Religious

महालक्ष्मी मंदिर में लक्ष्मी, सरस्वती और महाकाली का 45 करोड़ का शृंगार, तीनों मां 550 किलो चांदी के सिंहासन पर विराजित हैं, जानिए क्यों है खास

नवरात्रि से दीवाली तक, मुंबई के महालक्ष्मी मंदिर (Lakshmi) में 550 किलो चांदी के सिंहासन पर विराजमान महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के दर्शन करने के लिए हर दिन 1.5 लाख श्रद्धालु आते हैं। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यह एक स्वयंभू मंदिर है। यानी किसी ने इसे इंस्टॉल नहीं किया है। यहां दिवाली के दिन तीनों देवियों का विशेष श्रृंगार किया जाता है। एक देवता को लगभग 15 करोड़ रुपये के आभूषणों से सजाया जाता है। तीनों देवियों के 45 करोड़। मनघड़ंत बात बनाना।

देवी का मुकुट शुद्ध सोने का है, जिसका वजन 5 किलो तक

मंदिर के पुजारी अरुण लक्ष्मण वीरकर कहते हैं, यह मंदिर वैसा ही है जैसा सप्तशती में बताया गया है। प्रत्येक मंदिर पूर्व दिशा में होना चाहिए, इसलिए यह मंदिर भी समुद्र के किनारे पूर्व दिशा में है। शास्त्रों में लिखा है कि समुद्र की देवी थी…. यानी समुद्र के किनारे रहने वाले। मंदिर के पीछे समुद्र, दाहिनी ओर प्रशांत महासागर, बाईं ओर अरब महासागर और मुंबई शहर है। मंदिर में महालक्ष्मी, दाहिनी ओर महाकाली और बाईं ओर महासरस्वती हैं।

देवी का मुकुट शुद्ध सोने का है, जिसका वजन 5 किलो तक है। तीनों देवियों के मुख चांदी और तांबे से ढके हुए हैं। दीपावली पर सोने का आवरण चढ़ाया जाता है। मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ प्रबंधक एसवी पाध कहते हैं, मंदिर के रख-रखाव के लिए वर्ष 1952 में ट्रस्ट का गठन किया गया था। मंदिर की वार्षिक भेंट लगभग 19 करोड़ रुपये है।

 

हम समुद्र में हैं, हमें बाहर निकाल कर स्थापित कर दो

1761 के दौरान मुंबई में 7 टापू हुआ करते थे। मंदिर से जुड़ी एक मान्यता है कि उनमें से एक महालक्ष्मी का निवास वर्ली द्वीप में था। व्यापार को देखते हुए मुंबई को सात टुकड़ों में जोड़ने का काम शुरू किया गया। यह काम भगवान हनानी की देखरेख में शुरू किया गया था। काम का ठेका भगवान शिव को दिया गया था। सड़क बनाने में जितना भराव डाला गया, लहरें उसे बहा ले जातीं थी।

इससे ठेकेदार और अंग्रेज बहुत परेशान थे। तभी ठेकेदार के सपने में देवी आई और कहा कि हम समुद्र में हैं, हमें बाहर निकाल कर स्थापित कर दो, तभी यह सड़क बन पाएगी। अगले दिन भी ऐसा ही किया गया। सड़क 1784 में बनाई गई थी। कहा जाता है कि उन दिनों देवी की मूर्तियों को चोरों और डाकुओं से बचाने के लिए समुद्र में फेंक दिया गया था।

 

ये भी पढ़ें  –

Hindu Rituals: क्या आप जानते हैं हिंदू धर्म के ये 16 संस्कार

 

Like and Follow us on :

Telegram | Facebook | Instagram | Twitter | Pinterest | Linkedin

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button