Droupadi Murmu के Mathura दौरे में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर 25 मिनट तक आध्यात्मिक चर्चा की। बारिश के बीच परिवार के साथ आश्रम पहुंचीं राष्ट्रपति ने संत को प्रणाम किया, जन्मदिन की बधाई दी और बाद में मथुरा में अत्याधुनिक कैंसर यूनिट का उद्घाटन भी किया।
मथुरा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आध्यात्मिक दौरा चर्चा में
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उत्तर प्रदेश दौरा इस बार आध्यात्मिकता, आस्था और जनसेवा के कई महत्वपूर्ण पड़ावों के कारण खास बन गया। Droupadi Murmu की Mathura यात्रा का सबसे चर्चित पल वह रहा, जब राष्ट्रपति ने वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की और करीब 25 मिनट तक आध्यात्मिक चर्चा की। यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक शिष्टाचार भेंट नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे राष्ट्रपति के आध्यात्मिक झुकाव, भारतीय संत परंपरा के प्रति सम्मान और धार्मिक स्थलों के प्रति उनकी आस्था से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने परिवार के साथ बारिश के बीच वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचीं। मौसम अनुकूल नहीं था, लेकिन इसके बावजूद यात्रा तय समय के अनुसार हुई। आश्रम पहुंचते ही राष्ट्रपति ने विनम्र भाव से हाथ जोड़कर संत प्रेमानंद महाराज को प्रणाम किया। संत ने भी ‘राधे-राधे’ कहकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव का क्षण बन गया।
आश्रम में माला-चुनरी से हुआ राष्ट्रपति का स्वागत
राष्ट्रपति के आश्रम पहुंचने पर संतों और आश्रम के शिष्यों ने पारंपरिक ढंग से उनका स्वागत किया। Droupadi Murmu के Mathura दौरे के इस हिस्से में आश्रम का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और गरिमामय बना रहा। राष्ट्रपति को माला पहनाई गई और चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इस स्वागत में वह सहज और भावुक दोनों नजर आईं।
आश्रम की परंपरा के अनुरूप राष्ट्रपति ने पूरा सम्मान संत परंपरा को दिया। उन्होंने न केवल संत प्रेमानंद महाराज को प्रणाम किया, बल्कि उन्हें जन्मदिन की बधाई भी दी। गुरुवार यानी 19 मार्च को प्रेमानंद महाराज का 56वां जन्मदिन था। ऐसे में राष्ट्रपति की ओर से जन्मदिन की बधाई दिए जाने को आश्रम से जुड़े लोगों ने विशेष महत्व का क्षण माना।
राष्ट्रपति का यह भाव बताता है कि उनकी मुलाकात महज राजकीय कार्यक्रम नहीं थी। उसमें व्यक्तिगत श्रद्धा, सम्मान और आत्मीयता भी दिखाई दी। यही वजह है कि यह मुलाकात चर्चा का विषय बन गई।
25 मिनट तक चली आध्यात्मिक चर्चा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और संत प्रेमानंद महाराज के बीच लगभग 25 मिनट तक आध्यात्मिक चर्चा हुई। बताया गया कि इस दौरान Droupadi Murmu Mathura यात्रा का सबसे निजी और गहन हिस्सा सामने आया। राष्ट्रपति संत के साथ बातचीत में भाव-विभोर नजर आईं। बातचीत के दौरान कुटिया में केवल राष्ट्रपति, उनके परिजन और संत के करीबी शिष्य ही मौजूद रहे।
इससे स्पष्ट होता है कि मुलाकात का स्वरूप शांत, निजी और गहन आध्यात्मिक संवाद वाला था। बाहर से यह भले एक सामान्य धार्मिक मुलाकात लग सकती है, लेकिन अंदर हुई चर्चा ने इसे और भी विशेष बना दिया। आध्यात्मिक विमर्श के विषय सार्वजनिक नहीं किए गए, लेकिन यह जरूर सामने आया कि राष्ट्रपति इस चर्चा के दौरान गहरे भावनात्मक जुड़ाव में दिखाई दीं।
भारतीय सार्वजनिक जीवन में जब देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद संभालने वाली शख्सियत किसी संत से इस तरह की आत्मीय मुलाकात करती है, तो वह स्वतः ही जनचर्चा का विषय बन जाती है। इस मुलाकात को उसी नज़र से देखा जा रहा है।
राष्ट्रपति का यूपी दौरा और उसका धार्मिक क्रम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उत्तर प्रदेश के तीन दिन के दौरे पर हैं। Droupadi Murmu का Mathura पड़ाव इस बड़े कार्यक्रम का अहम हिस्सा था। इससे पहले गुरुवार को उन्होंने अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए थे। वहां उन्होंने श्रीराम मंदिर परिसर का भ्रमण किया और रामदरबार में राम यंत्र की स्थापना भी की।
अयोध्या में उन्होंने कहा था कि प्रभु श्रीराम ने इसी पवित्र भूमि पर जन्म लिया था और यहां कदम रखना उनके लिए सौभाग्य की बात है। अयोध्या में उनका कार्यक्रम आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। वहां उन्हें मंदिर निर्माण से जुड़े कार्यों की जानकारी भी दी गई। इस क्रम ने यह साफ किया कि राष्ट्रपति का दौरा केवल प्रशासनिक या औपचारिक नहीं, बल्कि धार्मिक विरासत और भारतीय आस्था केंद्रों के प्रति सम्मान का भी प्रतीक है।
अयोध्या से गुरुवार शाम वह मथुरा पहुंचीं। यही से उनके मथुरा-वृंदावन प्रवास की शुरुआत हुई, जो शुक्रवार सुबह प्रेमानंद महाराज से मुलाकात के साथ और अधिक चर्चा में आ गया।
मथुरा पहुंचने के बाद वृंदावन में इस्कॉन मंदिर भी गईं
मथुरा पहुंचने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वृंदावन में कई प्रमुख धार्मिक स्थलों का भी दौरा किया। Droupadi Murmu Mathura कार्यक्रम के तहत वह इस्कॉन मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने राधा-श्याम सुंदर का पूजन-अर्चन किया। मंदिर परिसर में उनकी मौजूदगी ने वहां के भक्तों और प्रबंधन के बीच उत्साह का माहौल बना दिया।
राष्ट्रपति ने इस्कॉन मंदिर की साज-सजावट की तारीफ की। मंदिर के वातावरण, सजावट और भक्तिमय व्यवस्था को उन्होंने सराहा। इस दौरान उन्होंने मंदिर में मौजूद बच्चों से भी बातचीत की और उन्हें चॉकलेट दी। यह दृश्य उनके सहज और मानवीय व्यक्तित्व की झलक भी देता है। करीब आधे घंटे तक इस्कॉन मंदिर में रुकने के बाद राष्ट्रपति ने प्रेम मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया।
इस पूरे कार्यक्रम ने यह दिखाया कि उनका मथुरा दौरा केवल एक स्थल तक सीमित नहीं था, बल्कि वृंदावन की व्यापक आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा हुआ था।
प्रेमानंद महाराज से मुलाकात के बाद अगला कार्यक्रम
संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति का अगला कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण रहा। प्रेमानंदजी से मिलने के बाद वह बाबा नीम करौली महाराज के आश्रम भी पहुंचने वाली थीं। मथुरा और वृंदावन में ऐसे प्रमुख संत स्थलों की श्रृंखलाबद्ध यात्रा ने उनके कार्यक्रम को एक विशिष्ट धार्मिक आयाम दिया।
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इसके बाद राष्ट्रपति ने रामकृष्ण मिशन हॉस्पिटल का भी दौरा किया। इस तरह Droupadi Murmu Mathura यात्रा में आध्यात्मिक संवाद और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा सेवा कार्य दोनों शामिल रहे। यही इस दौरे की खासियत भी रही—एक ओर संतों का आशीर्वाद, दूसरी ओर जनसेवा से जुड़े संस्थान का उद्घाटन।
रामकृष्ण मिशन हॉस्पिटल में अत्याधुनिक कैंसर यूनिट का उद्घाटन
संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रामकृष्ण मिशन हॉस्पिटल पहुंचीं। वहां उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे आधुनिक कैंसर यूनिट ‘नंदकिशोर सोमानी ऑन्कोलॉजी ब्लॉक’ का उद्घाटन किया। Droupadi Murmu Mathura कार्यक्रम का यह हिस्सा स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किसी भी क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। पश्चिमी यूपी के मरीजों के लिए इस तरह की यूनिट उम्मीद का नया केंद्र बन सकती है। उद्घाटन के दौरान उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और यूपी सरकार के मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण भी मौजूद रहे।
इस उद्घाटन ने राष्ट्रपति के दौरे को केवल आध्यात्मिक महत्व तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे जनहित और स्वास्थ्य सेवा के एक ठोस संदेश से भी जोड़ दिया। यह संतुलन उनके पूरे कार्यक्रम की विशेष पहचान बनकर सामने आया।
राष्ट्रपति का मथुरा का यह दूसरा दौरा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए मथुरा कोई नया पड़ाव नहीं है। इससे पहले भी वह यहां आ चुकी हैं। Droupadi Murmu का Mathura का यह दूसरा दौरा है। इससे पहले वह पिछले साल 25 सितंबर को मथुरा आई थीं। उस समय उन्होंने बांके बिहारी मंदिर में दर्शन किए थे।
यह तथ्य महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि मथुरा-वृंदावन से राष्ट्रपति का एक निरंतर आध्यात्मिक संबंध बन रहा है। देश की राष्ट्रपति होने के बावजूद उनका ऐसे धार्मिक स्थलों पर बार-बार आना और श्रद्धा प्रकट करना लोगों के बीच एक विशेष भाव पैदा करता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि उनकी यात्राओं में भारतीय धार्मिक परंपरा और संस्कृति के प्रमुख केंद्र लगातार शामिल रहे हैं।
अयोध्या में रामलला के दर्शन और राम यंत्र की स्थापना
उत्तर प्रदेश दौरे के पहले दिन गुरुवार को राष्ट्रपति अयोध्या पहुंचीं। वहां उन्होंने रामलला के दर्शन किए और राम मंदिर परिसर का भ्रमण किया। मंदिर में रामदरबार में राम यंत्र की स्थापना करना उनके कार्यक्रम का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। Droupadi Murmu की Mathura यात्रा को समझने के लिए अयोध्या वाला पड़ाव भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि दोनों कार्यक्रमों में आध्यात्मिक निरंतरता दिखाई देती है।
अयोध्या में राष्ट्रपति ने कहा था कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि उन्हें उस पवित्र भूमि पर जाने का अवसर मिला, जहां प्रभु श्रीराम ने जन्म लिया था। उनके इस वक्तव्य को धार्मिक श्रद्धा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति के रूप में देखा गया। वहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें मंदिर निर्माण से जुड़े कार्यों की भी जानकारी दी।
अयोध्या से मथुरा और वृंदावन तक का यह क्रम उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख धार्मिक केंद्रों को राष्ट्रपति की यात्रा से जोड़ता है।
भाव-विभोर दिखीं राष्ट्रपति, मुलाकात का भावनात्मक पक्ष
संत प्रेमानंद महाराज के साथ राष्ट्रपति की मुलाकात का जो पक्ष सबसे ज्यादा चर्चा में आया, वह था उनका भाव-विभोर होना। बताया जा रहा है कि आध्यात्मिक चर्चा के दौरान राष्ट्रपति गहराई से प्रभावित नजर आईं। Droupadi Murmu की Mathura यात्रा के इस भावनात्मक पक्ष ने लोगों का ध्यान खास तौर पर खींचा।
जब कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति सार्वजनिक कार्यक्रमों से परे किसी संत के सामने बैठकर आत्मिक शांति महसूस करता है, तो उसमें मानवीय आयाम और भी प्रबल हो जाता है। यही वजह है कि यह मुलाकात सामान्य प्रोटोकॉल से आगे जाकर लोगों को ज्यादा जुड़ी हुई और सजीव लगी। कुटिया में सीमित लोगों की मौजूदगी ने यह भी दिखाया कि बातचीत को निजी और शांत माहौल में रखा गया।
यह मुलाकात किसी राजनीतिक अर्थ में नहीं, बल्कि आध्यात्मिक संवाद के रूप में सामने आई। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता रही।
कौन हैं संत प्रेमानंद महाराज
संत प्रेमानंद महाराज का नाम पिछले कुछ वर्षों में देशभर में तेजी से चर्चित हुआ है। वृंदावन में उनकी आध्यात्मिक उपस्थिति, प्रवचन शैली और भक्ति पर आधारित संदेशों के कारण बड़ी संख्या में लोग उनसे जुड़ते हैं। राष्ट्रपति की मुलाकात के बाद उनके जीवन और पृष्ठभूमि को लेकर भी लोगों की जिज्ञासा बढ़ी है।
प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की नरवल तहसील के अखरी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम शंभू नारायण पांडे और माता का नाम रामा देवी है। परिवार में तीन भाई हैं और प्रेमानंद महाराज मंझले हैं। बचपन में उनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था।
यह साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आध्यात्मिक जीवन की ओर जाने की यात्रा है, जिसने आज उन्हें लाखों श्रद्धालुओं के बीच लोकप्रिय बना दिया है।
बचपन से आध्यात्मिक झुकाव, कक्षा 8 तक की पढ़ाई
प्रेमानंद महाराज बचपन से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। उन्होंने कक्षा 8 तक पढ़ाई की। कम उम्र से ही उनके भीतर वैराग्य और साधना की भावना स्पष्ट दिखने लगी थी। Droupadi Murmu Mathura मुलाकात के बाद यह जीवन यात्रा और भी लोगों के सामने आई है, क्योंकि राष्ट्रपति जैसे शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति का उनसे मिलना उनके आध्यात्मिक प्रभाव को भी रेखांकित करता है।
जब वह 13 साल के हुए, तब उन्होंने ब्रह्मचारी बनने का फैसला किया। यह निर्णय सामान्य बाल्यावस्था के जीवन से बिल्कुल अलग था। आध्यात्मिक साधना की राह चुनना, वह भी इतनी छोटी उम्र में, उनकी आंतरिक प्रवृत्ति और गहरे धार्मिक संस्कारों की ओर संकेत करता है।
शुरुआत में उनका नाम ‘आर्यन ब्रह्मचारी’ रखा गया। बाद में साधना, गुरुदीक्षा और तप की प्रक्रिया के साथ उनकी पहचान प्रेमानंद महाराज के रूप में स्थापित हुई।
काशी से मथुरा तक की साधना यात्रा
प्रेमानंद महाराज ने आध्यात्मिक जीवन की अपनी यात्रा में काशी में करीब 15 महीने बिताए। काशी भारतीय सनातन परंपरा का एक बड़ा केंद्र है और वहां बिताया गया समय किसी भी साधक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। Droupadi Murmu के Mathura चर्चा के बीच यह तथ्य भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि राष्ट्रपति जिस संत से मिलने पहुंचीं, उनकी साधना यात्रा गहरे तप और अनुशासन से होकर गुजरी है।
काशी में रहने के दौरान उन्होंने गुरु गौरी शरण जी महाराज से गुरुदीक्षा ली। गुरुदीक्षा किसी भी संत जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ होती है, क्योंकि वहीं से साधना को दिशा, परंपरा और आध्यात्मिक आधार मिलता है। गुरुदीक्षा के बाद वह मथुरा आ गए और तब से वृंदावन में ही रह रहे हैं।
वृंदावन, जो राधा-कृष्ण भक्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है, वहीं प्रेमानंद महाराज ने अपनी आध्यात्मिक साधना और सेवा का केंद्र बनाया। यही कारण है कि आज उनके आश्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
राष्ट्रपति की मुलाकात से क्यों बढ़ी चर्चा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जैसी शीर्ष संवैधानिक हस्ती की किसी संत से मुलाकात अपने आप में चर्चा का कारण बनती है। लेकिन Droupadi Murmu की Mathura में मुलाकात का महत्व इसलिए और बढ़ गया क्योंकि इसमें आत्मीयता, आध्यात्मिक संवाद, जन्मदिन की बधाई, परिजनों की मौजूदगी और भावुक वातावरण जैसे कई तत्व शामिल थे।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब राष्ट्रपति पहले अयोध्या में रामलला के दर्शन कर चुकी थीं, फिर मथुरा में वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रही थीं। इस तरह प्रेमानंद महाराज से उनकी भेंट पूरे धार्मिक दौरे का स्वाभाविक और गहरा पड़ाव बन गई। लोगों के बीच यह भी चर्चा रही कि राष्ट्रपति ने बारिश की परवाह किए बिना सुबह-सुबह आश्रम पहुंचकर जिस विनम्रता से संत को प्रणाम किया, वह भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की सुंदर झलक है।
आस्था और सेवा का संतुलित संदेश
राष्ट्रपति के इस पूरे कार्यक्रम में एक खास बात साफ तौर पर उभरकर सामने आई—आस्था और सेवा का संतुलन। एक ओर उन्होंने अयोध्या और मथुरा जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दर्शन-पूजन किया, संतों से मुलाकात की, आध्यात्मिक चर्चा की; दूसरी ओर उन्होंने रामकृष्ण मिशन हॉस्पिटल में आधुनिक कैंसर यूनिट का उद्घाटन भी किया। Droupadi Murmu का Mathura दौरा इसी संतुलन की वजह से और अधिक सार्थक नजर आया।
भारतीय सार्वजनिक जीवन में ऐसे कार्यक्रम अक्सर यह संदेश देते हैं कि आध्यात्मिकता और जनसेवा विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकती हैं। धार्मिक चेतना के साथ समाज के लिए उपयोगी संस्थानों को बढ़ावा देना एक व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा माना जाता है। राष्ट्रपति का यह दौरा उसी भावना को सामने लाता है।
परिवार की मौजूदगी ने मुलाकात को और आत्मीय बनाया
प्रेमानंद महाराज से मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति अपने परिवार के साथ थीं। यह तथ्य इस भेंट को और अधिक आत्मीय बनाता है। Droupadi Murmu का Mathura कार्यक्रम में जहां राजकीय गरिमा मौजूद थी, वहीं परिवार की मौजूदगी ने इसे निजी श्रद्धा का रूप भी दिया। संतों और आश्रम परंपरा में परिवार सहित दर्शन और आशीर्वाद लेने को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
कुटिया में राष्ट्रपति, उनके परिजन और संत के करीबी शिष्य ही मौजूद रहे। यह सीमित उपस्थिति बताती है कि मुलाकात को शांत और आत्मीय रखा गया। आज के सार्वजनिक जीवन में ऐसे क्षण कम ही देखने को मिलते हैं, जहां औपचारिकता से अधिक भावनात्मक सहजता दिखाई दे।
वृंदावन की आध्यात्मिक भूमि और राष्ट्रपति का जुड़ाव
मथुरा-वृंदावन को भारतीय भक्ति परंपरा का हृदय कहा जाता है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं करता, बल्कि एक अलग आध्यात्मिक वातावरण को महसूस भी करता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की हालिया यात्रा ने भी यही संकेत दिया कि Droupadi Murmu का संबंध केवल प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं, बल्कि इस पवित्र क्षेत्र की आध्यात्मिक ऊर्जा से भी जुड़ा हुआ है।
पिछले साल 25 सितंबर को बांके बिहारी मंदिर में दर्शन और इस बार प्रेमानंद महाराज से मुलाकात, इस्कॉन मंदिर में पूजा, प्रेम मंदिर दर्शन और आगे बाबा नीम करौरी महाराज के आश्रम जाने का कार्यक्रम—ये सब मिलकर राष्ट्रपति के वृंदावन से गहरे जुड़ाव की तस्वीर पेश करते हैं।
उत्तर प्रदेश दौरे का व्यापक संदेश
राष्ट्रपति का उत्तर प्रदेश दौरा कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण रहा। अयोध्या में रामलला के दर्शन, राम यंत्र की स्थापना, मथुरा में संत प्रेमानंद महाराज से भेंट, इस्कॉन और प्रेम मंदिर में दर्शन, फिर स्वास्थ्य सेवा से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट का उद्घाटन—इन सबने मिलकर इस यात्रा को बहुआयामी बना दिया। Droupadi Murmu के Mathura के इस बड़े दौर का एक अत्यंत प्रभावशाली हिस्सा बनकर उभरा।
यह दौरा भारतीय आध्यात्मिक धरोहर, सांस्कृतिक निरंतरता, धार्मिक आस्था और सामाजिक सरोकारों को एक साथ प्रस्तुत करता है। राष्ट्रपति का यह कार्यक्रम कई स्तरों पर संदेश देता है—विनम्रता का, परंपरा के सम्मान का, स्वास्थ्य सेवा के विस्तार का और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़े रहने का।
मुलाकात की मानवीय छवि लोगों को क्यों छू गई
राष्ट्रपति की संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की तस्वीरों और विवरणों में जो बात सबसे ज्यादा असर छोड़ती है, वह इसकी मानवीयता है। बारिश के बीच सुबह-सुबह पहुंचना, हाथ जोड़कर प्रणाम करना, ‘राधे-राधे’ से अभिवादन स्वीकार होना, जन्मदिन की बधाई देना, भाव-विभोर होना—ये सभी दृश्य लोगों को सहज रूप से जोड़ते हैं।
लोग केवल बड़े पद और सुरक्षा घेरे को नहीं देखते, बल्कि ऐसे क्षणों में व्यक्ति की सरलता और श्रद्धा को भी देखते हैं। राष्ट्रपति मुर्मू के इस कार्यक्रम ने यही छवि मजबूत की कि सर्वोच्च संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्होंने भारतीय संत परंपरा के सामने विनम्रता और श्रद्धा का भाव बनाए रखा।
क्यों खास रही यह मुलाकात
कुल मिलाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और संत प्रेमानंद महाराज की यह मुलाकात कई कारणों से विशेष रही। यह एक आध्यात्मिक संवाद था, जिसमें औपचारिकता से ज्यादा आत्मीयता थी। यह एक ऐसा क्षण था, जहां देश की राष्ट्रपति ने वृंदावन की संत परंपरा के सामने श्रद्धा प्रकट की। यह मुलाकात जन्मदिन की शुभकामना, पारिवारिक उपस्थिति, भावनात्मक संवाद और संतों के आशीर्वाद से भरी हुई रही।
इसके साथ ही मथुरा दौरे में रामकृष्ण मिशन हॉस्पिटल में अत्याधुनिक कैंसर यूनिट का उद्घाटन इस यात्रा को जनसेवा के संदेश से भी जोड़ता है। अयोध्या से मथुरा तक की यह श्रृंखला राष्ट्रपति के आध्यात्मिक झुकाव और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति उनके सम्मान को स्पष्ट करती है। यही वजह है कि Droupadi Murmu की Mathura यात्रा ने धार्मिक, सामाजिक और मानवीय—तीनों स्तरों पर लोगों का ध्यान खींचा है।
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