डिजिटल डिटॉक्स: आज से शुरू कीजिए Digital Fasting और बदल दीजिए लाइफस्टाइल Read it later

उपवास (Fasting) की परंपरा केवल खाने-पीने तक सीमित नहीं है। आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में Digital Fasting यानी स्क्रीन से दूरी बनाना भी उतना ही ज़रूरी हो गया है। इसका मतलब है कुछ घंटों या दिनों तक मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और बाकी डिजिटल डिवाइस से पूरी तरह ब्रेक लेना। जैसे शरीर को आराम की जरूरत होती है, वैसे ही आंखों और दिमाग को भी Digital Detox की जरूरत है।

Table of Contents

भारतीयों को स्मार्टफोन की लत अधिकतर कैसी है?
फोन पर बिताया जाने वाला समय

भारतीय औसतन रोजाना 4 घंटे 9 मिनट मोबाइल पर गुजारते हैं।

सबसे ज्यादा समय कहां जाता है

ज्यादातर समय Social Media और Video Apps पर खर्च होता है।

खाने के दौरान फोन का इस्तेमाल

करीब 58% लोग खाना खाते समय भी मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं।

बच्चों में स्मार्टफोन की शुरुआत

औसतन बच्चे 12 साल की उम्र से ही स्मार्टफोन चलाना शुरू कर देते हैं।

मोबाइल से दूर होने पर तनाव

91% बच्चे मोबाइल न मिलने पर तनाव और चिड़चिड़ापन महसूस करते हैं।

👉 नोट: यह आंकड़े 2022–23 के हैं।

Digital Fasting क्यों है जरूरी?

आज की Modern Lifestyle में स्क्रीन टाइम का हिस्सा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि औसतन लोग रोज़ 6 से 7 घंटे मोबाइल, लैपटॉप और टीवी पर बिताते हैं। यानी पूरे दिन का चौथाई हिस्सा केवल स्क्रीन पर चला जाता है। सोशल मीडिया, वीडियो गेम्स और इंटरनेट का Dopamine Reward System हमें बार-बार स्क्रीन की तरफ खींचता है। धीरे-धीरे यह Screen Addiction का रूप ले लेता है, जिससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

ज्यादा स्क्रीन टाइम से क्या नुकसान होते हैं?

नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर आप रोज़ाना 6–7 घंटे से ज्यादा स्क्रीन पर रहते हैं तो Eye Strain, नींद की समस्या (Sleep Disorder) और तनाव जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। लंबे समय तक Screen Time दिमाग पर दबाव डालता है, जिससे फोकस और प्रोडक्टिविटी कम हो जाती है। लगातार मोबाइल और लैपटॉप पर नजरें गड़ाने से Blue Light Effect आंखों की रोशनी पर भी असर डाल सकता है।

ज्यादा स्क्रीन टाइम के नुकसान
1–2 घंटे

आंखों में हल्की Dryness, पानी आना और ध्यान भटकना शुरू हो सकता है।

3–4 घंटे

आंखों में थकान, सिरदर्द की शुरुआत और गर्दन व कंधों में जकड़न महसूस होने लगती है।

5–6 घंटे

नींद पर असर, Blue Light से दिमाग प्रभावित होना, चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ना।

7–8 घंटे

लगातार सिरदर्द, आंखों में धुंधलापन और नजर कमजोर होना।

8 घंटे से ज्यादा

आंखों की रोशनी पर बुरा असर, अनिद्रा, मानसिक थकान और डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।

👉 यह दिक्कतें बच्चों और पहले से आंखों की बीमारी झेल रहे लोगों में और गंभीर रूप ले सकती हैं।

कैसे करें Digital Fasting?

👉 रोज़ाना 1–2 घंटे का Screen Break लें।
👉 खाने के समय मोबाइल और टीवी से दूरी बनाएं।
👉 वीकेंड पर No Screen Day मनाएं।
👉 ध्यान, योग और किताबों को अपनी आदत में शामिल करें।
👉 Screen Time Management Apps की मदद से मोबाइल उपयोग सीमित करें।

डिजिटल इंटरमिटेंट फास्टिंग को धीरे-धीरे कैसे अपनाएं

डिजिटल इंटरमिटेंट फास्टिंग (Digital Fasting) को अचानक अपनाना आसान नहीं होता, इसलिए इसे धीरे-धीरे अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करना बेहतर है। शुरुआत छोटे-छोटे बदलावों से करें।

सुबह और रात की आदतों में बदलाव

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकुल व्‍यास के अनुसार, सुबह उठने के बाद कम से कम आधे घंटे तक मोबाइल न देखें और रात को सोने से 1 घंटा पहले फोन बंद कर दें। इससे आंखों को आराम और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है।

डिजिटल फास्टिंग: स्क्रीन टाइम कम करने के आसान टिप्स
नो-फोन ज़ोन बनाएं

बेडरूम, वॉशरूम और डाइनिंग टेबल को No Phone Zone घोषित करें।

सोने से पहले स्क्रीन ऑफ करें

नींद से कम-से-कम 1 घंटा पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप बंद कर दें।

रात में स्क्रीन से दूरी

रात 10 बजे के बाद फिल्में, शो या वेब सीरीज़ देखने से बचें।

होम स्क्रीन को सिंपल रखें

फोन की होम स्क्रीन से सोशल मीडिया ऐप्स हटा दें।

नोटिफिकेशन कंट्रोल करें

बार-बार फोन उठाने की आदत रोकने के लिए नोटिफिकेशन ऑफ करें।

खाना खाते वक्त स्क्रीन न देखें

लंच या डिनर के दौरान मोबाइल और टीवी से पूरी दूरी बनाए रखें।

सुबह की शुरुआत स्क्रीन-फ्री करें

जागने के बाद पहले 30 मिनट तक मोबाइल, टीवी और लैपटॉप से दूर रहें।

सोशल मीडिया डिटॉक्स अपनाएं

हफ्ते में कम से कम 1 दिन सोशल मीडिया से ब्रेक लें।

एक्टिविटी और हॉबी पर समय दें

रोज़ाना 30 मिनट वॉक, योग या कोई हॉबी करने की आदत डालें।

स्क्रीन-फ्री आदतें अपनाएं

पढ़ाई, वॉक और आउटडोर एक्टिविटी जैसी Screen-Free दिनचर्या बनाएँ।

ऑफ़लाइन पढ़ाई की आदत डालें

ई-पेपर और ई-बुक की जगह किताबें और Newspaper पढ़ने की आदत डालें।

स्क्रीन टाइम को धीरे-धीरे कम करें

शुरुआत में दिन के सिर्फ 1–2 घंटे Screen Free Time रखें और धीरे-धीरे इसे बढ़ाते जाएं। हफ्ते में एक दिन Social Media Detox यानी पूरी तरह सोशल मीडिया से दूरी बनाना आंखों को आराम देने और दिमाग को फ्रेश रखने का आसान और असरदार तरीका है।

Digital Fasting

क्या Digital Intermittent Fasting से बढ़ती है Productivity?

जी हां, Digital Fasting अपनाने से काम और पढ़ाई दोनों में फोकस बेहतर होता है। जब हम कुछ समय स्क्रीन से दूरी बनाते हैं तो दिमाग ज्यादा एक्टिव और फ्रेश महसूस करता है।

फोकस और क्रिएटिविटी में सुधार

स्क्रीन से ब्रेक लेने पर Attention Span बढ़ता है, जिससे पढ़ाई या ऑफिस वर्क में ध्यान केंद्रित करना आसान हो जाता है। साथ ही, क्रिएटिविटी भी निखरती है और नए आइडियाज आसानी से दिमाग में आते हैं।

Digital Fasting से Brain Fatigue से बचाव

लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने से Brain Fatigue यानी मानसिक थकान हो सकती है। Digital Intermittent Fasting से दिमाग को आराम मिलता है और एनर्जी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे Productivity नेचुरली बढ़ती है।

क्या बच्चों और बड़ों के लिए Digital Fasting अलग होनी चाहिए?

बच्चों और बड़ों की स्क्रीन की जरूरतें और आदतें अलग होती हैं। छोटे बच्चों के लिए रोजाना 1–2 घंटे से ज्यादा स्क्रीन देखना नुकसानदायक हो सकता है। वहीं बड़ों के लिए काम और पढ़ाई की वजह से Screen Time स्वाभाविक रूप से ज्यादा होता है, लेकिन उनके लिए भी Digital Intermittent Fasting बेहद जरूरी है।

बच्चों के लिए जरूरी नियम

बच्चों का दिमाग और शरीर विकास की अवस्था में होता है, इसलिए वे स्क्रीन के प्रभाव में जल्दी आ जाते हैं। लंबे समय तक मोबाइल या टीवी देखने से आंखों की थकान, नींद की गड़बड़ी और पढ़ाई में ध्यान न लगना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए बच्चों के लिए नियम सख्त होने चाहिए कि वे रोज 1–2 घंटे से ज्यादा स्क्रीन का इस्तेमाल न करें।

बड़ों के लिए जरूरी सावधानियां

बड़ों के लिए स्क्रीन का इस्तेमाल कई बार काम और पढ़ाई का हिस्सा होता है। लगातार लैपटॉप या मोबाइल पर रहने से सिरदर्द, तनाव और नींद की कमी जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। ऐसे में सबसे अच्छा यही है कि वे Digital Fasting को अपनाएं और खुद को समय-समय पर स्क्रीन से दूर रखकर शरीर और दिमाग को आराम दें।

क्या ऑफिस में Digital Intermittent Fasting संभव है?

ऑफिस में पूरे दिन स्क्रीन से दूरी बनाना मुश्किल होता है, लेकिन छोटे-छोटे ब्रेक लेकर और सही तरीके अपनाकर Digital Fasting किया जा सकता है। लगातार लैपटॉप पर काम करना आंखों और दिमाग दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण है, इसलिए सही आदतें अपनाना जरूरी है।

लैपटॉप की सही पोजिशन का ध्यान रखें

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लैपटॉप आंखों से उचित दूरी और सही ऊंचाई पर रखा जाए तो आंखों की थकान काफी कम हो जाती है। यह न केवल आंखों को आराम देता है बल्कि लंबे समय तक काम करना भी आसान बनाता है।

20-20-20 Rule अपनाएं

ऑफिस वर्कर्स के लिए 20-20-20 Rule बेहद कारगर है। यानी हर 20 मिनट बाद, 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखें। इस छोटे से अभ्यास से आंखों की थकान घटती है, दिमाग को ब्रेक मिलता है और Productivity भी बेहतर होती है।

 

All Image Credit: freepik

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