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देश की पहली कोरोना मरीज फिर पॉजिटिव: डेढ़ साल बाद भी वैक्सीन नहीं लगवाई, यात्रा के दौरान टेस्ट कराया तो संक्रमित निकली

देश की पहली कोरोना मरीज फिर पॉजिटिव
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चीन के वुहान से लौटने वाला देश की पहली कोरोना मरीज करीब डेढ़ साल बाद फिर से पॉजिटिव हो गई है। दरअसल केरल के त्रिशूर में रहने वाली मेडिकल की छात्रा दिल्ली जाना चाहती थी, इसलिए उसने आरटी-पीसीआर टेस्ट करवाया। 

मंगलवार को उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। त्रिशूर के डीएमओ डॉ. केजे रीना ने बताया कि उसे बिना लक्षण वाला संक्रमण है। ऐसे में जैसे ही उस 20 वर्षीय छात्रा की रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो सभी अचंभित रह गए।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मेडिकल छात्र ने अभी तक वैक्सीन की एक भी खुराक नहीं ली है। 

वह त्रिशूर जिले के माथिलाकम ग्राम पंचायत की रहने वाली है और चीन के वुहान में चिकित्सा की पढ़ाई कर रही थी। 

हालांकि, 23 जनवरी 2020 को भारत लौटने के बाद वह वापस वुहान नहीं गई हैं और ऑनलाइन पढ़ाई कर रही हैं।

पिछले साल 30 जनवरी को उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। उस दौरान त्रिशूर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में इलाज के बाद वह ठीक हो गई थी।

 कोलकाता से घर केरल लौटी थी

माथिलाकम ग्राम पंचायत की स्वास्थ्य निरीक्षक शीबा ने कहा, ‘वुहान से लौटी छात्रा ने सबसे पहले मुझे घर आने की सूचना दी। वह कोलकाता से लौटी थी। 

पहले दिन जब वह घर पहुंची तो मैं उससे लगातार संपर्क में थी। वह अपना तापमान जांचने के लिए सरकारी अस्पताल पहुंची और हमें इसकी जानकारी दी।

शीबा ने बताया- पिछले साल मैं उस स्टूडेंट को दिन में 2 से 3 बार फोन करती थी। शुरू में उसमें कोई लक्षण नहीं दिख रहा था, 

लेकिन तीन-चार दिन बाद जब मैंने फोन किया तो उन्होंने बताया कि उनके गले में हल्का दर्द हो रहा है। मैंने तुरंत जिले के चिकित्सा अधिकारियों को यह बताया और उसे अस्पताल ले जाया गया। 

बाद में उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। यह देश का पहला पॉजिटिव केस था।

घर लौटकर मनाया था भाई का जन्मदिन

स्वास्थ्य निरीक्षक शीबा ने बताया कि वुहान से लौटने के दो दिन बाद मेडिकल की छात्रा ने छोटे भाई का जन्मदिन मनाया था। भाई ने कुछ दोस्तों को दावत पर घर भी बुलाया था। 

जब दोस्त घर आए, तो लड़की घर पर थी, हालांकि वह क्वारंटीन थी।

एहतियात के तौर पर पंचायत व प्रशासन ने उन बच्चों को प्राथमिक संपर्क मानकर परिवार सहित क्वारंटीन रहने को कहा था। 

शीबा ने बताया कि मेडिकल की छात्रा स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग कर रही है। वह बस यही चाहती थी कि अगर उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो उसके माता-पिता को तुरंत न बताया जाए, उसे डर था कि कहीं वे परेशान न जाएं।

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