भारतीय वायुसेना के Group Captain Shubhanshu Shukla ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने Axiom Mission और International Space Station (ISS) अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि दो हफ्ते तक अंतरिक्ष में रहना किसी भी एस्ट्रोनॉट के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और प्रेरणादायक होता है। वे इस मिशन में Commander और Pilot थे और सिस्टम ऑपरेशंस की कमान संभाल रहे थे।
उन्होंने माना कि space mission में डर तो होता है लेकिन सबसे बड़ी ताकत वह भरोसेमंद टीम होती है, जिस पर अपनी जिंदगी सौंपी जा सकती है।
अंतरिक्ष में किए गए प्रयोग और सीख
ISS पर 14 दिनों तक रहते हुए शुभांशु ने कई scientific experiments किए और महत्वपूर्ण तस्वीरें लीं। उन्होंने कहा कि इस अनुभव से उन्हें किताबों से परे असली अंतरिक्ष जीवन की चुनौतियों को समझने का मौका मिला। उन्होंने स्पष्ट किया कि human space mission में इंसान की जिंदगी दांव पर होती है, इसलिए हर निर्णय और हर ट्रेनिंग का असर सीधा मिशन की सफलता से जुड़ा होता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही बड़ी बातें
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुभांशु शुक्ला ने दो बड़ी बातें रखीं:
Human Space Mission केवल ट्रेनिंग भर नहीं, बल्कि ऐसा अनुभव है जो अमूल्य ज्ञान देता है।
भारत अब अपने rocket, capsule और पृथ्वी से इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है।
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में शरीर कई बदलावों से गुजरता है। 20 दिन बिताने के बाद शरीर पृथ्वी की gravity भूल जाता है, जिसे वापस पाने में समय लगता है।
5 सवाल-जवाब में खुलासा
शुभांशु ने पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया:
Experiments: अभी डेटा एनालिसिस जारी है, कुछ महीनों में नतीजे आएंगे।
Training difference: रूस, अमेरिका और भारत का सेटअप अलग है, लेकिन लक्ष्य एक—सुरक्षित अंतरिक्ष मिशन।
Learning for Gaganyaan: किताबों से परे असली अनुभव ने उन्हें बेहतर समझ दी।
Rocket Launch feeling: शुरुआत में डर और उत्साह दोनों थे, लेकिन रिस्क को उन्होंने मैनेज किया।
Emotional connect: कठिन समय में ट्रेनिंग और मिशन का मकसद ही ताकत देता है।
अब गगनयान मिशन की तैयारी
शुभांशु शुक्ला ने कहा कि उनका अगला मिशन ISRO का Gaganyaan Mission होगा। इसके तहत 2027 में भारतीय वायुसेना के तीन पायलट्स को 400 किमी ऑर्बिट में 3 दिन तक भेजा जाएगा। इसके बाद स्पेसक्राफ्ट की लैंडिंग हिंद महासागर में कराई जाएगी।
इस मिशन की लागत करीब 20,193 करोड़ रुपए है। इससे पहले ISRO दो खाली टेस्ट फ्लाइट और एक रोबोटिक फ्लाइट भेजेगा। चौथी फ्लाइट में भारतीय पायलट्स अंतरिक्ष की उड़ान भरेंगे।
🚀 गगनयान मिशन से भारत को क्या फायदे मिलेंगे
स्पेस इकोनॉमी में भारत की मजबूत पकड़
गगनयान मिशन के जरिए भारत तेजी से बढ़ रही Space Economy का अहम हिस्सा बनेगा। अनुमान है कि 2035 तक यह इंडस्ट्री 1.8 ट्रिलियन डॉलर (करीब 154 लाख करोड़ रुपए) की हो जाएगी। ऐसे में भारत के लिए इसमें सक्रिय बने रहना बेहद जरूरी है।
चौथा देश बनेगा भारत
गगनयान मिशन की सफलता के बाद भारत, रूस, अमेरिका और चीन के बाद चौथा देश होगा जो अंतरिक्ष में इंसान भेजने में सफल होगा। यह कदम भारत की अंतरिक्ष तकनीक और वैज्ञानिक क्षमता को और मजबूती देगा।
रिसर्च और स्पेस स्टेशन की दिशा में कदम
गगनयान मिशन से सौर मंडल (Solar System) और अंतरिक्ष विज्ञान पर गहन रिसर्च के नए रास्ते खुलेंगे। साथ ही, भारत के अपने Space Station Project को भी गति मिलेगी।
नई नौकरियों और निवेश में इजाफा
इस मिशन से रिसर्च और डेवलपमेंट के क्षेत्र में नए रोजगार (New Jobs) पैदा होंगे। इसके अलावा स्पेस इंडस्ट्री में निवेश बढ़ेगा, जिससे देश की इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा।
ग्लोबल सहयोग के नए अवसर
गगनयान मिशन से भारत को दूसरे देशों के साथ मिलकर स्पेस टेक्नोलॉजी और Space Research Collaboration करने का अवसर मिलेगा। इससे भारत वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री में अहम भूमिका निभा सकेगा।
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