पश्चिमी देश शब्द की असली वजह, जो सिर्फ नक्शे से तय नहीं होती
यह सवाल भी उतना ही जरूरी है। अमेरिका भारत के पश्चिम में भी नहीं पड़ता, अगर आप सीधे नक्शे पर देखें तो भारत से बहुत दूर है। फिर भी वह “पश्चिमी दुनिया” का सबसे बड़ा चेहरा क्यों है।

Western countries शब्द सिर्फ नक्शे की दिशा नहीं बताता। यही वजह है कि भारत के पश्चिम में होने के बाद भी पाकिस्तान और गल्फ देश पश्चिमी देश नहीं कहलाते, जबकि अमेरिका और यूरोप को यह नाम मिला। इसकी जड़ भूगोल से ज्यादा इतिहास, सत्ता, संस्कृति और राजनीति में है।
सवाल का सीधा जवाब
भारत के पश्चिम में पाकिस्तान है। उसके आगे ईरान, इराक, सऊदी अरब, यूएई और दूसरे गल्फ देश हैं। इसलिए आम पाठक के मन में सीधा सवाल उठता है कि जब ये सब भारत के पश्चिम में हैं, तो इन्हें पश्चिमी देश क्यों नहीं कहा जाता। फिर अमेरिका और यूरोप को ही Western countries क्यों कहा जाता है।
सीधा जवाब यह है कि “पश्चिमी देश” एक भौगोलिक दिशा का शब्द नहीं है। यह एक ऐतिहासिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत शब्द है। इसमें “पश्चिम” का मतलब सिर्फ “पश्चिम दिशा” नहीं, बल्कि एक खास तरह की ऐतिहासिक परंपरा, राज्य व्यवस्था, समाज, विचारधारा और अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ से है।
यही पूरे सवाल की जड़ है।
दिशा और पहचान का फर्क
दुनिया में कई शब्द ऐसे हैं जो सुनने में भौगोलिक लगते हैं, लेकिन असल में उनका मतलब सिर्फ नक्शे से तय नहीं होता। “मिडिल ईस्ट”, “दक्षिण एशिया”, “पश्चिमी दुनिया”, “ग्लोबल साउथ” और “यूरो-अटलांटिक” ऐसे ही शब्द हैं। ये सिर्फ जमीन की दिशा नहीं बताते। ये सत्ता, इतिहास, व्यापार, युद्ध, धर्म, भाषा और संस्थाओं के आधार पर बने हैं।
इसीलिए भारत के पश्चिम में स्थित हर देश “Western countries” में नहीं आता। उसी तरह दुनिया के सुदूर पश्चिम में होने वाला हर देश भी अपने-आप पश्चिमी नहीं कहलाता। यह पहचान केवल दिशा से नहीं बनती।
यह फर्क पहले समझना जरूरी है।
Western countries की मूल जड़
“Western countries” की जड़ यूरोप के इतिहास में है। इसका शुरुआती अर्थ यूरोपीय सभ्यता से जुड़ा था। बाद में इसमें उन देशों को भी शामिल किया गया, जिनकी राजनीतिक और सांस्कृतिक जड़ें यूरोप से निकलीं। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड इसी कारण इस दायरे में आए।
यानी पश्चिमी दुनिया का आधार यूरोप रहा। फिर यूरोप से निकले उपनिवेश, बसावट वाले समाज, अंग्रेजी या यूरोपीय भाषा पर आधारित राज्य, आधुनिक लोकतांत्रिक संस्थाएं, पूंजीवादी अर्थव्यवस्था, चर्च और बाद में सेक्युलर-लिबरल राजनीति इस पहचान का हिस्सा बने।
इसलिए जब लोग Western countries कहते हैं, तो उनका इशारा एक खास “सभ्यतागत परिवार” की तरफ होता है।
![]()
ईसाई यूरोप की भूमिका
Western countries की पहचान बनाने में ईसाई यूरोप की भी बड़ी भूमिका रही। कई सदियों तक यूरोप ने खुद को “क्रिश्चियन वर्ल्ड” के रूप में देखा। इसके सामने इस्लामी दुनिया, बीजान्टिन दुनिया, फारसी दुनिया और बाद में एशियाई साम्राज्य अलग खड़े थे।
मध्यकाल में यूरोप और अरब-इस्लामी दुनिया के बीच व्यापार भी था, युद्ध भी थे, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी था। लेकिन दोनों एक ही राजनीतिक-सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा नहीं बने। यूरोप की चर्च-आधारित संरचना, बाद में राष्ट्र-राज्य, फिर पुनर्जागरण, प्रबोधन और औद्योगिक क्रांति ने एक अलग पहचान बनाई।
यहीं से “West” और “non-West” का फर्क और साफ हुआ।
पुनर्जागरण और प्रबोधन का असर
यूरोप में पुनर्जागरण आया। फिर प्रबोधन का दौर आया। विज्ञान, तर्क, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, राज्य और समाज के नए विचार उभरे। चर्च की शक्ति सीमित हुई। आधुनिक लोकतंत्र, संसद, संविधान, नागरिक अधिकार और आधुनिक विश्वविद्यालयों जैसी संस्थाओं को यूरोपीय आधुनिकता का हिस्सा माना गया।
बाद में यही मॉडल अमेरिका और दूसरे यूरोपीय मूल वाले देशों में फैला। इसलिए अमेरिका भूगोल से यूरोप में नहीं है, फिर भी वह “Western countries” में गिना जाता है। कारण साफ है। उसकी राजनीतिक संरचना, कानूनी ढांचा, अंग्रेजी भाषा, लोकतांत्रिक संस्थाएं और ऐतिहासिक जड़ें यूरोपीय हैं।
यही कारण है कि पश्चिमी दुनिया नक्शे से नहीं, ऐतिहासिक विकास से बनी।
![]()
पाकिस्तान पश्चिम में है, पश्चिमी नहीं
अब सवाल के सबसे सीधे हिस्से पर आते हैं। पाकिस्तान भारत के पश्चिम में है। यह भौगोलिक तथ्य है। लेकिन “Western countries” का मतलब केवल भारत के पश्चिम में होना नहीं है। पाकिस्तान दक्षिण एशिया का देश है। उसका ऐतिहासिक विकास भारतीय उपमहाद्वीप की राजनीति, इस्लामी पहचान, ब्रिटिश भारत के बंटवारे और दक्षिण एशियाई समाज के संदर्भ में हुआ।
उसकी भाषा, समाज, जातीय ढांचा, इतिहास, धार्मिक संरचना, राजनीतिक संकट और राष्ट्रीय पहचान यूरोप-अमेरिका वाली पश्चिमी परंपरा से अलग है। पाकिस्तान पर ब्रिटिश प्रशासन का असर रहा, अंग्रेजी वहां की आधिकारिक व्यवस्था का हिस्सा रही, लेकिन इससे वह पश्चिमी देश नहीं बन गया।
यानी पाकिस्तान “west of India” है, लेकिन “Western countries” में नहीं आता।
गल्फ देश अलग क्यों माने जाते हैं
गल्फ देश भारत के पश्चिम में हैं। वे एशिया के पश्चिमी हिस्से में आते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय भाषा में उन्हें “Middle East” या “Gulf countries” कहा जाता है, “Western countries” नहीं। इसका कारण यह है कि उनकी पहचान पश्चिमी यूरोपीय-उत्पत्ति वाली आधुनिकता से नहीं, अरब-इस्लामी इतिहास, राजघरानों, तेल अर्थव्यवस्था, जनजातीय विरासत और पश्चिम एशियाई भू-राजनीति से बनती है।
सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान जैसे देशों की अपनी अलग राजनीतिक संरचना है। उनमें कई जगह राजशाही है। समाज, कानून, धर्म और राज्य संबंध पश्चिमी देशों से अलग हैं। उनके आर्थिक संबंध अमेरिका और यूरोप से मजबूत हो सकते हैं, लेकिन इससे उनकी सभ्यतागत श्रेणी नहीं बदलती।
यही कारण है कि गल्फ देश पश्चिम में होते हुए भी “Western countries” नहीं कहलाते।
अमेरिका पश्चिमी देश क्यों
यह सवाल भी उतना ही जरूरी है। अमेरिका भारत के पश्चिम में भी नहीं पड़ता, अगर आप सीधे नक्शे पर देखें तो भारत से बहुत दूर है। फिर भी वह “पश्चिमी दुनिया” का सबसे बड़ा चेहरा क्यों है।
अमेरिका की जड़ यूरोपीय उपनिवेशवाद में है। वहां की प्रमुख भाषा अंग्रेजी है। उसका संविधान, न्याय व्यवस्था, लोकतांत्रिक संरचना, व्यक्तिगत अधिकारों की अवधारणा और आधुनिक राजनीतिक संस्कृति यूरोपीय प्रबोधन से निकली है। अमेरिका ने खुद को आधुनिक पश्चिमी लोकतंत्र का नेता भी बनाया।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह भूमिका और मजबूत हुई। तब से “West” का मतलब केवल यूरोप नहीं रहा। उसमें अमेरिका केंद्र में आ गया।
![]()
शीत युद्ध ने शब्द को मजबूत किया
दुनिया को “West” और “East” में बांटने का काम शीत युद्ध ने और तेज किया। एक तरफ अमेरिका और उसके सहयोगी देश थे। दूसरी तरफ सोवियत संघ और उसका ब्लॉक था। इस समय “Western countries” का मतलब लोकतांत्रिक, पूंजीवादी और अमेरिकी गठजोड़ वाले देश बन गया।
यानी यह शब्द भूगोल से आगे बढ़कर विचारधारा, सैन्य गठबंधन और आर्थिक मॉडल का भी संकेत बन गया। इसीलिए जापान एशिया में होते हुए भी कई संदर्भों में पश्चिमी गुट का करीबी माना गया, लेकिन उसे पूरी तरह पश्चिमी देश नहीं कहा गया। वहीं तुर्किये नाटो में है, लेकिन उसकी पहचान पश्चिमी और गैर-पश्चिमी के बीच एक मिश्रित जगह पर देखी जाती है।
इससे साफ है कि “West” एक सख्त दिशा नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक-राजनीतिक फ्रेम है।
नक्शे वाला पश्चिम और राजनीति वाला पश्चिम
यहां दो अलग शब्द मन में रखना जरूरी है। पहला है दिशा वाला पश्चिम। दूसरा है राजनीति और सभ्यता वाला पश्चिम। भारत के नक्शे के हिसाब से पाकिस्तान, ईरान, अरब देश और आगे यूरोप सब पश्चिम में हैं। लेकिन राजनीतिक-सांस्कृतिक भाषा में “Western countries” कहने का अर्थ इनमें से एक खास समूह से होता है।
इस समूह में आम तौर पर अमेरिका, कनाडा, पश्चिमी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड आते हैं। कभी-कभी इसमें जापान, दक्षिण कोरिया और इजराइल जैसे करीबी अमेरिकी सहयोगियों को “Western-aligned” कहा जाता है, लेकिन उन्हें मूल पश्चिमी देश नहीं कहा जाता।
यही फर्क भ्रम दूर करता है।
भाषा का असर भी बड़ा है
अंग्रेजी भाषा में “West” और हिंदी में “पश्चिम” एक जैसे लगते हैं, लेकिन हर जगह दोनों का अर्थ एक जैसा नहीं रहता। जब कोई कहता है “western border”, तो वह दिशा बता रहा होता है। जब कोई कहता है “Western countries”, तो वह राजनीतिक और सभ्यतागत समूह की बात कर रहा होता है।
यहां अनुवाद का भ्रम पैदा होता है। हिंदी में “पश्चिमी देश” सुनते ही लगता है कि जो देश पश्चिम में हैं, वे सब इसमें आ जाएंगे। लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक भाषा में ऐसा नहीं होता। इसीलिए यह समझना जरूरी है कि हर शब्द का अर्थ संदर्भ से तय होता है।
सिर्फ शब्द देखकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
![]()
धर्म अकेला कारण नहीं
कई लोग मान लेते हैं कि पश्चिमी देशों का मतलब सिर्फ ईसाई देश है और गैर-पश्चिमी देशों का मतलब मुस्लिम या एशियाई देश है। यह समझ अधूरी है। धर्म जरूर एक तत्व रहा, लेकिन वही अकेला कारण नहीं है। पश्चिमी दुनिया की पहचान धर्म से आगे बढ़कर आधुनिक राज्य, कानून, लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था, सैन्य गठबंधन, उपनिवेशवादी अतीत और साझा राजनीतिक ढांचे से बनी।
इसीलिए लैटिन अमेरिका के कई देश ईसाई बहुल हैं, लेकिन हर संदर्भ में उन्हें “core Western countries” नहीं कहा जाता। वहीं जापान ईसाई देश नहीं है, फिर भी अमेरिकी गुट का करीबी है। इसका मतलब साफ है। “West” बहुस्तरीय पहचान है। इसे सिर्फ धर्म से नहीं समझा जा सकता।
संस्कृति और समाज का फर्क
पश्चिमी देशों की पहचान में कुछ सामाजिक संकेत भी जुड़े रहे हैं। जैसे व्यक्ति की स्वतंत्रता, आधुनिक नागरिक अधिकार, निजी संपत्ति पर जोर, संसद आधारित शासन, चुनावी लोकतंत्र, प्रेस की भूमिका, विश्वविद्यालय व्यवस्था और औद्योगिक पूंजीवाद। यह सब हर पश्चिमी देश में एक जैसे नहीं है, लेकिन सामूहिक पहचान का हिस्सा जरूर है।
दूसरी तरफ गल्फ देशों का सामाजिक ढांचा अलग है। वहां परिवार, धर्म, राजशाही, जनजातीय परंपरा और प्रवासी श्रम आधारित अर्थव्यवस्था का बड़ा असर है। पाकिस्तान का समाज भी दक्षिण एशियाई, इस्लामी और उपमहाद्वीपीय इतिहास से बना है। इसीलिए ये देश पश्चिम में होकर भी पश्चिमी समाजों की श्रेणी में नहीं आते।
यानी भूगोल से ज्यादा सामाजिक ढांचा काम करता है।
राजनीति और सैन्य गठजोड़ की भूमिका
आज “Western countries” शब्द अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बहुत बार अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए भी इस्तेमाल होता है। जैसे नाटो देश, यूरोपीय संघ के बड़े देश, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया। यूक्रेन युद्ध, रूस पर प्रतिबंध, चीन नीति, व्यापार समझौते और मानवाधिकार बहस में “the West” शब्द इसी अर्थ में आता है।
इसलिए आज जब समाचार में “पश्चिमी देश” कहा जाता है, तो उसका मतलब अक्सर वही देश होते हैं जो अमेरिका-यूरोप के सुरक्षा और राजनीतिक ढांचे के करीब हों। पाकिस्तान या गल्फ देश कभी-कभी अमेरिका के साझेदार हो सकते हैं, लेकिन वे इस “West” के मूल सदस्य नहीं माने जाते।
यानी “West” आज भी एक सक्रिय भू-राजनीतिक शब्द है।
भारत में भ्रम क्यों होता है
भारत में यह सवाल इसलिए बार-बार आता है क्योंकि हम दिशा को बहुत सीधे ढंग से समझते हैं। स्कूल के नक्शे में पश्चिम दिशा देखी जाती है। वहां पाकिस्तान और अरब देश पड़ते हैं। इसलिए “पश्चिमी देश” सुनकर सहज रूप से वही देश याद आते हैं। लेकिन समाचार, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में यह शब्द अलग अर्थ में इस्तेमाल होता है।
दूसरा कारण यह है कि हिंदी में “पश्चिमी” का सीधा अर्थ “पश्चिम का” समझा जाता है। अंग्रेजी में “Western” का अर्थ कई संदर्भों में “Western civilization” या “the West” होता है। यही भाषाई अंतर भ्रम पैदा करता है।
इसलिए इस शब्द को दिशा से नहीं, संदर्भ से समझना चाहिए।
भारत के लिए यह समझ क्यों जरूरी
यह केवल शब्दों का खेल नहीं है। विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय खबर, आर्थिक रिपोर्ट, युद्ध, प्रतिबंध, तेल राजनीति, नाटो, रूस, चीन और मानवाधिकार जैसी बहसों में “Western countries” शब्द बहुत आता है। अगर इसका अर्थ साफ नहीं होगा, तो पूरी खबर गलत समझी जा सकती है।
उदाहरण के लिए अगर किसी रिपोर्ट में लिखा हो कि “पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए”, तो उसका मतलब पाकिस्तान, सऊदी अरब या ईरान नहीं होता। उसका मतलब अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा और उनके सहयोगी देश होते हैं। इसलिए इस शब्द की सही समझ खबर पढ़ने के लिए जरूरी है।
यह आम पाठक के लिए सीधा उपयोगी ज्ञान है।
गल्फ देश पश्चिम के साथी हो सकते हैं
यह भी समझना जरूरी है कि किसी देश का पश्चिम का सहयोगी होना और उसका पश्चिमी देश होना दो अलग बातें हैं। यूएई या सऊदी अरब अमेरिका के करीबी साझेदार हो सकते हैं। वे पश्चिमी देशों के साथ रक्षा, व्यापार और निवेश संबंध रख सकते हैं। फिर भी वे “Western countries” नहीं कहलाते।
उसी तरह पाकिस्तान कभी अमेरिकी खेमे के करीब रहा, कभी चीन के। लेकिन उसकी राष्ट्रीय और सभ्यतागत पहचान दक्षिण एशियाई ही रही। इसलिए किसी देश का गठजोड़ बदलने से उसकी पूरी सभ्यतागत श्रेणी नहीं बदल जाती।
यह फर्क चर्चा में बहुत काम आता है।
क्या जापान और दक्षिण कोरिया पश्चिमी हैं
यह सवाल भी अक्सर जुड़ता है। जापान और दक्षिण कोरिया एशियाई देश हैं। वे पश्चिमी देश नहीं हैं। लेकिन वे अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं। उनकी अर्थव्यवस्था आधुनिक है। लोकतांत्रिक ढांचा मजबूत है। इसलिए कई बार उन्हें “Western allies” या “western-aligned” कहा जाता है।
यहां भी वही नियम लागू होता है। पश्चिमी गुट के करीब होना और पश्चिमी देश होना अलग चीज है। जापान की सभ्यता, भाषा, इतिहास और सामाजिक जड़ें एशियाई हैं। इसलिए वह पश्चिमी नहीं कहलाता।
इससे पता चलता है कि “Western countries” शब्द बहुत सोच-समझकर इस्तेमाल करना चाहिए।
शब्द बदल रहे हैं, पर अर्थ अभी भी वही
आज दुनिया बदल रही है। ग्लोबल साउथ, इंडो-पैसिफिक, मल्टीपोलर वर्ल्ड, एशियाई सदी और उभरती अर्थव्यवस्था जैसे नए शब्द तेजी से चल रहे हैं। फिर भी “Western countries” शब्द अभी भी जीवित है। कारण साफ है। अमेरिका और यूरोप अब भी दुनिया की राजनीति, सेना, वित्त, मीडिया और संस्थाओं पर बड़ा असर रखते हैं।
इसलिए यह शब्द पुराना होने के बावजूद खत्म नहीं हुआ। हां, उसका इस्तेमाल अब अधिक सावधानी से किया जाता है। कई विशेषज्ञ “West” की जगह “US-led bloc” या “Euro-Atlantic countries” जैसे शब्द भी इस्तेमाल करते हैं। फिर भी आम राजनीतिक भाषा में “Western countries” सबसे ज्यादा प्रचलित शब्द बना हुआ है।
स्कूल वाला जवाब और असली जवाब
अगर इस सवाल का स्कूल वाला छोटा जवाब दें, तो कहेंगे: पाकिस्तान और गल्फ देश भारत के पश्चिम में हैं, इसलिए वे पश्चिम में स्थित देश हैं। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय राजनीति वाला सही जवाब दें, तो कहेंगे: वे पश्चिमी देश नहीं हैं, क्योंकि “पश्चिमी देश” शब्द एक ऐतिहासिक-सभ्यतागत और राजनीतिक समूह के लिए इस्तेमाल होता है।
यही दोनों जवाब साथ रखने से भ्रम खत्म होता है। दिशा के हिसाब से वे पश्चिम में हैं। पहचान के हिसाब से वे Western countries नहीं हैं।
यही इस पूरे विषय का सबसे साफ निष्कर्ष है।
Western countries का सीधा जवाब
अब इस सवाल का अंतिम और सीधा उत्तर यह है: पाकिस्तान, ईरान और गल्फ देश भारत के पश्चिम में जरूर हैं, लेकिन उन्हें पश्चिमी देश नहीं कहा जाता, क्योंकि “पश्चिमी देश” शब्द का मतलब सिर्फ दिशा नहीं है। यह यूरोपीय मूल, अमेरिकी प्रभाव, पश्चिमी राजनीतिक परंपरा, लोकतांत्रिक संस्थाओं, पूंजीवादी ढांचे और साझा ऐतिहासिक विकास वाले देशों के लिए इस्तेमाल होता है।
इसीलिए अमेरिका और यूरोप “Western countries” कहलाते हैं। पाकिस्तान और गल्फ देश नहीं।
आगे जब भी किसी खबर में “पश्चिमी देश” पढ़ें, तो उसे नक्शे की दिशा नहीं, इतिहास और राजनीति की श्रेणी के रूप में समझें। यही सही पढ़ाई है और यही सही खबर की समझ भी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: पश्चिमी देश किसे कहा जाता है?
उत्तर: पश्चिमी देश उन देशों को कहा जाता है जिनकी ऐतिहासिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जड़ें यूरोप और अमेरिका की पश्चिमी परंपरा से जुड़ी हैं।
प्रश्न 2: क्या भारत के पश्चिम में होने वाला हर देश पश्चिमी देश होता है?
उत्तर: नहीं। दिशा और राजनीतिक-सांस्कृतिक पहचान अलग चीजें हैं। भारत के पश्चिम में कई देश हैं, लेकिन वे सभी Western countries नहीं हैं।
प्रश्न 3: पाकिस्तान पश्चिमी देश क्यों नहीं कहलाता?
उत्तर: पाकिस्तान दक्षिण एशिया का देश है। उसकी ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक पहचान पश्चिमी यूरोप-अमेरिका वाली परंपरा से अलग है।
प्रश्न 4: गल्फ देशों को पश्चिमी देश क्यों नहीं कहा जाता?
उत्तर: गल्फ देशों की पहचान अरब-इस्लामी इतिहास, राजशाही और पश्चिम एशियाई राजनीति से बनती है। इसलिए उन्हें Middle East या Gulf countries कहा जाता है।
प्रश्न 5: अमेरिका पश्चिमी देश क्यों माना जाता है?
उत्तर: अमेरिका की भाषा, संस्थाएं, राजनीतिक ढांचा और ऐतिहासिक जड़ें यूरोपीय परंपरा से निकली हैं। इसलिए वह पश्चिमी दुनिया का हिस्सा माना जाता है।
प्रश्न 6: क्या पश्चिमी देश का मतलब ईसाई देश होता है?
उत्तर: नहीं। धर्म एक तत्व है, लेकिन अकेला कारण नहीं। पश्चिमी पहचान इतिहास, राज्य व्यवस्था, राजनीति और संस्थाओं से भी बनती है।
प्रश्न 7: क्या जापान पश्चिमी देश है?
उत्तर: नहीं। जापान एशियाई देश है। वह पश्चिमी देशों का सहयोगी हो सकता है, लेकिन खुद Western country नहीं कहलाता।
प्रश्न 8: क्या शीत युद्ध ने पश्चिमी देशों की परिभाषा बदली?
उत्तर: हां। शीत युद्ध के समय “West” का मतलब अमेरिका और उसके सहयोगी लोकतांत्रिक-पूंजीवादी देशों से जुड़ गया।
प्रश्न 9: क्या “पश्चिमी देश” और “पश्चिम दिशा” एक ही बात हैं?
उत्तर: नहीं। पश्चिम दिशा भौगोलिक शब्द है। पश्चिमी देश एक ऐतिहासिक और राजनीतिक श्रेणी है।
प्रश्न 10: खबरों में “पश्चिमी देशों” का मतलब आम तौर पर किनसे होता है?
उत्तर: आम तौर पर अमेरिका, कनाडा, पश्चिमी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों से होता है।
ये भी पढ़ें :
सेक्स वर्कर्स डे: लीगल है या क्राइम? भारतीय कानून जान चौंक जाएंगे आप, कानूनी दर्जा, फिर भी क्यों डरते हैं लोग इस पेशे से?
Like and follow us on :
|Telegram | Facebook | Instagram | Twitter | Pinterest | Linkedin