किस राज्य में कब पड़ेंगे वोट? बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी का पूरा शेड्यूल Read it later

India Assembly Elections 2026 के तहत चुनाव आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इन पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में कुल 17.4 करोड़ मतदाता 824 सीटों के लिए वोट डालेंगे, जबकि चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान

चुनाव आयोग ने रविवार को देश के पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का औपचारिक ऐलान कर दिया। असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में होने वाले इन चुनावों के साथ ही पूरे देश की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

India Assembly Elections 2026

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India Assembly Elections

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इन चुनावों में कुल 824 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होगा। इन राज्यों में लगभग 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही सभी राज्यों में आचार संहिता तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है।

आयोग के अनुसार मतदान प्रक्रिया अप्रैल में शुरू होगी और अंतिम परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इन चुनावों को लेकर सुरक्षा, पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई नए कदम उठाए गए हैं।

किन राज्यों में कब होगा मतदान

चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग चरणों में मतदान कराया जाएगा।

तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव एक ही चरण में होंगे। यहां मतदाता 23 अप्रैल को अपने वोट डालेंगे।

पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में मतदान कराया जाएगा। राज्य में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। पिछली बार यहां आठ चरणों में चुनाव हुए थे, इसलिए इस बार चरणों की संख्या कम की गई है।

असम, केरल और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में मतदान एक ही चरण में होगा। इन तीनों जगहों पर 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे।

चुनाव आयोग के मुताबिक इन सभी राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल मई महीने में समाप्त हो रहा है, इसलिए उससे पहले नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

17.4 करोड़ मतदाता करेंगे वोट

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि पांचों राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में कुल 17.4 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं। ये सभी मतदाता 824 विधानसभा सीटों के लिए वोट डालेंगे।

आयोग के मुताबिक इस चुनाव में बड़ी संख्या में पहली बार वोट डालने वाले युवा भी शामिल होंगे। चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक योग्य नागरिक मतदाता सूची में शामिल हों और वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लें।

उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग ने पिछले एक साल में मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं।

चुनाव आचार संहिता लागू

India Assembly Elections 2026 तारीखों की घोषणा के साथ ही संबंधित राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसका मतलब है कि अब राज्य सरकारें कोई नई सरकारी योजना, नई घोषणा या बड़े नीतिगत फैसले नहीं कर सकेंगी।

आचार संहिता का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि चुनाव के दौरान सभी राजनीतिक दलों को बराबरी का अवसर मिले और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग न हो।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि तारीखों की घोषणा से पहले जो घोषणाएं की गई थीं, वे आचार संहिता के दायरे में नहीं आतीं। लेकिन अब से कोई भी नई घोषणा या योजना लागू नहीं की जा सकती।

हिंसा पर सख्त रुख

चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि चुनावी हिंसा किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि अब तक जो घटनाएं हुई हैं वे आचार संहिता लागू होने से पहले की थीं। लेकिन अब चुनाव कार्यक्रम घोषित हो चुका है और यदि किसी भी तरह की हिंसा होती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 326 चुनाव आयोग को यह जिम्मेदारी देता है कि वह योग्य नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करे और उन्हें सुरक्षित वातावरण में मतदान का अवसर दे।

आयोग ने यह भी बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा।

सभी मतदान केंद्रों पर 100% वेबकास्टिंग

चुनाव आयोग ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है।

2026 के विधानसभा चुनावों में सभी मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसका मतलब है कि मतदान प्रक्रिया की लाइव निगरानी की जा सकेगी।

मुख्य चुनाव आयुक्त के अनुसार यह व्यवस्था चारों राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के सभी मतदान केंद्रों पर लागू होगी। इससे मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी तरह की अनियमितता को तुरंत रोका जा सकेगा।

चुनाव आयोग के नए प्रयोग

चुनाव आयोग ने पिछले 12 महीनों में चुनाव प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए कई नए प्रयोग किए हैं।

पहला प्रयोग SIR यानी विशेष मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया से जुड़ा है। इसके जरिए यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी अयोग्य व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न रहे।

दूसरा महत्वपूर्ण बदलाव मोबाइल फोन से संबंधित है। मतदान केंद्र के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं होगी। मतदाता को अपना फोन पोलिंग स्टेशन के बाहर ही रखना होगा और मतदान के बाद वह उसे वापस ले सकेगा।

इसके अलावा आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसी भी मतदान केंद्र पर 1200 से ज्यादा मतदाता न हों। इससे मतदान प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और सुचारु रूप से संचालित की जा सकेगी।

India Assembly Elections 2026 से जुड़ी सभी जानकारी एक ऐप में

चुनाव आयोग ने डिजिटल तकनीक का उपयोग भी बढ़ाया है।

अब चुनाव से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां एक मोबाइल एप के जरिए उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसमें मतदाता पहचान पत्र (EPIC), उम्मीदवारों के हलफनामे और अन्य चुनावी जानकारी शामिल है।

इससे मतदाताओं को उम्मीदवारों और चुनाव से जुड़ी जानकारी आसानी से मिल सकेगी और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

बंगाल चुनाव को लेकर उठे सवाल

India Assembly Elections 2026 का चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ सवाल भी पूछे गए।

एक सवाल पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर था। आरोप लगाया गया कि चुनाव आयोग दो चरणों में चुनाव कराकर किसी विशेष राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।

इस पर चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि आयोग पूरी तरह निष्पक्ष है और चुनावी कार्यक्रम तय करते समय सभी प्रशासनिक और सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखा गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले चुनावों में हिंसा का इतिहास देखते हुए पुलिस अधिकारियों की विशेष नियुक्ति की गई है ताकि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

SIR सप्लिमेंट्री लिस्ट पर जवाब

एक अन्य सवाल SIR प्रक्रिया की सप्लिमेंट्री लिस्ट को लेकर पूछा गया।

चुनाव आयुक्त ने बताया कि जैसे ही सप्लिमेंट्री लिस्ट जारी होगी, उसे मुख्य मतदाता सूची में जोड़ दिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि पात्र मतदाताओं का नाम सूची में शामिल हो।

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असम और केरल के अनोखे मतदान केंद्र

चुनाव आयोग ने कुछ दूरस्थ और विशेष मतदान केंद्रों का भी जिक्र किया।

असम में एक मतदान केंद्र धनेखाना क्षेत्र में स्थित है, जहां मतदान दल को पहुंचने के लिए काफी कठिन यात्रा करनी पड़ती है। यह मतदान केंद्र माजुली से लगभग 50 से 60 किलोमीटर दूर है।

मतदान दल को पहले सड़क मार्ग से जाना पड़ता है, फिर ब्रह्मपुत्र नदी पार करनी होती है और अंत में ट्रैक्टर के जरिए वहां पहुंचना होता है। इस केंद्र पर कुल 248 मतदाता हैं।

केरल में भी एक अनोखा मतदान केंद्र है। इडुक्की जिले के आदिवासी क्षेत्र एडामलकुड्डी में स्थित बूथ संख्या 34 तक पहुंचने के लिए अधिकारियों को विशेष वाहन से 30 किलोमीटर तक दुर्गम सड़क से गुजरना पड़ता है। इसके बाद उन्हें लगभग 8 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। इस बूथ पर कुल 693 मतदाता हैं।

EVM से होंगे सभी मतदान

चुनाव आयोग ने बताया कि पांचों राज्यों में कुल 2,18,807 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इन सभी केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM का इस्तेमाल किया जाएगा।

EVM के जरिए मतदान प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और पारदर्शी मानी जाती है। इसलिए देश में लगभग सभी चुनाव अब इसी मशीन से कराए जाते हैं।

EVM का इतिहास

भारत में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का परीक्षण मई 1982 में किया गया था। उस समय केरल के परावुर विधानसभा क्षेत्र के 50 मतदान केंद्रों पर इसका प्रयोग हुआ था।

उस चुनाव में हारे उम्मीदवार एसी जोस ने चुनाव परिणाम को अदालत में चुनौती दी थी। इसके बाद वहां दोबारा चुनाव कराया गया, हालांकि जांच में मशीन में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई।

बाद में दिसंबर 1988 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में धारा 61A जोड़ी गई। इससे EVM के उपयोग को कानूनी मान्यता मिल गई।

पूरे देश में EVM का इस्तेमाल

नवंबर 1998 में मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली की कुल 17 विधानसभा सीटों पर EVM का प्रयोग किया गया। यह एक तरह का प्रायोगिक उपयोग था।

इसके बाद धीरे-धीरे देशभर में इसका इस्तेमाल बढ़ता गया। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में पहली बार पूरे देश में लगभग 17.5 लाख EVM मशीनों का इस्तेमाल किया गया था।

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EVM की तकनीकी खासियत

EVM मशीन की एक खासियत यह भी है कि यह बिजली के बिना भी काम कर सकती है। इसमें 6 वोल्ट की बैटरी लगी होती है, जिससे मशीन लंबे समय तक चल सकती है।

1989-90 के दौरान एक EVM मशीन की कीमत लगभग 5500 रुपए थी। समय के साथ इसमें कई तकनीकी सुधार किए गए हैं ताकि इसे और अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।

लोकतंत्र का बड़ा उत्सव

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव भारत के लोकतंत्र का एक बड़ा उत्सव माने जाते हैं। करोड़ों मतदाता इसमें भाग लेकर अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं।

चुनाव आयोग ने इन चुनावों को शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से कराने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर तकनीकी व्यवस्था तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इन चुनावों के परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे और उसी दिन यह साफ हो जाएगा कि इन पांच राज्यों में किस दल की सरकार बनेगी।

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