खेलीफ-टिंग पर संकट, World Boxing ने लागू किया Gender Test Rule Read it later

ओलंपिक शैली की मुक्केबाजी की वैश्विक संस्था World Boxing ने सितंबर 2025 में इंग्लैंड के लिवरपूल में होने वाली World Boxing Championship से पहले महिला वर्ग में खेलने वाली सभी खिलाड़ियों के लिए gender test boxing अनिवार्य कर दिया है। इसमें खिलाड़ियों को Polymerase Chain Reaction (PCR Test) या इसी तरह के आनुवंशिक स्क्रीनिंग टेस्ट से गुजरना होगा, ताकि उनके जन्म के समय का लिंग निर्धारित किया जा सके।

 टेस्टिंग प्रक्रिया और कारण

यह परीक्षण Y chromosome की उपस्थिति या अनुपस्थिति की पहचान करेगा, जिसे जैविक लिंग का प्रमुख सूचक माना जाता है। World Boxing President Boris van der Vorst ने कहा कि संगठन सभी खिलाड़ियों की गरिमा का सम्मान करता है लेकिन खेल में सुरक्षा और fair competition बनाए रखना भी जरूरी है। इसी कारण से यह कदम उठाया गया है।

खेलीफ और लिन यू-टिंग पर संकट

इस नियम से Algeria की Olympic Champion Iman Khelif और Taiwan की Lin Yu-Ting की भागीदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं। दोनों खिलाड़ियों ने पेरिस ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन उनके लिंग को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। खेलीफ ने साफ कहा कि वह जन्म से महिला हैं और पिछले 10 वर्षों से women’s boxing में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।

राष्ट्रीय महासंघों की जिम्मेदारी

World Boxing ने स्पष्ट किया है कि खिलाड़ियों के लिए gender test कराने और रिपोर्ट जमा करने की जिम्मेदारी उनके National Federations की होगी। यह भी कहा गया कि नियम लागू करने का मकसद sports integrity और सुरक्षा को बनाए रखना है।

पिछले अनुभव और खेलों में लिंग परीक्षण

ओलंपिक खेलों में chromosome testing 1990 तक आम था लेकिन ठोस नतीजे न आने पर इसे बंद कर दिया गया। बाद में कई खेलों ने hormone level test अपनाए, खासकर testosterone level पर ध्यान दिया गया। इस साल की शुरुआत में World Athletics ने फिर से chromosome test शुरू किया, जिससे अन्य खेलों पर भी दबाव बढ़ा।

पेरिस ओलंपिक में हुआ था जेंडर विवाद

यह नया नियम उस विवाद के बाद आया है जो पिछले साल Paris Olympics के दौरान सामने आया था। बॉक्सिंग में अल्जीरिया की मुक्केबाज Imane Khalif पर पुरुष होने का आरोप लगा था। उनकी प्रतिद्वंद्वी ने मुकाबले से यह कहते हुए हटने का निर्णय लिया कि उन्हें “पुरुष के साथ लड़ने को मजबूर किया गया”। इसकी पूरी खबर यहां पढ़ें…

लिंग परीक्षण पर बहस और विवाद

खिलाड़ियों और विशेषज्ञों का मानना है कि gender test boxing से कई बार महिलाओं का करियर खतरे में पड़ सकता है, खासकर तब जब टेस्ट रिपोर्ट पर गलतफहमी पैदा हो। कई संगठनों का कहना है कि यह नियम खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है। इसके बावजूद, बॉक्सिंग जैसी contact sports में सुरक्षा को देखते हुए इसे आवश्यक माना जा रहा है।

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