैं कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अपने करियर की शुरुआत राजनीति से नहीं, बल्कि मेडिसिन से की।
उन्होंने हनोवर मेडिकल स्कूल से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की और डॉक्टर बनीं। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें रिसर्च और पब्लिक हेल्थ में विशेष रुचि पैदा हुई।
यही वैज्ञानिक सोच आगे चलकर उनकी नीति-निर्माण शैली में दिखी—जहां फैसले भावनाओं से नहीं, बल्कि डेटा, रिसर्च और लॉन्ग-टर्म विजन पर आधारित रहे।
सात बच्चों की मां: राजनीति और परिवार का असाधारण संतुलन
सात बच्चों की मां हैं उर्सुला वॉन डेर लेयेन
यह तथ्य उन्हें दुनिया के अधिकांश शीर्ष नेताओं से अलग बनाता है।
Ursula von der Leyen सात बच्चों की मां हैं और इसके बावजूद उन्होंने यूरोप की सबसे ताकतवर राजनीतिक जिम्मेदारी निभाई।
उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों से कहा है कि परिवार और करियर के बीच संतुलन आसान नहीं था, लेकिन मजबूत पारिवारिक समर्थन और अनुशासन ने इसे संभव बनाया।
यूरोप में वर्किंग मदर्स, चाइल्ड केयर और वर्क-लाइफ बैलेंस से जुड़ी नीतियों पर उनके फोकस के पीछे उनका निजी अनुभव साफ झलकता है।

राजनीति में प्रवेश: जर्मनी से शुरुआत
उर्सुला ने राजनीति में कदम जर्मनी की क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU) के जरिए रखा।
उन्होंने स्थानीय राजनीति से शुरुआत की और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
उनकी छवि एक पढ़ी-लिखी, आधुनिक और संतुलित नेता की बनी—जो सामाजिक मुद्दों और प्रशासनिक दक्षता, दोनों को समान महत्व देती थीं।
एंजेला मर्केल की कैबिनेट में अहम भूमिका
उर्सुला वॉन डेर लेयेन को जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल की भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है।
मर्केल सरकार में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले—
परिवार, वरिष्ठ नागरिक, महिला और युवा मामलों की मंत्री
श्रम और सामाजिक मामलों की मंत्री
रक्षा मंत्री (इस पद को संभालने वाली जर्मनी की पहली महिला)
रक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने जर्मन सेना के आधुनिकीकरण और महिला भागीदारी को प्राथमिकता दी।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष बनने का ऐतिहासिक क्षण
यूरोपीय आयोग की पहली महिला अध्यक्ष
साल 2019 में उर्सुला वॉन डेर लेयेन को यूरोपीय आयोग का अध्यक्ष चुना गया।
यह पद यूरोपीय संघ की कार्यकारी शक्ति का केंद्र माना जाता है।
वह इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला बनीं—जो यूरोपीय राजनीति के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था।
अध्यक्ष के तौर पर चुनौतियां और बड़े फैसले
उर्सुला का कार्यकाल आसान नहीं रहा। उनके सामने एक के बाद एक वैश्विक संकट आए—
कोविड-19 महामारी के दौरान पूरे यूरोप का नेतृत्व
वैक्सीन खरीद और वितरण की साझा नीति
रूस–यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप की ऊर्जा और सुरक्षा नीति में बदलाव
ग्रीन डील और क्लाइमेट एक्शन को तेज करना
इन फैसलों ने उन्हें एक “क्राइसिस मैनेजर” के रूप में स्थापित किया।
भारत–यूरोपीय संघ संबंधों में भूमिका
भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में उनकी मौजूदगी यह दिखाती है कि भारत–EU रिश्ते उनके लिए कितने अहम हैं।
ट्रेड, टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट चेंज और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग—इन सभी मुद्दों पर उर्सुला भारत को एक रणनीतिक साझेदार मानती हैं।

उर्सुला वॉन डेर लेयेन से जुड़े रोचक तथ्य
जर्मन, फ्रेंच और अंग्रेजी में धाराप्रवाह
डॉक्टर होने के कारण स्वास्थ्य नीतियों पर गहरी पकड़
सात बच्चों की मां होते हुए भी यूरोप की सबसे ताकतवर महिला नेता
“फर्म लेकिन एम्पैथेटिक” लीडरशिप स्टाइल
परिवार और राजनीति दोनों को समान प्राथमिकता देने वाली दुर्लभ वैश्विक नेता
नेतृत्व शैली: सख्ती के साथ संवेदनशीलता
उर्सुला वॉन डेर लेयेन की लीडरशिप को अक्सर Firm but Empathetic Leadership कहा जाता है।
वह कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटतीं, लेकिन उनके फैसलों में सामाजिक प्रभाव और मानवीय दृष्टिकोण हमेशा शामिल रहता है।
क्यों खास है उनका जिक्र
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर उनकी मौजूदगी सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं है।
यह भारत और यूरोप के बढ़ते रिश्तों, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक सहयोग की दिशा को रेखांकित करती है।
इसी कारण आज उनके जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों को जानना और भी जरूरी हो जाता है।
प्रेरणा का वैश्विक चेहरा
उर्सुला वॉन डेर लेयेन की कहानी सिर्फ सत्ता के शिखर तक पहुंचने की नहीं है।
यह कहानी है—
एक डॉक्टर की
एक मां की
एक यूरोपीय नागरिक की
और एक वैश्विक नेता की
भारत के गणतंत्र दिवस पर उनकी मौजूदगी हमें यह याद दिलाती है कि नेतृत्व, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रेरणा सीमाओं से परे होती है।
संपन्न परिवार से निकलकर अपनी अलग पहचान
एक समृद्ध और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार में जन्म लेने के बावजूद Ursula von der Leyen ने अपनी पहचान खुद बनाई। वह केवल एक कुशल डॉक्टर या सफल राजनीतिज्ञ ही नहीं रहीं, बल्कि निजी जीवन में भी उन्होंने अनुकरणीय संतुलन कायम किया। सात बच्चों की परवरिश के साथ उन्होंने यह साबित किया कि नेतृत्व और परिवार साथ-साथ चल सकते हैं।
पति और निजी रिश्ते
उर्सुला के पति हाइको वॉन डेर लेयेन पेशे से मेडिकल प्रोफेसर हैं और एक मेडिकल इंजीनियरिंग कंपनी के CEO भी रह चुके हैं। दोनों की मुलाकात विश्वविद्यालय के दिनों में हुई थी, जब वे एक ही यूनिवर्सिटी बैंड का हिस्सा थे। यही दोस्ती आगे चलकर जीवनसाथी के रिश्ते में बदली।
सात बच्चों की मां, जिम्मेदारियों से भरा जीवन

उर्सुला और हाइको के सात बच्चे हैं—डेविड, सोफी, डोनाटा, जुड़वां बच्चे विक्टोरिया और जोहाना, एग्मोंट और ग्रासिया। बच्चों की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते Ursula von der Leyen ने कई बार राजनीति से अस्थायी दूरी भी बनाई। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि मां की भूमिका उनके जीवन की सबसे अहम जिम्मेदारियों में से एक रही है।
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शौक और निजी रुचियां
राजनीति की व्यस्तता के बावजूद उर्सुला अपने शौक के लिए समय निकालती हैं।
उन्हें घुड़सवारी का खास शौक है और वे अक्सर जर्मनी स्थित अपने घर पर वीकेंड में घोड़े की सवारी करती नजर आती हैं। इसके अलावा, वे पियानो बजाती हैं और शास्त्रीय संगीत में भी गहरी रुचि रखती हैं—जो उनके व्यक्तित्व के शांत और संवेदनशील पक्ष को दर्शाता है।
क्या है उर्सुला की आय और Net Worth
2025 तक Ursula von der Leyen की अनुमानित नेटवर्थ 3.5 से 4 मिलियन डॉलर के बीच आंकी जाती है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष के रूप में उनका वार्षिक वेतन और भत्ते मिलाकर करीब 4 लाख यूरो (लगभग 3.6 करोड़ रुपये) से अधिक है।घर, संपत्ति और लग्जरी लाइफस्टाइल
उर्सुला का मूल निवास जर्मनी के हैनोवर के पास स्थित एक लगभग 200 साल पुराना ऐतिहासिक फार्महाउस है, जिसमें एक बड़ी लाइब्रेरी सहित आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। इसके अलावा, स्विट्जरलैंड में उनका एक हॉलिडे शैलेट भी है।
आधिकारिक दौरों पर वे Mercedes-Benz S-Class (Armoured) में यात्रा करती हैं, जिसकी कीमत 1.4 लाख डॉलर से अधिक है। निजी उपयोग के लिए उनके पास Audi e-tron और BMW iX जैसी प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारें भी हैं।
नेतृत्व के पीछे संतुलित निजी जीवन
राजनीतिक शक्ति, वैश्विक जिम्मेदारियों और पारिवारिक जीवन—तीनों को साथ साधने की क्षमता ही उर्सुला वॉन डेर लेयेन को एक Global Woman Leader के रूप में अलग पहचान दिलाती है।
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