तेहरान की सड़कों पर उबाल, वॉशिंगटन में जंग की तैयारी? इजराइल अलर्ट पर Read it later

iran protest crisis: ईरान में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बीच अमेरिका ने सैन्य विकल्पों पर मंथन तेज कर दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को संभावित हमलों की ब्रीफिंग दी गई है, जबकि इजराइल हाई अलर्ट पर है और तेहरान ने अमेरिका-इजराइल को खुली चेतावनी दी है।

Table of Contents

ईरान में दो हफ्तों से जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शन

ईरान में बीते दो हफ्तों से बड़े पैमाने पर सरकार-विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं। कई शहरों में सड़कों पर उतरे लोगों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की खबरें सामने आई हैं। हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान को लेकर चिंता बढ़ गई है।

ट्रम्प को ईरान पर संभावित सैन्य हमलों की ब्रीफिंग

अमेरिकी अधिकारियों ने राष्ट्रपति Donald Trump को ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों की जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई करती है, तो ट्रम्प सैन्य कदम उठाने पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं।

हालांकि, राष्ट्रपति ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और सभी विकल्प खुले रखे गए हैं।

ट्रम्प का बयान: अमेरिका मदद के लिए तैयार

शनिवार को ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा—
ईरान आज़ादी की ओर देख रहा है, जो पहले कभी नहीं हुआ। अमेरिका मदद के लिए तैयार है।

इस बयान को ईरान के मौजूदा हालात में अमेरिकी समर्थन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रदर्शनों में मौतें और गिरफ्तारियां बढ़ीं

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान के एक डॉक्टर के हवाले से बताया गया है कि अब तक कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है। वहीं, 2600 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

इन आंकड़ों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और बढ़ा दी है।

ईरान की संसद की चेतावनी: अमेरिका-इजराइल को जवाब देंगे

ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका या इजराइल ने ईरान पर हमला किया, तो दोनों को सख्त जवाब दिया जाएगा।

यह पहली बार है जब ईरानी नेतृत्व ने संभावित जवाबी कार्रवाई में इजराइल को भी सीधे तौर पर निशाने पर रखने की बात कही है।

अमेरिकी हमले की आशंका से इजराइल हाई अलर्ट पर

ईरान पर संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका को देखते हुए Israel हाई अलर्ट पर है। सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

जून में हो चुकी है 12 दिन की जंग

ईरान और इजराइल जून महीने में 12 दिन की जंग लड़ चुके हैं। उस दौरान अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर हवाई हमले किए थे। इस पुराने संघर्ष की वजह से मौजूदा हालात को और ज्यादा संवेदनशील माना जा रहा है।

नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री की फोन वार्ता

शनिवार को इजराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के बीच फोन पर बातचीत हुई।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बातचीत में ईरान में अमेरिकी दखल की संभावनाओं पर चर्चा हुई। हालांकि, बातचीत के मुद्दों का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया।

ईरान की धमकी: अमेरिकी सेना और इजराइल दोनों निशाने पर

ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर प्रदर्शनकारियों के बहाने उस पर हमला हुआ, तो अमेरिकी सेना और इजराइल दोनों ईरान के निशाने पर होंगे। इस बयान के बाद मध्य-पूर्व में तनाव और गहरा गया है।

iran protest crisis
getty images
ईरान में प्रदर्शनकारियों को फांसी की चेतावनी

ईरान में पिछले दो हफ्तों से government protest Iran तेज हो गए हैं। अब सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व में सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपना लिया है।

अटॉर्नी जनरल की धमकी: ‘खुदा का दुश्मन’ माना जाएगा

ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शन में शामिल लोगों को ‘खुदा का दुश्मन’ करार दिया जाएगा। ईरानी कानून के तहत इस श्रेणी में आने पर death penalty यानी मौत की सजा भी दी जा सकती है।

लंदन में ईरानी दूतावास पर विरोध प्रदर्शन

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में भी ईरान के हालात को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए। इस दौरान ईरानी दूतावास के बाहर एक प्रदर्शनकारी ने इस्लामी गणराज्य का झंडा उतारकर 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले इस्तेमाल होने वाला झंडा फहरा दिया।

शेर-सूरज वाला झंडा लगाया गया, वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि प्रदर्शनकारी ने शेर और सूरज के प्रतीक वाला पुराना ईरानी तिरंगा झंडा लगाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह झंडा दूतावास पर कुछ मिनटों तक लगा रहा, बाद में हटा दिया गया।

यह झंडा ईरान में शाह के शासनकाल के दौरान प्रयोग किया जाता था।

‘Free Iran’ और ‘Democracy for Iran’ के नारे

प्रदर्शन के दौरान ‘Democracy for Iran’ और ‘Free Iran’ जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने ईरान में लोकतंत्र और आज़ादी की मांग की।

लंदन पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई, 3 गिरफ्तार

घटना के बाद लंदन पुलिस ने ईरानी दूतावास की सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था रोकी जा सके। पुलिस के मुताबिक, अब तक 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अन्य संदिग्ध की तलाश जारी है।

रजा पहलवी की सड़कों पर उतरने की नई अपील

ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस Reza Pahlavi ने एक बार फिर वीडियो संदेश जारी कर लोगों से सड़कों पर डटे रहने की अपील की है। उन्होंने लोगों से कहा कि वे समूह में मुख्य सड़कों पर निकलें, अकेले न पड़ें और ऐसी गलियों में न जाएं जहां खतरा हो सकता है।

पहलवी का दावा: खामेनेई का दमन तंत्र कमजोर

पहलवी ने दावा किया कि लगातार तीसरी रात हुए प्रदर्शनों से सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई का दमनकारी तंत्र कमजोर पड़ा है। उनके मुताबिक, कई सुरक्षा कर्मियों ने आदेश मानने से इनकार किया है और कुछ ने अपने पद भी छोड़ दिए हैं।

अमेरिका के समर्थन का जिक्र

अपने संदेश में रजा पहलवी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए तैयार रहने की घोषणा की है। इससे आंदोलनकारियों का मनोबल और बढ़ा है।

देश लौटने की तैयारी कर रहे हैं रजा पहलवी

65 वर्षीय रजा पहलवी ने शनिवार को कहा कि वे देश लौटने की तैयारी कर रहे हैं ताकि चल रहे प्रदर्शनों में सीधे शामिल हो सकें। वह करीब 50 साल से अमेरिका में निर्वासन में रह रहे हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि ईरान की राष्ट्रीय क्रांति की जीत अब ज्यादा दूर नहीं है।

ईरान संकट का अंतरराष्ट्रीय असर

ईरान में जारी हालात का असर केवल देश तक सीमित नहीं है। अमेरिका, इजराइल और पूरे मध्य-पूर्व में सुरक्षा और कूटनीतिक स्तर पर हलचल तेज हो चुकी है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

क्राउन प्रिंस को सत्ता सौंपने की मांग क्यों उठी

ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सत्ता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के हाथों में आई थी। वे 1979 से 1989 तक सुप्रीम लीडर रहे। उनके निधन के बाद अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से अब तक लगातार 37 वर्षों से सत्ता में हैं। लंबे समय से चला आ रहा यह शासन अब जनता के असंतोष का केंद्र बन गया है।

47 साल बाद बदलाव की मांग क्यों तेज हुई

ईरान इस समय गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। भारी महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट और लगातार जन आंदोलनों ने आम लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। 47 साल बाद अब बड़ी संख्या में लोग सख्त धार्मिक शासन से असंतुष्ट होकर regime change Iran की मांग करने लगे हैं।

रजा पहलवी को क्यों देखा जा रहा है विकल्प के तौर पर

इसी पृष्ठभूमि में क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग जोर पकड़ रही है। प्रदर्शनकारी उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प मानते हैं। युवाओं और GenZ का मानना है कि पहलवी की वापसी से ईरान को आर्थिक स्थिरता, वैश्विक स्वीकार्यता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता मिल सकती है।

महंगाई ने भड़काया GenZ का गुस्सा

देशभर में GenZ का आक्रोश आर्थिक बदहाली से जुड़ा है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है।

खाद्य और दवाओं की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

ईरान में महंगाई चरम पर है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में करीब 72% और दवाओं की कीमतों में लगभग 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आम लोगों की नाराजगी और बढ़ा दी है।

खामेनेई की चेतावनी: विदेशी एजेंटों का आरोप

प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान ‘विदेशियों के लिए काम करने वाले भाड़े के लोगों’ को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनों के पीछे विदेशी एजेंट हैं, जो देश में हिंसा फैलाना चाहते हैं।

ट्रम्प को खुश करने का आरोप

खामेनेई ने कहा कि कुछ उपद्रवी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करना चाहते हैं। उन्होंने साफ कहा कि ईरान की एकजुट जनता अपने दुश्मनों को हराएगी और इस्लामिक रिपब्लिक कभी पीछे नहीं हटेगी।

तेल पर टिकी ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था

ईरान की अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर तेल निर्यात पर निर्भर है। 2024 में देश का कुल निर्यात लगभग 22.18 बिलियन डॉलर रहा, जबकि आयात 34.65 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। इससे व्यापार घाटा 12.47 बिलियन डॉलर हो गया।

2025 में और गहराया व्यापार घाटा

2025 में तेल निर्यात में गिरावट और प्रतिबंधों के कारण व्यापार घाटा बढ़कर करीब 15 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। चीन, तुर्की, यूएई और इराक ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं, जिनमें चीन को 90% तेल निर्यात किया जाता है।

बिना प्रतिबंध हटे स्थिरता मुश्किल

ईरान ने क्षेत्रीय व्यापार बढ़ाने के प्रयास जरूर किए हैं, लेकिन 2025 में जीडीपी ग्रोथ केवल 0.3% रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रतिबंध हटे बिना या परमाणु समझौते की बहाली के बिना रियाल की गिरावट और आर्थिक अस्थिरता को रोकना बेहद कठिन होगा।

ये भी पढ़ें :

Venezuela Power Crisis: मादुरो गया, अब काबेलो की बारी? अमेरिका की चेतावनी, शर्तें नहीं मानीं तो अंजाम मादुरो जैसा होगा

 

 

Like and follow us on :

Telegram | Facebook | Instagram | Twitter | Pinterest | Linkedin

Was This Article Helpful?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *