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CRPC की 177 धाराओं में बड़े बदलाव,आप भी जानें किन-किन धाराओं में क्‍या बदला

CRPC:  20 दिसंबर बुधवार को लोकसभा में तीन नए आपराधिक कानून विधेयक पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (CRPC) में पहले 484 धाराएं थीं जो अब से 531 होंगी। 9 नई धाराएं इसमें जोड़ी गई हैं। 39 नई उपधाराएं जोड़ी गई हैं. अमित शाह ने कहा कि सीआरपीसी की 177 धाराओं में बदलाव किए गए हैं. 44 नए प्रावधान और स्पष्टीकरण जोड़े गए हैं। 35 अनुभागों में समय-सीमाएँ जोड़ी गई हैं और 14 अनुभाग हटा दिए गए हैं।

मॉब लिंचिंग जैसे अपराध के लिए अब मौत की सज़ा

गृह मंत्री ने लोकसभा में कहा कि मॉब लिंचिंग एक जघन्य अपराध है और इस कानून में हम मॉब लिंचिंग के अपराध के लिए मौत की सजा का प्रावधान कर रहे हैं। लेकिन मैं विपक्ष से पूछना चाहता हूं कि आपने (कांग्रेस) भी वर्षों तक देश पर शासन किया है, आपने मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून क्यों नहीं बनाया? आपने मॉब लिंचिंग शब्द का इस्तेमाल सिर्फ हमें गाली देने के लिए किया, लेकिन जब आप सत्ता में थे तो आप कानून बनाना भूल गए।

उन्होंने सदन को जानकारी देते हुए कहा कि इस सदन की मंजूरी के बाद सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 लागू हो जाएगी. इसके अलावा भारतीय साक्ष्य अधिनियम (साक्ष्य अधिनियम 1872) के स्थान पर भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023 लागू किया जाएगा।

अंग्रेजों के काले कानून अब खत्म

शाह ने लोकसभा में कहा कि अंग्रेजों के राजद्रोह जैसे काले कानून को खत्म कर दिया गया है। इसकी जगह आजाद भारत में देशद्रोह का कानून लाया गया है। देश के खिलाफ बोलना अपराध माना जाएगा। सशस्त्र विद्रोह के लिए अब जेल की सजा होगी। उन्होंने कहा कि पुराने कानून तत्कालीन विदेशी शासकों ने अपना प्रभुत्व कायम रखने के लिए बनाये थे। नए कानून हमारे संविधान के मूल मूल्यों – व्यक्तिगत स्वतंत्रता, मानवाधिकार और सभी के लिए समान व्यवहार – को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं।

शाह ने कहा कि मैंने इसे देशद्रोह की जगह देशद्रोह में बदल दिया है।’ क्योंकि अब देश आजाद हो गया है तो लोकतांत्रिक देश में कोई भी सरकार की आलोचना कर सकता है। लेकिन यदि  कोई देश की सुरक्षा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि राजद्रोह कानून अंग्रेजों ने बनाया था, जिसके कारण तिलक, गांधी, पटेल समेत देश के कई सेनानी कई बार 6-6 साल तक जेल में रहे। वो कानून अब तक चलाया जाता  रहा।

150 साल पुराने तीन कानूनों में बोले अमित शाह

गृह मंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक सदन में करीब 150 साल पुराने तीन कानून हैं, जो हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली को चलाते हैं। मोदी जी के नेतृत्व में मैंने पहली बार उन तीन कानूनों में आमूलचूल परिवर्तन किया है, जो भारतीयता, भारतीय संविधान और भारत के लोगों से संबंधित हैं। ये मेरे लिए बहुत सम्मान और गर्व करने की बात है कि आज मैं 3 कानूनों के साथ इस महान सदन के सामने उपस्थित होकर साक्षी बना हूं। ये ऐसा अवसर है जब अगले वर्ष हमारे संविधान के 75 वर्ष पूरे होंगे, ये ऐसा अवसर है जब इसी संसद ने देश की मातृशक्ति को सदनों में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून बनाया गया है।

 

पुलिस की जवाबदेही तय की जायेगी

शाह ने कहा- अब नए कानून में पुलिस की जवाबदेही भी तय होगी। अब अगर कोई गिरफ्तार होता है तो पुलिस उसके परिवार को सूचना देगी। पहले ये जरूरी नहीं था। किसी भी स्थिति में, पुलिस पीड़ित को 90 दिनों के भीतर घटना की जानकारी देगी।

आरोपी की अनुपस्थिति में भी सुनवाई

देश में कई मामले लंबित हैं, बॉम्बे ब्लास्ट जैसे मामलों के आरोपी पाकिस्तान जैसे देशों में छुपे हुए हैं। अब उन्हें यहां आने की कोई जरूरत नहीं है।’ यदि वह 90 दिनों के भीतर अदालत में उपस्थित नहीं होते हैं, तो मुकदमा उनकी अनुपस्थिति में होगा।

 

बच्ची या नाबालिग युवती से दुष्कर्म के दोषी को अब सजा ए मौत

पहले बलात्कार के लिए धाराएं 375, 376 थीं, अब जहां से अपराधों की चर्चा शुरू की जाती है, वहां बलात्कार को धारा 63, 69 में शामिल कर दिया गया है। सामूहिक बलात्कार को भी गंभीर मानकर आगे रखा गया है। बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध भी सामने आये हैं। इसमें हत्या 302 थी, अब 101 हो गई है। 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की से बलात्कार के लिए आजीवन कारावास और मृत्युदंड दोनों का प्रावधान है। सामूहिक बलात्कार के दोषी पाए जाने वालों को 20 साल तक की कैद या जब तक वे जीवित हैं तब तक यानी मरते दम तक कैद की सजा दी जाएगी।

 

सबसे बड़ा बदलाव ये है कि अब ट्रायल कोर्ट को हर फैसला अधिकतम 3 साल के भीतर देना होगा. देश में 5 करोड़ मामले लंबित हैं. इनमें से 4.44 करोड़ मामले ट्रायल कोर्ट में हैं।

इसी तरह जिला अदालतों में जजों के 25,042 पदों में से 5,850 पद खाली हैं।

 

अनजाने में हुई हत्या को श्रेणियों में बांटा गया

प्रस्तावित कानून में गैर इरादतन हत्या को दो भागों में बांटा गया है। अगर गाड़ी चलाते वक्त कोई दुर्घटना हो जाए तो आरोपी अगर घायल को पुलिस स्टेशन या अस्पताल ले जाए तो उसे कम सजा मिलेगी। हिट एंड रन केस में 10 साल की सजा होगी।

मॉब लिंचिंग पर मौत की सज़ा होगी। छीना-झपटी के लिए पहले कोई कानून नहीं था, अब यह कानून बन गया है। जहां किसी के सिर पर डंडे से वार करने वाले को सजा दी जाएगी, वहीं अगर आरोपी का ब्रेन डेड हो जाता है तो आरोपी को 10 साल की सजा होगी।

 

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सांवरिया सेठ सिंह

सांवरिया सेठ सिंह पत्रकारिता के क्षेत्र में 14 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ ThumbsUp Bharat से जुड़े हैं। देश के कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और डिजिटल न्यूज पोर्टल पर अपनी सेवाएं देने के बाद वे इस मंच का हिस्सा बने हैं। बिजनेस, देश-प्रदेश, धर्म और टेक्नोलॉजी समाचारों की गहरी समझ रखने वाले सांवरिया सेठ सिंह का अनुभव ThumbsUp Bharat की संपादकीय टीम को और सशक्त बनाता है।

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