Census 2027: 33 सवाल, मोबाइल ऐप, डिजिटल मैपिंग और पहली बार सेल्फ-गणना की शुरुआत, Read it later

Census 2027 का पहला फेज आज 1 अप्रैल से शुरू हो गया है और यह देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना की शुरुआत है। पहले चरण में हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस होगा, जबकि दूसरे चरण में फरवरी 2027 से जनसंख्या गणना और जाति से जुड़ा डेटा जुटाया जाएगा।

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जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू, देश में डिजिटल गिनती का नया दौर

देश में जनगणना 2027 का पहला चरण आज 1 अप्रैल से शुरू हो गया है। यह चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस से जुड़ा है, जिसमें मकानों, आवासीय सुविधाओं और बुनियादी घरेलू ढांचे का डेटा जुटाया जाएगा। यह प्रक्रिया 2026 के दौरान चरणबद्ध तरीके से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलेगी और देश की जनगणना प्रणाली को पहली बार पूरी तरह डिजिटल रूप में संचालित किया जा रहा है।

इस बार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि गणना के लिए कागज आधारित पद्धति की जगह डिजिटल उपकरणों, मोबाइल ऐप और वेब-आधारित सेल्फ-एन्यूमरेशन को शामिल किया गया है। इससे डेटा संग्रहण तेज, संरचित और तकनीकी रूप से ज्यादा समन्वित होने की उम्मीद है। देश के इतिहास में यह पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना मानी जा रही है, इसलिए इसका प्रशासनिक महत्व भी बहुत बड़ा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी की स्व-गणना

जनगणना के पहले ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सेल्फ-एन्यूमरेशन पूरी की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी साझा की और ऑनलाइन फॉर्म भरते हुए तस्वीर भी पोस्ट की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी स्व-गणना प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इससे सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि नागरिकों को इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए।

स्व-गणना की यह सुविधा पहली बार दी गई है। इसका मतलब यह है कि अब नागरिक चाहें तो तय अवधि के भीतर पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकते हैं। हालांकि यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन सरकार इसे सुविधा और दक्षता बढ़ाने वाले कदम के रूप में पेश कर रही है।

दो चरणों में होगी पूरी जनगणना

Census 2027 को दो चरणों में बांटा गया है। पहला चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस से जुड़ा है, जो 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुका है। दूसरे चरण में जनसंख्या गणना की जाएगी, जो फरवरी 2027 से शुरू होगी। इसी दूसरे चरण में जाति से जुड़ा डेटा भी जुटाया जाएगा।

दूसरा चरण राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें जाति की जानकारी शामिल की जाएगी। लंबे समय से जाति गणना को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक बहस जारी रही है। अब इसे जनगणना के दूसरे चरण में शामिल किया जाना बड़े नीतिगत कदम के रूप में देखा जा रहा है।

आजादी के बाद पहली बार जुटेगा जाति का डेटा

इस बार जनसंख्या गणना के दौरान जाति का डेटा एकत्र किया जाएगा। उपलब्ध आधिकारिक और विश्वसनीय रिपोर्टों के अनुसार, यह पहला अवसर होगा जब स्वतंत्र भारत की नियमित जनगणना प्रक्रिया में इस स्तर पर जाति गणना शामिल की जा रही है। 1931 की जनगणना के बाद जाति-आधारित संपूर्ण गणना लंबे समय तक नहीं हुई थी, इसलिए यह कदम ऐतिहासिक माना जा रहा है।

जाति गणना का असर केवल सांख्यिकीय रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगा। इसका संबंध आरक्षण, सामाजिक न्याय, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, कल्याणकारी योजनाओं और भविष्य के परिसीमन जैसे विषयों से भी जोड़ा जा रहा है। इसी वजह से Census 2027 का दूसरा चरण नीति-निर्माण की दृष्टि से बहुत प्रभावशाली माना जा रहा है।

पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना

इस बार की जनगणना का सबसे बड़ा बदलाव इसका पूरी तरह डिजिटल होना है। अब कर्मचारी मोबाइल ऐप की मदद से डेटा सीधे स्मार्टफोन या डिजिटल डिवाइस पर दर्ज करेंगे। पहले यह डेटा कागज पर भरा जाता था और बाद में डिजिटाइज किया जाता था, जिससे समय और श्रम दोनों ज्यादा लगते थे।

डिजिटल प्रक्रिया के कई फायदे बताए जा रहे हैं। एक तो डेटा एंट्री की गति बढ़ेगी, दूसरा त्रुटियों को तुरंत पकड़ा जा सकेगा, तीसरा सूचना को केंद्रीयकृत तरीके से सुरक्षित रखा जा सकेगा। यही वजह है कि Census 2027 को प्रशासनिक ढांचे के डिजिटलीकरण की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है।

दोनों चरणों में रहेगी सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा

इस बार दोनों चरणों में स्व-गणना यानी Self Enumeration की ऑनलाइन सुविधा दी गई है। सरकार ने इसके लिए सुरक्षित वेब पोर्टल उपलब्ध कराया है, जहां नागरिक घर-घर सर्वे शुरू होने से पहले अपनी जानकारी स्वयं भर सकते हैं। यह प्रक्रिया हर राज्य और जिले के स्थानीय कैलेंडर के हिसाब से हाउस लिस्टिंग शुरू होने से लगभग 15 दिन पहले खुलेगी।

उदाहरण के तौर पर कुछ जिलों में 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक सेल्फ-एन्यूमरेशन विंडो खोली गई है, जबकि कुछ राज्यों में अलग तिथियों के अनुसार यह शुरू होगी। पोर्टल पर जानकारी दर्ज करने के बाद नागरिकों को एक रेफरेंस आईडी मिलती है। इस आईडी को बाद में फील्ड में आने वाले गणनाकर्मी को दिखाया जा सकता है, ताकि डुप्लीकेशन से बचा जा सके।

Census 2027

पोर्टल पर 16 भाषाओं में मिलेगी सुविधा

जनगणना प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने के लिए पोर्टल पर कई भाषाओं में सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। आपके दिए गए विवरण के अनुसार यह सुविधा 16 भाषाओं में होगी। इसका उद्देश्य यह है कि लोग अपनी भाषाई सहजता के अनुसार जानकारी भर सकें और डिजिटल प्रक्रिया केवल अंग्रेजी-हिंदी जानने वालों तक सीमित न रह जाए। इस तरह Census 2027 को तकनीकी के साथ-साथ भाषा के स्तर पर भी व्यापक बनाने की कोशिश की गई है।

यह कदम खास तौर पर उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जो पहली बार किसी सरकारी सर्वे या राष्ट्रीय गणना को डिजिटल माध्यम से पूरा करेंगे। भाषा की सुविधा मिलने से सहभागिता बढ़ने की संभावना भी अधिक है।

स्व-गणना अनिवार्य नहीं, लेकिन उपयोगी विकल्प

सरकार ने साफ किया है कि सेल्फ-एन्यूमरेशन पूरी तरह वैकल्पिक है। जो लोग खुद ऑनलाइन जानकारी नहीं भरेंगे, वे पारंपरिक तरीके से सरकारी कर्मचारी के घर आने पर जानकारी दे सकते हैं। इसका मतलब यह है कि डिजिटल विकल्प जोड़ा गया है, लेकिन पारंपरिक गणना व्यवस्था समाप्त नहीं की गई है।

महत्वपूर्ण बात यह भी है कि जिन्होंने ऑनलाइन फॉर्म भरा होगा, उनके घर भी सरकारी कर्मचारी सत्यापन के लिए जा सकते हैं। यानी स्व-गणना सुविधा प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए है, लेकिन सत्यापन व्यवस्था फिर भी बनी रहेगी। इससे डेटा की विश्वसनीयता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

पहले चरण में पूछे जाएंगे 33 सवाल

पहले चरण की प्रश्नावली में कुल 33 सवाल शामिल हैं। इन सवालों का संबंध मकान, घर की संरचना, स्वामित्व, पानी, शौचालय, रसोई, वाहन, मोबाइल, इंटरनेट, सुविधाओं और अन्य बुनियादी जानकारियों से है। इसका उद्देश्य केवल लोगों की गिनती नहीं, बल्कि उनके आवासीय और सामाजिक-आर्थिक वातावरण की समग्र तस्वीर समझना है।

हाउस लिस्टिंग चरण के ये 33 सवाल भविष्य की कई योजनाओं के आधार बन सकते हैं। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि किस क्षेत्र में किस तरह की बुनियादी सुविधाओं की कमी है, कहां शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है और कहां आवासीय ढांचे को लेकर तत्काल नीति की जरूरत है।

लिव-इन कपल्स को कैसे दर्ज किया जाएगा

इस बार जनगणना के सामाजिक वर्गीकरण से जुड़ी कुछ परिभाषाएं भी चर्चा में हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, यदि कोई लिव-इन कपल लंबे समय से स्थिर रिश्ते में रह रहा है और वह खुद अपने संबंध को टिकाऊ मानता है, तो उसे विवाहित युगल की तरह दर्ज किया जा सकता है। यह वर्गीकरण पारंपरिक वैवाहिक श्रेणियों से अलग एक व्यावहारिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।

यद्यपि इस तरह की श्रेणियों पर अंतिम फील्ड-स्तरीय व्याख्या गणनाकर्मियों के दिशानिर्देशों पर निर्भर करेगी, लेकिन Census 2027 में सामाजिक वास्तविकताओं को अधिक सटीक रूप में दर्ज करने का प्रयास साफ दिखाई देता है। इस तरह की प्रविष्टियां सामाजिक संरचना के नए पैटर्न को समझने में मदद कर सकती हैं।

मोबाइल में FM और यूट्यूब को कैसे गिना जाएगा

पहले चरण के सवालों में मीडिया और सूचना-सुविधाओं से जुड़ी जानकारी भी शामिल है। आपके दिए गए विवरण के मुताबिक, यदि मोबाइल फोन में FM सुविधा है तो उसे रेडियो की उपलब्धता के रूप में दर्ज किया जा सकता है। वहीं मोबाइल पर यूट्यूब देखने को टीवी स्वामित्व नहीं माना जाएगा; टीवी दर्ज करने के लिए वास्तविक टीवी सेट होना जरूरी होगा।

यह फर्क इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जनगणना केवल डिजिटल खपत को नहीं, बल्कि भौतिक घरेलू संपत्ति और सुविधाओं को भी मापती है। Census 2027 में इस तरह के वर्गीकरण से यह समझने में मदद मिलेगी कि घरों में पारंपरिक मीडिया और डिजिटल मीडिया की पहुंच किस तरह बदल रही है।

वाहन, पानी और रसोई की श्रेणी कैसे तय होगी

हाउस लिस्टिंग चरण में वाहन स्वामित्व भी दर्ज किया जाएगा, लेकिन श्रेणियां स्पष्ट हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कार या जीप की श्रेणी में ट्रैक्टर शामिल नहीं होगा। इसी तरह ई-रिक्शा या ऑटो को कार या बाइक के रूप में नहीं गिना जाएगा।

पानी के मामले में यदि घर में नल होने के बावजूद पीने के लिए बोतलबंद या कैन वाला पानी मंगाया जाता है, तो “bottled water” जैसी प्रविष्टि दर्ज की जा सकती है। रसोई के मामले में यदि घर के उसी हिस्से में खाना बनता और सोया जाता है, तो उसे अलग रसोई नहीं माना जाएगा। रसोई तभी दर्ज होगी जब घर में अलग से इसका स्थान हो। इस तरह Census 2027 केवल सुविधा की उपस्थिति नहीं, उसकी प्रकृति भी समझने की कोशिश कर रही है।

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किन 3 सवालों का जवाब नहीं देना चाहिए

सरकार ने लोगों को यह भी आगाह किया है कि यदि कोई गणनाकर्मी कुछ निजी या असंबंधित जानकारी मांगता है, तो उसका जवाब नहीं देना चाहिए। इनमें महीने की आमदनी, बैंक बैलेंस, आधार-पैन जैसे दस्तावेज दिखाने का दबाव और बैंक खाता नंबर या OTP जैसी जानकारी शामिल है।

यह चेतावनी बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़े राष्ट्रीय सर्वे के दौरान ठगी या फर्जी पूछताछ की आशंका भी बढ़ जाती है। Census 2027 के नाम पर यदि कोई आपसे बैंकिंग या दस्तावेजी जानकारी मांगता है, तो उसे संदेह की नजर से देखना चाहिए। आधिकारिक गणना प्रक्रिया का दायरा सीमित और स्पष्ट है।

डेटा सिक्योरिटी को लेकर सरकार का बड़ा दावा

जनगणना डेटा को इस बार अत्यंत संवेदनशील सूचना श्रेणी में रखा गया है। आपके दिए गए विवरण के अनुसार इसे ‘अति-संवेदनशील सूचना बुनियादी ढांचा’ यानी CII की श्रेणी में शामिल किया गया है। इसका अर्थ यह है कि डेटा सुरक्षा को बहुत उच्च स्तर पर रखा जाएगा और इसकी निगरानी गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के भीतर की जाएगी।

सरकार का दावा है कि जनगणना डेटा को वैसी ही सुरक्षा दी जाएगी जैसी परमाणु प्रतिष्ठानों, राष्ट्रीय पावर ग्रिड या सैन्य नेटवर्क जैसी महत्वपूर्ण प्रणालियों को दी जाती है। केवल अधिकृत अधिकारी ही बायोमेट्रिक और डिजिटल सिग्नेचर जैसी सुरक्षा परतों के जरिए डेटा तक पहुंच सकेंगे। डेटा लीक या दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी बताया गया है।

RTI और कोर्ट में उपयोग से बाहर रहेगा डेटा

आपके दिए गए विवरण के मुताबिक, जनगणना डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा और RTI के दायरे से बाहर होगा। साथ ही इसे किसी सरकारी योजना या न्यायालय में सीधे सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इस तरह का प्रावधान नागरिकों को यह भरोसा देने के लिए है कि जो व्यक्तिगत जानकारी वे देंगे, उसका इस्तेमाल लक्षित प्रशासनिक कार्रवाई या कानूनी विवाद में उनके खिलाफ नहीं होगा।

Census 2027 में डेटा गोपनीयता का यह पहलू इसलिए भी अहम है क्योंकि डिजिटल संग्रहण के साथ-साथ डेटा लीक और निगरानी को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ी हैं। सरकार का सुरक्षा मॉडल इन्हीं आशंकाओं को कम करने की दिशा में रखा गया है।

हर घर बनेगा ‘डिजी डॉट’, जियो टैगिंग से बदलेगी तस्वीर

इस बार हर घर को डिजिटल मैप पर जियो-टैग्ड पहचान देने की भी बात कही गई है। यानी हर मकान एक तरह से डिजिटल बिंदु या “डिजी डॉट” के रूप में दर्ज होगा। इससे देश का आवासीय मानचित्र पहले से ज्यादा सूक्ष्म और उपयोगी रूप में तैयार हो सकेगा।

Census 2027 में यह बदलाव सिर्फ लोकेशन रिकॉर्डिंग नहीं, बल्कि भविष्य की प्रशासनिक और विकासात्मक योजना का बड़ा आधार बन सकता है। किसी गांव, कस्बे, शहर या शहरी बस्ती का वास्तविक फैलाव और संरचना अब अधिक सटीक ढंग से सामने आ सकेगी।

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डिजी डॉट का पहला फायदा: आपदा में सटीक राहत

जियो-टैगिंग से तैयार डिजिटल लेआउट का सबसे बड़ा उपयोग आपदा प्रबंधन में हो सकता है। यदि किसी सुदूर क्षेत्र में बादल फटने, बाढ़, भूकंप या भूस्खलन जैसी घटना होती है, तो मैप के जरिए यह जानना आसान होगा कि किस स्थान पर कितने घर हैं और वहां अनुमानित आबादी कितनी हो सकती है।

इससे राहत सामग्री, हेलिकॉप्टर, नाव, अस्थायी शिविर, भोजन पैकेट और मेडिकल सहायता को अधिक सटीक तरीके से भेजने में मदद मिल सकती है। Census 2027 का यह पहलू केवल गिनती तक सीमित नहीं, बल्कि जान बचाने वाली प्रशासनिक क्षमता से भी जुड़ सकता है।

दूसरा फायदा: परिसीमन में मदद

डिजिटल मैपिंग राजनीतिक परिसीमन की प्रक्रिया में भी मदद कर सकती है। संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं तय करते समय ग्रामीण और शहरी हिस्सों का संतुलन, आबादी का वितरण और भौगोलिक निरंतरता महत्वपूर्ण होती है। यदि घर-घर की डिजिटल पहचान उपलब्ध होगी, तो परिसीमन प्रक्रिया अधिक सटीक हो सकती है।

Census 2027 के बाद भविष्य में जब डिलिमिटेशन से जुड़े फैसले होंगे, तब यह डेटा बताने में मदद करेगा कि किस क्षेत्र का वास्तविक आवासीय फैलाव क्या है और किन मोहल्लों या बस्तियों को एक साथ रखा जाना चाहिए।

तीसरा फायदा: शहरी प्लानिंग आसान होगी

शहरों में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों, पार्कों और सार्वजनिक सुविधाओं की योजना बनाने के लिए केवल अनुमान नहीं, बल्कि सूक्ष्म आवासीय डेटा चाहिए होता है। यदि डिजिटल लेआउट से यह पता चलता है कि किसी बस्ती में बच्चों की संख्या ज्यादा है, तो वहां स्कूल और पार्क प्राथमिकता में आ सकते हैं। अगर कच्चे या कमजोर घरों की अधिकता है, तो मेडिकल इमरजेंसी और राहत संसाधन पहले से चिन्हित किए जा सकते हैं।

Census 2027 का यह हिस्सा शहरी नियोजन को डेटा-आधारित बनाने की दिशा में अहम कदम हो सकता है।

चौथा फायदा: शहरीकरण और पलायन का सटीक डेटा

यदि इस बार हर घर की डिजिटल मैपिंग होती है, तो अगले दशक में होने वाली अगली जनगणना में इन बदलावों की तुलना करना बहुत आसान होगा। इससे पता चलेगा कि कौन-से क्षेत्र तेजी से शहरी हुए, किस दिशा में आबादी बढ़ी, किन इलाकों से पलायन हुआ और किन बस्तियों का फैलाव सबसे अधिक हुआ।

भारत जैसे तेजी से बदलते देश में शहरीकरण और माइग्रेशन के सटीक पैटर्न नीति के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। Census 2027 इस मामले में दीर्घकालिक संदर्भ बिंदु बन सकता है।

पांचवां फायदा: मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हटाने में मदद

आपके दिए गए विवरण के अनुसार, जियो-टैगिंग और पहचान आधारित भौगोलिक रिकॉर्ड से मतदाता सूची को भी अधिक सटीक बनाने में मदद मिल सकती है। यदि कोई व्यक्ति किसी स्थान से डिजिटल रूप से जुड़ा है, तो दोहरे पंजीकरण जैसी गड़बड़ियों की पहचान आसान हो सकती है।

हालांकि मतदाता सूची और जनगणना अलग प्रशासनिक प्रक्रियाएं हैं, लेकिन Census 2027 से मिलने वाला भौगोलिक और आवासीय ढांचा भविष्य में चुनावी रिकॉर्ड को अधिक साफ-सुथरा बनाने में परोक्ष रूप से सहायक हो सकता है।

सिर्फ गिनती नहीं, देश के डिजिटल प्रशासन का नया आधार

Census 2027 केवल देश की आबादी गिनने का अभ्यास नहीं है। यह डिजिटल प्रशासन, सामाजिक संरचना की नई समझ, जाति डेटा, आवासीय बुनियादी ढांचे, शहरी नियोजन, आपदा प्रबंधन और भविष्य की नीतियों के लिए आधार तैयार करने वाली राष्ट्रीय प्रक्रिया बन चुकी है। पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुका है, दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा, और दोनों में पहली बार डिजिटल तथा सेल्फ-एन्यूमरेशन मॉडल शामिल है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्व-गणना पूरी करना इस प्रक्रिया की औपचारिक और प्रतीकात्मक शुरुआत बन गया है। 33 सवालों वाला पहला चरण लोगों के घरों, सुविधाओं और रहने की स्थितियों को दर्ज करेगा, जबकि दूसरा चरण सामाजिक और जनसंख्या संबंधी बड़े प्रश्नों का उत्तर देगा। इस लिहाज से Census 2027 आने वाले वर्षों की नीति, राजनीति और विकास की दिशा तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय डेटा अभियान बन सकता है।

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